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  • शिवपुरी कोतवाली में कथित शराबखोरी और फायरिंग के मामले में टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच, सात पुलिसकर्मी निलंबित

    शिवपुरी कोतवाली में कथित शराबखोरी और फायरिंग के मामले में टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच, सात पुलिसकर्मी निलंबित

    शिवपुरी: में सिटी कोतवाली से जुड़े एक कथित घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। थाना प्रभारी टीआई रोहित दुबे को लाइन अटैच कर दिया गया है, जबकि उपनिरीक्षक प्रवीण त्रिवेदी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। यह मामला मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात का बताया जा रहा है, जब शहर में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चल रहा था। घटनाक्रम में थाने के भीतर कथित रूप से शराब पीने, ताश खेलने, पुलिसकर्मियों के बीच विवाद और गोली चलने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात करीब एक बजे सिटी कोतवाली परिसर में स्थित पुराने महिला थाने के कमरों में कुछ पुलिसकर्मियों के मौजूद होने की बात कही गई है। इनमें हवलदार विनय सिंह जाटव, कोतवाली के चालक शरद यादव और दो अन्य आरक्षकों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मी शराब के नशे में ताश खेल रहे थे। इसी बीच ताश खेलने के दौरान कहासुनी हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई।

    बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान शरद यादव के साथ मारपीट की गई। इसके बाद गुस्से में आकर उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली चला दी। हालांकि, गोली किसी व्यक्ति को नहीं लगी और किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई। घटना के बाद विनय सिंह जाटव समेत कुछ पुलिसकर्मियों के कोतवाली परिसर से चले जाने की बात कही गई है। यह भी दावा किया गया कि शरद यादव उन्हें तलाश करते हुए माधव चौक तक पहुंचे थे। इन विवरणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले को लेकर विनय सिंह जाटव से संपर्क किए जाने पर उन्होंने ऐसी किसी घटना से इनकार करते हुए इसे अफवाह बताया। इस विरोधाभास के कारण घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है। थाने के पुराने महिला थाना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फुटेज की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित समय पर परिसर में क्या हुआ था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुटेज और निलंबन आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

    घटनाक्रम के दौरान टीआई रोहित दुबे की ड्यूटी माधव चौक पर बताई गई थी। आरोप है कि वह करीब दो घंटे तक निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिवपुरी की पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया सिटी कोतवाली पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद थाना प्रभारी को लाइन अटैच करने और सात पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। विभागीय कार्रवाई का विस्तृत आधार और आरोपों की अंतिम स्थिति उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।

    निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में उपनिरीक्षक प्रवीण त्रिवेदी के अलावा गजेंद्र परिहार, देवेंद्र रावत, जितेंद्र रायपुरिया, विनय जाटव, शरद यादव और अवतार सिंह शामिल हैं। इस प्रकार कुल सात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। थाना प्रभारी रोहित दुबे को लाइन अटैच करने के पीछे स्टाफ पर नियंत्रण रखने में कथित विफलता और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का मामला बताया गया है।

    रोहित दुबे का शिवपुरी में कोतवाली प्रभारी के रूप में यह दूसरा कार्यकाल बताया गया है। वह अशोकनगर से स्थानांतरित होकर शिवपुरी आए थे और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर के कार्यकाल में उन्हें सिटी कोतवाली की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले एक जन आंदोलन के दौरान विवाद में आने के बाद उन्हें इस थाने से हटाया गया था। बाद में उन्हें फिर से कोतवाली प्रभारी बनाया गया। अब ताजा घटनाक्रम के बाद उन्हें दोबारा लाइन अटैच किया गया है। मामले में आरोपों की पुष्टि और घटनाक्रम की पूरी स्थिति जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर


    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। जब छात्र वाहन में बैठ रहे थे, तब वे ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।

    इसी दौरान वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और गालियां देने का आरोप लगा।घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग के एडीसीपी अनिल कुमार शर्मा ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। एडीसीपी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।

    इस घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को गंभीर और निंदनीय बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सिंघार का कहना है कि आदिवासी छात्रों का अपमान करने के आरोपों की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।उन्होंने मांग उठाई कि मामले में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस तरह उन्होंने घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है।

