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  • नवरात्रि में ऑनलाइन फूड डिलीवरी की धूम, नोएडा में 11 हजार की व्रत थाली और मुंबई में रसगुल्लों का बड़ा ऑर्डर

    नवरात्रि में ऑनलाइन फूड डिलीवरी की धूम, नोएडा में 11 हजार की व्रत थाली और मुंबई में रसगुल्लों का बड़ा ऑर्डर


    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान देशभर में व्रत के व्यंजनों और पारंपरिक मिठाइयों की ऑनलाइन मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। दुर्गा अष्टमी, महा नवमी और दशहरे के आसपास त्योहार का उत्साह खाने-पीने के ऑर्डर में भी दिखाई दिया। इस दौरान लोगों ने साबूदाने से बने व्यंजनों, विशेष व्रत थालियों और मिठाइयों को प्राथमिकता दी। नवरात्रि के दौरान कुछ ग्राहकों के बड़े ऑर्डर भी चर्चा में रहे। नोएडा में एक ग्राहक ने 13 व्रत थालियों के लिए 11,072 रुपये खर्च किए, जबकि मुंबई में एक ग्राहक ने मिठाइयों और कॉफी रसगुल्ला तिरामिसु के लिए 9,870 रुपये का ऑर्डर दिया।

    17 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच व्रत के व्यंजनों में साबूदाने से बनी चीजें सबसे ज्यादा पसंद की गईं। इस अवधि में हर घंटे औसतन 1,794 साबूदाने के व्यंजन ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इसके बाद नवरात्रि व्रत थालियों, सिंघाड़े से बनी चीजों और कुट्टू तथा राजगिरा से तैयार विशेष व्यंजनों की मांग रही। समा के चावल और मखाने से बने पकवान भी लोगों के पसंदीदा विकल्पों में शामिल रहे।

    नवरात्रि के दौरान केवल अलग-अलग व्यंजनों ही नहीं, बल्कि पूरे भोजन के कॉम्बो भी ग्राहकों को आकर्षित करते रहे। विशेष व्रत थालियों में सिंघाड़े की पूरी वाली थाली की मांग सबसे आगे रही। इसके अलावा राजगिरा की पूरी और आलू-हींग से तैयार तीन कोर्स वाली थाली भी खूब पसंद की गई। इस तरह की थालियों के ऑर्डर दिल्ली, बेंगलुरु, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों से अधिक आए।

    शहरों के हिसाब से देखें तो मुंबई और बेंगलुरु में साबूदाना खिचड़ी की मांग सबसे ज्यादा रही। पुणे और जयपुर में भी इस व्यंजन को पसंद किया गया। व्रत के दौरान ऐसे भोजन की मांग बढ़ी, जिसे पारंपरिक स्वाद के साथ एक संपूर्ण भोजन के रूप में मंगाया जा सके। व्रत थालियों में अलग-अलग पकवानों के संयोजन ने ग्राहकों को कई विकल्प दिए।

    मिठाइयों की बात करें तो नवरात्रि के दौरान रसगुल्ला सबसे लोकप्रिय विकल्प बनकर सामने आया। 17 से 20 अक्टूबर के बीच देशभर में इसके हर घंटे औसतन 495 ऑर्डर मिले। दिल्ली, मुंबई और गुरुग्राम में रसगुल्ले की मांग विशेष रूप से अधिक रही। कुल मिलाकर पारंपरिक मिठाइयों के ऑर्डर में पिछले वर्ष की तुलना में 36.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    रसगुल्ले के अलावा गुलाब जामुन, काजू कतली, जलेबी और रसमलाई भी त्योहार के दौरान खूब मंगाई गईं। बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में मिठाइयों की मांग अधिक रही। वहीं पटना, देहरादून, जोधपुर, गया और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में भी मिठाइयों के ऑर्डर में अच्छी गतिविधि देखने को मिली। छोटे शहरों में अगरतला, शिलांग, पलवल और भटिंडा में भी मिठाइयों की मांग उल्लेखनीय रही।

    इस अवधि के सबसे बड़े मिठाई ऑर्डरों में मुंबई के ग्राहक का 9,870 रुपये का ऑर्डर शामिल रहा। इसमें कई तरह की मिठाइयों के साथ कॉफी रसगुल्ला तिरामिसु भी मंगाया गया। यह मिठाई पारंपरिक भारतीय रसगुल्ले और इटली की प्रसिद्ध मिठाई तिरामिसु का फ्यूजन रूप है। त्योहार के दौरान इस तरह के नए स्वाद वाले विकल्प भी ग्राहकों के भोजन और मिठाई के चुनाव का हिस्सा बने।

    नवरात्रि के इन आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहार के दौरान ग्राहकों की पसंद पारंपरिक व्रत के भोजन और मिठाइयों के इर्द-गिर्द रही। साबूदाने के व्यंजनों और व्रत थालियों की मांग के साथ रसगुल्ले सहित पारंपरिक मिठाइयों के ऑर्डर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा

    कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को बेंगलुरु में स्विगी इंस्टामार्ट के एक डार्क स्टोर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक्सपायर हो चुके खाने-पीने के सामान और दवाओं के भंडारण तथा बिक्री के खिलाफ राज्य में तेज किए गए अभियान का हिस्सा थी। बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग तथा औषधि सुरक्षा विभाग की ओर से यह अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, डार्क स्टोर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    इस कार्रवाई के बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने लोगों से सामान खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजें और दवाइयां खरीदने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए। ग्राहकों को किसी उत्पाद में संदिग्ध स्थिति नजर आने पर उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देने की भी अपील की गई है।

    बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में पूरे कर्नाटक में करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त की गई हैं। जब्त किए गए सामान में एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट और दवाइयां भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ ऐसे उत्पाद कथित तौर पर बिक्री के लिए स्टोर किए गए थे, जिन पर नए लेबल लगाए गए थे।

    खादर ने ग्राहकों से खाना, दवाइयां और अन्य उत्पाद खरीदते समय उनकी जानकारी अच्छी तरह जांचने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखना जरूरी है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को किसी उत्पाद में कोई छोटा सुराग या संदिग्ध बात दिखाई देती है तो उसकी रिपोर्ट करने की अपील की गई है।

    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्राहकों को उत्पादों की जांच करने में सहायता देने के लिए क्यूआर कोड और बारकोड की व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने सोशल एक्टिविस्ट से भी अपील की कि सार्वजनिक स्थानों पर इस व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि ग्राहक इसका इस्तेमाल कर सकें और उत्पादों के संबंध में अधिक जागरूक हो सकें।

    खादर के मुताबिक, ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक एक्सपायर हो चुके तथा गलत लेबल वाले खाद्य उत्पाद और दवाइयां पहुंचने से रोकने के लिए लगातार निगरानी जरूरी है। उन्होंने इस प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्पादों की जांच के साथ संदिग्ध सामान की पहचान और उसे जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने होसकोटे में हुई जांच का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को वहां डार्क स्टोर्स पर करीब 45 लाख रुपये मूल्य की दवाइयां मिलीं। उनके अनुसार, कुछ उत्पादों के लेबल बदले गए थे। इन उत्पादों को अधिकारियों ने अपनी कस्टडी में ले लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

    राज्य में चल रही कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्राहकों को भी सतर्क रहने का संदेश दिया गया है। अधिकारियों की जांच में सामने आए एक्सपायर और गलत लेबल वाले उत्पादों को लेकर लोगों से खरीदारी के समय जानकारी जांचने और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना देने की अपील की गई है। कर्नाटक सरकार की ओर से क्यूआर कोड और बारकोड के जरिए उत्पादों की जांच को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

  • स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर

    स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर


    नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।
    हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।
    रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।
    कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
    स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।
    स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
    कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
  • राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां

    राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां


    नई दिल्ली।क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार की आपत्ति के बाद स्विगी और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिलीवरी की होड़ में सड़क सुरक्षा और गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

    सरकारी स्तर पर यह मुद्दा तब गंभीर रूप से सामने आया जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में बेहद कम समय में सामान पहुंचाने को प्रमुखता दी जाने लगी। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा दबाव बनाते हैं। नतीजतन कई बार राइडर्स को समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए तेज ड्राइविंग करनी पड़ती है जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।मंगलवार को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में क्विक कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा काम के घंटे भुगतान प्रणाली और डिलीवरी के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ऐसी समय-सीमाएं हटाएं जो राइडर्स को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

    इससे पहले क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा लिया था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी टैगलाइन और विज्ञापन रणनीति में बदलाव किया है। कंपनियां अब डिलीवरी की गति के बजाय उत्पादों की उपलब्धता सेवा की सुविधा और ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों पर जोर दे रही हैं।क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि क्या बेहद कम समय में डिलीवरी वास्तव में सुरक्षित और टिकाऊ है। सोशल मीडिया श्रमिक संगठनों और गिग वर्कर्स की ओर से बार-बार यह चिंता जताई गई कि कम समय की प्रतिस्पर्धा में राइडर्स को अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़तालों ने भी इस मुद्दे को और मुखर बना दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से समय-सीमा हटाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अपनी तेज डिलीवरी क्षमता खो देंगी। डार्क स्टोर्स माइक्रो-वेयरहाउस और स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क के चलते क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले की तरह तेजी से ऑर्डर पूरा करती रहेंगी। फर्क बस इतना होगा कि अब मार्केटिंग में सबसे तेज होने के बजाय सबसे भरोसेमंद सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अहम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं और उनकी सुरक्षा काम की शर्तों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग हो रही थी। केंद्र सरकार का यह हस्तक्षेप उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • 10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: Blinkit और अन्य कंपनियों को सरकार का आदेश

