Tag: symbol

  • रात में दिखें सांप, साफ पानी या तेज रोशनी तो क्या होता है मतलब, स्वप्न शास्त्र में बताए गए संकेत समझिए

    रात में दिखें सांप, साफ पानी या तेज रोशनी तो क्या होता है मतलब, स्वप्न शास्त्र में बताए गए संकेत समझिए


    नई दिल्ली ।
    रात में देखे गए कुछ सपने सुबह उठने के बाद भी लंबे समय तक याद रहते हैं। कभी मंदिर या भगवान के दर्शन होते हैं, कभी साफ पानी, सांप, आसमान में उड़ना, दिवंगत व्यक्ति या तेज रोशनी दिखाई देती है। भारतीय परंपरा में ऐसे सपनों के अलग-अलग अर्थ बताए गए हैं और स्वप्न शास्त्र में इन्हें कई तरह के संकेतों से जोड़ा जाता है।

    स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपनों को समझने के लिए केवल उसमें दिखाई देने वाली चीज को देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। सपने के दौरान व्यक्ति कैसा महसूस कर रहा था, दृश्य शांत था या डरावना और वर्तमान जीवन में उसकी परिस्थितियां कैसी हैं, इन बातों का भी महत्व बताया जाता है।

    सपने में मंदिर या भगवान के दर्शन को सामान्य तौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है। अगर मंदिर साफ दिखाई दे, दीपक जल रहा हो या वातावरण शांत हो तो इसे मन की शांति, आध्यात्मिक जुड़ाव और सकारात्मक भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है। भगवान शिव, विष्णु, श्रीकृष्ण या माता के दर्शन को भी अलग-अलग आध्यात्मिक भावनाओं का प्रतीक माना जाता है।

    सपने में साफ और शांत पानी दिखाई देना भी शुभ संकेतों में शामिल किया जाता है। निर्मल नदी, स्वच्छ तालाब या शांत जल मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और नई शुरुआत की इच्छा को दर्शा सकता है। इसके विपरीत गंदा या अत्यधिक अशांत पानी तनाव, बेचैनी या किसी परेशानी की ओर संकेत कर सकता है।

    सांप का सपना अक्सर लोगों को डराता है, लेकिन इसे हर स्थिति में अशुभ नहीं माना जाता। स्वप्न परंपरा में सांप को शक्ति, परिवर्तन, रहस्य और आंतरिक ऊर्जा से जोड़ा गया है। अगर सांप नुकसान नहीं पहुंचाता तो इसे बदलाव या आंतरिक शक्ति का प्रतीक माना जा सकता है। वहीं सपने में अत्यधिक डर महसूस होना किसी चिंता या तनाव को दर्शा सकता है।

    खुद को आसमान में उड़ते हुए देखना आजादी और अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने की इच्छा से जुड़ा हो सकता है। उड़ते समय खुशी और उत्साह महसूस होना सकारात्मक सोच तथा आगे बढ़ने की आकांक्षा का संकेत माना जाता है। दूसरी ओर ऊंचाई से गिरने का डर असुरक्षा या किसी परिस्थिति को लेकर चिंता को दिखा सकता है।

    किसी दिवंगत व्यक्ति का सपने में दिखाई देना भी जरूरी नहीं कि अशुभ हो। प्रिय व्यक्ति की यादें और उनसे जुड़ी भावनाएं लंबे समय तक मन में रहती हैं। इसलिए ऐसे सपने भावनात्मक जुड़ाव, स्मृति या अधूरी भावनाओं का प्रतिबिंब हो सकते हैं। सपना शांत हो तो मन में सुकून की भावना और परेशान करने वाला हो तो भीतर के दुख से इसका संबंध हो सकता है।

    सपने में सोना, पैसा या दूसरी कीमती चीजें दिखाई देना समृद्धि, अवसर और महत्वाकांक्षा से जोड़ा जाता है। हालांकि इसका सीधा अर्थ भविष्य में धन मिलने की गारंटी नहीं है। कीमती वस्तु खोने का सपना आर्थिक चिंता या किसी महत्वपूर्ण चीज को खोने के डर से भी जुड़ा हो सकता है।

    सातवां प्रमुख सपना तेज रोशनी, दीपक या सूर्योदय का है। अंधेरे के बाद प्रकाश दिखाई देना आशा, ज्ञान, स्पष्टता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जाता है। कठिन दौर से गुजर रहे व्यक्ति के लिए ऐसा सपना मानसिक रूप से बेहतर स्थिति की इच्छा को भी दर्शा सकता है।