    फिलहाल पुलिस ने थाना प्रभारी को निलंबित करने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के समय वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही। मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच के अंतिम निष्कर्षों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया यह मामला अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर चर्चा में है। एक ओर थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर उमंग सिंघार ने कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
  • कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में जहरीले धतूरा फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने Amazon, Instamart और BigBasket से जुड़े फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज को मानव इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराए जाने की शिकायतों और जांच के बाद की गई।

    धतूरा एक जहरीला पौधा माना जाता है और इसके फल तथा बीज का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसकी बिक्री और वितरण को लेकर विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई। जांच के दौरान अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित पाए गए।

    जांच में कुछ ऐसे पैकेट भी सामने आए जिन पर फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। विभाग के अनुसार, धतूरा जैसे जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में स्टोर करना, बेचना या वितरित करना स्वीकार्य नहीं है। जांच के दौरान ऐसे उत्पादों के गोदामों में रखे होने की जानकारी भी सामने आई, जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को विभाग के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कंपनियों से ऑनलाइन बिक्री, उत्पादों की उपलब्धता और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे गए।

    Amazon की ओर से इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया गया। वहीं Instamart ने अपने स्तर पर की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। BigBasket ने बताया कि उसने धतूरा के फलों की ऑनलाइन बिक्री रोक दी है। कंपनी की ओर से भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग को स्पष्ट करने की बात भी कही गई।

    BigBasket ने यह भी कहा कि ऐसे उत्पादों पर मानव उपभोग के लिए नहीं होने की स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी। हालांकि, नियामक विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। विभाग का कहना है कि जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के तौर पर उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से स्वीकार्य नहीं है।

    कार्रवाई के तहत Amazon, Instamart और BigBasket के संबंधित फूड लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। लाइसेंस की बहाली आगे की सुनवाई और कंपनियों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही हो सकेगी। इस दौरान कंपनियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।

    विभाग ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धतूरा के फल और बीज की उन सभी लिस्टिंग और विज्ञापनों को तत्काल हटाने या निलंबित करने का निर्देश दिया है, जिनमें इन्हें खाद्य पदार्थ या मानव उपभोग के लिए उपलब्ध बताया गया हो। साथ ही धतूरा उत्पादों की आपूर्ति करने वाले संबंधित विक्रेताओं और सप्लायरों के लाइसेंस तथा रजिस्ट्रेशन पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    इस कार्रवाई से ऑनलाइन खाद्य बिक्री में उत्पादों की जांच, सही लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी एक बार फिर सामने आई है। विभाग की सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहरीले या मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थ खाद्य उत्पादों के रूप में उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।

  • कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    मध्य प्रदेश:के कटनी में पुलिस प्रशासन से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएसपी नेहा पच्चीसिया को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कथित तौर पर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कराया गया। इसी प्रकरण में सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

    जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, संबंधित जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपये बताया गया है, जबकि उसे कथित रूप से 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम हस्तांतरित कराया गया। मामले में मारूफ अहमद हनफी को कथित फ्रंटमैन के तौर पर बताया गया है। जमीन के लेनदेन को लेकर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी जांच की जा रही है।

    आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कटनी में सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीम ने की। कार्यालय सील करने का उद्देश्य मामले से संबंधित केस डायरी, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्यों पर प्रभाव की आशंका न रहे।

    मामले में कुठला थाने में एफआईआर संख्या 0738/2026 दर्ज की गई है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दर्ज धाराओं में 61, 198, 199(बी), 308(7) और 318(4) शामिल हैं।

    जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि जमीन के कथित सौदे में सीएसपी से करीबी बताए जा रहे क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से धनराशि की फंडिंग की गई थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन की प्रकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के कथित दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

    निलंबन की कार्रवाई के साथ गृह विभाग की ओर से विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच को भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच के दौरान जमीन सौदे, कथित वित्तीय लेनदेन, पुलिस पद के संभावित दुरुपयोग और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

    सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • मेघालय और ओडिशा की तीन खाद्य कंपनियों पर कार्रवाई, निरीक्षण में स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी

