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  • नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नई दिल्ली । भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के साथ अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। पहले तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले तिलक अब पांचवें या छठे नंबर पर उतर रहे हैं। इस नई भूमिका में उनका लक्ष्य शुरुआत से ही तेजी से रन बनाना है। हालांकि, वह परिस्थितियों को समझकर ही आक्रामक शॉट खेलने का फैसला करते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले से पहले उन्होंने अपने बदले हुए बल्लेबाजी अंदाज और रन चेज के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति के बारे में बताया।

    तिलक के मुताबिक, उनके पास पहले से ही बड़े शॉट खेलने की क्षमता थी और उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भी खूब रन बनाए हैं। लेकिन अब पांचवें या छठे नंबर पर आने के बाद उनकी सोच में थोड़ा बदलाव आया है। इस क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए वह पहली ही गेंद से बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं। हालांकि, इसके लिए गेंद का उनके अनुकूल होना जरूरी है। यदि पहली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का सही अवसर नहीं मिलता, तो वह जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं।

    तिलक ने बताया कि ऐसी स्थिति में वह शुरुआत में सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाते हैं। साथ ही मैदान में खाली जगह तलाशकर चौके लगाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते समय केवल आक्रामक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैच की परिस्थिति के अनुसार जोखिम लेना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर वह क्रीज पर समय बिताते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवरों तक ले जाने की कोशिश करते हैं।
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    तिलक की यह रणनीति न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में देखने को मिली थी। क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। ऐसे समय में तिलक ने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर पारी को संभाला। उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए और टीम को चार विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच सातवें विकेट के लिए 69 रन की नाबाद साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को उस मुकाबले में जीत तक पहुंचाया।

    तिलक ने बताया कि उस समय उन्होंने नीतीश रेड्डी से कहा था कि अगर दोनों बल्लेबाज मिलकर यहां से मैच जिता देते हैं तो यह बेहद खास होगा। उन्होंने साथी खिलाड़ी को क्रीज पर टिके रहने, मुकाबले को आगे तक ले जाने और फिर परिस्थितियों के अनुसार खेलने की सलाह दी थी। तिलक के अनुसार, रन चेज में धैर्य बनाए रखना और सही समय पर तेजी से रन बनाना काफी महत्वपूर्ण होता है।

    आखिरी ओवरों में गेंदबाजों पर दबाव बनाने को लेकर भी तिलक की सोच स्पष्ट है। उनका मानना है कि डेथ ओवर्स में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज अधिक दबाव में होता है। वह इसी सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करते हैं कि गेंदबाज पर दबाव होने के कारण उससे रन देने की गलती हो सकती है। इस मानसिकता से उन्हें मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते समय आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

    न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंचने से पहले भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज खेली थी। लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण नए माहौल और समय क्षेत्र के अनुसार खुद को ढालना आसान नहीं था। तिलक ने माना कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम इस वजह से बहाने नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन से युवा क्रिकेटरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी टीम बैठकों में स्पष्ट किया है कि टी20 टीम का प्रदर्शन पूरे दौरे के लिए अच्छा माहौल तैयार कर सकता है।

    भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब टीम की नजर बाकी दोनों मैच जीतकर सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप करने पर है। तिलक ने इसे भारतीय टीम और दर्शकों के लिए अच्छा अवसर बताया। चौथा टी20 मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में खेला जाना है।

  • अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रचा छक्कों का नया इतिहास, एक कैलेंडर वर्ष में सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़ा

    अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रचा छक्कों का नया इतिहास, एक कैलेंडर वर्ष में सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़ा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक कैलेंडर वर्ष के दौरान सबसे ज्यादा छक्के लगाने का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ हैदराबाद में खेले गए पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में अभिषेक ने 29 रन की पारी खेली।भले ही वह इस मैच में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे, लेकिन अपनी छोटी पारी के दौरान उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। अभिषेक अब साल 2026 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 69 छक्के लगा चुके हैं। उन्होंने इस मामले में सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने वर्ष 2022 में 68 छक्के लगाए थे।

