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  • भारतीय नौसेना को मिलेंगे दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

    भारतीय नौसेना को मिलेंगे दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

    नई दिल्ली ।भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और खुफिया क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका की जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक के साथ दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने के लिए करीब 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

    यह लीज व्यवस्था 30 महीने की अवधि के लिए होगी। अनुबंध पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक अधिग्रहण ए. अनबारासु भी मौजूद रहे। समझौते का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और उनसे जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने की नौसेना की क्षमता को बढ़ाना है।

    एमक्यू-9बी सी गार्डियन को लंबी अवधि तक उड़ान भरने और बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसमें आधुनिक सेंसर, उन्नत निगरानी प्रणाली और विभिन्न प्रकार के पेलोड लगाए जा सकते हैं। इन क्षमताओं के कारण यह समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखने के लिए उपयोगी प्लेटफॉर्म माना जाता है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन ड्रोन की तैनाती से भारतीय नौसेना की मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ड्रोन समुद्र के विशाल हिस्सों में लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर कवरेज उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। इससे समुद्री गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखना और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा।

    हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के साथ ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी मौजूद हैं। ऐसे में समुद्र में होने वाली गतिविधियों की वास्तविक समय के करीब निगरानी और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता नौसेना के लिए अहम है।

    एमक्यू-9बी सी गार्डियन की लंबी उड़ान क्षमता नौसेना को लंबे समय तक किसी विशेष समुद्री क्षेत्र पर निगरानी बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसके जरिए जहाजों की आवाजाही, समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ेगी। इससे समुद्री सीमा सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी अभियानों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री मौजूदगी और निगरानी ढांचे को लगातार मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरण और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच उन्नत मानव रहित प्लेटफॉर्म नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    रक्षा क्षेत्र में हाल के दिनों में सरकार की खरीद गतिविधियां भी तेज हुई हैं। पिछले सप्ताह रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए करीब 1,577 करोड़ रुपये के दो अनुबंध किए थे। इन समझौतों के तहत लोइटर म्यूनिशन सिस्टम, संबंधित हथियार और अन्य उपकरणों की खरीद की जानी है।

    नौसेना के लिए एमक्यू-9बी सी गार्डियन की लीज भी इसी व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण प्रक्रिया का हिस्सा है। लीज व्यवस्था के माध्यम से नौसेना को सीमित अवधि में आधुनिक निगरानी क्षमता उपलब्ध होगी। इससे परिचालन जरूरतों को पूरा करने के साथ समुद्री क्षेत्र में भारत की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

  • चीन में धर्म की भी 'जासूसी'! अस्पताल से स्कूल तक आस्था पर निगरानी, मांगी जा रही जानकारी

    चीन में धर्म की भी 'जासूसी'! अस्पताल से स्कूल तक आस्था पर निगरानी, मांगी जा रही जानकारी


    नई दिल्ली। चीन में धार्मिक मान्यताओं पर सरकारी निगरानी का दायरा बढ़ने का दावा किया जा रहा है। चेंगदू के एक सरकारी अस्पताल में स्थायी कर्मचारियों के अलावा कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारियों से भी उनकी धार्मिक आस्था की जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है। कर्मचारियों से पूछा गया कि वे किसी धर्म को मानते हैं या नहीं। यहां तक कि किसी धर्म को न मानने वालों की जानकारी भी दर्ज करने की बात कही गई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल ने इसे कर्मचारियों की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा एक बड़ा सर्वे बताया और इसे वैचारिक, जातीय एवं धार्मिक मामलों की नियमित जांच से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी शामिल बताए गए हैं। चीन में पार्टी सदस्यों के लिए धार्मिक आस्था रखने पर प्रतिबंध होने की बात कही जाती है। ऐसे में किसी कर्मचारी के खुद को धार्मिक बताने पर उसे अपनी पार्टी शाखा को इसकी जानकारी देने के लिए कहा गया।

    स्कूलों में छात्रों और परिवारों की भी जानकारी

    धार्मिक पहचान की कथित निगरानी केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं बताई जा रही। रिपोर्ट में सिचुआन के एक विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कर्मचारी के हवाले से कहा गया है कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ-साथ उनके परिवारों की धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी जुटाई जा रही है और इसे उच्च अधिकारियों तक भेजा जाता है।