    मेघालय और ओडिशा की तीन खाद्य कंपनियों पर कार्रवाई, निरीक्षण में स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी

    नई दिल्ली ।भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन खाद्य व्यवसाय संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने मेघालय की ए.बी. एंटरप्राइज तथा ओडिशा की जाइका ऑर्गेनिक्स और नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के खाद्य कारोबार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।

    नियामक के अनुसार इन कंपनियों के खिलाफ निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन सामने आए। इनमें भ्रामक स्वास्थ्य संबंधी दावे, खराब स्वच्छता व्यवस्था, अनुचित भंडारण, कीट नियंत्रण की कमियां और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना शामिल है।

    ए.बी. एंटरप्राइज के मामले में उत्पादों के लेबल और प्रचार सामग्री पर स्वास्थ्य लाभ से जुड़े ऐसे दावे पाए गए, जिन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन और दावे संबंधी नियमों का उल्लंघन माना गया। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी आवश्यक विनिर्माण स्वीकृति के बिना खाद्य उत्पादों का कारोबार कर रही थी।

    कंपनी को सुधार नोटिस जारी करने के साथ अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था। हालांकि, नियामक के मुताबिक कंपनी की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके बाद खाद्य कारोबार से जुड़ी सभी गतिविधियों को अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया।

    ओडिशा स्थित जाइका ऑर्गेनिक्स के संयंत्र में निरीक्षण के दौरान स्वच्छता और सैनिटेशन से संबंधित कई गंभीर कमियां सामने आईं। खाद्य पदार्थों के निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण की परिस्थितियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।

    निरीक्षण में खराब हाउसकीपिंग, कीट नियंत्रण की समस्याएं, जंग लगे उपकरण, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का अनुचित भंडारण तथा उत्पादन प्रक्रिया में आवश्यक नियंत्रण की कमी पाई गई। कुछ उत्पादों और सामग्रियों पर निर्माण तिथि, बैच नंबर और उपयोग की अंतिम तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी अंकित नहीं थीं।

    अनुपालन मूल्यांकन में जाइका ऑर्गेनिक्स को 90 में से केवल 10 अंक मिले। 12 प्रतिशत के इस स्कोर के आधार पर कंपनी को गैर-अनुपालन श्रेणी में रखा गया। नियामक ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और जैविक जोखिम पैदा कर सकती हैं।

    नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के उत्पादन परिसर में भी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं। निरीक्षण के दौरान प्रसंस्करण और भंडारण क्षेत्रों में मक्खियां, मकड़ी के जाले, कीटों के प्रवेश के रास्ते और जल स्रोतों के आसपास शैवाल की मौजूदगी दर्ज की गई।

    इसके अलावा जंग लगे उपकरण, खाद्य सामग्री के पास कचरे का जमाव और तैयार उत्पादों के अनुचित भंडारण जैसी कमियां भी सामने आईं। कंपनी के रिकॉर्ड में खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और नियंत्रण नमूनों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का भी अभाव पाया गया।

    नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज को अनुपालन मूल्यांकन में 80 में से 20 अंक मिले, यानी कंपनी का स्कोर 25 प्रतिशत रहा। इसे भी गैर-अनुपालन श्रेणी में रखा गया और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

    खाद्य नियामक ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • फिक्सिंग मामले में ICC का बड़ा एक्शन, अमेरिका के खिलाड़ी पर 8 साल का प्रतिबंध

    फिक्सिंग मामले में ICC का बड़ा एक्शन, अमेरिका के खिलाड़ी पर 8 साल का प्रतिबंध

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका के क्रिकेटर अखिलेश रेड्डी पर आठ वर्षों का प्रतिबंध लगा दिया है। आईसीसी की भ्रष्टाचार-रोधी ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2025 अबू धाबी टी10 लीग से जुड़े मामले में एंटी-करप्शन कोड के कई प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया। इसके बाद उन्हें सभी प्रकार की क्रिकेट गतिविधियों से आठ साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।

    आईसीसी के अनुसार यह मामला वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित अबू धाबी टी10 लीग से जुड़ा है। इस प्रतियोगिता के लिए एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी को नामित भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच के दौरान अखिलेश रेड्डी की भूमिका संदेह के दायरे में आई, जिसके बाद विस्तृत जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई।