    14 अक्टूबर को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम को 24 रन से हार का सामना करना पड़ा। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट के नुकसान पर 247 रन बनाए और भारत के सामने 248 रन का लक्ष्य रखा। जवाब में भारतीय टीम निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी और उसकी पारी 223 रन पर समाप्त हो गई। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली।

    अभिषेक शर्मा ने अपनी 29 रन की पारी के दौरान 24 गेंदों का सामना किया और तीन चौके तथा एक छक्का लगाया। शुरुआती ओवरों में उन्हें तेजी से रन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। संजू सैमसन ने शुरुआती चरण में अधिक स्ट्राइक अपने पास रखी, जबकि वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने अभिषेक को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पावरप्ले के बाद उनका स्ट्राइक रेट भी 100 से नीचे था।

    पारी के नौवें ओवर में शमर स्प्रिंगर की गेंद पर अभिषेक ने आगे बढ़कर जोरदार छक्का लगाया। इसी छक्के के साथ उन्होंने सूर्यकुमार यादव के एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक छक्के लगाने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस तरह अभिषेक ने उस समय नया मुकाम हासिल किया, जब उनका व्यक्तिगत स्कोर बड़ा नहीं था।

    अभिषेक ने वर्ष 2026 की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ नागपुर में उन्होंने 35 गेंदों पर 84 रन बनाए थे। इस पारी में उनके बल्ले से आठ छक्के निकले थे। इसके बाद गुवाहाटी में उन्होंने 20 गेंदों पर नाबाद 68 रन की पारी खेली और पांच छक्के लगाए।

    हालांकि, इन शानदार पारियों के बाद उनका बल्ला कुछ समय तक खामोश रहा। कई मुकाबलों में वह खाता खोलने में भी नाकाम रहे। इसके बावजूद उन्होंने वापसी करते हुए छक्कों के मामले में नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया।

    चौथे टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी का नेतृत्व शाई होप ने किया। उन्होंने 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। पारी की आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर उन्होंने अपना शतक पूरा किया।

    यह मौजूदा दौरे पर उनका चौथा और टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का तीसरा शतक था। शेरफेन रदरफोर्ड ने भी 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन की तेज पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए केवल 43 गेंदों में 91 रन की साझेदारी की, जिससे वेस्टइंडीज बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहा।

    भारतीय गेंदबाजों के लिए यह मुकाबला चुनौतीपूर्ण रहा। मयंक यादव और अर्शदीप सिंह ने अपने-अपने चार ओवरों में 52-52 रन दिए। भारतीय टीम ने क्षेत्ररक्षण के दौरान भी कुछ मौके गंवाए। इसके अलावा टीम ने 18 अतिरिक्त रन दिए, जिसका वेस्टइंडीज को फायदा मिला। मेहमान टीम ने अपनी पारी में कुल 16 छक्के लगाए और बड़े स्कोर के दम पर मुकाबला जीत लिया। इस परिणाम से सीरीज फिर बराबरी पर आ गई, जबकि अभिषेक शर्मा ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के जरिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नया रिकॉर्ड कायम किया।

  • : अभिषेक शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज 2000 रन बनाकर रचा इतिहास, सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि..

    : अभिषेक शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज 2000 रन बनाकर रचा इतिहास, सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि..

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए इतिहास रच दिया। इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में अभिषेक ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 2,000 रन पूरे किए और इस उपलब्धि तक सबसे कम गेंदों में पहुंचने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने भारत के पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। अभिषेक ने अपने आक्रामक अंदाज से गेंदबाजों पर दबाव बनाया और महज 18 गेंदों में अर्धशतक जड़कर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया।

    अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2,000 रन पूरे करने के लिए केवल 1,024 गेंदों का सामना किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड सूर्यकुमार यादव के नाम था, जिन्होंने दिसंबर 2023 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गकेबरहा में 1,164 गेंदों में इस आंकड़े को हासिल किया था। इस तरह अभिषेक ने सूर्यकुमार से 140 गेंदें कम खेलकर यह उपलब्धि हासिल की। उनकी इस कामयाबी ने टी20 क्रिकेट में उनकी तेज रन बनाने की क्षमता को फिर सामने रखा। अभिषेक पहले भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण चर्चा में रहे हैं और इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत की।

    वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक शुरुआत से ही आक्रामक नजर आए। उन्होंने पारी के दूसरे ओवर में रोस्टन चेज की गेंदों पर दो शानदार छक्के लगाए और कवर के ऊपर से चौका भी जड़ा। इसके बाद उन्होंने शमर स्प्रिंगर और शमर जोसेफ के खिलाफ भी बड़े शॉट लगाए। अभिषेक ने मैदान के अलग-अलग हिस्सों में रन बटोरते हुए वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा। उनकी बल्लेबाजी में चौकों और छक्कों का अच्छा तालमेल दिखाई दिया, जिससे भारतीय टीम की रन गति तेज बनी रही।

    अभिषेक ने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। यह इस श्रृंखला में उनका पहला अर्धशतक था और टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का 14वां अर्धशतक भी रहा। उन्होंने अपनी पारी में शुरुआत से ही तेजी बनाए रखी और गेंदबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। इससे पहले श्रृंखला के शुरुआती मुकाबले में वह 21 रन बनाकर आउट हो गए थे। तीसरे मैच में उन्होंने उस प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए दमदार वापसी की। उनकी बल्लेबाजी ने दर्शकों का ध्यान खींचा और भारतीय पारी को तेज शुरुआत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरे छोर पर संजू सैमसन के जल्दी आउट होने के बाद अभिषेक को ईशान किशन का साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाते हुए केवल 20 गेंदों में अर्धशतकीय साझेदारी पूरी कर ली। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लगातार अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। ईशान किशन ने भी उपयोगी योगदान दिया, लेकिन रोस्टन चेज ने उनकी पारी समाप्त कर दी। ईशान ने 37 रन बनाए। इसके बाद भी अभिषेक ने रन बनाने की गति बनाए रखी और भारतीय पारी को मजबूती दी।

    अभिषेक शर्मा की शानदार पारी का अंत दसवें ओवर में हुआ, जब शमर स्प्रिंगर ने उन्हें कैच आउट कर दिया। अभिषेक ने 30 गेंदों में 69 रन बनाए, जिसमें छह चौके और पांच छक्के शामिल थे। उनकी पारी ने भारत को मजबूत स्कोर की दिशा में आगे बढ़ाया। 2,000 रन का रिकॉर्ड और 18 गेंदों में अर्धशतक इस मुकाबले की प्रमुख उपलब्धियां रहीं। अभिषेक के प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि टी20 प्रारूप में तेजी से रन बनाना उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत है।

  • JPN vs IND: पहली बार भारत से टी20 इंटरनेशनल खेलेगा जापान, जानिए टीम के स्टार खिलाड़ियों और बड़े रिकॉर्ड्स की पूरी कहानी

    JPN vs IND: पहली बार भारत से टी20 इंटरनेशनल खेलेगा जापान, जानिए टीम के स्टार खिलाड़ियों और बड़े रिकॉर्ड्स की पूरी कहानी

    नई दिल्ली । क्रिकेट के मैदान पर भारत और जापान की सीनियर पुरुष टीमें पहली बार टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में आमने-सामने होने जा रही हैं। यह ऐतिहासिक मुकाबला 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला जापानी क्रिकेट के लिए बेहद खास माना जा रहा है।

    भारत और जापान इससे पहले सीनियर पुरुष टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में आमने-सामने नहीं आए हैं। ऐसे में 22 सितंबर को होने वाला मुकाबला दोनों देशों के क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा। यह मैच सुजुकी कप के तहत खेला जाएगा और एशियाई खेलों से पहले भारतीय टीम के लिए भी अहम मुकाबला होगा।

    जापान की क्रिकेट टीम भारत की तरह क्रिकेट की बड़ी ताकत नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में टीम ने टी20 क्रिकेट में लगातार अपनी स्थिति मजबूत की है। जापान ने अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मुकाबला अक्टूबर 2022 में खेला था। इसके बाद टीम ने कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान बनाई है।

