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  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर 23 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इस घटना के बाद से ही स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

    बताया गया है कि झड़प के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही थी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर पर हुई घटना और संजय कुमार को लगी चोट का जिक्र करता नजर आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग फिर तेज हो गई।

    शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की और मामले में देरी पर सवाल उठाए।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को कार्रवाई के लिए 72 घंटे का भरोसा दिया गया था। हालांकि इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

    स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने भी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस पहले मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। 3 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई में देरी के पीछे किसी राजनीतिक दबाव से भी इनकार किया था।

    अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके आधार पर आरोपों की स्थिति और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

    घटना के बाद से प्रदर्शन से जुड़े पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गिरफ्तारी के साथ अब यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।

  • स्वतंत्र माइक्रोफिन के 3000 करोड़ रुपये IPO से पहले सामने आए जोखिम, असुरक्षित कर्ज और नकदी बहिर्वाह ने बढ़ाई चिंता

    स्वतंत्र माइक्रोफिन के 3000 करोड़ रुपये IPO से पहले सामने आए जोखिम, असुरक्षित कर्ज और नकदी बहिर्वाह ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली ।अनन्या बिरला और एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रमोटेड स्वतंत्र माइक्रोफिन लिमिटेड ने 3000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल किया है। कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कारोबार और संचालन से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया गया है, जिन पर संभावित निवेशकों की नजर रह सकती है।

    कंपनी के सामने सबसे प्रमुख जोखिमों में असुरक्षित माइक्रोफाइनेंस ऋणों पर अत्यधिक निर्भरता शामिल है। 31 मार्च 2026 तक स्वतंत्र माइक्रोफिन की कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों में 88.56 प्रतिशत हिस्सा असुरक्षित माइक्रोफाइनेंस ऋणों का था। ऐसे ऋणों में किसी प्रकार की आर्थिक कमजोरी आने पर वसूली से जुड़ी चुनौती बढ़ सकती है।

    स्वतंत्र माइक्रोफिन मुख्य रूप से ऐसे परिवारों को ऋण उपलब्ध कराती है, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक है। कंपनी के अनुसार, इस आय वर्ग के ग्राहक रोजगार में बदलाव, आय में कमी और आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इससे ऋण भुगतान और वसूली पर असर पड़ने का जोखिम बना रहता है।

    कंपनी के कारोबार में नकद संग्रह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देने के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल संग्रह का 79.22 प्रतिशत हिस्सा नकद भुगतान से आया। कंपनी ने स्वयं माना है कि नकद लेनदेन में धोखाधड़ी, चोरी, नकदी प्रबंधन की गलतियों और धन के दुरुपयोग जैसे जोखिम हो सकते हैं।

    नकदी प्रवाह से जुड़ा आंकड़ा भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन गतिविधियों में इस्तेमाल हुई शुद्ध नकदी 5392.6 करोड़ रुपये रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 427 करोड़ रुपये थी। इस तरह परिचालन नकदी बहिर्वाह में करीब 1160 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज हुई।

    कंपनी ने इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण ऋण वितरण में तेजी और लोन बुक के विस्तार को बताया है। साथ ही, भविष्य में कारोबार और ऋण पोर्टफोलियो बढ़ने के साथ परिचालन स्तर पर नकारात्मक नकदी प्रवाह जारी रहने की संभावना से भी दस्तावेज में अवगत कराया गया है।

    भौगोलिक एकाग्रता भी कंपनी के लिए जोखिम का विषय है। कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे पांच राज्यों में केंद्रित है। इन क्षेत्रों में आर्थिक, राजनीतिक या प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रतिकूल बदलाव आने पर कंपनी के कारोबार और ऋण वसूली पर असर पड़ सकता है।

    कानूनी मोर्चे पर भी कंपनी से जुड़ी चुनौती सामने आई है। रत्नाफिन कैपिटल और रत्नाफिन एंटरप्राइज ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रेडमार्क और लोगो से जुड़े कथित उल्लंघन को लेकर स्वतंत्र माइक्रोफिन के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं ने रोक लगाने के साथ दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े जोखिम भी मसौदा दस्तावेज में दर्ज हैं। कंपनी ने बताया है कि उसके कॉरपोरेट प्रमोटर एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास माइक्रोफाइनेंस कारोबार का पर्याप्त अनुभव नहीं है। यह पहलू निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में ऋण जोखिम, वसूली और संचालन की निगरानी अहम होती है।

    कर्मचारियों के पलायन की दर भी ऊंची बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में पूर्णकालिक कर्मचारियों की एट्रिशन दर 39.22 प्रतिशत रही, हालांकि यह पिछले वित्त वर्ष के 41.47 प्रतिशत से कम है। लगातार ऊंची एट्रिशन दर कंपनी के श्रम-प्रधान कारोबारी मॉडल के सामने मानव संसाधन से जुड़ी चुनौती को दर्शाती है।

    प्रस्तावित आईपीओ में 1500 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि मौजूदा शेयरधारक 1500 करोड़ रुपये तक के शेयर ऑफर फॉर सेल के माध्यम से पेश करेंगे। कंपनी 300 करोड़ रुपये तक का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट भी कर सकती है। यदि यह प्लेसमेंट होता है तो नए शेयरों के निर्गम का आकार उसी अनुपात में घटाया जा सकता है।