    10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: Blinkit और अन्य कंपनियों को सरकार का आदेश


    नई दिल्ली। देशभर के गिग वर्कर्स की सुरक्षा और उनके काम के दबाव को देखते हुए अब 10 मिनट में डिलीवरी का दावा समाप्त कर दिया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने अपने सभी ब्रांडों से यह दावा हटा लिया है। इसके साथ ही मंत्री ने अन्य बड़ी कंपनियों जैसे Zepto, Swiggy और Zomato के प्रतिनिधियों से भी स्पष्ट कहा कि वे अपने ब्रांड प्रचार में तय समय सीमा वाली डिलीवरी का उल्लेख न करें और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

    देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल और लगातार उठ रही सुरक्षा चिंताओं के बाद यह कदम उठाया गया है।

    अब आम ग्राहक 10 मिनट के भीतर डिलीवरी की सुविधा की उम्मीद नहीं कर सकते। हालांकि इससे डिलीवरी की गति में बदलाव हो सकता है, लेकिन सरकार का मानना है कि यह कर्मचारियों के हित में सबसे जरूरी निर्णय है।

    स्रोतों के अनुसार Blinkit जल्द ही अपने सभी विज्ञापन और प्रचार सामग्री से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा देगी। इसके बाद अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह का ऐलान आने की संभावना है। यह कदम डिलीवरी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव कम करने और उनके काम करने के सुरक्षित माहौल को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
     मंत्री ने कहा कि कम समय में डिलीवरी का दबाव कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है।

    गिग वर्कर्स के संगठन लंबे समय से इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि तय समय सीमा के कारण कई बार कर्मचारी स्वास्थ्य और सुरक्षा की अनदेखी करने को मजबूर होते हैं। इस निर्णय से यह सुनिश्चित किया गया है कि गिग वर्कर्स की सुरक्षा प्राथमिकता में रहे।

    क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने बयान जारी कर कहा कि यह कदम सरकार की सलाह और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    कंपनी जल्द ही अपने सभी प्रचार और विज्ञापन से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा रही है। इससे पूरे देश में गिग वर्कर्स की सुरक्षा और कार्यस्थल की स्थिति बेहतर होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम गिग वर्कर्स के अधिकारों की दिशा में बड़ा सुधार है। अब कंपनियों को ग्राहकों की सुविधा के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा का संतुलन बनाना होगा। यह संदेश भी जाता है कि व्यवसायिक सफलता केवल तेज डिलीवरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कर्मचारियों की भलाई और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम गिग वर्कर्स के हित में एक महत्वपूर्ण सुधार है। अब 10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म हो गया है और कंपनियों को कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मिल गए हैं। इससे यह स्पष्ट संदेश भी जाता है कि तेजी से सेवा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा और उनका भला प्राथमिकता में होना चाहिए।

  • Zomato-Swiggy ने किया बड़ा ऐलान… गिग वर्कर्स को मिलेगा ज्यादा पेमेंट, जानिए कितना

    Zomato-Swiggy ने किया बड़ा ऐलान… गिग वर्कर्स को मिलेगा ज्यादा पेमेंट, जानिए कितना


    नई दिल्ली।नए साल 2026 की पूर्व संख्‍या यानी बुधवार 31 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन फूड और ग्रॉसरी ऑर्डर पहुंचाने के काम करने वाले गिग और डिलीवरी वर्कर्स ने देशभर में हड़ताल का आह्वान क्या किया इस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के होश उड़ गए. रिपोर्ट के मुताबिक New Year Eve पर डिलीवरी में रुकावट आने की आशंका के बीच ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों जोमैटो और स्विगी ने आनन-फानन में बड़ा ऐलान कर दिया. जी हां दोनों ही कंपनियों ने अब गिग वर्कस को ज्यादा पेमेंट देने का ऑफर दिया है.रिपोर्ट की मानें तो ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म ज़ोमैटो और स्विगी अपने डिलीवरी पार्टनर्स को अब ज्यादा इंसेंटिव देंगे. ये त्योहारों के समय में उनका एक स्टैंडर्ड तरीका है ताकि गिग वर्कर्स यूनियनों की हड़ताल के आह्वान के बीच न्यू ईयर ईव पर ऑर्डर डिीवरी सर्विस में कम से कम रुकावट आए.