    चेंगदू शिक्षा विभाग से जुड़े एक कर्मचारी के मुताबिक, बच्चों के स्कूल में दाखिले से पहले उनके परिवारों की नियमित पृष्ठभूमि जांच होती है। इसमें परिवार की धार्मिक पहचान से जुड़ी जानकारी भी शामिल होने का दावा किया गया है। यानी कथित तौर पर निगरानी सिर्फ व्यक्ति की धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके परिवार की पृष्ठभूमि तक भी पहुंच रही है।

    ‘सिनिसाइजेशन ऑफ रिलिजन’ के तहत बढ़ा नियंत्रण

    चीन में धार्मिक गतिविधियों पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण पहले से ही सख्त रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में धार्मिक मामलों पर पार्टी की निगरानी और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। चीन की ‘सिनिसाइजेशन ऑफ रिलिजन’ नीति के तहत धार्मिक संगठनों और उनकी गतिविधियों को चीनी राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने की कोशिश की जाती है।

  • Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर

    Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर


    अयोध्या।
    राम मंदिर (Ram Mandir) में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) ने अपना सर्विलांस सिस्टम बेहद सख्त कर दिया है। राम मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आ रहे हैं और दान भी कर रहे हैं। 25 जुलाई से दान पेटियों की पूरी वीडियोग्राफी शुरू कर दी गई है। ट्रस्ट के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दान पात्र के मैनेजमेंट से लेकर दान की गिनती तक की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए 8 सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाई गई है। इसके अलावा 360 डिग्री और एसएलआर कैमरे लगाए गए हैं जो कि चप्पे-चप्पे की पल-पल वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।


    दो फोटोग्राफर भी रखे गए

    दान पेटी में दान आने से लेकर उनकी गिनती तक पूरी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य दान में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी लाना है। ट्रस्ट ने कहा कि पहले 40 दान पेटियों में से कई पेटियां एक साथ भी खली जाती थीं। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा। अब इसकी निगरानी की जाएगी और एक दिन में एक ही पेटी खोली जाएगी। इस सारी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए दो प्रोफेशनल फोटोग्राफर भी रखे गए हैं। इसके अलावा गिनती दो बैंक अधिकारियों की उपस्थिति में होगी।

    अधिकारी ने कहा कि जब एक बॉक्स की काउंटिंग हो जाएगी तभी दूसरा खोला जाएगा और इसे एसबीआई के अधिकारी सील कर देंगे। बता दें कि पुलिस ने चढ़ावा चोरी के आरोपों में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। अब ट्रस्ट का कहना है कि बैंक के अधिकारियों की उपस्थिति, कई एजेंसियों की निगरानी और वीडियोग्राफी से आगे ऐसी कोई गुंजाइश ही नहीं रहेगी। न्यास के महंत दिनेन्द्र दास ने कहा, ‘एक दान पेटी खाली करने से पूर्व गणना कक्ष से एक खाली पेटी लाने, उसे रखने और सीलबंद बेटी को गणना कक्ष में ले जाने की संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है।’

    उन्होंने कहा, “वहीं निगरानी टीम में दो बैंक कर्मचारी, न्यास के दो प्रतिनिधि, दो निजी सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। दान से भरी पेटी जब गणना कक्ष में पहुंचाई जाती है तो भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी उस पर सील लगाते हैं जिससे यह प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बन जाती है।”

    उन्होंने कहा, ”दान की गणना वाले कक्ष में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अब राम मंदिर में एक पैसा भी इधर से उधर नहीं जा सकता.. सबकुछ सुरक्षित है। न्यास आगे भी इस व्यवस्था में सुधार करना जारी रखेगा।” उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सख्त हो जाए तो चोरी अपने आप रुक जाएगी।

    न्यास में हाल ही में हुए बदलाव पर दास ने कहा कि न्यास की बैठक में लिए गए सभी निर्णय सभी को स्वीकार होंगे। उन्होंने कहा कि सावन मास में झूला उत्सव सहित धार्मिक परंपराएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। राम मंदिर में चढावे की कथित चोरी की घटना के बाद विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।

  • महान एयर और आईआरजीसी को सहायता पहुंचाने के आरोप में चार देशों की छह संस्थाओं व व्यक्तियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

