सूर्य देव का व्रत करने वाले श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ कपड़े पहनते हैं। इसके बाद सूर्य उदय के समय तांबे के लोटे में साफ जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार जल में लाल फूल या अक्षत डालना भी शुभ माना जाता है। अर्घ्य देते समय सूर्य देव का स्मरण करते हुए परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद सूर्य मंत्र का जाप और सूर्य चालीसा का पाठ किया जा सकता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ प्रार्थना करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।
रविवार का व्रत रखने वाले कई लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार एक समय भोजन करते हैं। व्रत में सात्विक भोजन करने और साफ सफाई बनाए रखने को प्राथमिकता दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध और कटु वचन से बचना तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करना अच्छा माना जाता है। व्रत का पालन अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार करना चाहिए। बच्चों बुजुर्गों और किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। श्रद्धा के साथ पूजा करना जरूरी है लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
सूर्य देव की पूजा में जल लाल फूल अक्षत और दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। कई परंपराओं में लाल रंग को सूर्य देव से जुड़ा शुभ रंग माना जाता है। पूजा के दौरान गुड़ और गेहूं का दान करना भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन या उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं। दान का उद्देश्य दूसरों की सहायता करना और समाज में सद्भाव बढ़ाना होना चाहिए। सूर्य देव की आराधना करते समय गायत्री मंत्र या सूर्य से संबंधित मंत्रों का जाप भी किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति मंत्रों से परिचित नहीं है तो वह सरल प्रार्थना के साथ भी पूजा कर सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार का व्रत आत्मविश्वास सम्मान और उन्नति की कामना से किया जाता है। सूर्य देव को ज्योतिष में आत्मबल नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। हालांकि व्रत करने से किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं होती। इसे श्रद्धा और व्यक्तिगत आस्था से जुड़ी परंपरा के रूप में देखना चाहिए। सूर्य के प्रकाश में सुबह कुछ समय बिताना भी दिनचर्या का अच्छा हिस्सा हो सकता है लेकिन तेज धूप को सीधे देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए सूर्य देव की पूजा करते समय उनकी ओर सीधे लगातार देखने से बचें। श्रद्धा के साथ सही दिनचर्या और अच्छे कर्म अपनाकर रविवार को सकारात्मक शुरुआत का अवसर बनाया जा सकता है।

