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  • इंदौर में H1N1 से महिला की मौत, भोपाल में 6 केस के बावजूद जांच शुरू नहीं: अस्पतालों में बढ़े खांसी-बुखार के मरीज

    इंदौर में H1N1 से महिला की मौत, भोपाल में 6 केस के बावजूद जांच शुरू नहीं: अस्पतालों में बढ़े खांसी-बुखार के मरीज


    इंदौर । इंदौर में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण से उज्जैन की 60 वर्षीय महिला की मौत के बाद मध्य प्रदेश में मौसमी वायरल संक्रमण और फ्लू को लेकर चिंता बढ़ गई है। राजधानी भोपाल में भी अब तक छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद यहां सरकारी स्तर पर एच1एन1 की नियमित जांच शुरू नहीं हो सकी है। गांधी मेडिकल कॉलेज में जांच किट उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के सैंपल की जांच की व्यवस्था शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे समय में जब मौसम में बदलाव के साथ खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस संबंधी परेशानियों वाले मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, जांच व्यवस्था को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    भोपाल के बड़े अस्पतालों की ओपीडी में रोज करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें गले में खराश, खांसी, बुखार, नाक बहने और कमजोरी जैसी शिकायतें हैं। डॉक्टरों के अनुसार इन लक्षणों के पीछे सामान्य वायरल संक्रमण के अलावा इंफ्लूएंजा ए, एच1एन1, इंफ्लूएंजा बी, एडिनोवायरस और अन्य रेस्पिरेटरी वायरस भी कारण हो सकते हैं। शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होने के कारण केवल सामान्य लक्षणों को देखकर संक्रमण की सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

    इंदौर में इलाज के दौरान एक महिला की मौत और भोपाल में पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद भी जांच किट का उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की एच1एन1 जांच कराना जरूरी नहीं होता। मरीज की स्थिति, लक्षणों की गंभीरता और संक्रमण के जोखिम को देखते हुए डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं। एम्स भोपाल में भी सामान्य तौर पर हर मरीज का टेस्ट नहीं किया जा रहा है, बल्कि संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों के सैंपल उनकी स्थिति के आधार पर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

    पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार मौसम में अचानक बदलाव, नमी और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण वायरल और सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं। राहत की बात यह है कि इंफ्लूएंजा के अधिकांश मरीज सामान्य इलाज, आराम और डॉक्टर की सलाह से ठीक हो सकते हैं। लेकिन कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और फेफड़ों तक पहुंचने पर निमोनिया जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। सांस लेने में परेशानी, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, लगातार तेज बुखार या स्थिति तेजी से बिगड़ने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में अस्पताल में भर्ती करने और जरूरत पड़ने पर आईसीयू सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है।

    डॉक्टरों ने यह भी बताया है कि कई परिवारों में एक सदस्य के बीमार होने के दो या तीन दिन बाद दूसरे सदस्यों में भी खांसी, बुखार और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसलिए संक्रमण के दौरान सावधानी बेहद जरूरी है। बीमार व्यक्ति को संभव हो तो घर पर आराम करना चाहिए, दूसरों के संपर्क में कम आना चाहिए और मास्क का उपयोग करना चाहिए। हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोना तथा आंख, नाक और मुंह को बार बार छूने से बचना भी संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।

    विशेषज्ञों ने बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीवायरल दवा लेने से भी सावधान किया है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और गलत दवा या अधूरा इलाज नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टर यदि एंटीवायरल दवा लिखते हैं तो उसका पूरा कोर्स करना जरूरी है। पर्याप्त आराम, गुनगुना पानी और तरल पदार्थों का सेवन भी मददगार हो सकता है।

    एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन भी उपलब्ध है। खासतौर पर उन लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद टीकाकरण पर विचार करना चाहिए जिनमें संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि खांसी, बुखार और सांस संबंधी लक्षणों को हल्के में न लिया जाए और हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह ली जाए।

  • बुखार आते ही घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सांस फूलना हो तो रहें अलर्ट; स्वाइन फ्लू से बचाव और टेस्ट की पूरी जानकारी

    बुखार आते ही घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सांस फूलना हो तो रहें अलर्ट; स्वाइन फ्लू से बचाव और टेस्ट की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के इंदौर में 60 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद देश के कई हिस्सों में इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू के मामले पिछले साल की तुलना में करीब छह गुना बढ़ने की बात सामने आई है। वहीं बेंगलुरु के एक स्कूल में 500 से ज्यादा विद्यार्थी और 21 स्टाफ सदस्य बीमार पड़ने की खबर ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क कर दिया है। मेरठ में भी मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हरियाणा चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर स्वास्थ्य विभागों ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर H1N1 टेस्ट कराना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका जवाब नहीं है। हर बुखार में तुरंत स्वाइन फ्लू टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। टेस्ट का फैसला मरीज के लक्षणों बीमारी की अवधि आसपास संक्रमण की स्थिति और उसके जोखिम वाले कारकों को देखकर किया जाता है।

    स्वाइन फ्लू जिसे H1N1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है उसके लक्षण कई बार सामान्य फ्लू जैसे ही दिखाई देते हैं। इसमें बुखार खांसी गले में खराश शरीर में दर्द सिरदर्द थकान और कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मरीजों में नाक बहने या बंद होने जैसी शिकायत भी देखी जाती है। सामान्य तौर पर हल्के लक्षण होने पर घबराने के बजाय आराम करना पर्याप्त हो सकता है। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है। हालांकि अगर बुखार लगातार बढ़ रहा हो सांस लेने में परेशानी हो छाती में दर्द हो अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या बीमारी के लक्षण लगातार बिगड़ रहे हों तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

    स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने बोलने या सांस लेने के दौरान निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। खास बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखाई देने से पहले भी वायरस फैला सकता है। बच्चों में संक्रमण फैलने की अवधि कुछ मामलों में अधिक हो सकती है। यही वजह है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और बीमारी के दौरान दूसरों से दूरी रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    स्वाइन फ्लू का खतरा हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। दो साल से कम उम्र के बच्चे 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं और अस्थमा डायबिटीज या हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम ज्यादा हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार नाक या गले के स्वैब से जांच करा सकते हैं। RT-PCR जैसे टेस्ट वायरस की पहचान में मदद करते हैं। लेकिन हर सामान्य बुखार में जांच कराना जरूरी नहीं है। यदि लक्षण हल्के हैं और मरीज की हालत स्थिर है तो डॉक्टर स्थिति देखकर टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इसके उलट तेज या लगातार बुखार सांस लेने में परेशानी तेजी से बिगड़ती तबीयत या हाई रिस्क श्रेणी में आने वाले मरीजों के मामले में जांच और उपचार को लेकर जल्द चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

    देश के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभागों की ओर से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचना हाथ साफ रखना बीमारी के दौरान भीड़ से दूरी बनाना और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं न लेना महत्वपूर्ण है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वाइन फ्लू को लेकर डरने के बजाय लक्षणों को समझकर समय पर चिकित्सा सलाह ली जाए। वर्ष 2009 में H1N1 वैश्विक महामारी का कारण बना था लेकिन आज H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है। इसलिए मौजूदा मामलों को सीधे कोरोना जैसी नई महामारी मानना सही नहीं होगा। फिर भी बुजुर्गों बच्चों गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह संक्रमण गंभीर हो सकता है। ऐसे में सावधानी और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।