    हालांकि हर सपना भविष्य की घटना का संकेत नहीं होता। दिनभर के विचार, तनाव, डर, इच्छाएं और पुरानी यादें भी सपनों का रूप ले सकती हैं। इसलिए किसी सपने के आधार पर आर्थिक, वैवाहिक या जीवन से जुड़ा बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए। सपनों को अपनी भावनाओं और मानसिक स्थिति को समझने का एक माध्यम मानना अधिक उचित है।

  • ममता बनर्जी को एक और झटका…..असली TMC के नाम और सिंबल पर दावा ठोकेंगे बागी सांसद!

    ममता बनर्जी को एक और झटका…..असली TMC के नाम और सिंबल पर दावा ठोकेंगे बागी सांसद!


    कोलकाता
    । पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता छिनते ही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को एक के बाद झटके मिले रहे हैं। रविवार को ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को गहरा जख्म देकर तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के बागी सांसदों ने अब त्रिपुरा की एक पार्टी संग विलय का फैसला कर लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) से मिलकर लोकसभा में अलग सीट की व्यवस्था करने की मांग भी की है। इधर पार्टी से नए-नए बागी हुए सुदीप बंदोपाध्याय ने रविवार को संकेत दे दिए हैं कि बागी खेमा अगले महीने टीएमसी के नाम और सिंबल पर अपना दावा ठोकेगा। ऐसे में यह चर्चाएं भी तेज हो गई हैं कि NDA को लोकसभा में अपना सबसे बड़ा सहयोगी मिलने जा रहा है।

    इससे पहले लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों की बगावत के बाद, बागी खेमे को जिस ‘हेवीवेट’ की तलाश थी, वह भी अब पूरी हो गई है। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और लोकसभा में टीएमसी के संसदीय दल के नेता रहे सुदीप बंदोपाध्याय भी अब आधिकारिक तौर पर बागी गुट में शामिल हो गए हैं। बागी गुट में शामिल होते ही सुदीप बंदोपाध्याय ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा है बागियों का त्रिपुरा नेशनल सिटीजंस पार्टी (NCP) में विलय केवल एक अस्थायी व्यवस्था है।


    क्या है प्लान?

    लोकसभा में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों का समर्थन होने की बात दोहराते हुए सुदीप बंदोपाध्याय ने बागियों की लॉन्ग टर्म रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, “जब आप 2-तिहाई बहुमत के साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो यही सिस्टम है। आप पहले ही दिन जा के नहीं बोल सकते कि हमें पार्टी का सिंबल दे दो।” उन्होंने आगे कहा कि बागी खेमा जुलाई में चुनाव आयोग और कोर्ट के सामने आधिकारिक मांग रखेगा कि उन्हें ही असली तृणमूल माना जाए, क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। इसके बाद कोर्ट इस पर फैसला करेगा।

    गौरतलब है कि रविवार को तृणमूल कांग्रेस में संकट उस वक्त और गहरा गया जब बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक बेहद कम चर्चित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। यह पार्टी अब लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार को समर्थन देगी। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसदों की अगुवाई करने वालीं काकोली घोष दस्तीदार ने एक बयान में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बिरला को सौंपे गए आवेदन पर साइन किए हैं। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में अपना विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे।”


    त्रिपुरा की पार्टी है NCPI

    ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ त्रिपुरा की एक रजिस्टर्ड पार्टी है। हालांकि इसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही ज्यादा वोट मिले। इस बीच भाजपा ने कहा है कि अगर टीएमसी के सांसद NDA का समर्थन करना चाहते हैं तो यह देश के लिए अच्छा होगा।


    बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी बनेगी TMC

    लोकसभा में अगर टीएमसी के इस खेमे ने NDA को समर्थन दिया तो पार्टी बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी भी बन सकती है। बता दें कि बीजेपी के पास केंद्र में फिलहाल NDA के दो बड़े सहयोगी का समर्थन है। इसमें आंध्र प्रदेश की टीडीपी में 16 सांसद और ​जनता दल (यूनाइटेड) के 12 सांसद शामिल हैं। अब 20 से ज्यादा बागी टीएमसी सांसदों के समर्थन ने सदन में NDA की संख्या 313 तक बढ़ सकती है।