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  • अभिषेक शर्मा ने रचा इतिहास सलामी बल्लेबाज के रूप में बनाया अनोखा रिकॉर्ड भारत ने सीरीज पर किया कब्जा

    अभिषेक शर्मा ने रचा इतिहास सलामी बल्लेबाज के रूप में बनाया अनोखा रिकॉर्ड भारत ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को 90 रन के बड़े अंतर से हरा दिया। इस जीत के कई नायक रहे लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अभिषेक शर्मा की गेंदबाजी की रही। बल्लेबाज के रूप में टीम में शामिल अभिषेक ने इस मुकाबले में बल्ले से नहीं बल्कि गेंद से ऐसा कमाल दिखाया कि उनका नाम भारतीय क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया। उनकी बेहतरीन गेंदबाजी ने भारत की जीत को एकतरफा बना दिया और टीम को तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त दिला दी।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने केवल 2.5 ओवर की गेंदबाजी में 17 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। इस प्रदर्शन के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए सलामी बल्लेबाज के रूप में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी स्पेल फेंकने वाले खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उनके करियर के लिए बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि वह मुख्य रूप से आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस मैच में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से भी टीम के लिए मैच जिताऊ भूमिका निभाई।

    भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अलग अलग प्रारूपों में सलामी बल्लेबाजों द्वारा गेंदबाजी के कई यादगार प्रदर्शन दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट में यह रिकॉर्ड महान ऑलराउंडर वीनू मांकड़ के नाम है जिन्होंने वर्ष 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ 52 रन देकर आठ विकेट हासिल किए थे। वहीं एकदिवसीय क्रिकेट में रवि शास्त्री ने 1991 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 15 रन देकर पांच विकेट लेकर यह उपलब्धि हासिल की थी। अब टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अभिषेक शर्मा ने अपने शानदार स्पेल के दम पर इस सूची में अपना नाम जोड़ लिया है।

    हालांकि बल्लेबाजी में अभिषेक लगातार दूसरे मुकाबले में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। पहले टी20 में एक रन पर आउट होने के बाद दूसरे मुकाबले में भी वह केवल आठ रन बनाकर पवेलियन लौट गए। लेकिन गेंद से उनका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा कि बल्लेबाजी की कमी पूरी तरह छिप गई और वह मैच के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

    भारत की बल्लेबाजी की बात करें तो ईशान किशन ने विस्फोटक अंदाज में 44 गेंदों पर 81 रन की शानदार पारी खेली। उनकी पारी में नौ चौके और दो छक्के शामिल रहे। तिलक वर्मा ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 29 गेंदों पर नाबाद 60 रन बनाए जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने 25 रन का उपयोगी योगदान दिया। इन पारियों की बदौलत भारत ने निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट पर 219 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

    220 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आई। पूरी टीम 129 रन पर सिमट गई। मेजबान टीम की ओर से ब्रायन बेनेट ने सबसे अधिक 32 रन बनाए लेकिन उन्हें किसी दूसरे बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। अभिषेक शर्मा के तीन विकेटों के अलावा यश ठाकुर और प्रिंस यादव ने भी दो दो विकेट लेकर भारत की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    इस शानदार जीत के साथ भारतीय टीम ने तीन मैचों की टी20 श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। साथ ही अभिषेक शर्मा ने यह साबित कर दिया कि वह केवल विस्फोटक बल्लेबाज ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी गेंदबाजी से भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

  • सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, हरारे में दूसरे टी20 में भारत का पलड़ा फिर दिख रहा भारी

    सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, हरारे में दूसरे टी20 में भारत का पलड़ा फिर दिख रहा भारी

    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला 25 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। पहला मैच सात विकेट से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर चुकी भारतीय टीम अब दूसरा मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम ने पहले मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन किया था, जिससे टीम प्रबंधन के सामने विजयी संयोजन को बरकरार रखने का विकल्प मजबूत माना जा रहा है।

