कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
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स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर
नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। -

राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां
नई दिल्ली।क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार की आपत्ति के बाद स्विगी और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिलीवरी की होड़ में सड़क सुरक्षा और गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।सरकारी स्तर पर यह मुद्दा तब गंभीर रूप से सामने आया जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में बेहद कम समय में सामान पहुंचाने को प्रमुखता दी जाने लगी। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा दबाव बनाते हैं। नतीजतन कई बार राइडर्स को समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए तेज ड्राइविंग करनी पड़ती है जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।मंगलवार को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में क्विक कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा काम के घंटे भुगतान प्रणाली और डिलीवरी के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ऐसी समय-सीमाएं हटाएं जो राइडर्स को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
इससे पहले क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा लिया था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी टैगलाइन और विज्ञापन रणनीति में बदलाव किया है। कंपनियां अब डिलीवरी की गति के बजाय उत्पादों की उपलब्धता सेवा की सुविधा और ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों पर जोर दे रही हैं।क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि क्या बेहद कम समय में डिलीवरी वास्तव में सुरक्षित और टिकाऊ है। सोशल मीडिया श्रमिक संगठनों और गिग वर्कर्स की ओर से बार-बार यह चिंता जताई गई कि कम समय की प्रतिस्पर्धा में राइडर्स को अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़तालों ने भी इस मुद्दे को और मुखर बना दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से समय-सीमा हटाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अपनी तेज डिलीवरी क्षमता खो देंगी। डार्क स्टोर्स माइक्रो-वेयरहाउस और स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क के चलते क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले की तरह तेजी से ऑर्डर पूरा करती रहेंगी। फर्क बस इतना होगा कि अब मार्केटिंग में सबसे तेज होने के बजाय सबसे भरोसेमंद सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अहम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं और उनकी सुरक्षा काम की शर्तों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग हो रही थी। केंद्र सरकार का यह हस्तक्षेप उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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Zomato-Swiggy ने किया बड़ा ऐलान… गिग वर्कर्स को मिलेगा ज्यादा पेमेंट, जानिए कितना
नई दिल्ली।नए साल 2026 की पूर्व संख्या यानी बुधवार 31 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन फूड और ग्रॉसरी ऑर्डर पहुंचाने के काम करने वाले गिग और डिलीवरी वर्कर्स ने देशभर में हड़ताल का आह्वान क्या किया इस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के होश उड़ गए. रिपोर्ट के मुताबिक New Year Eve पर डिलीवरी में रुकावट आने की आशंका के बीच ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों जोमैटो और स्विगी ने आनन-फानन में बड़ा ऐलान कर दिया. जी हां दोनों ही कंपनियों ने अब गिग वर्कस को ज्यादा पेमेंट देने का ऑफर दिया है.रिपोर्ट की मानें तो ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म ज़ोमैटो और स्विगी अपने डिलीवरी पार्टनर्स को अब ज्यादा इंसेंटिव देंगे. ये त्योहारों के समय में उनका एक स्टैंडर्ड तरीका है ताकि गिग वर्कर्स यूनियनों की हड़ताल के आह्वान के बीच न्यू ईयर ईव पर ऑर्डर डिीवरी सर्विस में कम से कम रुकावट आए.कंपनियों के सताने लगी ये चिंता
