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  • भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण अधिकारियों की बैठक, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु सहयोग के लिए साझा रणनीति पर बनेगी सहमति

    भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण अधिकारियों की बैठक, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु सहयोग के लिए साझा रणनीति पर बनेगी सहमति

    नई दिल्ली ।भारत सोमवार 17 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह यानी ईडब्ल्यूजी के वरिष्ठ अधिकारियों तथा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की बैठक की मेजबानी करेगा। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा होगी।

    बैठक की शुरुआत वरिष्ठ अधिकारियों के उद्घाटन सत्र से होगी। इसके बाद ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर संपर्क समूह की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करना और सहयोग को और मजबूत करना होगा।

    इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मंगलवार को ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे। दोनों बैठकों के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों पर सामूहिक दृष्टिकोण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

    भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए इस बार की व्यापक थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है। पर्यावरण क्षेत्र में इस थीम के तहत सदस्य देशों के बीच ऐसे क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा, जिनका संबंध जलवायु परिवर्तन से निपटने, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से है।

    बैठक में अंतिम दस्तावेज से जुड़े संभावित परिणामों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा पर्यावरण से संबंधित अन्य प्राथमिक विषयों पर विचार किया जाएगा। इन चर्चाओं के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह की स्थापना वर्ष 2015 में मॉस्को में हुई पहली ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर नियमित रूप से सहयोग करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना था। इसके माध्यम से देश अपने अनुभव साझा करने, प्रभावी कार्यप्रणालियों को एक-दूसरे तक पहुंचाने और संयुक्त पर्यावरणीय कार्रवाई को मजबूत करने पर काम करते रहे हैं।

    वहीं जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की स्थापना वर्ष 2024 में की गई थी। इसका उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर सहयोग के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना है। यह समूह जलवायु संबंधी प्राथमिकताओं पर संवाद और समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है।

    नई दिल्ली में होने वाली बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक नीति विमर्श के प्रमुख विषय बने हुए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से साझा नीतिगत अनुभवों और व्यावहारिक उपायों के आदान-प्रदान को गति मिलने की उम्मीद है। बैठकों में होने वाली चर्चा आगे की सामूहिक प्राथमिकताओं और सहयोग के क्षेत्रों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती

    पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती


    नई दिल्ली । देश की अग्रणी पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड ने पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने कंपनी का ईएसजी स्कोर बढ़ाकर 84.3 कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी सतत विकास, पारदर्शिता और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के मामले में उद्योग की अग्रणी कंपनियों में शामिल है।

    कंपनी का यह स्कोर पिछले मूल्यांकन के 81 अंकों की तुलना में 3.3 अंक अधिक है। इस सुधार के साथ अदाणी पोर्ट्स को केयरएज की ओर से ईएसजी के क्षेत्र में लीडरशिप श्रेणी में स्थान मिला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी पर्यावरणीय जोखिमों के बेहतर प्रबंधन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

    कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह नई रेटिंग वार्षिक समीक्षा के बाद जारी की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों और सुधारों को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक ईएसजी मानकों के अनुरूप नीतियों को मजबूत करने के प्रयासों को विशेष महत्व दिया गया।

    पर्यावरण के क्षेत्र में कंपनी ने कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा उपयोग, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरणीय मानकों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भी कंपनी के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है।

    सामाजिक जिम्मेदारी के मोर्चे पर भी अदाणी पोर्ट्स ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना, कार्यस्थल पर विविधता और समान वेतन को बढ़ावा देना तथा कर्मचारियों की भागीदारी मजबूत करना कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव कंपनी की सामाजिक रेटिंग पर भी देखने को मिला।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में बोर्ड स्तर पर ईएसजी की नियमित निगरानी, व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और सप्लाई चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय ने कंपनी की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया है। कंपनी का कहना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत सुधार की नीति ही उसकी दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

    कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी मानकों के मामले में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन के सर्वोत्तम मानकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    इस उपलब्धि के साथ कंपनी को हाल ही में एक और बड़ी सफलता मिली थी, जब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने उसकी लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया। एजेंसी ने कंपनी का स्टेबल आउटलुक भी बरकरार रखा। यह अपग्रेड मजबूत नकदी प्रवाह, स्वस्थ वित्तीय स्थिति और बड़े विस्तार कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया गया।