    पहले मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा करते हुए आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया। शीर्ष क्रम ने टीम को मजबूत शुरुआत दी, जबकि मध्यक्रम ने बिना किसी दबाव के जीत सुनिश्चित कर दी। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने तेज अर्धशतक लगाकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया और टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी संयमित नेतृत्व करते हुए खिलाड़ियों का प्रभावी उपयोग किया, जिससे टीम पूरे मैच में नियंत्रण में दिखाई दी।

    गेंदबाजी विभाग में तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। नई गेंद से मिले अतिरिक्त उछाल का भारतीय गेंदबाजों ने पूरा फायदा उठाया। मयंक यादव की रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ ने विपक्षी बल्लेबाजी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अन्य युवा गेंदबाजों ने भी अनुशासित प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी। ऐसे में दूसरे मुकाबले में भी भारतीय टीम उसी गेंदबाजी संयोजन के साथ उतर सकती है।

    संभावित प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पहले मैच में सभी विभागों के संतुलित प्रदर्शन को देखते हुए टीम प्रबंधन विजयी संयोजन पर भरोसा जता सकता है। हालांकि अंतिम एकादश को लेकर फैसला मैच से पहले पिच और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया जाएगा। यदि कोई बदलाव होता भी है तो वह गेंदबाजी विभाग में सीमित हो सकता है।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है। मैच के शुरुआती चरण में नई गेंद को अतिरिक्त उछाल और हल्की मूवमेंट मिल सकती है, जिससे तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना रहती है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान होती जाती है। स्पिनरों को यहां बहुत अधिक सहायता मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए तेज गेंदबाज एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इस मैदान पर 170 से 180 रन का स्कोर प्रतिस्पर्धी माना जाता है।

    रिकॉर्ड की बात करें तो हरारे में भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत रहा है। हाल के मुकाबलों में भारतीय टीम ने लगातार प्रभावशाली जीत दर्ज की है और मौजूदा फॉर्म भी उसके पक्ष में दिखाई देता है। दूसरी ओर, जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान का लाभ उठाकर सीरीज में वापसी की कोशिश करेगा। मेजबान टीम के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा होगा, क्योंकि हार की स्थिति में वह सीरीज गंवा देगी।

    मौजूदा फॉर्म, टीम संतुलन और पहले मैच के प्रदर्शन को देखते हुए भारत को दूसरे टी20 में भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यदि भारतीय बल्लेबाज शुरुआती बढ़त बनाए रखते हैं और तेज गेंदबाज नई गेंद का प्रभावी उपयोग करते हैं, तो टीम के पास लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने का सुनहरा अवसर रहेगा।

  • वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड

    वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की शुरुआत टीम इंडिया ने बेहद शानदार अंदाज में की। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए पहले मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त देते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। इस जीत की सबसे बड़ी खासियत 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी रही जिन्होंने अपनी तूफानी पारी से मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। भारत ने 126 रन के लक्ष्य को सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला समाप्त कर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 120 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गेंदों के लिहाज से अपनी चौथी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इस मुकाबले में पहले गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह दबाव में रखा। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद भी विकेटों का पतन लगातार जारी रहा और 32 रन तक जिम्बाब्वे अपने चार प्रमुख बल्लेबाज गंवा चुका था। भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से सटीक लाइन और लेंथ के साथ मेजबान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुश्किल परिस्थिति में रेयान बर्ल और वेस्ली मधेवेरे ने पारी को संभालने का प्रयास किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को कुछ हद तक संकट से बाहर निकाला। मधेवेरे ने बाद में तादिवानाशे मारुमानी के साथ भी उपयोगी रन जोड़े जिससे जिम्बाब्वे का स्कोर सम्मानजनक स्थिति तक पहुंच सका। मधेवेरे ने 39 रन बनाए जबकि मारुमानी 27 रन बनाकर नाबाद लौटे। रेयान बर्ल ने 26 रन का योगदान दिया और जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए।

    भारत की ओर से युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो-दो विकेट अपने नाम किए। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई ने भी एक-एक विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को कभी खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ने लक्ष्य को सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत भले ही अभिषेक शर्मा के जल्दी आउट होने से हुई लेकिन इसके बाद वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक तेवर से मैच का रंग बदल दिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ तेज साझेदारी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। वैभव ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें चार चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। इस अर्धशतक के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा पुरुष बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

