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  • नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026: रविंद्रनाथ टैगोर के बाद अमिताव घोष के नाम की चर्चा, आज होगा विजेता का ऐलान

    नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026: रविंद्रनाथ टैगोर के बाद अमिताव घोष के नाम की चर्चा, आज होगा विजेता का ऐलान


    नई दिल्ली ।नोबेल पुरस्कार 2026 के तहत मेडिसिन, केमिस्ट्री और फिजिक्स के पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। अब गुरुवार को साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान किया जाएगा। पुरस्कार की घोषणा से पहले संभावित विजेताओं को लेकर चर्चा तेज है। इस बीच भारतीय लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में शामिल बताया जा रहा है। यदि उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो वह यह सम्मान पाने वाले दूसरे भारतीय होंगे।

    साहित्य के क्षेत्र में भारत की ओर से अब तक केवल रविंद्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला है। टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई भी थे। ऐसे में अमिताव घोष के नाम की चर्चा ने भारतीय साहित्य के संदर्भ में इस पुरस्कार को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि, अभी साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    अमिताव घोष की साहित्यिक रचनाओं में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उनकी चर्चित किताबों में ‘सी ऑफ पॉपीज’ और ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ शामिल हैं। ‘सी ऑफ पॉपीज’ वर्ष 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल हुई थी। यह किताब उनकी आइबिस ट्रिलॉजी का पहला भाग है।

    ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ में जलवायु परिवर्तन और इंसानों पर उसके प्रभाव से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है। अमिताव घोष की किताबों में इतिहास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के साथ बदलती दुनिया से संबंधित विषय भी दिखाई देते हैं। इसी साहित्यिक काम के कारण इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार के संभावित नामों में उनका उल्लेख किया जा रहा है।

    2026 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा कई चरणों में की जा रही है। साहित्य के पुरस्कार की घोषणा गुरुवार को होने वाली है। इससे पहले संभावित विजेता के तौर पर कई नामों को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। बुकमेकरों की ओर से लगाए गए अनुमानों में अमिताव घोष का नाम भी शामिल है। हालांकि, विजेता का वास्तविक फैसला पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यदि अमिताव घोष को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो 1913 में रविंद्रनाथ टैगोर के बाद साहित्य के क्षेत्र में यह भारत के लिए दूसरा नोबेल सम्मान होगा। टैगोर को यह पुरस्कार मिलने के बाद लंबे समय से किसी अन्य भारतीय लेखक को साहित्य का नोबेल नहीं मिला है। इसी वजह से घोष के नाम की चर्चा को खास महत्व मिल रहा है।

    नोबेल पुरस्कार से जुड़े विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार प्राप्त करने वालों को मेडल, डिप्लोमा और इनामी राशि प्रदान की जाएगी। इस पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 11.5 करोड़ रुपये के बराबर है। साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता की घोषणा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस बार यह सम्मान किस लेखक को दिया जाता है।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर रहेंगे, जहां उनके स्वागत की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जकार्ता सहित कई प्रमुख स्थानों पर स्वागत की तैयारियों के बीच इस दौरे का सांस्कृतिक महत्व भी विशेष रूप से चर्चा में है।

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में द्विपक्षीय बैठकों के साथ भारतीय समुदाय से संवाद भी शामिल है। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में इस यात्रा को अहम माना जा रहा है।

    इस दौरे की एक विशेष उपलब्धि यह भी होगी कि प्रधानमंत्री मोदी को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा पर आधारित एक विशेष पुस्तक भेंट की जाएगी। यह वर्ष टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिससे इस यात्रा का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया है। पुस्तक में टैगोर की यात्रा, उनके अनुभवों और भारत तथा इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

    बताया गया है कि इस पुस्तक पर पिछले दो वर्षों से शोध और लेखन का कार्य किया गया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर इसके पूर्ण होने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लेखक का मानना है कि यह पुस्तक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

    रवींद्रनाथ टैगोर ने लगभग एक सदी पहले इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान वहां की संस्कृति, कला और परंपराओं का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने जावा, बाली, सुमात्रा, जकार्ता और अन्य क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए भारतीय सांस्कृतिक प्रभावों को करीब से देखा। विशेष रूप से रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक स्वरूपों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था।

    अपनी यात्रा के दौरान टैगोर ने प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर का भी भ्रमण किया और वहां की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कला, नृत्य और पारंपरिक शिल्प में गहरी रुचि दिखाई। उनकी इस यात्रा का प्रभाव बाद में भारतीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी दिखाई दिया, जहां दक्षिण-पूर्व एशियाई कला और परंपराओं को विशेष महत्व दिया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को भी नई पहचान देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को भविष्य में और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।