    जापानी टीम में केंडल कडोवाकी-फ्लेमिंग, सबाओरिश रविचंद्रन, लैकलन यामामोटो-लेक, इब्राहिम ताकाहाशी और डेक्लान सुजुकी जैसे खिलाड़ी अहम भूमिका निभाते हैं। बल्लेबाजी की बात करें तो केंडल कडोवाकी-फ्लेमिंग जापान के टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं। उनके नाम 1760 रन दर्ज हैं।

    सबाओरिश रविचंद्रन जापान के प्रमुख ऑलराउंड खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से टीम को योगदान दिया है। टी20 इंटरनेशनल में जापान की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में भी उनका नाम सबसे ऊपर है। उनके नाम 54 विकेट दर्ज हैं।

    लैकलन यामामोटो-लेक भी जापानी क्रिकेट के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं। उनके नाम टी20 इंटरनेशनल में 825 रन दर्ज हैं। फरवरी 2024 में चीन के खिलाफ उन्होंने नाबाद 134 रन की शानदार पारी खेली थी। यह जापान की ओर से टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।

    जापान के गेंदबाजी रिकॉर्ड में रियो सकुरानो-थॉमस का नाम भी खास है। उन्होंने फरवरी 2024 में थाईलैंड के खिलाफ 26 रन देकर छह विकेट हासिल किए थे। यह जापान की ओर से टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत गेंदबाजी प्रदर्शन है।

    इब्राहिम ताकाहाशी भी टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने जापान के लिए टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 623 रन बनाए हैं और गेंदबाजी में 40 विकेट भी हासिल किए हैं। वहीं माकोटो तानियामा के नाम 38 विकेट दर्ज हैं। ऐसे में जापानी टीम के पास भारत जैसी मजबूत टीम के सामने खुद को साबित करने के लिए कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।

    भारत के खिलाफ मुकाबला जापान के खिलाड़ियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा। भारतीय टीम के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव और विश्व स्तर के खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद जापान अपने घरेलू मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा।

    यह मुकाबला भारत और जापान के बीच खेल संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों से भी इस मैच को जोड़ा गया है। इस मुकाबले के जरिए जापान में क्रिकेट को और लोकप्रिय बनाने तथा दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को मजबूत करने की कोशिश होगी।

    22 सितंबर को होने वाला भारत-जापान टी20 इंटरनेशनल मुकाबला इसलिए भी खास रहेगा क्योंकि पहली बार दोनों देशों की सीनियर पुरुष टीमें क्रिकेट के सबसे तेज लोकप्रिय प्रारूप में आमने-सामने होंगी। जापानी खिलाड़ियों के रिकॉर्ड और भारत की मजबूत टीम के बीच यह मुकाबला क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक नया और यादगार अध्याय बन सकता है।

  • अभिषेक शर्मा ने रचा इतिहास सलामी बल्लेबाज के रूप में बनाया अनोखा रिकॉर्ड भारत ने सीरीज पर किया कब्जा

    अभिषेक शर्मा ने रचा इतिहास सलामी बल्लेबाज के रूप में बनाया अनोखा रिकॉर्ड भारत ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को 90 रन के बड़े अंतर से हरा दिया। इस जीत के कई नायक रहे लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अभिषेक शर्मा की गेंदबाजी की रही। बल्लेबाज के रूप में टीम में शामिल अभिषेक ने इस मुकाबले में बल्ले से नहीं बल्कि गेंद से ऐसा कमाल दिखाया कि उनका नाम भारतीय क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया। उनकी बेहतरीन गेंदबाजी ने भारत की जीत को एकतरफा बना दिया और टीम को तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त दिला दी।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने केवल 2.5 ओवर की गेंदबाजी में 17 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। इस प्रदर्शन के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए सलामी बल्लेबाज के रूप में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी स्पेल फेंकने वाले खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उनके करियर के लिए बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि वह मुख्य रूप से आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस मैच में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से भी टीम के लिए मैच जिताऊ भूमिका निभाई।

    भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अलग अलग प्रारूपों में सलामी बल्लेबाजों द्वारा गेंदबाजी के कई यादगार प्रदर्शन दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट में यह रिकॉर्ड महान ऑलराउंडर वीनू मांकड़ के नाम है जिन्होंने वर्ष 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ 52 रन देकर आठ विकेट हासिल किए थे। वहीं एकदिवसीय क्रिकेट में रवि शास्त्री ने 1991 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 15 रन देकर पांच विकेट लेकर यह उपलब्धि हासिल की थी। अब टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अभिषेक शर्मा ने अपने शानदार स्पेल के दम पर इस सूची में अपना नाम जोड़ लिया है।

    हालांकि बल्लेबाजी में अभिषेक लगातार दूसरे मुकाबले में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। पहले टी20 में एक रन पर आउट होने के बाद दूसरे मुकाबले में भी वह केवल आठ रन बनाकर पवेलियन लौट गए। लेकिन गेंद से उनका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा कि बल्लेबाजी की कमी पूरी तरह छिप गई और वह मैच के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

    भारत की बल्लेबाजी की बात करें तो ईशान किशन ने विस्फोटक अंदाज में 44 गेंदों पर 81 रन की शानदार पारी खेली। उनकी पारी में नौ चौके और दो छक्के शामिल रहे। तिलक वर्मा ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 29 गेंदों पर नाबाद 60 रन बनाए जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने 25 रन का उपयोगी योगदान दिया। इन पारियों की बदौलत भारत ने निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट पर 219 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

    220 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आई। पूरी टीम 129 रन पर सिमट गई। मेजबान टीम की ओर से ब्रायन बेनेट ने सबसे अधिक 32 रन बनाए लेकिन उन्हें किसी दूसरे बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। अभिषेक शर्मा के तीन विकेटों के अलावा यश ठाकुर और प्रिंस यादव ने भी दो दो विकेट लेकर भारत की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    इस शानदार जीत के साथ भारतीय टीम ने तीन मैचों की टी20 श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। साथ ही अभिषेक शर्मा ने यह साबित कर दिया कि वह केवल विस्फोटक बल्लेबाज ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी गेंदबाजी से भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

  • सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, हरारे में दूसरे टी20 में भारत का पलड़ा फिर दिख रहा भारी

    सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, हरारे में दूसरे टी20 में भारत का पलड़ा फिर दिख रहा भारी

    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला 25 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। पहला मैच सात विकेट से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर चुकी भारतीय टीम अब दूसरा मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम ने पहले मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन किया था, जिससे टीम प्रबंधन के सामने विजयी संयोजन को बरकरार रखने का विकल्प मजबूत माना जा रहा है।

    पहले मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा करते हुए आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया। शीर्ष क्रम ने टीम को मजबूत शुरुआत दी, जबकि मध्यक्रम ने बिना किसी दबाव के जीत सुनिश्चित कर दी। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने तेज अर्धशतक लगाकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया और टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी संयमित नेतृत्व करते हुए खिलाड़ियों का प्रभावी उपयोग किया, जिससे टीम पूरे मैच में नियंत्रण में दिखाई दी।

    गेंदबाजी विभाग में तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। नई गेंद से मिले अतिरिक्त उछाल का भारतीय गेंदबाजों ने पूरा फायदा उठाया। मयंक यादव की रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ ने विपक्षी बल्लेबाजी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अन्य युवा गेंदबाजों ने भी अनुशासित प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी। ऐसे में दूसरे मुकाबले में भी भारतीय टीम उसी गेंदबाजी संयोजन के साथ उतर सकती है।

    संभावित प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पहले मैच में सभी विभागों के संतुलित प्रदर्शन को देखते हुए टीम प्रबंधन विजयी संयोजन पर भरोसा जता सकता है। हालांकि अंतिम एकादश को लेकर फैसला मैच से पहले पिच और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया जाएगा। यदि कोई बदलाव होता भी है तो वह गेंदबाजी विभाग में सीमित हो सकता है।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है। मैच के शुरुआती चरण में नई गेंद को अतिरिक्त उछाल और हल्की मूवमेंट मिल सकती है, जिससे तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना रहती है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान होती जाती है। स्पिनरों को यहां बहुत अधिक सहायता मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए तेज गेंदबाज एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इस मैदान पर 170 से 180 रन का स्कोर प्रतिस्पर्धी माना जाता है।

