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  • भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील

    भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को भारत यात्रा (India Trip) पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन (Swiss President Guy Parmelin) से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मौके पर हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी, परिवहन, आवाजाही समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हुए व्यापार समझौते से अगले 15 सालों में देश में सौ अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

    एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है जिसे 1960 में स्थापित किया गया था। इसमें चार देश स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता है जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि का दस्तावेज है।

    मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने भी स्विट्जरलैंड में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया। इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियां हमारी मित्रता में गूंजती हैं। मोदी ने स्विट्जरलैंड के पार्मेलिन को भारत की तीन विशेष चीज़- गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर तथा हाथ से नक्काशी किया कश्मीरी अखरोट की लकड़ी का दीवार पैनल भेंट किया।


    स्विस बाजार में पहुंच बढ़ेगी

    मोदी ने कहा कि बैठक में हमने अपनी साझेदारी को एक नई गति और नई ऊंचाई दी है। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। इससे कृषि, फार्मा, वस्त्र तथा इंजीनियरिंग सामानों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा।


    अनुसंधान पर जोर

    इस दौरान स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई गई। भारत के साइंस स्टार्टअप की क्षमता निर्माण के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।


    वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करेंगे

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। PM मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं भी दीं। इस दौरान कहा कि दोनों देश एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने को बढ़ते रहेंगे।


    भारत स्विट्जरलैंड के बीच 5 प्रमुख समझौते

    प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता हुआ। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है। साथ ही नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट भी शामिल है।

    युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (वाईपीएस)हुआ। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों के एक से दूसरे देश में अस्थायी रोजगार ग्रहण करने के काम को नियंत्रित करना है। इससे वे अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषायी कौशल को बढ़ा सकते हैं। वाईपीएस में प्रति देश प्रतिवर्ष तीन सौ लोगों का आदान-प्रदान शामिल है, जिसे बढ़ाकर पांच सौ किया जा सकता है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के माध्यम से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करना है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एसएनएसएफ) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपूर्ण वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करके, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी का निर्माण करना है।

    संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग (ईएईआर) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चिह्नित क्षेत्रों में परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता हुआ। इसका मकसद सतत अवसंरचना विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें ई-वाहनों, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और अवसंरचना को बढ़ाकर परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों पर ध्यान दिया गया है।

  • स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन भारत पहुंचे, राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में औपचारिक स्वागत

    स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन भारत पहुंचे, राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में औपचारिक स्वागत

    नई दिल्ली ।स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन सोमवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन के बाद राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। स्विस राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। गाइ पार्मेलिन का यह दौरा भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर जोर रहेगा। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से राजनयिक और आर्थिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के साथ शिक्षा, विज्ञान और तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में गाइ पार्मेलिन का तीन दिवसीय दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर माना जा रहा है।

    गाइ पार्मेलिन 7 अक्टूबर को दूसरे भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते यानी टीईपीए के लागू होने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भारत और ईएफटीए के बीच आर्थिक साझेदारी तथा कारोबारी संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। समझौते के लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    भारत और स्विट्जरलैंड के आर्थिक संबंधों में ईएफटीए की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईएफटीए देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। आर्थिक मामलों के अलावा शिक्षा, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में भी दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क रहा है।

    गाइ पार्मेलिन का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और ईएफटीए के बीच आर्थिक साझेदारी से जुड़े सहयोग का नया चरण आगे बढ़ रहा है। टीईपीए के लागू होने की पहली वर्षगांठ के मौके पर होने वाला समृद्धि शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को समझौते की प्रगति और भविष्य के आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर देगा। राष्ट्रपति भवन में हुआ औपचारिक स्वागत और इसके बाद होने वाले उच्चस्तरीय कार्यक्रम भारत और स्विट्जरलैंड के बीच राजनीतिक संवाद तथा आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण गतिविधियों के रूप में देखे जा रहे हैं।

  • हैदराबाद से स्विट्जरलैंड तक बढ़ी गुमशुदगी की गुत्थी, कारोबारी दंपती की तलाश के बीच करोड़ों रुपये के निवेश लेनदेन की भी जांच शुरू

    हैदराबाद से स्विट्जरलैंड तक बढ़ी गुमशुदगी की गुत्थी, कारोबारी दंपती की तलाश के बीच करोड़ों रुपये के निवेश लेनदेन की भी जांच शुरू