    वैभव के आउट होने के बाद ईशान किशन ने 35 रन की उपयोगी पारी खेली जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने नाबाद 28 रन बनाकर जीत की औपचारिकता पूरी की। अंत में तिलक वर्मा ने भी नाबाद रहकर टीम को आसान जीत तक पहुंचाया। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजरबानी ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारवा को एक सफलता मिली।

    यह मुकाबला कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी खास रहा क्योंकि बतौर कप्तान उन्हें लगातार निराशाओं के बाद पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय जीत मिली। इससे पहले आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब भारत की नजरें शेष दो मुकाबलों में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर खेले जाने वाले अगले दोनों मैचों में भारतीय टीम अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखने के इरादे से उतरेगी जबकि जिम्बाब्वे वापसी की कोशिश करेगा।

  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

    ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस हार के साथ ही भारतीय टीम ने 2019 के बाद पहली बार लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाई हैं। इससे पहले भारत आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज 0-2 से हार चुका था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन ही बना सकी। बल्लेबाज एक बार फिर बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और टीम चुनौतीपूर्ण स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। जवाब में इंग्लैंड ने सिर्फ 13.5 ओवर में एक विकेट खोकर 159 रन बनाते हुए मुकाबला 37 गेंद शेष रहते अपने नाम कर लिया।

    गेंदों के लिहाज से यह भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीसरी सबसे बड़ी हार रही। वहीं 150 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने विकेटों के लिहाज से अपनी संयुक्त रूप से दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इंग्लैंड की जीत के हीरो कप्तान हैरी ब्रूक रहे, जिन्होंने सिर्फ 35 गेंदों में 79 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर फिल साल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 68 गेंदों में 146 रन की अविजित साझेदारी कर मैच पूरी तरह इंग्लैंड के पक्ष में कर दिया।

    यह जीत इंग्लैंड के लिए ऐतिहासिक भी रही। पहली बार उसने भारत को दो या उससे अधिक मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज में हराया है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई छह टी20 द्विपक्षीय सीरीज में भारत ने पांच जीती थीं, जबकि एक सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई थी।

    अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथेम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि इंग्लैंड की नजर क्लीन स्वीप पर होगी।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर अपनी फिरकी का लोहा मनवाते हुए एक बेहद ऐतिहासिक और दुर्लभ उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अक्षर पटेल ने यह विशेष मुकाम हासिल किया। उन्होंने इस मुकाबले में कसी हुई गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान हैरी ब्रूक का महत्वपूर्ण विकेट चटकाया। इस विकेट को हासिल करने के साथ ही अक्षर पटेल के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट पूरे हो गए हैं, जिसने उन्हें एक बेहद खास और विशिष्ट क्लब में शामिल कर दिया है।

    अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजर रहे 32 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल अब भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 100 विकेट का जादुई आंकड़ा छूने वाले चौथे गेंदबाज बन गए हैं। इस रिकॉर्ड की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह यह मुकाम हासिल करने वाले भारत के इतिहास के पहले स्पिन गेंदबाज हैं। उनसे पहले भारत के लिए यह उपलब्धि केवल तीन तेज गेंदबाजों ने ही हासिल की थी, जिसमें अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या का नाम शामिल है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में अब तक कई महान स्पिनरों ने टी20 प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन कोई भी इस प्रतिष्ठित आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था, जिससे अक्षर की यह सफलता और अधिक मायने रखती है।