    कंपनियों के सताने लगी ये चिंता 

    गौरतलब है कि तेलंगाना गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स यूनियन TGPWU और इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स IFAT ने दावा किया था कि लाखों वर्कर्स बेहतर पेमेंट और काम करने के बेहतर हालात की मांग को लेकर देश भर में हड़ताल में शामिल होने वाले हैं. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस हड़ताल से New Year Eve पर ज़ोमैटो स्विगी ब्लिंकिट इंस्टामार्ट और ज़ेप्टो जैसी फ़ूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स फर्मों के कामकाज पर असर पड़ सकता है. ये कंपनियों के लिए इसलिए भी बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इस मौक पर डिमांड सबसे ज्यादा हाई लेवल पर होती है.
    Zomato ने दिया ये ऑफर
    ज़ोमैटो ने न्यू ईयर ईव पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच पीक आवर्स में डिलीवरी पार्टनर्स को हर ऑर्डर पर 120 से 150 रुपये का पेमेंट देने का ऑफ़र दिया है. अचानक लिए गए इस फैसे की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि प्लेटफॉर्म ने दिन भर में 3000 रुपये तक की कमाई का भी वादा किया है जो ऑर्डर की संख्या और वर्कर की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.इसके सा ही जोमैटो ने ऑर्डर रिजेक्ट करने और कैंसल करने पर लगने वाली पेनल्टी को कुछ समय के लिए माफ भी कर दिया है. PTI की रिपोर्ट में जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल के प्रवक्ता ने बताया कि यह ज्यादा डिमांड वाले त्योहारों और साल के आखिर के समय में फॉलो किया जाने वाला एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल है.

    स्विगी ने बढ़ाया इंसेंटिव

    Zomato की तरह ही Swiggy ने भी साल के आखिरी समय में इंसेंटिव बढ़ा दिए हैं और इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच डिलीवरी वर्कर्स को 10000 रुपये तक की कमाई का ऑफर दिया है. उन्होंने कहा कि नए साल की शाम को प्लेटफॉर्म शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच छह घंटे के समय के लिए 2000 रुपये तक की पीक-आवर कमाई का ऐड कर रहा है ताकि साल के सबसे बिजी ऑर्डरिंग टाइम में से एक के दौरान काफी राइडर मौजूद रह सकें.

  • जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO

    जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO


    नई दिल्ली । जहां एक ओर जोमाटो और स्विगी को डिलीवरी के मोर्चे पर सड़क पर तगड़ी टक्कर मिल रही है. वहीं अब शेयर बाजार में भी बड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है. दोनों कंपनियों का होश उड़ाने के लिए रोजमर्रा की जरूरत के सामान डिलीवर करने वाली कंपनी जेप्टो अपना आईपीओ लेकर आ रही है. शुक्रवार यानी आज कंपनी गुपचुप तरीके से अपना ड्राफ्ट पेपर सेबी दफ्तर में दाखिल करेगी. जानकारों का कहना है कि जेप्टो आईपीओ का साइज 11 हजार करोड़ या उससे ऊपर जा सकता है.
    लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अभी तक जितनी भी जानकारी सामने आई है वो सभी सूत्रों के हवाले से की गई है.कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है.

    जोमैटो-स्विगी की राह पर जेप्टो

    आईपीओ संबंधी मसौदा प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी मिलने की स्थिति में जेप्टो भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले सबसे नई स्टार्टअप फर्मों में से एक बन जाएगी. आईपीओ लाने के साथ ही जेप्टो वह अपने क्षेत्र के प्रतिद्वंद्वियों जोमैटो एवं स्विगी की कतार में खड़ी हो जाएगी जो पहले से ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं. कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है. अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
    गुपचुप तरीका अपना आईपीओ
    सूत्रों के मुताबिक जेप्टो गोपनीय मार्ग से आईपीओ के लिए आवेदन करने की तैयारी में है. इस मार्ग के तहत कंपनी सेबी के साथ अपने मसौदा दस्तावेज को सार्वजनिक किए बगैर उस पर शुरुआती चर्चा कर सकती है. हाल के वर्षों में गोपनीय मार्ग से आईपीओ लाने का तरीका उन कंपनियों के बीच लोकप्रिय हुआ है जो आईपीओ से पहले बाजार की स्थिति को देखते हुए अधिक लचीलापन चाहती हैं और नियामक से प्रारंभिक सुझाव लेना चाहती हैं.
    कंपनी कितना जुटा सकी पैसा
    जेप्टो का मौजूदा मूल्यांकन सात अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. कंपनी अपने गठन से लेकर अब तक कुल 1.8 अरब डॉलर करीब 16000 करोड़ रुपये का कोष जुटा चुकी है. कंपनी ने अगस्त 2023 में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनी यानी यूनिकॉर्न होने का दर्जा हासिल किया था. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले युवाओं आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा ने इस कंपनी की स्थापना की थी. जेप्टो ने 10 मिनट में किराना के सामान की आपूर्ति का मॉडल अपनाकर बड़े भारतीय शहरों में तेजी से विस्तार किया.