     हैदराबाद के एक कारोबारी दंपती के स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब जांच के दौरान दंपती पर कई लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने के आरोप भी सामने आए। फिलहाल पुलिस गुमशुदगी और वित्तीय लेनदेन, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

    पुलिस के अनुसार लापता दंपती की पहचान 51 वर्षीय पब्बा चंद्रशेखर और उनकी 42 वर्षीय पत्नी स्वप्ना के रूप में हुई है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों 22 जून को स्विट्जरलैंड की यात्रा पर गए थे। यात्रा के शुरुआती दिनों में उनका परिजनों से नियमित संपर्क बना रहा, लेकिन 8 जुलाई के बाद अचानक दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। इसके बाद परिवार को उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका, जिससे चिंता बढ़ गई।

    लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर दंपती की 23 वर्षीय बेटी श्रेया ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दंपती ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्विट्जरलैंड में प्रवेश किया था या नहीं। इसके लिए यात्रा से जुड़े दस्तावेज, इमिग्रेशन रिकॉर्ड, एयरलाइन विवरण और अन्य आधिकारिक सूचनाओं की जांच की जा रही है। साथ ही उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों और हाल के वित्तीय लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे लोगों की शिकायतें भी मिली हैं, जिन्होंने दावा किया है कि चंद्रशेखर और स्वप्ना ने पिछले कुछ वर्षों में 60 से अधिक लोगों से करीब 50 करोड़ रुपये जुटाए थे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुछ लोगों को अधिक लाभ का भरोसा देकर निवेश कराया गया, जबकि कुछ से व्यक्तिगत जरूरतों और व्यावसायिक निवेश के नाम पर धन लिया गया। इन आरोपों के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

    हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस समय दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों की सत्यता की जांच की जा रही है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी कहा है कि प्राथमिकता फिलहाल दंपती का पता लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है तथा आवश्यक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का भी पालन किया जा रहा है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास दंपती की यात्रा, वर्तमान ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई भी विश्वसनीय जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस को उपलब्ध कराए। जांच एजेंसियों का कहना है कि गुमशुदगी और वित्तीय शिकायतों से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    संक्षिप्त सार:
    हैदराबाद का एक कारोबारी दंपती स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान लापता हो गया है। पुलिस गुमशुदगी के साथ-साथ उन आरोपों की भी जांच कर रही है, जिनमें दंपती पर निवेशकों से करीब 50 करोड़ रुपये जुटाने का दावा किया गया है।

    English Keywords:
    Chandrasekhar, Switzerland, HyderabadPolice, InvestmentFraud, Investigation

    नई दिल्ली । हैदराबाद के एक कारोबारी दंपती के स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब जांच के दौरान दंपती पर कई लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने के आरोप भी सामने आए। फिलहाल पुलिस गुमशुदगी और वित्तीय लेनदेन, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

    पुलिस के अनुसार लापता दंपती की पहचान 51 वर्षीय पब्बा चंद्रशेखर और उनकी 42 वर्षीय पत्नी स्वप्ना के रूप में हुई है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों 22 जून को स्विट्जरलैंड की यात्रा पर गए थे। यात्रा के शुरुआती दिनों में उनका परिजनों से नियमित संपर्क बना रहा, लेकिन 8 जुलाई के बाद अचानक दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। इसके बाद परिवार को उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका, जिससे चिंता बढ़ गई।

    लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर दंपती की 23 वर्षीय बेटी श्रेया ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दंपती ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्विट्जरलैंड में प्रवेश किया था या नहीं। इसके लिए यात्रा से जुड़े दस्तावेज, इमिग्रेशन रिकॉर्ड, एयरलाइन विवरण और अन्य आधिकारिक सूचनाओं की जांच की जा रही है। साथ ही उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों और हाल के वित्तीय लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे लोगों की शिकायतें भी मिली हैं, जिन्होंने दावा किया है कि चंद्रशेखर और स्वप्ना ने पिछले कुछ वर्षों में 60 से अधिक लोगों से करीब 50 करोड़ रुपये जुटाए थे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुछ लोगों को अधिक लाभ का भरोसा देकर निवेश कराया गया, जबकि कुछ से व्यक्तिगत जरूरतों और व्यावसायिक निवेश के नाम पर धन लिया गया। इन आरोपों के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

    हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस समय दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों की सत्यता की जांच की जा रही है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी कहा है कि प्राथमिकता फिलहाल दंपती का पता लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है तथा आवश्यक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का भी पालन किया जा रहा है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास दंपती की यात्रा, वर्तमान ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई भी विश्वसनीय जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस को उपलब्ध कराए। जांच एजेंसियों का कहना है कि गुमशुदगी और वित्तीय शिकायतों से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड का कमाल 1954 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड का कमाल 1954 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। टीम ने राउंड ऑफ 16 के बेहद रोमांचक मुकाबले में कोलंबिया को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने 1954 के बाद पहली बार विश्व कप के अंतिम आठ में जगह बनाई है। अब क्वार्टर फाइनल में उसका मुकाबला मजबूत अर्जेंटीना से होगा।

    वैंकूवर में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही सावधानी के साथ खेल दिखाया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। दोनों ओर से कई अच्छे आक्रमण हुए लेकिन मजबूत रक्षापंक्ति और शानदार गोलकीपिंग के कारण स्कोर गोलरहित बना रहा। आखिरकार मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ जहां स्विट्जरलैंड ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत अपने नाम कर ली।

    स्विट्जरलैंड की जीत के सबसे बड़े नायक रूबेन वर्गास रहे जिन्होंने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। मुकाबले के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें मैच खेलने को लेकर भी संशय था लेकिन टीम के लिए जीत दिलाना उनके करियर का सबसे यादगार पल बन गया। उन्होंने बताया कि पेनल्टी लेने के समय वह पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे हुए थे और खुश हैं कि टीम की उम्मीदों पर खरे उतर सके।

    मैच शुरू होने से पहले स्विट्जरलैंड को बड़ा झटका तब लगा जब टीम के प्रमुख खिलाड़ी जोहान मंजांबी घुटने की चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए। उनके नहीं खेलने से पहले हाफ में टीम के आक्रमण की धार कुछ कमजोर दिखाई दी। दूसरी ओर कोलंबिया ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा लेकिन वह इसे गोल में नहीं बदल सकी।

    कोलंबिया की ओर से गुस्तावो पुएर्ता ने शानदार प्रयास किया लेकिन स्विट्जरलैंड के गोलकीपर ग्रेगर कोबेल ने बेहतरीन बचाव कर टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। दूसरे हाफ में लुइस सुआरेज को भी गोल करने का अवसर मिला लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से बाहर निकल गया। वहीं स्विट्जरलैंड के फैबियन रीडर की दमदार वॉली को कोलंबिया के गोलकीपर कैमिलो वर्गास ने शानदार तरीके से रोक दिया।

    अतिरिक्त समय में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। कोलंबिया के जॉन लुकुमी का हेडर क्रॉसबार से टकराकर बाहर चला गया जबकि स्विट्जरलैंड के जेकी अमदौनी के प्रयास को भी गोलकीपर ने विफल कर दिया। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में ग्रेगर कोबेल ने अहम बचाव किया और रूबेन वर्गास की निर्णायक किक ने स्विट्जरलैंड को सात दशक बाद विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचाकर नया इतिहास रच दिया।

    अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें क्वार्टर फाइनल पर होंगी जहां स्विट्जरलैंड की चुनौती मौजूदा दावेदार अर्जेंटीना के सामने होगी। यह मुकाबला विश्व कप के सबसे रोमांचक मैचों में से एक माना जा रहा है।

  • ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

    ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

    नई द‍िल्‍ली । वाशिंगटन में ईरान के साथ तकनीकी वार्ता के अगले चरण को लेकर चल रही तैयारी के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की स्विट्जरलैंड यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है। यह यात्रा उस प्रक्रिया का हिस्सा थी जिसमें दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए प्रारंभिक समझौते को लागू करने और उसके क्रियान्वयन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से बातचीत होनी थी। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यात्रा स्थगित होने के बावजूद बातचीत की प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्ष जल्द से जल्द अगले चरण की तकनीकी चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हैं।

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि तकनीकी बातचीत की तारीख अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुई है और स्थिति लगातार बदल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल किसी भी समय प्रस्थान के लिए तैयार है लेकिन वार्ता की व्यवस्था और समय तय करना आसान प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उपराष्ट्रपति उसी दिन यात्रा नहीं कर रहे हैं और आगे की जानकारी परिस्थितियों के अनुसार साझा की जाएगी।

