Tag: T20I Series

  • टॉप ऑर्डर फ्लॉप खराब कॉम्बिनेशन और कमजोर बल्लेबाजी टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण

    टॉप ऑर्डर फ्लॉप खराब कॉम्बिनेशन और कमजोर बल्लेबाजी टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है। बेलफास्ट में खेले गए दूसरे मुकाबले में एक रन की रोमांचक हार के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज 2 0 से गंवा दी। इस हार ने टीम इंडिया की तैयारियों रणनीति और बल्लेबाजी क्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी सीरीज के दौरान भारतीय टीम कई विभागों में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी और यही उसकी हार का सबसे बड़ा कारण बना।

    सबसे बड़ी चिंता टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर का खराब प्रदर्शन रहा। सलामी बल्लेबाजों और शुरुआती क्रम के बल्लेबाजों ने दोनों मुकाबलों में निराश किया। संजू सैमसन पूरी सीरीज में रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए। पहले मैच में वह केवल पांच रन बना सके जबकि दूसरे मुकाबले में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। अभिषेक शर्मा ने पहले मैच में शानदार 49 रन बनाए लेकिन दूसरे मैच में शून्य पर आउट हो गए। ईशान किशन भी दोनों मैचों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे और कुल मिलाकर केवल 13 रन ही बना सके। शुरुआती बल्लेबाजों की नाकामी ने पूरी टीम पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।

    दूसरा बड़ा कारण कप्तान श्रेयस अय्यर का फीका प्रदर्शन रहा। बतौर कप्तान यह उनकी पहली टी20 सीरीज थी और उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन उनका बल्ला पूरी तरह शांत रहा। दो मुकाबलों में वह केवल 13 रन बना सके। कप्तान का खराब प्रदर्शन टीम के आत्मविश्वास पर भी असर डालता है और यही इस सीरीज में देखने को मिला।

    भारतीय टीम का मध्यक्रम भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी साफ महसूस हुई। अक्षर पटेल शिवम दुबे और अन्य बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में असफल रहे। तिलक वर्मा ने दूसरे मैच में अर्धशतक जरूर लगाया लेकिन उनका स्ट्राइक रेट टी20 क्रिकेट के हिसाब से काफी धीमा रहा। तेजी से रन नहीं बनने के कारण टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी और इसका फायदा आयरलैंड को मिला।

    टीम चयन और प्लेइंग इलेवन का संतुलन भी सवालों के घेरे में रहा। पहले मुकाबले में दो स्पिनरों के साथ उतरने का फैसला परिस्थितियों के अनुकूल नहीं था। वॉशिंगटन सुंदर से केवल एक ओवर गेंदबाजी कराई गई जिसमें उन्होंने 19 रन खर्च किए। वहीं तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को मौका देना भी टीम के लिए महंगा साबित हुआ। उन्होंने चार ओवर में बिना विकेट लिए 57 रन लुटा दिए जिससे आयरलैंड को खुलकर खेलने का मौका मिल गया।

    पांचवां बड़ा कारण युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं देना माना जा रहा है। पहले मैच में बल्लेबाजी के खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम प्रबंधन ने दूसरे मुकाबले में भी उन्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया। भारत ए के लिए हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद उम्मीद थी कि उन्हें अवसर मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव जैसे आक्रामक बल्लेबाज मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे।

    इस सीरीज ने भारतीय टीम को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल प्रतिभा के दम पर लगातार सफलता हासिल नहीं की जा सकती। बेहतर टीम संयोजन स्पष्ट बल्लेबाजी क्रम और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाना उतना ही जरूरी है। आगामी बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम प्रबंधन को इन कमियों पर गंभीरता से काम करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी निराशाजनक हार से बचा जा सके।

  • कोहरा, धुंध और जहरीली हवा की मार: IND vs SA चौथा T20I रद्द, BCCI की प्लानिंग पर उठे सवाल

    कोहरा, धुंध और जहरीली हवा की मार: IND vs SA चौथा T20I रद्द, BCCI की प्लानिंग पर उठे सवाल