    आईसीसी ने बताया कि अखिलेश रेड्डी को भ्रष्टाचार-रोधी संहिता के तीन अलग-अलग प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। उन पर मैच के परिणाम या उसके किसी पहलू को प्रभावित करने की कोशिश करने, दूसरे खिलाड़ी को ऐसे कृत्य के लिए उकसाने तथा जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कर जांच में बाधा पहुंचाने के आरोप सिद्ध हुए।

    जांच में यह भी सामने आया कि खिलाड़ी ने अपने मोबाइल उपकरण से डेटा और संदेश हटाने की कोशिश की, जो भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों की जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते थे। आईसीसी ने इसे जांच प्रक्रिया में सहयोग न करने और साक्ष्य मिटाने का गंभीर मामला माना।

    आईसीसी के आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। इसी तारीख को अखिलेश रेड्डी को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। अब इस अवधि को शामिल करते हुए वह अगले आठ वर्षों तक किसी भी स्तर की क्रिकेट गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे।

    अखिलेश रेड्डी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर अभी शुरुआती दौर में ही था। उन्होंने अब तक अमेरिका के लिए चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। इन मैचों में गेंदबाजी करते हुए उनके नाम एक विकेट दर्ज है, जबकि उन्हें बल्लेबाजी का अवसर नहीं मिला। इसके अलावा वह 2025 अबू धाबी टी10 लीग में एस्पिन स्टैलियन्स टीम का हिस्सा भी रहे थे।

    आईसीसी लगातार क्रिकेट में भ्रष्टाचार रोकने के लिए अपनी निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रही है। परिषद का कहना है कि मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। खिलाड़ियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से जांच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की जाती है।

    इस कार्रवाई को क्रिकेट की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईसीसी का मानना है कि खेल की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई आवश्यक है। इसी नीति के तहत दोषी पाए जाने पर अखिलेश रेड्डी पर यह लंबा प्रतिबंध लगाया गया है।

  • घरेलू क्रिकेट में जानबूझकर नो-बॉल और खतरनाक बीमर फेंकने वाले गेंदबाज होंगे पूरे मैच से निलंबित

    घरेलू क्रिकेट में जानबूझकर नो-बॉल और खतरनाक बीमर फेंकने वाले गेंदबाज होंगे पूरे मैच से निलंबित

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आगामी 2026-27 घरेलू क्रिकेट सत्र के औपचारिक शुभारंभ से पूर्व खेल परिस्थितियों और नियमों में कई युगांतकारी परिवर्तनों की घोषणा की है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब द्वारा वैश्विक क्रिकेट नियमों में किए गए संशोधनों के अनुपालन में बोर्ड ने घरेलू प्रतियोगिताओं को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से नए प्रावधान लागू किए हैं। इन संशोधनों के तहत अनुशासनहीनता और अनुचित खेल भावना पर लगाम कसने के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं। नए दिशानिर्देशों का सर्वाधिक प्रभाव गेंदबाजों, खेल के संचालन, अंतिम ओवरों के निष्पादन तथा विकेटकीपरों की तकनीकी भूमिका पर पड़ेगा। बोर्ड ने इन अद्यतन नियमावलियों की विस्तृत जानकारी सभी राज्य क्रिकेट संघों, मैच रेफरी और अंपायरों को औपचारिक रूप से प्रेषित कर दी है।

    नए नियमों के अंतर्गत सबसे कठोर प्रावधान अनुचित गेंदबाजी प्रथाओं को रोकने के संदर्भ में किया गया है। यदि कोई भी गेंदबाज जानबूझकर फ्रंट फुट नो-बॉल फेंकता हुआ या बल्लेबाज के शरीर को निशाना बनाते हुए खतरनाक बीमर डालता हुआ पाया जाता है, तो अंपायर उसे केवल वर्तमान पारी से ही नहीं, बल्कि पूरे मैच से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर देंगे। पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में गेंदबाज को केवल उस विशिष्ट पारी में गेंदबाजी करने से रोका जाता था और वह मैच में क्षेत्ररक्षण के साथ-साथ अगली पारी में गेंदबाजी के लिए पात्र रहता था। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से खेल में दुर्भावनापूर्ण व्यवहार पर पूर्ण विराम लगेगा और मैदान पर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