    अमेरिकी प्रशासन ने यह संकेत दिया कि जैसे ही अगले चरण की बातचीत को लेकर कोई निश्चित कार्यक्रम तय होगा उसे सार्वजनिक किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं की जा रही है बल्कि समन्वय से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते समय में बदलाव हुआ है। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि उनका उद्देश्य जल्द से जल्द तकनीकी वार्ता शुरू करना है ताकि समझौते के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाया जा सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही पक्ष समझौते के बाद निगरानी और अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की तैयारी कर रहे हैं। इन वार्ताओं में सबसे अहम विषय यह माना जा रहा है कि समझौते को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए और उसकी प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए।

    उपराष्ट्रपति ने पहले संकेत दिया था कि तकनीकी बातचीत कुछ ही दिनों में शुरू हो सकती है और इसके लिए स्विट्जरलैंड संभावित स्थान हो सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इस प्रक्रिया का समन्वय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समय और स्थान को लेकर लगातार बदलाव की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने कहा था कि योजना के अनुसार स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी थी लेकिन यह स्थिति परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बातचीत का मुख्य फोकस तकनीकी विवरणों पर होगा जिनमें निगरानी प्रक्रिया सत्यापन तंत्र और ईरान के संवर्धित यूरेनियम से जुड़े प्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनना ही बड़े समझौते की सफलता की असली परीक्षा होगी।

    व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन केवल बयानों पर नहीं बल्कि व्यावहारिक कार्यों पर भरोसा करता है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अमेरिका का कहना है कि बातचीत में प्रगति तभी मानी जाएगी जब जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सामने आएंगे और समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।

  • ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता निर्णायक मोड़ पर, स्विट्जरलैंड में शुरू होगी अंतिम दौर की बातचीत; मध्य पूर्व की नजरें टिकीं

    ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता निर्णायक मोड़ पर, स्विट्जरलैंड में शुरू होगी अंतिम दौर की बातचीत; मध्य पूर्व की नजरें टिकीं

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी परमाणु विवाद एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर अंतिम चरण की बातचीत शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में शुरू होने जा रही है। इस बैठक को केवल द्विपक्षीय वार्ता के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे मध्य पूर्व की भविष्य की रणनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया माना जा रहा है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि आगामी दौर की बातचीत विशेष रूप से परमाणु मुद्दों पर केंद्रित होगी। उनके अनुसार, दोनों पक्ष कई चरणों की चर्चा के बाद अब ऐसे बिंदु पर पहुंचे हैं जहां प्रमुख मतभेदों को दूर करने और संभावित समझौते का रास्ता तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इसी प्रक्रिया के तहत एक प्रस्तावित समझौता ढांचे और पारस्परिक समझ से जुड़े दस्तावेजों पर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी।

    परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से तनाव बना हुआ है। पश्चिमी देशों की चिंता यह रही है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम भविष्य में सैन्य क्षमता हासिल करने की दिशा में इस्तेमाल हो सकता है, जबकि ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिए है। यही विवाद दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिबंधों, कूटनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों की बड़ी वजह बना हुआ है।

    स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब मध्य पूर्व पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। क्षेत्र में जारी संघर्षों, सीमा विवादों और विभिन्न गुटों की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की प्रगति को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ईरानी विदेश मंत्री ने बातचीत से पहले क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय संतुलन भी ईरान की प्राथमिक चिंताओं में शामिल हैं। उनके अनुसार, क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव बढ़ाने वाले कदमों का व्यापक असर पड़ सकता है और इससे कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्विट्जरलैंड वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के बीच वर्षों से जमे अविश्वास को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों, व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं। हालांकि, बातचीत के सफल होने की राह आसान नहीं मानी जा रही क्योंकि कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अब भी महत्वपूर्ण मतभेद मौजूद हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बैठक को लेकर काफी उत्सुकता है। यूरोपीय देशों सहित कई वैश्विक शक्तियां चाहती हैं कि कूटनीतिक समाधान के माध्यम से परमाणु विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा हो। इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    आने वाले दिनों में स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि मध्य पूर्व की राजनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया साबित हो सकती है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं या फिर क्षेत्र में तनाव का दौर आगे भी जारी रहता है।

  • स्विट्जरलैंड भी लगेगा फीका! भारत के इन 5 रेलवे रूट्स पर दिखती है 'जन्नत' खिड़की से दिखेंगी बर्फीली वादियों का नजारा

    स्विट्जरलैंड भी लगेगा फीका! भारत के इन 5 रेलवे रूट्स पर दिखती है 'जन्नत' खिड़की से दिखेंगी बर्फीली वादियों का नजारा


