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  • दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    नई दिल्ली ।दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। इस मौके पर घरों में मेहमानों के स्वागत के लिए तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं। आमतौर पर लोग बाजार से मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन इस बार त्योहार पर कुछ अलग बनाने की योजना है तो घर पर पारंपरिक सोहन हलवा तैयार कर सकते हैं। देसी घी, चीनी, गेहूं के आटे और ढेर सारे मेवों से बनने वाली यह मिठाई स्वाद के साथ त्योहार की मिठास भी बढ़ा सकती है।

    सोहन हलवा उत्तर भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। इसकी खास पहचान गाढ़ी बनावट, हल्के खिंचाव और घी की खुशबू से होती है। इसमें काजू, बादाम और पिस्ता जैसे मेवे मिलाने से इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है। इसे तैयार करने में थोड़ा समय और लगातार मेहनत की जरूरत होती है, लेकिन सही तरीके से बनाने पर हलवा अच्छी तरह जमता है और इसे मनचाहे आकार में काटकर परोसा जा सकता है।

    इसे बनाने के लिए 4 बड़े चम्मच अंकुरित गेहूं का आटा, 4 बड़े चम्मच मैदा, एक कप चीनी, एक कप देसी घी और एक कप पानी की जरूरत होगी। इसके अलावा आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 2 बड़े चम्मच बारीक कटे काजू, 2 बड़े चम्मच बादाम और एक बड़ा चम्मच पिस्ता लेना होगा।

    हलवा बनाने की शुरुआत सांचे तैयार करने से करें। इसके लिए छोटी स्टील की कटोरियों या किसी चौड़े सांचे में थोड़ा देसी घी लगाकर चिकना कर लें। अब इनके तले में कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता फैला दें। इससे हलवा जमने के बाद ऊपर की तरफ मेवे दिखाई देंगे और मिठाई आकर्षक लगेगी।

    इसके बाद एक बर्तन में अंकुरित गेहूं का आटा और मैदा डालें। इसमें धीरे-धीरे पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंटें। ध्यान रखें कि घोल में किसी तरह की गांठ न रहे। अब इसे कुछ देर के लिए अलग रख दें।

    अगले चरण में भारी तले वाली कड़ाही में चीनी और पानी डालकर गर्म करें। चीनी पूरी तरह घुल जाने के बाद तैयार आटे का घोल धीरे-धीरे चाशनी में मिलाएं। इस दौरान मिश्रण को लगातार चलाते रहना जरूरी है, ताकि वह कड़ाही के तले में चिपके नहीं और उसमें गांठें न बनें।

    जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके देसी घी डालें। हर बार घी डालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह चलाएं। इसे मध्यम से धीमी आंच पर पकाते रहें। सोहन हलवे की सही बनावट पाने के लिए इस प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। लगातार चलाने से मिश्रण समान रूप से पकता है।

    जब हलवा गाढ़ा होकर कड़ाही के किनारों को छोड़ने लगे और उसमें चमक दिखाई देने लगे, तब इलायची पाउडर मिला दें। इसके बाद गैस बंद कर दें। तैयार मिश्रण को तुरंत घी लगे सांचों में डालें और ऊपर से बचे हुए मेवे सजा दें।

    हलवे को कमरे के तापमान पर करीब 3 से 4 घंटे तक जमने दें। अच्छी तरह सेट होने के बाद इसे सांचे से निकालकर मनचाहे आकार में काट लें। इस तरह घर पर तैयार सोहन हलवा मेहमानों को परोसने के लिए तैयार हो जाएगा।

    हलवा बनाते समय कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है। हमेशा भारी तले वाली कड़ाही का इस्तेमाल करें और आटे के घोल को अच्छी तरह फेंटें। घी एक साथ डालने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाएं। पकाते समय मिश्रण लगातार चलाते रहें। तैयार हलवे को सांचे में डालने में देरी न करें, क्योंकि ठंडा होने पर यह जल्दी जमने लगता है। पूरी तरह ठंडा और सेट होने के बाद ही इसके टुकड़े काटें।

    तैयार सोहन हलवे को एयरटाइट डिब्बे में रखकर सुरक्षित रखा जा सकता है। दिवाली से पहले इसे तैयार करने से त्योहार के दिन मिठाई बनाने की भागदौड़ कम होगी और घर आए मेहमानों को पारंपरिक स्वाद वाली मिठाई परोसने का मौका मिलेगा।

  • त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    नई दिल्ली । गाजियाबाद में त्योहारों के मौसम को देखते हुए मिठाई और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से जिले के सभी मिठाई विक्रेताओं के लिए मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना अनिवार्य होगा। नए प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करने से पहले दुकानदारों को इसकी जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