    प्रथम श्रेणी एवं बहु-दिवसीय मैचों के संचालन को लेकर भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत संशोधन किया गया है। अब दिन के अंतिम ओवर के दौरान यदि किसी भी गेंद पर विकेट का पतन होता है, तो खेल को उस समय स्थगित करने के बजाय ओवर की शेष गेंदों का खेल पूरा कराया जाएगा। इसके तहत नए बल्लेबाज को मैदान पर आकर अंतिम गेंदों का सामना करना अनिवार्य होगा, जिससे दिन के निर्धारित ओवरों की शत-प्रतिशत पूर्ति संभव हो सकेगी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य समय के अपव्यय को रोकना और खेल की निरंतरा को बनाए रखना है।

    सीमित ओवरों के प्रारूप में कप्तानों और विकेटकीपरों की सहूलियत तथा तकनीकी स्पष्टता के लिए भी विशेष रियायतें दी गई हैं। एकदिवसीय मैचों में अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान कप्तान मैदान के भीतर प्रवेश कर अपने खिलाड़ियों के साथ सामरिक रणनीतियों पर सीधा विचार-विमर्श कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, विकेटकीपरों द्वारा दस्तानों की स्थिति को लेकर उत्पन्न होने वाले तकनीकी विवादों को समाप्त करने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि गेंदबाज द्वारा गेंद छोड़ने के सटीक क्षण तक ही दस्ताने स्टंप्स के पीछे होना अनिवार्य है। बोर्ड का यह समग्र प्रयास भारतीय घरेलू क्रिकेट के ढांचे को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • टी20 वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट में विफल रहे स्पिनर मोहम्मद नवाज; आईसीसी की बड़ी कार्रवाई के बाद रद्द किए गए पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड

    टी20 वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट में विफल रहे स्पिनर मोहम्मद नवाज; आईसीसी की बड़ी कार्रवाई के बाद रद्द किए गए पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के अनुभवी स्पिन गेंदबाजी ऑलराउंडर मोहम्मद नवाज पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के मामले में गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। डोप परीक्षण के दौरान खिलाड़ी के शरीर में एक प्रतिबंधित पदार्थ के अंश पाए गए थे, जिसके बाद नवाज ने आधिकारिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इस कृत्य के लिए शासी निकाय ने उन पर तीन महीने का निलंबन लागू किया है। हालांकि, खेल नियमों के तहत पुनर्वास कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने की शर्त पर इस अवधि को कम कर केवल एक महीने किए जाने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

    मध्य प्रदेश सहित देश और दुनिया के खेल प्रेमियों के लिए यह घटनाक्रम काफी चौंकाने वाला है। बत्तीस वर्षीय मोहम्मद नवाज का यह डोप परीक्षण इस वर्ष 7 फरवरी को श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप के एक मुकाबले के बाद किया गया था। यह मैच पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच खेला गया था, जिसके संपन्न होने के बाद लिए गए जैविक नमूने की जांच रिपोर्ट में कार्बोक्सी-टीएचसी नामक प्रतिबंधित तत्व की पुष्टि हुई थी। आईसीसी की आधिकारिक एंटी-डोपिंग आचार संहिता के अंतर्गत इस विशिष्ट पदार्थ को नशीले या मादक पदार्थों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जिसके सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

    वैश्विक क्रिकेट निकाय द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, पाकिस्तानी ऑलराउंडर ने अपनी इस प्रशासनिक और नैतिक चूक को बिना किसी प्रतिवाद के स्वीकार कर लिया है। खिलाड़ी ने आईसीसी के समक्ष यह भी प्रमाणित किया कि उक्त प्रतिबंधित पदार्थ का उपयोग प्रतियोगिता की अवधि के बाहर किया गया था और इसका उद्देश्य मैदान पर अपने खेल प्रदर्शन को अनुचित रूप से बेहतर बनाना या कोई अतिरिक्त लाभ प्राप्त करना बिल्कुल नहीं था। इसी तार्किक आधार पर विचार करते हुए आईसीसी ने उन पर अपेक्षाकृत कम समय यानी तीन महीने की अयोग्यता का निर्णय लिया। यह निलंबन 1 मई से प्रभावी माना गया है, क्योंकि इसी तिथि से खिलाड़ी ने स्वैच्छिक रूप से अस्थायी निलंबन स्वीकार कर लिया था।