    अक्षर पटेल ने इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को छूने के लिए कुल 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। मैनचेस्टर टी20 मैच के पांचवें ओवर में जब उन्होंने हैरी ब्रूक को अपना शिकार बनाया, तो उन्होंने न केवल मैच में भारत की स्थिति मजबूत की बल्कि अपना नाम भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा दिया। भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अर्शदीप सिंह 134 विकेटों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 121 विकेट और हार्दिक पंड्या 114 विकेट के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं। स्पिन गेंदबाजों की बात करें, तो अक्षर के बाद युजवेंद्र चहल इस सूची में सबसे करीब हैं, जिनके नाम 80 मैचों में 96 विकेट दर्ज हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में अक्षर पटेल ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर खुद को सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद और उपयोगी खिलाड़ियों में स्थापित किया है। मैच की शुरुआत में नई गेंद से गेंदबाजी करनी हो या फिर बीच के ओवरों में रनों की गति पर अंकुश लगाना हो, भारतीय कप्तान हर मुश्किल परिस्थिति में अक्सर अक्षर पटेल की ओर ही देखते हैं। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विकेट के चारों ओर गेंद को टर्न कराने की कला और अत्यधिक दबाव वाले क्षणों में शांत रहकर विकेट निकालने की असाधारण क्षमता उन्हें समकालीन क्रिकेट में अन्य स्पिनरों से काफी अलग बनाती है।

    केवल गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि अक्षर पटेल ने निचले क्रम में आकर कई महत्वपूर्ण अवसरों पर बल्ले से भी टीम इंडिया के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है और मैच जिताऊ पारियां खेली हैं। यही कारण है कि आज वह क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय राष्ट्रीय टीम का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा बन चुके हैं। 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेटों का आंकड़ा पार करना किसी भी आधुनिक गेंदबाज के करियर की एक महान व्यक्तिगत बानगी माना जाता है। खेल के प्रति उनके समर्पण और निरंतरता को देखते हुए क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनका यह शानदार प्रदर्शन आगामी मैचों में भी इसी तरह जारी रहा, तो वह जल्द ही भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे सफल गेंदबाज बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेंगे।

  • पहले ही मैच में कप्तानी की कड़ी परीक्षा, श्रेयस अय्यर के साथ जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई कप्तान नहीं चाहेगा

    पहले ही मैच में कप्तानी की कड़ी परीक्षा, श्रेयस अय्यर के साथ जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई कप्तान नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम  का आयरलैंड दौरा उम्मीदों के विपरीत शुरुआत के साथ आगे बढ़ा। बेलफास्ट में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में मेजबान आयरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 34 रन से शिकस्त दे दी। यह मुकाबला सिर्फ हार की वजह से ही चर्चा में नहीं रहा बल्कि भारतीय टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया जिसे कोई भी कप्तान अपने करियर की शुरुआत में नहीं देखना चाहता।

    श्रेयस अय्यर पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत की कप्तानी कर रहे थे लेकिन उनका डेब्यू जीत के बजाय हार के साथ समाप्त हुआ। इसी के साथ वह उन चुनिंदा भारतीय कप्तानों की सूची में शामिल हो गए जिन्होंने अपने पहले टी20 कप्तानी मैच में हार का सामना किया। यह हार इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि भारत का जनवरी 2024 से चला आ रहा टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में अजेय रहने का सिलसिला भी टूट गया।

    मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 183 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। जवाब में भारतीय बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और पूरी टीम 18.5 ओवर में 148 रन पर सिमट गई। भारतीय बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे जबकि आयरलैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। परिणामस्वरूप भारत को 34 रन से हार झेलनी पड़ी।

    इस हार के साथ श्रेयस अय्यर का नाम भारतीय क्रिकेट के कुछ बड़े कप्तानों के साथ एक अनचाही सूची में जुड़ गया। इससे पहले विराट कोहली भी अपने टी20 कप्तानी डेब्यू में जीत दर्ज नहीं कर सके थे। साल 2017 में कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए अपने पहले टी20 मुकाबले में भारत को सात विकेट से हार मिली थी। विराट के नाम एक और अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वह भारत के ऐसे पहले कप्तान बने जिन्होंने टेस्ट वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में कप्तानी की शुरुआत हार के साथ की।

    साल 2022 में ऋषभ पंत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी20 सीरीज में कप्तानी का मौका मिला था। उस मुकाबले में भारत ने 211 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था लेकिन गेंदबाज लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके और पंत का कप्तानी डेब्यू भी हार के साथ समाप्त हुआ।