    इस अभियान के लिए जिले में 18 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में 18 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं। व्यापारियों को नए नियम के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना क्यों जरूरी है और नए प्रावधान का पालन किस तरह किया जाना है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग का जोर फिलहाल व्यापारियों को नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने पर है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले दुकानदारों को नए प्रावधान की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी व्यवस्था उसके अनुसार तैयार करने का समय मिल जाएगा। विभाग का उद्देश्य जागरूकता के जरिए नियमों के पालन को बढ़ावा देना है, ताकि बाद में नियमों के उल्लंघन की स्थिति कम से कम हो।

    विभाग के मुताबिक त्योहारों को लेकर विशेष अभियान 15 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले ही गठित 18 टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों को तैयार करने की प्रक्रिया और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी जा रही है।

    जांच के दौरान खाद्य सामग्री को तैयार करने से लेकर उसके भंडारण तक निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग की टीमें यह जांच कर रही हैं कि खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है या नहीं। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।

    निरीक्षण के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी जा रही है। विभाग की ओर से व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले वे अपनी व्यवस्था में जरूरी बदलाव कर सकें।

    सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश मिश्रा के मुताबिक फिलहाल खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और 18 टीमों के माध्यम से नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उनके अनुसार शासन से आदेश मिलने के बाद त्योहारों को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और नियमों के पालन पर विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।

    15 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘Use By Date’ के प्रावधान को लेकर विभाग ने व्यापारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्योहारों से पहले चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान के साथ नियमित निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की कार्रवाई भी जारी है। विभाग का प्रयास है कि मिठाई विक्रेता नए नियम को समझें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका पालन सुनिश्चित करें।

  • ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक

    ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक



    ग्वालियर। होली की दूज पर ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का विशेष पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जेल में बंद अपने भाईयों से मिलने के लिए एक हजार से अधिक बहनें जेल पहुंचीं। जेल प्रशासन ने इस आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जेल के बाहर सुबह से ही काउंटर लगाकर बहनों का पूरी तरह से सत्यापन (वैरिफिकेशन) किया गया। केवल सत्यापित बहनों को ही जेल के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई।

    जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की।जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की। हालांकि जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि बाहर से कोई भी पूजन सामग्री लाई नहीं जा सकती। इसके चलते बहनों ने जेल परिसर में ही शुल्क देकर लड्डू और अन्य पूजन सामग्री खरीदी। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की पूरी मॉनीटरिंग की।

    भाईदूज का यह पर्व उन कैदियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो संगीन मामलों में जेल में बंद हैं और लंबे समय से अपने परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस अवसर ने जेल में बंद भाइयों के चेहरे पर मुस्कान और खुशी की लहर दौड़ा दी। जेल अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन से कैदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। यह न केवल भाई-बहन के रिश्तों को सशक्त बनाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

    जेल के अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सुबह से ही विशेष काउंटर लगाए गए थे। बहनों का नाम, पहचान पत्र और संबंध की पुष्टि करने के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अनुचित घटना न हो और कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने पूरे आयोजन पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार बहनों और कैदियों की मदद भी की।

    कार्यक्रम में कई बहनों ने बताया कि यह उनके भाईयों से मिलने का एक दुर्लभ अवसर होता है। लॉकडाउन और अन्य सुरक्षा कारणों से पिछले साल या महीनों में कई बार मिलने का अवसर नहीं मिला। इसलिए आज का दिन उनके लिए बेहद खास और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। बहनों ने अपने भाईयों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की कामना करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक तिलक किया।

    जेल प्रशासन ने बताया कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाली बहनों की संख्या पहली बार इतनी बड़ी रही है। इससे पहले के वर्षों में इस कार्यक्रम में कुछ सौ बहनें ही शामिल होती थीं। इस बार बड़ी संख्या में बहनों की भागीदारी ने भाईदूज के पर्व की गरिमा और उल्लास को और बढ़ा दिया।

    भाईदूज पर जेल में आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम से यह संदेश जाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का महत्व और पारंपरिक रीति-रिवाजों की गरिमा कायम रहनी चाहिए। जेल प्रशासन ने भी इस अवसर को शांति और अनुशासन के साथ सफल बनाने का प्रयास किया।

    इस आयोजन ने साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन का स्नेह और त्यौहारों का महत्व कभी कम नहीं होता। जेल में बंद कैदियों के लिए यह एक सुखद और यादगार अनुभव बन गया, जिसने उनके और उनके परिवार के बीच भावनात्मक दूरी को कम किया।