    नई दिल्ली ।लखनऊ/भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाने वाला चौथा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला बुधवार, 17 दिसंबर को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में होना था, लेकिन खराब मौसम और बेहद कम दृश्यता के कारण मैच को रद्द करना पड़ा। घने कोहरे, धुंध और खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके वायु प्रदूषण ने मैदान को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया था। कई बार निरीक्षण के बावजूद मैच शुरू नहीं हो सका, जिससे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI की मैच शेड्यूलिंग नीति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    यह मुकाबला आधिकारिक तौर पर ‘अत्यधिक कोहरे’ के कारण रद्द किया गया, लेकिन वास्तविकता यह थी कि लखनऊ में प्रदूषण और स्मॉग की मोटी परत ने पूरे स्टेडियम को ढक लिया था। बुधवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 400 के पार पहुंच गया था, जो ‘गंभीर’ से भी ऊपर की खतरनाक श्रेणी में आता है। ऐसे हालात में खिलाड़ियों की सेहत और सुरक्षा को लेकर चिंताएं स्वाभाविक रूप से बढ़ गईं।मैच शाम सात बजे शुरू होना था, लेकिन टॉस तक नहीं हो पाया। अंपायरों ने कुल छह बार मैदान और परिस्थितियों का निरीक्षण किया। हर बार दृश्यता इतनी कम पाई गई कि खेल कराना संभव नहीं था। अंततः रात करीब साढ़े नौ बजे मैच को औपचारिक रूप से रद्द करने का फैसला लिया गया। तब तक यह लगभग तय हो चुका था कि जैसे-जैसे रात बढ़ेगी, कोहरा और घना होता जाएगा।

    खराब हवा का असर खिलाड़ियों पर भी साफ दिखा। भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को वार्मअप के दौरान सर्जिकल मास्क पहने देखा गया, जो इस बात का संकेत था कि प्रदूषण का स्तर कितना गंभीर था। खिलाड़ी शाम साढ़े सात बजे तक वार्मअप कर चुके थे और उसके बाद ड्रेसिंग रूम लौट गए। ठंड और धुंध के चलते दर्शकों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होने लगी।निरीक्षण के दौरान बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के वरिष्ठ अधिकारी राजीव शुक्ला भी मैदान पर मौजूद थे। उन्होंने मैच अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन उनकी निराशा उनके हाव-भाव से साफ झलक रही थी। मैदान और मौसम की हालत ऐसी थी कि किसी भी तरह का जोखिम लेना उचित नहीं माना गया।

    इस पूरी स्थिति ने बीसीसीआई की सर्दियों के दौरान उत्तर भारत में अंतरराष्ट्रीय मैच कराने की योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पूरी सीरीज के लिए जिन शहरों को आयोजन स्थल चुना गया था, उनमें लखनऊ, न्यू चंडीगढ़ और धर्मशाला जैसे स्थान शामिल थे। यह वे इलाके हैं जहां नवंबर-दिसंबर के महीनों में प्रदूषण और कोहरे की समस्या आम तौर पर सबसे ज्यादा रहती है।इससे पहले धर्मशाला में खेले गए तीसरे टी20 इंटरनेशनल में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया था। उस मैच के बाद भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने भी स्वीकार किया था कि इतनी ठंड में खेलना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने इससे पहले कभी इतने ठंडे हालात में क्रिकेट नहीं खेला।

    अब सीरीज का आखिरी टी20 मुकाबला शुक्रवार को अहमदाबाद में खेला जाएगा। कोई रिजर्व डे नहीं होने के कारण लखनऊ वाला मैच दोबारा नहीं कराया जाएगा। फिलहाल भारत सीरीज में 2-1 से आगे है। माना जा रहा है कि बीसीसीआई आने वाली न्यूजीलैंड सीरीज के लिए आयोजन स्थलों में बदलाव पर दोबारा विचार कर सकता है, ताकि खिलाड़ियों को मौसम और प्रदूषण से होने वाली परेशानियों से बचाया जा सके।यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की योजना बनाते समय मौसम और पर्यावरणीय हालात को प्राथमिकता दी जा रही है या नहीं।