    महान एयर और आईआरजीसी को सहायता पहुंचाने के आरोप में चार देशों की छह संस्थाओं व व्यक्तियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर एक नया तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने ईरान की शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के गंभीर आरोप में भारत, चीन, रूस और ईरान से जुड़ी छह संस्थाओं तथा व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की आधिकारिक घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व क्षेत्र में ईरानी सैन्य गतिविधियों को मिलने वाले वित्तीय, तकनीकी और रसद संबंधी सहयोग को पूरी तरह से रोकना है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन प्रतिबंधों की मुख्य जद में वे अंतरराष्ट्रीय इकाइयां और कंपनियां आई हैं जो ईरान की विवादित विमानन सेवा ‘महान एयर’ को रसद तथा अन्य संसाधन उपलब्ध करा रही थीं। वाशिंगटन का आरोप है कि इस एयरलाइन का उपयोग लंबे समय से मध्य पूर्व के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में हथियार, सैन्य कर्मियों और आधुनिक युद्ध उपकरणों के परिवहन के लिए किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त, टेक सेक्टर से जुड़ी संस्था डाडेनेगर स्टार्टअप स्टूडियो को भी प्रतिबंधित सूची में डाला गया है, जिस पर आईआरजीसी की फ्रंट कंपनी के रूप में काम करने और अमेरिकी व इजरायली रक्षा ठिकानों की निगरानी जानकारी जुटाने का आरोप है।

    यह दंडात्मक कार्रवाई अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (ओएफएसी) द्वारा संशोधित कार्यकारी आदेश 13224 के तहत लागू की गई है। यह विशेष आदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों, उनके सहयोगियों, समर्थकों और वित्तीय तंत्र को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि आईआरजीसी और उससे जुड़े वैश्विक तंत्र को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करने वाली विदेशी संस्थाओं को अमेरिकी वित्तीय बाजार से पूरी तरह से अलग कर दिया जाएगा।

    कार्रवाई के साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और निजी वैश्विक कंपनियों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है। इसमें विशेष रूप से महान एयर या अन्य किसी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन के साथ वाणिज्यिक संबंध रखने वाली संस्थाओं को उनसे जुड़े गंभीर कानूनी, व्यावसायिक और वित्तीय जोखिमों के प्रति आगाह किया गया है। अमेरिकी विदेश नीति के अधिकारियों ने दोहराया कि वे उन सभी व्यक्तिगत और संस्थागत नेटवर्क की पहचान जारी रखेंगे जो क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले सैन्य संगठनों को संसाधन उपलब्ध कराते हैं।

    उल्लेखनीय है कि महान एयर को सबसे पहले वर्ष 2011 में आईआरजीसी की विशेष ‘कुद्स फोर्स’ को तकनीकी और वित्तीय सहायता देने के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया था। वहीं, आईआरजीसी स्वयं कई वर्षों से अमेरिका की ओर से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। चार प्रमुख देशों से जुड़ी संस्थाओं पर एक साथ हुई इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक क्षेत्र और वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

  • बलिया में लंबे अंतराल के बाद कोरोना की दस्तक, 32 वर्षीय महिला संक्रमित मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

    बलिया में लंबे अंतराल के बाद कोरोना की दस्तक, 32 वर्षीय महिला संक्रमित मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में लंबे समय बाद कोरोना संक्रमण का नया मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। आदर्श नगर पंचायत सहतवार के वार्ड संख्या-5 की 32 वर्षीय महिला में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों ने तत्काल निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। जिले में कोरोना के नए मामले ने यह संकेत दिया है कि संक्रमण के प्रति लापरवाही अभी भी जोखिम पैदा कर सकती है, इसलिए एहतियात बरतना आवश्यक है।

    महिला का सैंपल 11 जुलाई को लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में जांच के लिए लिया गया था। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 13 जुलाई को प्राप्त रिपोर्ट में उसके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए और संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई।