    शासी निकाय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मोहम्मद नवाज ने अपनी निर्धारित सजा को स्वीकार करने के साथ-साथ संस्था द्वारा निर्देशित नशा मुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रम में सम्मिलित होने पर पूर्ण सहमति व्यक्त की है। यदि वह आईसीसी के मानकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की संतुष्टि के अनुरूप इस संपूर्ण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेते हैं, तो उनके निलंबन की अवधि को तीन महीने से घटाकर केवल एक महीना कर दिया जाएगा। वर्तमान स्थिति के अनुसार, ढाई महीने का समय व्यतीत होने के उपरांत उनके अस्थायी निलंबन को भी हटा लिया गया है, जो पुनर्वास की दिशा में एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

    इस पूरे अनुशासनात्मक मामले में खिलाड़ी को सबसे बड़ा झटका उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स के मोर्चे पर लगा है। आईसीसी एंटी-डोपिंग कोड के कड़े नियमों के तहत, 7 फरवरी को नीदरलैंड्स के विरुद्ध खेले गए मैच से लेकर 1 मई तक की अवधि के बीच मोहम्मद नवाज द्वारा खेले गए सभी आधिकारिक मुकाबलों के व्यक्तिगत प्रदर्शन और रिकॉर्ड्स को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि इस विशिष्ट समयावधि के दौरान बनाए गए रन या लिए गए विकेटों को अब किसी भी आधिकारिक क्रिकेट सांख्यिकी में मान्यता नहीं दी जाएगी। इस कठोर निर्णय ने एक बार फिर खेल जगत में डोपिंग रोधी नियमों की सर्वोच्चता को सिद्ध किया है।

  • न्यायिक गरिमा और आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल: कार्यकाल के दौरान गैस एजेंसी चलाने के विवाद में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

    न्यायिक गरिमा और आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल: कार्यकाल के दौरान गैस एजेंसी चलाने के विवाद में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

    नई दिल्ली । देश की उच्च न्यायपालिका में संवैधानिक पदों पर आसीन न्यायाधीशों के लिए निर्धारित नैतिक आचार संहिता और नियमों की अनदेखी का एक अत्यंत संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और बाद में मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे चुके एक सेवानिवृत्त जस्टिस अपने लगभग 16 वर्षों के लंबे न्यायिक कार्यकाल के दौरान समानांतर रूप से एक एलपीजी गैस वितरण एजेंसी का संचालन भी करते रहे। इस पूरे मामले का आधिकारिक भंडाफोड़ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े एक डीलरशिप विवाद और एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की विधवा द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई एक रिट याचिका के माध्यम से हुआ है, जिसने न्यायिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

    प्राप्त विवरणों और दस्तावेजों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ने वर्ष 1984 में संबंधित व्यक्ति को किचन फ्लेम के नाम से एक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप आवंटित की थी। स्थापित नियमों और अलिखित न्यायिक आचार संहिता के अनुसार, संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों के लिए यह अनिवार्य माना जाता है कि उनका सरकार, निजी पक्षों अथवा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक, व्यावसायिक या संविदात्मक संबंध नहीं होना चाहिए ताकि हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके बावजूद, संबंधित न्यायाधीश नवंबर 2024 में मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने तक इस व्यावसायिक गैस एजेंसी के वैधानिक मालिक बने रहे, जिसे प्रथम दृष्टया स्थापित सेवा नियमों और नैतिक मापदंडों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।

    अत्यंत महत्वपूर्ण न्यायिक पदों पर आसीन रहने के बावजूद इस व्यावसायिक समझौते को समय-समय पर नवीनीकृत भी कराया जाता रहा। संबंधित न्यायाधीश ने अस्सी के दशक के मध्य में एक अधिवक्ता के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी, जिसके बाद वर्ष 2008 में वे उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त हुए और वर्ष 2023 में पदोन्नत होकर मुख्य न्यायाधीश बने। इस पूरे सफर के दौरान गैस एजेंसी के अनुबंध को कई बार रिन्यू कराया गया, जिसकी वैधता वर्ष 2030 तक के लिए बढ़ा दी गई थी। तेल कंपनी के साथ हुए सबसे हालिया समझौते के आधिकारिक स्टाम्प पेपर पर संबंधित न्यायाधीश के हस्ताक्षर और तस्वीरें भी मौजूद पाई गईं, जो इस व्यावसायिक गतिविधि में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता को प्रमाणित करती हैं।

