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  • अफगानिस्तान सीमा बंद करने से पाकिस्तान के व्यापार को झटका, कारोबार 74 प्रतिशत गिरा, तालिबान ने तलाशे नए रास्ते

    अफगानिस्तान सीमा बंद करने से पाकिस्तान के व्यापार को झटका, कारोबार 74 प्रतिशत गिरा, तालिबान ने तलाशे नए रास्ते

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा बंद होने का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ा है। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक जहांगीर खट्टक के मुताबिक, इस फैसले से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दूसरे देशों के साथ कारोबार के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति का उद्देश्य सीमा बंद करके तालिबान पर दबाव बनाना था, लेकिन इसके परिणाम उम्मीदों के विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

    पाकिस्तान ने पिछले वर्ष तालिबान के साथ तनाव के बाद अफगानिस्तान से लगने वाली प्रमुख सीमा चौकियों को बंद कर दिया था। इनमें तोरखम, स्पिन बोल्डक, खरलाची, गुलाम खान और अंगूर अड्डा क्रॉसिंग शामिल हैं। पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व को उम्मीद थी कि व्यापारिक आवाजाही रोकने से तालिबान पर दबाव बढ़ेगा और वह पाकिस्तान की शर्तें मानने के लिए तैयार होगा। हालांकि, सीमा बंद रहने से दोनों तरफ के व्यापारियों को नुकसान हुआ है।

    जहांगीर खट्टक ने कहा कि सीमा बंद होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। उनके मुताबिक, सीमा के दोनों ओर कारोबार करने वाले कई व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का प्रभाव केवल अफगानिस्तान के साथ होने वाले प्रत्यक्ष व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण पाकिस्तान के मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।

    पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को इस स्थिति से खास नुकसान होने की बात कही गई है। इसके अलावा सीमेंट और कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ा है। अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंचने वाले पाकिस्तानी कारोबारियों के लिए सीमा बंद होने से व्यापारिक मार्ग सीमित हो गए हैं। निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और पाकिस्तान के लिए इन बाजारों में अपनी पहुंच बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़े भी गिरावट की ओर संकेत करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर से घटकर 358 मिलियन डॉलर रह गया। यह लगभग 74 प्रतिशत की गिरावट है। व्यापार में इस कमी से सीमा पार सामान भेजने वाले कारोबारियों और संबंधित उद्योगों पर दबाव बढ़ा है।

    दूसरी ओर, तालिबान प्रशासन पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्ते विकसित करने की कोशिश कर रहा है। अफगानिस्तान ने चीन के साथ वखान कॉरिडोर के जरिए संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस मार्ग के माध्यम से चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ सीधे व्यापार की संभावनाएं बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान ने ईरान और तुर्की के रास्ते रेल परिवहन के जरिए कारोबार बढ़ाने के विकल्प भी अपनाए हैं। चीन के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ने से अफगानिस्तान को नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

    जहांगीर खट्टक का मानना है कि सीमा बंद करने की नीति का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के उद्योगों पर पड़ा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ व्यापार रोककर तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन इससे खुद उसके निर्यातकों और उद्योगों को नुकसान पहुंचा। वहीं, अफगानिस्तान दूसरे व्यापारिक मार्गों की तलाश में जुटा है।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में आई गिरावट क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सीमा पार कारोबार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष सीमा संबंधी प्रतिबंधों और व्यापारिक मतभेदों को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, गुलिस्तान सेक्टर में झड़प के बाद कई तालिबान सदस्यों के मारे जाने का दावा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, गुलिस्तान सेक्टर में झड़प के बाद कई तालिबान सदस्यों के मारे जाने का दावा


    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच करीब तीन महीने तक बनी शांति के बाद एक बार फिर सीमा क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से कथित हमले का जवाब देने और उसे नाकाम करने का दावा किया है। सीमा से सटे गुलिस्तान सेक्टर में हुई झड़प के दौरान कई तालिबान सदस्यों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।

    पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि अफगान तालिबान की तरफ से की गई कार्रवाई का जवाब दिया गया। इसके तहत गुरुवार को पाकिस्तानी वायुसेना ने तालिबान के करीब 10 ठिकानों पर हमला किया। पाकिस्तान का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ड्रोन लॉन्च करने और उन्हें रखने के लिए किया जा रहा था।

    सीमा क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच इससे पहले भी सीमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर टकराव हो चुका है। लंबे समय तक चले तनाव के बाद करीब तीन महीने तक स्थिति अपेक्षाकृत शांत रहने की बात सामने आई थी।

    पिछले सप्ताह पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाके में एक पुलिस प्रतिष्ठान को निशाना बनाकर हमला किया गया था। इस घटना में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद सीमा पार से होने वाली गतिविधियों और सुरक्षा स्थिति को लेकर पाकिस्तान की ओर से चिंता बढ़ी थी।