    इन लगातार मिल रही सकारात्मक रेटिंग्स ने अदाणी पोर्ट्स की वैश्विक विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कंपनी भविष्य में सतत विकास, निवेशकों के भरोसे और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली । देश में नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख प्रतियोगिता में युवाओं द्वारा संचालित छह स्टार्टअप्स को विजेता घोषित किया गया है। सस्टेनेबिलिटी, संसाधन संरक्षण और सामाजिक प्रभाव पर आधारित इन स्टार्टअप्स ने अपने अभिनव समाधानों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। चयनित उद्यमों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, मेंटरशिप और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद मिलेगी।

    यह प्रतियोगिता देश में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और सतत विकास से जुड़े समाधान विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी, टिकाऊ वस्त्र एवं फैशन, पर्यावरण-अनुकूल खाद्य प्रणालियां तथा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया। इन विषयों पर आधारित नवाचारों ने न केवल तकनीकी क्षमता दिखाई बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत कीं।

    प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिस्पर्धा मिली। देश के 28 राज्यों से 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 50 संभावनाशील स्टार्टअप्स का चयन एक विशेष क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए किया गया। तीन महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को व्यवसाय विकास, बाजार रणनीति, प्रभाव मूल्यांकन और निवेशकों से संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

    कार्यक्रम के तहत सभी चयनित स्टार्टअप्स को अपने विचार और व्यवसाय मॉडल विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला। मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद शीर्ष 20 स्टार्टअप्स को एक विशेष इमर्शन बूटकैंप के लिए चुना गया, जहां उन्हें उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों के साथ संवाद ने प्रतिभागियों को अपने मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता प्रदान की।

    अंतिम चरण में तीन स्टार्टअप्स को विजेता घोषित करते हुए उन्हें 3.5 लाख रुपये की सीड ग्रांट प्रदान की गई, जबकि तीन अन्य स्टार्टअप्स को उपविजेता के रूप में 2.2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त सभी विजेता टीमों को क्षमता विकास कार्यक्रमों और राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे अपने समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिभा और नवाचार की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और अवसरों का समान वितरण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों में निवेश और मार्गदर्शन अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों, दूरस्थ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमियों तक ऐसे अवसर सीमित रूप से पहुंच पाते हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए इस प्रकार की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि चयनित स्टार्टअप्स में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल चयनित उद्यमों में 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो देश के नवाचार परिदृश्य में बढ़ती महिला भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवा नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह संगम भारत को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

  • दराज में बंद पुराने स्मार्टफोन को मिलेगी नई पहचान, हजारों मोबाइल मिलकर बन सकते हैं भविष्य के मिनी डेटा सेंटर

    दराज में बंद पुराने स्मार्टफोन को मिलेगी नई पहचान, हजारों मोबाइल मिलकर बन सकते हैं भविष्य के मिनी डेटा सेंटर

    नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में तेजी से बदलते दौर के बीच अब पुराने स्मार्टफोन को लेकर एक नई सोच सामने आई है। आमतौर पर नया मोबाइल खरीदने के बाद पुराने फोन को लोग दराज में रख देते हैं या फिर उसे कबाड़ समझकर अलग कर देते हैं। लेकिन भविष्य में यही पुराने स्मार्टफोन आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। नई तकनीकी पहल के तहत पुराने मोबाइल उपकरणों को दोबारा उपयोग में लाकर उन्हें छोटे डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग नेटवर्क में बदला जा सकता है।

    इस अवधारणा का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करना और मौजूदा तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। दुनिया भर में हर वर्ष करोड़ों स्मार्टफोन उपयोग से बाहर हो जाते हैं। इनमें से अधिकांश उपकरण तकनीकी रूप से पूरी तरह बेकार नहीं होते, लेकिन नए मॉडलों के आने के बाद उनका उपयोग घट जाता है। ऐसे में इन उपकरणों की कंप्यूटिंग क्षमता को नए रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

    नई प्रणाली के तहत पुराने स्मार्टफोन के उन हिस्सों को हटाया जाता है जिनकी आवश्यकता नहीं रहती। इसमें स्क्रीन, कैमरा, बैटरी और बाहरी आवरण जैसे घटक शामिल हैं। इसके बाद केवल मदरबोर्ड को सुरक्षित रखा जाता है, जिसमें प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी इकाइयां मौजूद होती हैं। यही हिस्से आगे चलकर कंप्यूटिंग नेटवर्क की आधारशिला बनते हैं।

    इन मदरबोर्ड्स को एक साथ जोड़कर विशेष सॉफ्टवेयर आधारित प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जाता है। इसके लिए ऐसे सिस्टम का उपयोग किया जाता है जो एक साथ कई डिवाइसों को नियंत्रित और प्रबंधित कर सके। इस तरह अलग-अलग पुराने स्मार्टफोन मिलकर एक बड़े कंप्यूटिंग क्लस्टर का निर्माण करते हैं, जो जटिल डिजिटल कार्यों को संभालने में सक्षम हो सकता है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन को एक साथ जोड़ा जाए तो वे कुछ विशेष कार्यों में एक उन्नत सर्वर के बराबर प्रदर्शन कर सकते हैं। यही नहीं, यदि ऐसे हजारों उपकरणों को एक नेटवर्क में जोड़ा जाए तो वे क्लाउड सेवाओं, अनुसंधान परियोजनाओं, शैक्षणिक प्रयोगों और डेटा प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भविष्य में हजारों स्मार्टफोन को जोड़कर बड़े स्तर के कंप्यूटिंग क्लस्टर विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

    शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र के लिए यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को बड़े कंप्यूटिंग नेटवर्क पर काम करने के लिए महंगे सर्वर और अत्याधुनिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। यदि पुराने स्मार्टफोन आधारित क्लस्टर सफल होते हैं तो कम लागत में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उन्नत तकनीकी प्रयोगों का अवसर मिल सकेगा। इससे तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी।

    पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक कचरा वर्तमान समय की बड़ी वैश्विक चुनौतियों में शामिल है। पुराने उपकरणों का पुनः उपयोग नए हार्डवेयर निर्माण की आवश्यकता को कम कर सकता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है। यही कारण है कि इस तकनीक को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पुराना स्मार्टफोन केवल एक निष्क्रिय उपकरण नहीं रहेगा, बल्कि वह डेटा प्रोसेसिंग, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उपयोगी संसाधन के रूप में नई भूमिका निभा सकता है। यह पहल तकनीक और पर्यावरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

  • जलवायु संकट और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना सुरक्षित नहीं होगा खाद्य भविष्य

    जलवायु संकट और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना सुरक्षित नहीं होगा खाद्य भविष्य

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने ब्रिक्स देशों से छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास तेज करने का आह्वान किया है। भारत का मानना है कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए किसानों को आर्थिक, तकनीकी और संस्थागत रूप से सक्षम बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग वैश्विक कृषि व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिक्स देश अपनी सामूहिक क्षमता, अनुभव और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करें तो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक और दूरगामी बदलाव संभव हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र अनेक जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है और वैश्विक कृषि बाजारों में अस्थिरता किसानों के लिए नई कठिनाइयां पैदा कर रही है। इन परिस्थितियों में छोटे किसानों की सुरक्षा और समृद्धि को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है।

    कृषि मंत्री ने कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों में छोटे और सीमांत किसान खाद्य उत्पादन की रीढ़ हैं। यदि इन्हें आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता, बेहतर बाजार और नवाचार आधारित कृषि प्रणालियों तक पहुंच मिलती है तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक मजबूत और स्थिर बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों का सशक्तिकरण ही खाद्य सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

    भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के कृषि क्षेत्र ने लगातार उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4.5 प्रतिशत रही है, जो इस क्षेत्र की मजबूती और क्षमता को दर्शाती है। खाद्यान्न उत्पादन में निरंतर वृद्धि ने देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है।

    उन्होंने जानकारी दी कि भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। वहीं गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच गया है। बागवानी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है और इसका उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। इसके अलावा मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गया है, जो कृषि से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विकास का संकेत है।

    सम्मेलन के दौरान मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कृषि नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है और कृषि क्षेत्र में साझा प्रगति का समर्थन करता है।

    चौहान ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है, जिससे यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।

    उन्होंने विशेष रूप से इस तथ्य पर जोर दिया कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ऐसे में उनकी आय, उत्पादकता और संसाधनों तक पहुंच बढ़ाना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स देशों का साझा सहयोग कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बना सकता है।

  • भारत की पहली 100% एथेनॉल कार लॉन्च: मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल से स्वच्छ परिवहन को नई रफ्तार

    भारत की पहली 100% एथेनॉल कार लॉन्च: मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल से स्वच्छ परिवहन को नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल यात्री कार वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल लॉन्च कर दी है। यह वाहन E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर संचालित हो सकता है और 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने के लिए तैयार भारत का पहला यात्री वाहन माना जा रहा है।

    कंपनी की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। एथेनॉल आधारित ईंधन न केवल आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल को विशेष रूप से इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह विभिन्न स्तरों के एथेनॉल मिश्रण के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भविष्य में भारत के हरित परिवहन मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इससे देश में जैव ईंधन उद्योग को भी नई गति मिलने की संभावना है।

    लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार लगातार ऐसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही है जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करें। उन्होंने बताया कि सरकार की वैकल्पिक ईंधन रणनीति के तहत डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण को भी बढ़ावा देने की योजना है, जिससे पारंपरिक ईंधनों के उपयोग को धीरे-धीरे कम किया जा सके।

    गडकरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग से आग्रह किया कि वे पुराने वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप परिवर्तित करने की संभावनाओं पर काम करें। उनका मानना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और देश में चल रहे वाहन स्क्रैपेज कार्यक्रम को भी समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ ईंधन आधारित तकनीकों को अपनाने से वायु गुणवत्ता में सुधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि कंप्रेस्ड बायोगैस और हाइड्रोजन जैसे भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारतीय बाजार के लिए टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन समाधान विकसित करना है।

    कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारत में ग्रीन मोबिलिटी को लेकर उपभोक्ताओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में बिकने वाले हरित वाहनों में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रही, जो इस क्षेत्र में कंपनी की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बढ़ती उपलब्धता किसानों, एथेनॉल उत्पादकों और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

    वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल का लॉन्च भारत के ऊर्जा परिवर्तन अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल न केवल स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देती है, बल्कि देश को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास के लक्ष्य के करीब ले जाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

  • नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद

    नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । नया रेलवे पैसेंजर फीस स्ट्रक्चर शुक्रवार को लागू हो गया है। इसमें स्लीपर और फर्स्ट क्लास साधारण क्लास में उपनगरीय क्षेत्रों से बाहर की यात्राओं के लिए किराए में एक पैसा प्रति किलोमीटर का इजाफा किया गया है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य स्थिरता के साथ अफोर्डेबिलिटी को संतुलित करना है।

    रेलवे ने साधारण नॉन-एसी गैर-उपनगरीय सेवाओं के लिए सेकंड क्लास ऑर्डिनरी स्लीपर क्लास ऑर्डिनरी और फर्स्ट क्लास ऑर्डिनरी में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से बढ़ाया है। सेकंड क्लास ऑर्डिनरी का किराया 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए अपरिवर्तित रहेगा जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर की दूरी के लिए किराए में 5 रुपए की वृद्धि की गई है। 751 किलोमीटर से 1250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपए की वृद्धि की गई है। 1251 किलोमीटर से 1750 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपए की वृद्धि की गई है और 1751 किमी से 2250 किमी की दूरी के लिए 20 रुपए की वृद्धि की गई है।

    मंत्रालय ने कहा कि उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों पर जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूट शामिल हैं कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी क्लास जिसमें स्लीपर फर्स्ट क्लास एसी चेयर कार एसी 3-टियर एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं सभी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है।

    बयान में कहा गया है कि लंबी यात्राओं के लिए जैसे कि 500 ​​किलोमीटर की नॉन-एसी मेल या एक्सप्रेस यात्रा पर लगभग 10 रुपए अधिक लगेंगे।
    तेजस राजधानी राजधानी शताब्दी दुरंतो वंदे भारत हमसफर अमृत भारत तेजस महामना गतिमान अंत्योदय गरीब रथ जन शताब्दी युवा एक्सप्रेस नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य नॉन-सबअर्बन सेवाओं जहां लागू हो एस मेमू को छोड़कर सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा बेसिक किराए को अप्रूव्ड क्लास-वाइज बेसिक किराए में बढ़ोतरी के हिसाब से रिवाइज किया गया है।

    रिजर्वेशन फीस सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि जीएसटी की वैघता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और किराए को मौजूदा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ किया जाता रहेगा। संशोधित किराए सिर्फ 26 दिसंबर 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होंगे और पहले से बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि नए रेट दिखाने के लिए स्टेशन किराए की लिस्ट को अपडेट किया जाएगा।