    संक्रमण की पुष्टि के बाद चिकित्सा टीम तुरंत महिला के घर पहुंची और उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया। चिकित्सकों ने महिला को होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी है, जहां उसका उपचार और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न होने पर समय रहते आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की श्रृंखला को रोकने के उद्देश्य से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अभियान भी शुरू किया। महिला के संपर्क में आए चार लोगों के नमूने लेकर उनकी जांच कराई गई। राहत की बात यह रही कि सभी चारों व्यक्तियों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। इससे फिलहाल संक्रमण के व्यापक फैलाव की आशंका कम मानी जा रही है, हालांकि विभाग ने निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है।

    जिला स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण के प्रत्येक मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं और चिकित्सा दल लगातार स्थानीय स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो आगे भी जांच और निगरानी का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।

    कोरोना महामारी के बाद लंबे समय तक जिले में कोई नया मामला सामने नहीं आया था। ऐसे में इस संक्रमण की पुष्टि ने स्वास्थ्य तंत्र को एक बार फिर सतर्क रहने का संदेश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण के छिटपुट मामलों को हल्के में लेने के बजाय समय पर जांच, निगरानी और उपचार पर विशेष ध्यान देना जरूरी है ताकि किसी भी संभावित जोखिम को रोका जा सके।

    स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी, सर्दी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हों तो बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि व्यक्तिगत स्वच्छता, आवश्यक सावधानियों और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

  • MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप

    MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में वाहन चेकिंग (Vehicle Checking) के दौरान पुलिस (Police) की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि चेकिंग के दौरान पुलिस की निगरानी में खड़ी एक स्कूटी (Scooty) को एक अज्ञात युवक लेकर फरार हो गया. शिकायतकर्ता का दावा है कि स्कूटी की चाबी पुलिस के पास थी और कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी ने वही चाबी अज्ञात युवक को सौंप दी. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. पीड़ित ने मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, घटना 13 जुलाई की रात करीब 8 बजे भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर हुई. शिकायतकर्ता नदीम आलम का आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी सुजुकी बर्गमैन स्कूटी को रोक लिया था. उनका कहना है कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने स्कूटी की चाबी अपने पास रख ली थी और वाहन वहीं खड़ा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ देर बाद वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर वही चाबी एक अज्ञात युवक को दे दी।


    चेकिंग के दौरान रोकी गई थी स्कूटी

    आरोप है कि युवक ने बिना किसी रोक-टोक के स्कूटी स्टार्ट की और मौके से फरार हो गया. नदीम आलम के मुताबिक, जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपनी स्कूटी वापस मांगी, तब उन्हें पता चला कि वाहन वहां से गायब हो चुका है. उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    पीड़ित का कहना है कि यदि स्कूटी की चाबी पुलिस के कब्जे में थी, तो वाहन किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ कैसे लग गया और वह वहां से कैसे निकल गया. घटना के बाद नदीम आलम ने पूरे मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से की है. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनकी स्कूटी जल्द से जल्द बरामद की जाए।

    शिकायत के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
    शिकायतकर्ता का दावा है कि सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है. इस मामले के सामने आने के बाद वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. यदि शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है. फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

  • रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान या उससे जुड़े तत्वों ने क्षेत्र के पुराने दूरसंचार नेटवर्क की तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर अमेरिकी सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा ठेकेदारों के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि हमलों में लोकेशन डेटा की निर्णायक भूमिका साबित नहीं हुई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा और मोबाइल संचार की विश्वसनीयता पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि मोबाइल सर्विलांस पर काम करने वाले एक स्वतंत्र शोध समूह ने मध्य पूर्व के कई दूरसंचार नेटवर्क पर असामान्य गतिविधियां दर्ज कीं। शोधकर्ताओं के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकी रिक्वेस्ट भेजी गईं जिनका उद्देश्य रोमिंग पर मौजूद विशेष मोबाइल फोनों की स्थिति और नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से अलग होती हैं और किसी विशेष लक्ष्य की पहचान करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती हैं।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एसएस7 प्रोटोकॉल को लेकर हो रही है। यह दूरसंचार नेटवर्क का एक पुराना सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों के मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल, संदेश और रोमिंग सेवाओं के समन्वय के लिए किया जाता है। वर्षों से सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रणाली की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। यदि किसी नेटवर्क तक अनुचित पहुंच मिल जाए तो कुछ परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर किसी मोबाइल डिवाइस की स्थिति संबंधी सीमित जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति की लगातार और सटीक वास्तविक समय की निगरानी केवल इसी तकनीक के आधार पर हमेशा संभव नहीं होती।