    इस पूरे गुत्थी का खुलासा तब हुआ जब उक्त गैस एजेंसी का कामकाज संभालने वाले पूर्व प्रबंधक की विधवा ने मालिकाना हक को अपने नाम पर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली। इसी विधिक प्रक्रिया के दौरान दिसंबर 2025 में प्रशासन के पास एक आधिकारिक जनशिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि गैस एजेंसी के वास्तविक मालिक एक पूर्णकालिक न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं। इस गंभीर शिकायत के आधार पर तेल कंपनी ने संबंधित पूर्व न्यायाधीश को लगातार कई कारण बताओ नोटिस जारी किए। कंपनी का स्पष्ट रुख था कि बिना पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी संवैधानिक पद पर रहते हुए व्यावसायिक एजेंसी चलाना नियमों का उल्लंघन है, इसलिए क्यों न इस आवंटन को रद्द कर दिया जाए।

    न्यायिक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति की ओर से तेल कंपनी द्वारा जारी किए गए किसी भी कारण बताओ नोटिस का कोई विधिक जवाब दाखिल नहीं किया गया। अंततः प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जुलाई के प्रथम सप्ताह में किचन फ्लेम नामक इस एलपीजी डीलरशिप के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद पीड़ित परिवार ने दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिनका तर्क है कि मूल आवंटनकर्ता की गलतियों और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण उन्हें बेवजह आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह पूरा मामला एक ऐसे समय में सामने आया है जब न्यायपालिका पहले से ही कुछ अन्य आंतरिक विवादों के कारण असहज स्थिति का सामना कर रही है, और इस नए घटनाक्रम ने न्यायिक शुचिता पर बहस को और तेज कर दिया है।

  • भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    नई दिल्ली । कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने आम यात्री का भेष धारण कर बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) की बसों में सफर किया और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं तथा कर्मचारियों के व्यवहार का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक चले इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने दस से अधिक बसों में यात्रा की और कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री ने देखा कि एक यात्री द्वारा निर्धारित बस स्टॉप पर उतरने का स्पष्ट संकेत देने के बावजूद संबंधित बस के चालक और परिचालक ने वाहन नहीं रोका। इस लापरवाही के कारण यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंत्री ने इसे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ड्राइवर और कंडक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उनका कहना था कि सार्वजनिक परिवहन में ऐसी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस निरीक्षण के दौरान स्वयं मंत्री को भी यात्रियों जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान उन्होंने किराया देने के लिए 100 रुपये का नोट दिया, लेकिन कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने की बात कहते हुए उन्हें बस से उतर जाने के लिए कहा। मंत्री ने इस घटना को यात्रियों के साथ होने वाले व्यवहार का वास्तविक उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी समस्याएं रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए गंभीर असुविधा का कारण बनती हैं और इनका समाधान किया जाना आवश्यक है।

    बसों के निरीक्षण के अलावा मंत्री ने शहर में ऑटो-रिक्शा सेवाओं का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने एक ऐसे मामले में हस्तक्षेप किया, जहां मीटर पर निर्धारित किराए से अधिक राशि यात्रियों से वसूली जा रही थी। उन्होंने मौके पर ही संबंधित चालक को नियमों का पालन करने और निर्धारित किराए से अधिक वसूली नहीं करने की हिदायत दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सभी साधनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    बायराथी सुरेश ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। यदि चालक, परिचालक या अन्य कर्मचारी अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि यात्रियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए और सेवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाया जाए।

    मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह के औचक निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर आम नागरिक की तरह सेवाओं का अनुभव करना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद कमियों की सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा, कर्मचारियों में अनुशासन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार लगातार निगरानी रखेगी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाती रहेगी।