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  • माला सिन्हा के प्लेन हाईजैक की कहानी, आसमान में हुआ था बड़ा ड्रामा; नेपाल की राजनीति से जुड़ा था मामला

    माला सिन्हा के प्लेन हाईजैक की कहानी, आसमान में हुआ था बड़ा ड्रामा; नेपाल की राजनीति से जुड़ा था मामला


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के सुनहरे दौर की मशहूर अभिनेत्री माला सिन्हा ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा भी है जो फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। साल 1973 में माला सिन्हा उस विमान में सवार थीं जिसे नेपाल में हाईजैक कर लिया गया था। हैरानी की बात यह थी कि विमान को हाईजैक करने वालों में दुर्गा प्रसाद सुबेदी भी शामिल थे जो आगे चलकर नेपाल की पूर्व प्रधानमंत्री और देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के पति बने। इस घटना को नेपाल के पहले विमान अपहरण के तौर पर दर्ज किया जाता है।

    10 जून 1973 को रॉयल नेपाल एयरलाइंस का एक विमान बिराटनगर से काठमांडू के लिए रवाना हुआ था। विमान में यात्रियों के साथ अभिनेत्री माला सिन्हा भी मौजूद थीं। उड़ान के दौरान नेपाली कांग्रेस से जुड़े तीन लोगों ने विमान पर कब्जा कर लिया। इनमें दुर्गा प्रसाद सुबेदी के अलावा नागेंद्र धुंगेल और बसंत भट्टराई शामिल थे। अपहरणकर्ताओं ने विमान के पायलट को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया और विमान को भारत के बिहार स्थित फोर्ब्सगंज क्षेत्र में उतार दिया गया।

    इस पूरी घटना के पीछे वजह किसी यात्री को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विमान में ले जाए जा रहे सरकारी धन को हासिल करना बताई जाती है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार विमान में करीब 30 लाख नेपाली रुपये की रकम थी। इस धन को हासिल करने की योजना नेपाल के तत्कालीन राजा महेंद्र की राजशाही के खिलाफ चल रहे सशस्त्र संघर्ष के लिए फंड जुटाने से जुड़ी थी। इस ऑपरेशन के पीछे गिरिजा प्रसाद कोइराला का नाम भी सामने आया था जो बाद में नेपाल के प्रधानमंत्री बने।

    विमान को फोर्ब्सगंज में उतारने के बाद अपहरणकर्ताओं ने रकम अपने कब्जे में ली और इसके बाद विमान को यात्रियों के साथ आगे जाने दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना में यात्रियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था। घटना के बाद यह मामला नेपाल के राजनीतिक इतिहास का बेहद चर्चित अध्याय बन गया।

    दुर्गा प्रसाद सुबेदी बाद में नेपाल की राजनीति से जुड़े रहे और उनका नाम इसी ऐतिहासिक विमान अपहरण के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहा। उनकी मुलाकात सुशीला कार्की से भारत में पढ़ाई के दौरान हुई थी। कार्की ने आगे चलकर न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं। बाद में वह देश की अंतरिम प्रधानमंत्री भी बनीं।

    वहीं माला सिन्हा का फिल्मी सफर बेहद शानदार रहा। उन्होंने हिंदी के साथ बंगाली और नेपाली फिल्मों में भी काम किया और प्यासा धूल का फूल गुमराह अनपढ़ हिमालय की गोद में दिल तेरा दीवाना और आंखें जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। एक तरफ माला सिन्हा का नाम बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर से जुड़ा रहा तो दूसरी तरफ 1973 का यह विमान अपहरण उनके जीवन का ऐसा अनोखा प्रसंग बन गया जिसमें बॉलीवुड और नेपाल की राजनीतिक उथल पुथल एक साथ जुड़ गई।

  • नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, बालेन शाह ने बढ़ाया सत्ता केंद्रीकरण की ओर कदम, खुफिया एजेंसी सीधे PMO के अधीन

    नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, बालेन शाह ने बढ़ाया सत्ता केंद्रीकरण की ओर कदम, खुफिया एजेंसी सीधे PMO के अधीन




    नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है, जहां प्रधानमंत्री Balen Shah की सरकार ने सत्ता के केंद्रीकरण की दिशा में अहम कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय जांच विभाग को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधीन कर दिया है, जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस शुरू हो गई है।

    नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को मंजूर की गई “सरकार कार्य विभाजन नियमावली” के तहत इस खुफिया एजेंसी को गृह मंत्रालय से हटाकर PMO के नियंत्रण में लाया गया है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब देश में यह चर्चा चल रही थी कि खुफिया तंत्र को फिर से गृह मंत्रालय के अधीन किया जाए या प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे नियंत्रण में रखा जाए।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli की नीतियों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम विभागों को PMO के अधीन कर सत्ता को केंद्रीकृत किया था। उस समय उनकी सरकार पर विपक्ष और जनता ने तानाशाही शैली में शासन करने के आरोप लगाए थे।

    बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश Sushila Karki के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इन फैसलों को पलटते हुए खुफिया और अन्य एजेंसियों को उनके मूल मंत्रालयों के अधीन वापस कर दिया था। लेकिन अब बालेन शाह सरकार द्वारा इन्हें दोबारा PMO के अधीन लाने के फैसले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

    जानकारों के मुताबिक, इस बदलाव के साथ ही राजस्व जांच विभाग को भी भंग कर दिया गया है, जिसे पहले ओली सरकार के दौरान PMO के अधीन किया गया था। इसे सीधे तौर पर सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

    नेपाल की राजनीति में इस फैसले के बाद नई बहस छिड़ गई है कि क्या यह प्रशासनिक सुधार है या फिर सत्ता को एक ही केंद्र में सीमित करने की कोशिश। विपक्षी दलों और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संस्थागत संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बता रही है।