    रिपोर्टों के अनुसार बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र के कुछ दूरसंचार नेटवर्क पर ऐसे एसएस7 अनुरोधों में अचानक वृद्धि देखी गई। इसी आधार पर कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों या ठेकेदारों से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से ठोस तकनीकी प्रमाण जारी नहीं किए हैं।

    दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि युद्ध क्षेत्रों में वाणिज्यिक लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सेना का कहना है कि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि हालिया हमलों में लोकेशन डेटा की अहम भूमिका होने के दावों का समर्थन उपलब्ध तथ्यों से नहीं होता।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक युद्ध में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे संवेदनशील सूचनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं। इसलिए सैन्य, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के साथ-साथ आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुरक्षित नेटवर्क, अद्यतन सुरक्षा उपाय और डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और पुराने प्रोटोकॉल के आधुनिकीकरण पर अब वैश्विक स्तर पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।

  • असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    नई दिल्ली । असम के तिनसुकिया शहर में सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से नगर प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। तिनसुकिया नगर बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और खुले में पेशाब करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ‘हॉल ऑफ शेम’ अभियान लागू किया है। इस अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जाती है और उनके वीडियो फुटेज शहर के प्रमुख स्थानों पर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए जाते हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बढ़ेगा।

    नगर बोर्ड ने शहर के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क स्थापित किया है। इन कैमरों की सहायता से ऐसे लोगों की निगरानी की जा रही है जो सड़कों, दीवारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकते हैं या खुले में पेशाब करते हैं। कैमरों में रिकॉर्ड हुई घटनाओं को डिजिटल स्क्रीन पर दिखाकर लोगों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाने और जुर्माना लगाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था, इसलिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

    नगर निकाय के अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपमानित करना नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना है। उनका मानना है कि जब लोगों को यह एहसास होगा कि नियमों की अनदेखी सार्वजनिक रूप से सामने आ सकती है, तो वे स्वच्छता नियमों का अधिक गंभीरता से पालन करेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे शहर में गंदगी फैलाने की घटनाओं में कमी आएगी और सार्वजनिक स्थान अधिक साफ-सुथरे बने रहेंगे।

    हालांकि इस पहल ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर नई बहस को भी जन्म दिया है। कई नागरिकों ने इसे स्वच्छ भारत की दिशा में एक प्रभावी कदम बताते हुए समर्थन दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। ऐसे में यदि कठोर उपायों से लोगों की आदतों में सुधार आता है तो इससे पूरे शहर को लाभ मिलेगा।

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस अभियान पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना निजता के अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उनका तर्क है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और जागरूकता अभियान जैसे उपाय पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि सार्वजनिक प्रदर्शन से व्यक्तिगत सम्मान और गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग प्रभावी साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। यदि तकनीक का उपयोग पारदर्शिता, स्पष्ट नियमों और उचित निगरानी के साथ किया जाए तो ऐसे अभियान बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

    तिनसुकिया नगर बोर्ड की यह पहल अब अन्य शहरों के लिए भी चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह अभियान सार्वजनिक स्वच्छता में कितना बदलाव ला पाता है और साथ ही निजता एवं नागरिक अधिकारों से जुड़े उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है। फिलहाल यह पहल देश में स्वच्छता प्रबंधन और तकनीक के उपयोग को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन चुकी है।

  • स्मार्ट बॉर्डर से घुसपैठ पर कड़ा प्रहार, अमित शाह ने तकनीक आधारित सुरक्षा ग्रिड और एआई निगरानी की व्यापक रणनीति बताई

    स्मार्ट बॉर्डर से घुसपैठ पर कड़ा प्रहार, अमित शाह ने तकनीक आधारित सुरक्षा ग्रिड और एआई निगरानी की व्यापक रणनीति बताई

    नई दिल्ली । देश की सीमा सुरक्षा को अधिक मजबूत, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में सीमा प्रबंधन को पूरी तरह स्मार्ट तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे अवैध घुसपैठ, ड्रोन गतिविधियों, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए पारंपरिक व्यवस्था के साथ अत्याधुनिक तकनीक का समन्वय अब समय की आवश्यकता बन गया है।

    नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट सुपरिंटेंडेंट्स ऑफ पुलिस कॉन्फ्रेंस-2026 को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनका कहना था कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही प्रभावी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

    उन्होंने बताया कि सरकार “स्मार्ट बॉर्डर” की अवधारणा पर तेजी से काम कर रही है। इस व्यवस्था के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली, डिजिटल सर्विलांस, स्मार्ट सेंसर, एंटी-ड्रोन तकनीक तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों की मदद से सीमा पर होने वाली गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।

    गृह मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार एक “क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी ग्रिड” विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा की जाएगी। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें समय रहते रोकना है। इस दिशा में आधुनिक तकनीक और सूचनाओं के बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।

    अमित शाह ने कहा कि सरकार की सीमा सुरक्षा नीति तीन प्रमुख आधारों पर केंद्रित है, जिनमें सुरक्षित सीमाएं, समृद्ध सीमावर्ती क्षेत्र और जागरूक समाज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, सुरंग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन कम होगा और स्थानीय नागरिक भी राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के सक्रिय भागीदार बन सकेंगे।

    उन्होंने कहा कि संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ के खिलाफ अगले तीन वर्षों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार का लक्ष्य केवल घुसपैठियों की पहचान करना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित करना है जिससे अवैध प्रवेश की संभावनाओं को ही न्यूनतम किया जा सके।

    गृह मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमावर्ती गांवों में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। साथ ही भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। उनका कहना था कि यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवैध घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी, कट्टरपंथ तथा संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और मजबूत बुनियादी ढांचे के माध्यम से देश की सीमाओं को अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाना है।

  • पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निगरानी तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संभावित ट्रैकिंग, निगरानी और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए क्रेमलिन ने कई अतिरिक्त सावधानियां लागू की हैं। इन कदमों को वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य और हाईटेक खतरों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रूस की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वर्तमान समय में एआई आधारित विश्लेषण प्रणालियां विशाल मात्रा में उपलब्ध डिजिटल डेटा का बेहद कम समय में अध्ययन कर सकती हैं। सीसीटीवी फुटेज, सार्वजनिक गतिविधियों, यात्रा पैटर्न और अन्य डिजिटल संकेतों के आधार पर किसी भी महत्वपूर्ण व्यक्ति की गतिविधियों का आकलन करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी जोखिमों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    जानकारों के अनुसार राष्ट्रपति से जुड़े कई संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी प्रणालियों की समीक्षा की गई है। कुछ स्थानों पर डिजिटल नेटवर्क को सीमित करने तथा सुरक्षा ढांचे को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाए गए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की साइबर घुसपैठ या डेटा विश्लेषण के माध्यम से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच न बनाई जा सके।

    राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से उनके आवागमन, संचार माध्यमों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि किसी भी उच्च पदस्थ व्यक्ति की जानकारी तक पहुंच उसके आसपास मौजूद लोगों के माध्यम से भी संभव हो सकती है, इसलिए संपूर्ण सुरक्षा श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां अब केवल पारंपरिक खतरों तक सीमित नहीं रह गई हैं। पहले जहां सुरक्षा का केंद्र भौतिक हमलों, जासूसी गतिविधियों या सैन्य जोखिमों पर होता था, वहीं अब डेटा, एल्गोरिदम और डिजिटल विश्लेषण भी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। एआई आधारित प्रणालियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर व्यवहारिक पैटर्न और संभावित गतिविधियों का अनुमान लगाने में सक्षम होती जा रही हैं।

    हाल के वर्षों में दुनिया के कई देशों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख स्तंभों में शामिल किया है। रूस भी इसी दिशा में अपने सुरक्षा ढांचे को लगातार अपडेट कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में उच्च पदस्थ नेताओं की सुरक्षा केवल हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों या सुरक्षित परिसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एआई, सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन तकनीक और साइबर इंटेलिजेंस ने सुरक्षा की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में विश्व की प्रमुख शक्तियां अपने नेतृत्व, सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील ढांचों की सुरक्षा के लिए नई रणनीतियां विकसित कर रही हैं। रूस द्वारा उठाए गए हालिया कदम इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माने जा रहे हैं।