    रिकॉर्ड की बात करें तो हरारे में भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत रहा है। हाल के मुकाबलों में भारतीय टीम ने लगातार प्रभावशाली जीत दर्ज की है और मौजूदा फॉर्म भी उसके पक्ष में दिखाई देता है। दूसरी ओर, जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान का लाभ उठाकर सीरीज में वापसी की कोशिश करेगा। मेजबान टीम के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा होगा, क्योंकि हार की स्थिति में वह सीरीज गंवा देगी।

    मौजूदा फॉर्म, टीम संतुलन और पहले मैच के प्रदर्शन को देखते हुए भारत को दूसरे टी20 में भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यदि भारतीय बल्लेबाज शुरुआती बढ़त बनाए रखते हैं और तेज गेंदबाज नई गेंद का प्रभावी उपयोग करते हैं, तो टीम के पास लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने का सुनहरा अवसर रहेगा।

  • वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड

    वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की शुरुआत टीम इंडिया ने बेहद शानदार अंदाज में की। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए पहले मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त देते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। इस जीत की सबसे बड़ी खासियत 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी रही जिन्होंने अपनी तूफानी पारी से मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। भारत ने 126 रन के लक्ष्य को सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला समाप्त कर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 120 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गेंदों के लिहाज से अपनी चौथी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इस मुकाबले में पहले गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह दबाव में रखा। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद भी विकेटों का पतन लगातार जारी रहा और 32 रन तक जिम्बाब्वे अपने चार प्रमुख बल्लेबाज गंवा चुका था। भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से सटीक लाइन और लेंथ के साथ मेजबान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुश्किल परिस्थिति में रेयान बर्ल और वेस्ली मधेवेरे ने पारी को संभालने का प्रयास किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को कुछ हद तक संकट से बाहर निकाला। मधेवेरे ने बाद में तादिवानाशे मारुमानी के साथ भी उपयोगी रन जोड़े जिससे जिम्बाब्वे का स्कोर सम्मानजनक स्थिति तक पहुंच सका। मधेवेरे ने 39 रन बनाए जबकि मारुमानी 27 रन बनाकर नाबाद लौटे। रेयान बर्ल ने 26 रन का योगदान दिया और जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए।

    भारत की ओर से युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो-दो विकेट अपने नाम किए। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई ने भी एक-एक विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को कभी खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ने लक्ष्य को सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत भले ही अभिषेक शर्मा के जल्दी आउट होने से हुई लेकिन इसके बाद वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक तेवर से मैच का रंग बदल दिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ तेज साझेदारी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। वैभव ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें चार चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। इस अर्धशतक के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा पुरुष बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

    वैभव के आउट होने के बाद ईशान किशन ने 35 रन की उपयोगी पारी खेली जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने नाबाद 28 रन बनाकर जीत की औपचारिकता पूरी की। अंत में तिलक वर्मा ने भी नाबाद रहकर टीम को आसान जीत तक पहुंचाया। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजरबानी ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारवा को एक सफलता मिली।

    यह मुकाबला कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी खास रहा क्योंकि बतौर कप्तान उन्हें लगातार निराशाओं के बाद पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय जीत मिली। इससे पहले आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब भारत की नजरें शेष दो मुकाबलों में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर खेले जाने वाले अगले दोनों मैचों में भारतीय टीम अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखने के इरादे से उतरेगी जबकि जिम्बाब्वे वापसी की कोशिश करेगा।

  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

    ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस हार के साथ ही भारतीय टीम ने 2019 के बाद पहली बार लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाई हैं। इससे पहले भारत आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज 0-2 से हार चुका था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन ही बना सकी। बल्लेबाज एक बार फिर बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और टीम चुनौतीपूर्ण स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। जवाब में इंग्लैंड ने सिर्फ 13.5 ओवर में एक विकेट खोकर 159 रन बनाते हुए मुकाबला 37 गेंद शेष रहते अपने नाम कर लिया।