    नई दिल्ली । भारत में ट्रेन यात्राओं का अपना ही एक जादू हैपहियों की लयबद्ध खड़खड़ाहट खिड़की के बाहर लगातार बदलते नज़ारे और हर मील के साथ रोमांच का बढ़ता एहसास. विस्टाडोम कोच इस अनुभव को एक नए लेवल पर ले जाते हैं. घूमने वाली रिक्लाइनिंग सीटों कांच की छतों और बड़ी पैनोरमिक खिड़कियों के साथ ये कोच यात्रियों को प्रकृति की भव्यता में डूबने का मौका देते हैं. बर्फ से ढके पहाड़ों से लेकर हरी-भरी घाटियों और झरनों तक यहां भारत भर के कुछ सबसे खूबसूरत विस्टाडोम ट्रेन रूट दिए गए हैं. आइए जानते इन 5 रेलवे रूट्स के बारे में विस्तार से ।
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    जम्मू और कश्मीर विस्टाडोम स्पेशल कोच बडगाम से बनिहाल तक की यह 90 किलोमीटर की यात्रा यात्रियों को कश्मीर घाटी की लुभावनी सुंदरता में डुबो देती है. श्रीनगर अवंतीपोरा अनंतनाग और काजीगुंड से गुज़रते हुए ट्रेन बर्फ से ढकी चोटियों चमकती धाराओं और हरे-भरे घास के मैदानों के मनोरम दृश्य दिखाती है. 2023 में लॉन्च किया गया यह कांच की छत वाला कोच यात्रियों को प्रकृति का एक अभिन्न हिस्सा होने का एहसास कराता है जिससे यात्रा उतनी ही मनमोहक हो जाती है जितनी कि मंज़िल  ।
    डूअर्स न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस ​​यह ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी से अलीपुरद्वार जंक्शन तक 169 किलोमीटर की दूरी तय करती है और पश्चिम बंगाल के डूअर्स इलाके से गुज़रती है. खिड़कियों के बाहर घने जंगल फैले हुए चाय के बागान और पूर्वी हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं. वन्यजीवों को देखने से अनुभव और भी बेहतर हो जाता है और यह यात्रा भूटान का रास्ता जैसी लगती है. विस्टाडोम कोच हर मोड़ पर एक नया मनमोहक नज़ारा दिखाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं ।
    हिमाचल प्रदेश कालका-शिमला NG एक्सप्रेस ​​यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट कालका-शिमला लाइन इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता का एक शानदार उदाहरण है. 90 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी में ट्रेन 103 सुरंगों 800 पुलों और लगभग हज़ार मोड़ों से गुज़रती है. चीड़ के जंगल गहरी घाटियाँ और शानदार पहाड़ों के नज़ारे पूरे रास्ते की शोभा बढ़ाते हैं. विस्टाडोम कोच की चौड़ी कांच की छत और खिड़कियाँ इस ऐतिहासिक यात्रा को हिमाचली पहाड़ियों का एक शानदार पैनोरमिक अनुभव बना देती हैं
    गुजरात अहमदाबाद-केवडिया जन शताब्दी एक्सप्रेस ​​यह रूट अहमदाबाद को एकता नगर से जोड़ता है जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का गेटवे है. यात्री नर्मदा नदी और आसपास के नज़ारों का शानदार व्यू देख सकते हैं. विस्टाडोम कोच इस अनुभव को और भी खास बनाते हैं जिससे एक आम ट्रेन यात्रा एक खूबसूरत एडवेंचर में बदल जाती है. भारत की सबसे ऊंची मूर्ति देखने जाने वालों के लिए यह यात्रा अपने आप में एक बड़ा आकर्षण बन जाती है ।
    असम न्यू हाफलोंग स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन गुवाहाटी से न्यू हाफलोंग तक की यह 269 किलोमीटर की यात्रा असम की प्राकृतिक सुंदरता के शानदार नज़ारे दिखाती है. पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों को घुमावदार पहाड़ियाँ हरी-भरी घाटियाँ और शांत नदियाँ देखने को मिलती हैं. माइबोंग में रुकने से यात्रा में सांस्कृतिक अनुभव जुड़ जाता है जबकि विस्टाडोम कोच की बड़ी खिड़कियाँ इस क्षेत्र की अनछुई सुंदरता को दिखाती हैं. यह सिर्फ़ यात्रा का एक ज़रिया नहीं है; यह नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के नज़ारों का एक चलता-फिरता कैनवस है ।