    दोनों देशों के बीच इस साल फरवरी में भी संघर्ष हुआ था। इसके बाद मार्च में पाकिस्तान की ओर से काबुल में हवाई हमला किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस कार्रवाई में 400 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात कही गई थी। अफगान तालिबान ने उस समय दावा किया था कि मार्च में किया गया हवाई हमला एक मादक पदार्थ पुनर्वास केंद्र को निशाना बनाकर किया गया था।

    इसी दौरान बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी की गतिविधियों का भी उल्लेख सामने आया है। संगठन ने बलूचिस्तान में 25 अभियानों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। 20 सितंबर को नुश्की में बाईपास रोड पर शहीद बालाच खान स्टेडियम के पास पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई थी।

    इस हमले में दो पाकिस्तानी सैनिकों की मौत और चार अन्य के घायल होने की बात सामने आई थी। इसके बाद 21 सितंबर को लड़ाकों द्वारा मांड में रादिग पर कब्जा किए जाने की जानकारी भी दी गई।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव में सीमा पर हुई ताजा झड़प को महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान ने जहां तालिबान के हमले को नाकाम करने और उसके कई सदस्यों के मारे जाने का दावा किया है, वहीं सीमा क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति फिर सामने आई है।

    तीन महीने की शांति के बाद हुई इस ताजा कार्रवाई से दोनों पड़ोसी देशों के बीच सुरक्षा संबंधी विवाद दोबारा उभरता दिखाई दे रहा है। गुलिस्तान सेक्टर में झड़प और तालिबान के ठिकानों पर कार्रवाई के दावे के बीच सीमा क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनी हुई है।

  • पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनार प्रांत में एयरस्ट्राइक की है। इस हमले में तीन लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद तालिबान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    बताया गया है कि पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई साझा सीमा पर बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों और दोनों देशों के बीच लगातार बने मतभेदों के बीच की गई। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के सदस्य अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

    अफगानिस्तान में तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देना चाहिए। इसी आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों पड़ोसी देशों के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान की ओर से पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई है। तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन पर इस तरह के हमले स्वीकार नहीं किए जाएंगे और कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

    पाकिस्तान की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उसके उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। हाल ही में एक पुलिस स्टेशन परिसर में आत्मघाती बम धमाके और उसके बाद हुई हिंसा ने स्थिति को और गंभीर किया था। पाकिस्तान इन घटनाओं के लिए अफगानिस्तान से सक्रिय होने वाले चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराता रहा है।

    पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी से जुड़े तत्व अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं और वहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। दूसरी ओर तालिबान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता रहा है।

    दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और चरमपंथी गतिविधियों को लेकर पहले भी सैन्य टकराव की स्थिति बन चुकी है। तालिबान ने पहले भी चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान के भीतर किसी तरह का हमला उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा। उसका कहना है कि यदि अफगानिस्तान की जमीन पर हमला किया गया तो वह सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

    ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की स्थिति बन गई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान और तालिबान की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।

    इस बीच दोनों देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना भी चर्चा में है। सऊदी अरब के दोनों देशों के साथ संबंधों को देखते हुए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, फिलहाल तत्काल प्राथमिकता सीमा पर तनाव कम करने और आगे किसी सैन्य टकराव को रोकने की है।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक और उसके बाद तालिबान की चेतावनी ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को एक बार फिर संवेदनशील स्थिति में ला दिया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने के साथ अब निगाह इस बात पर है कि आगे कोई जवाबी सैन्य कार्रवाई होती है या तनाव को बातचीत के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।

  • मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने के पाकिस्तानी दावे को तालिबान ने खारिज किया, काबुल ने जवाब में रखी स्थिति स्पष्ट

    मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने के पाकिस्तानी दावे को तालिबान ने खारिज किया, काबुल ने जवाब में रखी स्थिति स्पष्ट


    नई दिल्ली ।मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के दावे पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के उस दावे से इनकार किया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपकर रह रहा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद नहीं है।

    अफगान पक्ष ने यह भी कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान के साथ तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के दावों में लंबे समय से अंतर रहा है।

    अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि मसूद अजहर उनके देश में मौजूद नहीं है। तालिबान की ओर से पहले भी इस तरह का इनकार किया जा चुका है। सितंबर 2022 में तालिबान के एक प्रवक्ता ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने से जुड़ी खबरों को गलत बताया था।

    अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान ने भी मसूद अजहर के अफगानिस्तान में मौजूद होने की कोई पुख्ता आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।

    पाकिस्तान के मुताबिक मसूद अजहर मई 2019 में डूरंड रेखा पार करके अफगानिस्तान चला गया था। इसके बाद से वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, अफगान सरकार इस दावे को स्वीकार नहीं करती है और अब विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भी उसकी मौजूदगी से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।

    तालिबान ने अपने बयान में एक बार फिर यह रुख दोहराया कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान को पाकिस्तान के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मसूद अजहर का नाम लंबे समय से दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों में सामने आता रहा है।

    मसूद अजहर को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव की चर्चा होती रही है। पाकिस्तान पहले वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की निगरानी सूची में भी रह चुका है। उसे 2018 से 2022 के बीच इस सूची में रखा गया था।

    उस अवधि में आतंकवाद के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को रोकने और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की व्यवस्था पर चिंता जताई गई थी। निगरानी सूची से बाहर आने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े थे। इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी।

    अब मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान के दावे और तालिबान के इनकार ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अफगानिस्तान ने जहां अजहर के अपने देश में होने से इनकार किया है, वहीं पाकिस्तान अपने पुराने दावे पर कायम रहा है।

  • पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज

    पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और Afghanistan के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीजफायर लागू नहीं है, जिससे क्षेत्र में नई सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है।

    इससे पहले मार्च में ईद से ठीक पहले दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह सिर्फ सीमित अवधि के लिए था और अब खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीमा पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    दरअसल, हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब Taliban से जुड़ी ताकतों ने सीमा पार हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने हवाई हमलों का जवाब बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक भारी सैन्य झड़पें हुईं, जिन्हें दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान की तरफ से हमले जारी रहे, जिनमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप भी दोहरा रहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, हालांकि काबुल और नई दिल्ली दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान के सख्त रुख के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में सीमा पर फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिलेगी।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी थमा नहीं है, बल्कि किसी बड़े टकराव की आशंका फिर से गहराने लगी है।

    इस्लामाबाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अफगानिस्तान के साथ फिलहाल कोई सीजफायर लागू नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ईद के दौरान जो युद्धविराम हुआ था, वह सिर्फ तीन दिन का अस्थायी समझौता था, जो अब समाप्त हो चुका है। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान फिर से सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    दरअसल, फरवरी और मार्च के दौरान दोनों देशों के बीच जबरदस्त सैन्य टकराव देखने को मिला था। तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच सीमा पर कई दिनों तक भीषण झड़पें हुईं। यह संघर्ष तब भड़का, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा पार हमले किए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था।

    हालात को देखते हुए ईद से पहले अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन अब पाकिस्तान के ताजा बयान ने उस समझौते को पूरी तरह खत्म मान लिया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, द्वारा किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में उसके नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है।

    हालांकि, अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। वहीं भारत पर लगाए गए आरोपों को भी नई दिल्ली ने सिरे से नकार दिया है।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान के ‘नो सीजफायर’ वाले बयान ने यह संकेत दे दिया है कि सीमा पर शांति फिलहाल दूर की बात है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो दोनों देशों के बीच फिर से बड़े सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा

    अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दुर्गम डूरंड लाइन पर चल रहा तनाव अब खुले सशस्त्र संघर्ष में बदल चुका है। अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने बताया कि बीते पांच दिनों में अफगान-तालिबान डिफेंस फोर्सेज ने पाकिस्तान की सेना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार इस लड़ाई में अब तक लगभग 150 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, करीब 200 घायल हुए हैं और पाकिस्तान के 40 पोस्ट तालिबान-अफगान लड़ाकों के कब्जे में आ गए हैं।
    अफगान-तालिबान का दावा
    अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने मंगलवार को बताया कि अफगान डिफेंस मिनिस्टर के हवाले से कहा गया है कि तालिबान- अफगान फोर्सेज पाकिस्तान की हरकतों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना की कई पोस्टों को बम के जरिए नष्ट किया गया।

    ड्रोन भी हुए तबाह
    अफगान फोर्स ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान द्वारा भेजे गए कई ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। इनमें छोटे इंटेलिजेंस ड्रोन भी शामिल हैं, जो अफगान फोर्सेज की गतिविधियों की जासूसी के लिए भेजे गए थे।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
    अफगान-तालिबान ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें उनके लड़ाके पाकिस्तानी पोस्ट पर कब्जा करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में अफगान लड़ाके हथियार, वायरलेस सेट और अन्य सैन्य सामग्री लूटते नजर आए। कई पाकिस्तानी सैनिक हाथ उठाकर भागते हुए दिखे, और उनके उपकरण अफगान कब्जे में चले गए। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच प्रचार युद्ध को और बढ़ा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पक्ष का जवाब
    अफगान दावों पर पाकिस्तान की सेना या सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगान पक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई में अफगान तालिबान के सैकड़ों लड़ाके मारे गए हैं और कई ठिकानों पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है। वर्तमान में सीमा पर तनाव चरम पर है और अफगान फोर्स अपनी जीत का दावा मजबूत कर रही है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। इस संघर्ष ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और हजारों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।