गौरतलब है कि तेलंगाना गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स यूनियन TGPWU और इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स IFAT ने दावा किया था कि लाखों वर्कर्स बेहतर पेमेंट और काम करने के बेहतर हालात की मांग को लेकर देश भर में हड़ताल में शामिल होने वाले हैं. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस हड़ताल से New Year Eve पर ज़ोमैटो स्विगी ब्लिंकिट इंस्टामार्ट और ज़ेप्टो जैसी फ़ूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स फर्मों के कामकाज पर असर पड़ सकता है. ये कंपनियों के लिए इसलिए भी बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इस मौक पर डिमांड सबसे ज्यादा हाई लेवल पर होती है.Zomato ने दिया ये ऑफरज़ोमैटो ने न्यू ईयर ईव पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच पीक आवर्स में डिलीवरी पार्टनर्स को हर ऑर्डर पर 120 से 150 रुपये का पेमेंट देने का ऑफ़र दिया है. अचानक लिए गए इस फैसे की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि प्लेटफॉर्म ने दिन भर में 3000 रुपये तक की कमाई का भी वादा किया है जो ऑर्डर की संख्या और वर्कर की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.इसके सा ही जोमैटो ने ऑर्डर रिजेक्ट करने और कैंसल करने पर लगने वाली पेनल्टी को कुछ समय के लिए माफ भी कर दिया है. PTI की रिपोर्ट में जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल के प्रवक्ता ने बताया कि यह ज्यादा डिमांड वाले त्योहारों और साल के आखिर के समय में फॉलो किया जाने वाला एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल है.स्विगी ने बढ़ाया इंसेंटिव
Zomato की तरह ही Swiggy ने भी साल के आखिरी समय में इंसेंटिव बढ़ा दिए हैं और इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच डिलीवरी वर्कर्स को 10000 रुपये तक की कमाई का ऑफर दिया है. उन्होंने कहा कि नए साल की शाम को प्लेटफॉर्म शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच छह घंटे के समय के लिए 2000 रुपये तक की पीक-आवर कमाई का ऐड कर रहा है ताकि साल के सबसे बिजी ऑर्डरिंग टाइम में से एक के दौरान काफी राइडर मौजूद रह सकें. -

जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO
नई दिल्ली । जहां एक ओर जोमाटो और स्विगी को डिलीवरी के मोर्चे पर सड़क पर तगड़ी टक्कर मिल रही है. वहीं अब शेयर बाजार में भी बड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है. दोनों कंपनियों का होश उड़ाने के लिए रोजमर्रा की जरूरत के सामान डिलीवर करने वाली कंपनी जेप्टो अपना आईपीओ लेकर आ रही है. शुक्रवार यानी आज कंपनी गुपचुप तरीके से अपना ड्राफ्ट पेपर सेबी दफ्तर में दाखिल करेगी. जानकारों का कहना है कि जेप्टो आईपीओ का साइज 11 हजार करोड़ या उससे ऊपर जा सकता है.लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अभी तक जितनी भी जानकारी सामने आई है वो सभी सूत्रों के हवाले से की गई है.कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है.जोमैटो-स्विगी की राह पर जेप्टो
आईपीओ संबंधी मसौदा प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी मिलने की स्थिति में जेप्टो भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले सबसे नई स्टार्टअप फर्मों में से एक बन जाएगी. आईपीओ लाने के साथ ही जेप्टो वह अपने क्षेत्र के प्रतिद्वंद्वियों जोमैटो एवं स्विगी की कतार में खड़ी हो जाएगी जो पहले से ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं. कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है. अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.गुपचुप तरीका अपना आईपीओसूत्रों के मुताबिक जेप्टो गोपनीय मार्ग से आईपीओ के लिए आवेदन करने की तैयारी में है. इस मार्ग के तहत कंपनी सेबी के साथ अपने मसौदा दस्तावेज को सार्वजनिक किए बगैर उस पर शुरुआती चर्चा कर सकती है. हाल के वर्षों में गोपनीय मार्ग से आईपीओ लाने का तरीका उन कंपनियों के बीच लोकप्रिय हुआ है जो आईपीओ से पहले बाजार की स्थिति को देखते हुए अधिक लचीलापन चाहती हैं और नियामक से प्रारंभिक सुझाव लेना चाहती हैं.कंपनी कितना जुटा सकी पैसाजेप्टो का मौजूदा मूल्यांकन सात अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. कंपनी अपने गठन से लेकर अब तक कुल 1.8 अरब डॉलर करीब 16000 करोड़ रुपये का कोष जुटा चुकी है. कंपनी ने अगस्त 2023 में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनी यानी यूनिकॉर्न होने का दर्जा हासिल किया था. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले युवाओं आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा ने इस कंपनी की स्थापना की थी. जेप्टो ने 10 मिनट में किराना के सामान की आपूर्ति का मॉडल अपनाकर बड़े भारतीय शहरों में तेजी से विस्तार किया.