    इसके बाद साल 2024 में शुभमन गिल को जिम्बाब्वे दौरे पर पहली बार टी20 टीम की कमान मिली थी। हरारे में खेले गए पहले मुकाबले में भारत को 13 रन से हार मिली थी। हालांकि गिल ने शानदार वापसी करते हुए पूरी सीरीज 4-1 से अपने नाम की और आलोचकों को करारा जवाब दिया था।

    अब साल 2026 में श्रेयस अय्यर भी इसी सूची का हिस्सा बन गए हैं। हालांकि क्रिकेट में एक मुकाबला किसी कप्तान की क्षमता तय नहीं करता। भारतीय टीम के सामने अब सीरीज में वापसी करने का मौका है और श्रेयस अय्यर की कोशिश होगी कि अगले मुकाबलों में टीम बेहतर प्रदर्शन करे तथा अपनी कप्तानी का सफल आगाज जीत के साथ आगे बढ़ाए। भारतीय टीम के पास मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण है इसलिए अगले मैचों में वापसी की पूरी उम्मीद बनी हुई है।

  • IND vs SA: टी20 सीरीज से पहले ICC ने टीम इंडिया को फाइन किया, जानें वजह

    IND vs SA: टी20 सीरीज से पहले ICC ने टीम इंडिया को फाइन किया, जानें वजह


    नई दिल्ली /भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज मंगलवार, 9 दिसंबर से शुरू हो रही है। इस सीरीज से एक दिन पहले ही ICC ने टीम इंडिया पर जुर्माना लगाया।

    ICC ने क्यों लगाई कार्रवाई
    रायपुर में खेले गए दूसरे वनडे में टीम इंडिया ने स्लो ओवर रेट बनाए रखा, जिसके कारण ICC ने मैच फीस का 10% फाइन लगाया। ICC ने बताया कि यह कार्रवाई उनके कोड ऑफ कंडक्ट फॉर प्लेयर्स एंड प्लेयर सपोर्ट पर्सनल के आर्टिकल 2.22 के तहत की गई, जो न्यूनतम ओवर रेट उल्लंघनों से संबंधित है।

    एमिरेट्स ICC एलीट पैनल के मैच रेफरी रिची रिचर्डसन ने यह जुर्माना लगाया क्योंकि KL राहुल की टीम निर्धारित समय में दो ओवर पीछे रह गई थी।

    KL राहुल ने स्वीकार किया गलती
    नियमों के अनुसार, प्रत्येक ओवर के लिए जो समय पर नहीं फेंका जाता, खिलाड़ियों पर उनकी मैच फीस का 5% जुर्माना लगाया जाता है। स्टैंड-इन कप्तान KL राहुल ने गलती स्वीकार कर ली, इसलिए किसी औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।

    टी20 सीरीज में कप्तानी और उपकप्तानी
    पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया की कप्तानी हार्दिक पांड्या को सौंपी गई है। उपकप्तान की जिम्मेदारी शुभमन गिल को मिली है, जो गर्दन की चोट के कारण वनडे सीरीज से बाहर थे और अब टी20 में वापसी कर रहे हैं।

    सीरीज का शेड्यूल

    1st T20: 9 दिसंबर, बाराबती स्टेडियम, कटक

    2nd T20: लखनऊ

    3rd T20: धर्मशाला

    4th T20: तिरुवनंतपुरम

    5th T20: चेन्नई

    भारत युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण वाली टीम के साथ जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

    रायपुर वनडे की झलक
    भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से जीती। हालांकि, जिस मैच में टीम को ICC फाइन लगा, उसमें दक्षिण अफ्रीका ने जीत दर्ज की। विराट कोहली (102) और ऋतुराज गायकवाड़ (105) की शतकीय पारियों की मदद से भारत ने 358 रन बनाए, लेकिन ओस की वजह से लक्ष्य का पीछा आसान हो गया और एडन मार्करम की 110 रनों की पारी के दम पर मेहमान टीम ने जीत दर्ज की।

    टी20 सीरीज की शुरुआत
    टी20 सीरीज का पहला मैच 9 दिसंबर को कटक के बाराबती स्टेडियम में शाम 7 बजे से खेला जाएगा। मैच का लाइव प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर और लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार ऐप एवं वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।