    गेंदों के लिहाज से यह भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीसरी सबसे बड़ी हार रही। वहीं 150 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने विकेटों के लिहाज से अपनी संयुक्त रूप से दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इंग्लैंड की जीत के हीरो कप्तान हैरी ब्रूक रहे, जिन्होंने सिर्फ 35 गेंदों में 79 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर फिल साल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 68 गेंदों में 146 रन की अविजित साझेदारी कर मैच पूरी तरह इंग्लैंड के पक्ष में कर दिया।

    यह जीत इंग्लैंड के लिए ऐतिहासिक भी रही। पहली बार उसने भारत को दो या उससे अधिक मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज में हराया है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई छह टी20 द्विपक्षीय सीरीज में भारत ने पांच जीती थीं, जबकि एक सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई थी।

    अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथेम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि इंग्लैंड की नजर क्लीन स्वीप पर होगी।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर अपनी फिरकी का लोहा मनवाते हुए एक बेहद ऐतिहासिक और दुर्लभ उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अक्षर पटेल ने यह विशेष मुकाम हासिल किया। उन्होंने इस मुकाबले में कसी हुई गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान हैरी ब्रूक का महत्वपूर्ण विकेट चटकाया। इस विकेट को हासिल करने के साथ ही अक्षर पटेल के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट पूरे हो गए हैं, जिसने उन्हें एक बेहद खास और विशिष्ट क्लब में शामिल कर दिया है।

    अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजर रहे 32 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल अब भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 100 विकेट का जादुई आंकड़ा छूने वाले चौथे गेंदबाज बन गए हैं। इस रिकॉर्ड की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह यह मुकाम हासिल करने वाले भारत के इतिहास के पहले स्पिन गेंदबाज हैं। उनसे पहले भारत के लिए यह उपलब्धि केवल तीन तेज गेंदबाजों ने ही हासिल की थी, जिसमें अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या का नाम शामिल है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में अब तक कई महान स्पिनरों ने टी20 प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन कोई भी इस प्रतिष्ठित आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था, जिससे अक्षर की यह सफलता और अधिक मायने रखती है।

    अक्षर पटेल ने इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को छूने के लिए कुल 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। मैनचेस्टर टी20 मैच के पांचवें ओवर में जब उन्होंने हैरी ब्रूक को अपना शिकार बनाया, तो उन्होंने न केवल मैच में भारत की स्थिति मजबूत की बल्कि अपना नाम भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा दिया। भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अर्शदीप सिंह 134 विकेटों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 121 विकेट और हार्दिक पंड्या 114 विकेट के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं। स्पिन गेंदबाजों की बात करें, तो अक्षर के बाद युजवेंद्र चहल इस सूची में सबसे करीब हैं, जिनके नाम 80 मैचों में 96 विकेट दर्ज हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में अक्षर पटेल ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर खुद को सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद और उपयोगी खिलाड़ियों में स्थापित किया है। मैच की शुरुआत में नई गेंद से गेंदबाजी करनी हो या फिर बीच के ओवरों में रनों की गति पर अंकुश लगाना हो, भारतीय कप्तान हर मुश्किल परिस्थिति में अक्सर अक्षर पटेल की ओर ही देखते हैं। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विकेट के चारों ओर गेंद को टर्न कराने की कला और अत्यधिक दबाव वाले क्षणों में शांत रहकर विकेट निकालने की असाधारण क्षमता उन्हें समकालीन क्रिकेट में अन्य स्पिनरों से काफी अलग बनाती है।

    केवल गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि अक्षर पटेल ने निचले क्रम में आकर कई महत्वपूर्ण अवसरों पर बल्ले से भी टीम इंडिया के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है और मैच जिताऊ पारियां खेली हैं। यही कारण है कि आज वह क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय राष्ट्रीय टीम का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा बन चुके हैं। 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेटों का आंकड़ा पार करना किसी भी आधुनिक गेंदबाज के करियर की एक महान व्यक्तिगत बानगी माना जाता है। खेल के प्रति उनके समर्पण और निरंतरता को देखते हुए क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनका यह शानदार प्रदर्शन आगामी मैचों में भी इसी तरह जारी रहा, तो वह जल्द ही भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे सफल गेंदबाज बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेंगे।