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  • पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरुलिया जिले में आयोजित करम उत्सव के एक कार्यक्रम में कुर्मी समुदाय को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 2025 के कुर्मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले समुदाय से किए गए वादों को सरकार पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। आंदोलन के दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछले वर्ष हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुर्मी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दुर्गापुर में हुई एक बैठक के दौरान भी घोषणा कर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कुर्मी समुदाय के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया और समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने का काम किया। यह आरोप शुभेंदु अधिकारी की ओर से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कुर्मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करेगी।

    उन्होंने बताया कि समुदाय के विकास के लिए इस वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाने की बात भी कही गई है। सरकार की ओर से कुर्मी समुदाय के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।

    कुर्मी समुदाय की प्रमुख मांगों में अनुसूचित जनजाति का दर्जा शामिल है। समुदाय की ओर से लंबे समय से इस मांग को उठाया जाता रहा है। इसके अलावा कुर्माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी इससे जुड़े प्रमुख मुद्दों में रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी। उन्होंने सत्ता संभालने के बाद कुर्मी समुदाय के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।

    कुर्मी आंदोलन से जुड़े मामलों की वापसी की घोषणा के साथ सरकार ने समुदाय के विकास और भाषाई पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी अपना रुख सामने रखा है। हालांकि, मामलों को वापस लेने की घोषणा के बाद संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए इसे लागू किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में कुर्मी समुदाय से जुड़े मामलों की वापसी, विकास के लिए बजट प्रावधान और भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दिलाने की कोशिशों का उल्लेख किया गया।

    पुरुलिया में हुई घोषणा के बाद कुर्मी समुदाय से जुड़े पुराने आंदोलन और उसकी मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं। सरकार के फैसले का केंद्र बिंदु 2025 के आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना है। इसके साथ ही विकास और भाषा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं।

    कुर्मी समुदाय के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को आने वाले समय में बढ़ाने की बात भी कही गई है। अब मामलों की वापसी और अन्य घोषणाओं को लागू करने के लिए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन पर अन्नपूर्णा दिवस, बंगाल में महिलाओं के खातों में पहुंच रही 3000 रुपये की वित्तीय सहायता

    पीएम मोदी के जन्मदिन पर अन्नपूर्णा दिवस, बंगाल में महिलाओं के खातों में पहुंच रही 3000 रुपये की वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर अन्नपूर्णा दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3000 रुपये की वित्तीय सहायता भेजी जा रही है। इस महीने करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पश्चिम बंगाल में इस दिन को अन्नपूर्णा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि भेजी जा रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की माताओं और बहनों के प्रति अपने लगाव का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें हमेशा पश्चिम बंगाल की माताओं और बहनों से बहुत प्यार मिला है। उन्होंने विश्वकर्मा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए अन्नपूर्णा योजना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इस योजना के जरिए बंगाल की महिलाओं को नई ताकत मिली है। उन्होंने योजना का लाभ उठाने वाली प्रत्येक महिला को बधाई भी दी।

    प्रधानमंत्री ने बंगाल में हुए राजनीतिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस साल 4 मई को बंगाल ने बदलाव का एक नया रास्ता चुना और उन्हें पता है कि इस बदलाव में बंगाल की माताओं और बहनों ने सबसे अहम भूमिका निभाई।

    अन्नपूर्णा योजना के तहत सितंबर महीने में करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में 3000 रुपये की राशि मिलने की जानकारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से दी गई है। इस योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले कुछ महीनों के दौरान बढ़ी है।

    जानकारी के अनुसार जून महीने में अन्नपूर्णा योजना के तहत 28 लाख महिलाओं को राशि मिली थी। इसके बाद जुलाई में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1.19 करोड़ हो गई। सितंबर महीने में करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को सहायता पहुंचाने की बात कही गई है।

    इस भुगतान की खास बात यह बताई गई है कि राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इसके साथ ही किसी तरह के बिचौलिये या कट-मनी की व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही गई है। योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं तक वित्तीय सहायता सीधे पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर राज्य में अन्नपूर्णा दिवस मनाए जाने के साथ महिलाओं के खातों में सहायता राशि भेजी जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को देशभर से जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दी जा रही हैं।

    अन्नपूर्णा योजना से जुड़ी इस पहल के तहत सितंबर महीने की राशि बड़ी संख्या में महिलाओं तक पहुंचाई जा रही है। 1.58 करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा जून और जुलाई की तुलना में अधिक है। इस तरह 17 सितंबर का दिन योजना के लाभार्थियों के लिए वित्तीय सहायता मिलने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा दिवस के रूप में मनाए जा रहे इस दिन के दौरान योजना के लाभार्थियों को 3000 रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया जारी है। योजना के तहत लाभ पाने वाली महिलाओं को इस वित्तीय सहायता का लाभ मिल रहा है।

  • पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील, नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा

    पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील, नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अल्पसंख्यक मतदाताओं से विकास के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के साथ आने की अपील की है। उन्होंने दोनों सीटों के अल्पसंख्यक मतदाताओं से कहा कि 6 अक्टूबर को होने वाला चुनाव उनके लिए एक तरह की परीक्षा है और उन्हें तय करना है कि वे सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मतदाताओं को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि विकास के मुद्दे पर फैसला करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार राज्य में विकास के काम को आगे बढ़ाएगी। नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की अच्छी संख्या है, इसलिए अधिकारी की अपील चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

    अधिकारी ने कहा कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों के अल्पसंख्यक मतदाताओं के पास इस उपचुनाव में अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का अवसर है। उनके अनुसार, यदि मतदाता सरकार के साथ विकास के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं तो उन्हें इस चुनाव में अपना फैसला बताना होगा। उन्होंने 6 अक्टूबर के मतदान को सरकार के साथ समर्थन और सहयोग की परीक्षा के रूप में पेश किया।

    नंदीग्राम सीट से बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह पार्टी नेता चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी और निजी सहायक रह चुके थे। चंद्रनाथ रथ की मई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हसीरानी रथ ने मंगलवार को हल्दिया में अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।

    उपचुनाव के लिए नंदीग्राम और रेजीनगर में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार उतारे हैं। नंदीग्राम में बीजेपी ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जबकि रेजीनगर से पार्टी ने साखराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

    शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में बीजेपी की जीत को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार वह करीब 10 हजार वोटों के अंतर से जीते थे, जबकि इस बार पार्टी को 50 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिल सकती है। उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम को लेकर जनता के समर्थन का हवाला दिया।

    नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ ने भी चुनाव को लेकर जीत का भरोसा जताया है। वहीं, उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बना हुआ है। इस मामले की जांच पहले राज्य पुलिस और विशेष जांच दल ने की थी, जिसके बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई।

    नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव ऐसे समय हो रहे हैं, जब दोनों सीटें खाली हुई हैं। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के दूसरी सीट बरकरार रखने के कारण खाली हुई। अब दोनों क्षेत्रों में उपचुनाव के जरिए नए विधायक का चुनाव किया जाएगा।

    अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील के बीच चुनावी मुकाबले में विकास, सरकार के कामकाज और अलग-अलग दलों के उम्मीदवार प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। वहीं, नंदीग्राम में बीजेपी की संभावित जीत के अंतर को लेकर अधिकारी द्वारा किया गया दावा चुनावी नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    नई दिल्ली । अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के नेता मिथुन चक्रवर्ती के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई खबर के बाद उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में चिंता का माहौल बन गया था। इसी बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल पहुंचकर मिथुन चक्रवर्ती से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। मुलाकात के बाद सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती का पिछली रात एक छोटा ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने खुद उन्हें और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सामिक भट्टाचार्य को ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, मिथुन चक्रवर्ती नहीं चाहते थे कि उनके स्वास्थ्य से जुड़ी यह जानकारी सार्वजनिक की जाए।

    सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक मिथुन चक्रवर्ती अब पूरी तरह ठीक हैं और उनकी हालत सामान्य है। उन्होंने अभिनेता के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। मिथुन चक्रवर्ती के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब सामने आई जानकारी के बाद उन्हें राहत मिली है। बताया गया है कि ऑपरेशन छोटा था और इसके बाद उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। अस्पताल में डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने हिंदी और बंगाली फिल्मों में लंबे समय तक अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। उन्होंने वर्ष 1976 में मशहूर निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। पहली ही फिल्म में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने बंगाली और हिंदी सिनेमा में लगातार काम किया और अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    वर्ष 1978 में आई बंगाली फिल्म ‘नदी थेके सागरे’ से उन्हें लोकप्रियता मिली। इसके बाद ‘सुरक्षा’, ‘तराना’, ‘हम पांच’ और ‘हम से बढ़कर कौन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया। हालांकि वर्ष 1982 में रिलीज हुई ‘डिस्को डांसर’ उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। फिल्म की सफलता ने मिथुन को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय बना दिया। उनके डांस और अभिनय की अलग शैली ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

    इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने ‘शौकीन’, ‘अशांति’, ‘कसम पैदा करने वाले की’, ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘गुलामी’, ‘स्वर्ग से सुंदर’, ‘डांस डांस’, ‘प्यार का मंदिर’, ‘स्वामी विवेकानंद’, ‘गुरु’, ‘गोलमाल 3’, ‘हाउसफुल 2’, ‘ओएमजी-ओह माय गॉड!’, ‘किक’, ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ समेत कई फिल्मों में काम किया। अपने लंबे फिल्मी करियर के दौरान उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। फिलहाल उनके छोटे ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य सामान्य बताए जाने से प्रशंसकों को राहत मिली है और सभी उनके जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।