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  • सूर्या की ‘करुप्पु’ की सफलता पर भावुक हुए आरजे बालाजी, थिएटर में दर्शकों के लिए किया मानवीय व्यवहार का आग्रह

    सूर्या की ‘करुप्पु’ की सफलता पर भावुक हुए आरजे बालाजी, थिएटर में दर्शकों के लिए किया मानवीय व्यवहार का आग्रह

    नई दिल्ली । तमिल सुपरस्टार सूर्या की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘करुप्पु’ ने सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों के बीच खास जगह बना ली है। फिल्म को मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के बीच इसके निर्देशक आरजे बालाजी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश जारी करते हुए दर्शकों और थिएटर मालिकों से विशेष अपील की है, जिसने फिल्म के माहौल को और भी चर्चा में ला दिया है।

    फिल्म 14 मई को रिलीज हुई थी और शुरुआती दिनों से ही इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कई जगहों पर हाउसफुल शो देखने को मिल रहे हैं और दर्शक फिल्म के किरदारों और कहानी से गहराई से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बढ़ते उत्साह और भावनात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए निर्देशक ने थिएटर अनुभव को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया।

    आरजे बालाजी ने अपने संदेश में कहा कि ‘करुप्पु’ को जिस तरह का प्यार दर्शकों से मिल रहा है, वह उनके और पूरी टीम के लिए बेहद भावुक करने वाला अनुभव है। उन्होंने स्वीकार किया कि जब फिल्म की शुरुआत की गई थी, तब इस तरह के व्यापक और भावनात्मक रिस्पॉन्स की कल्पना नहीं की गई थी। निर्देशक के अनुसार, कई जगहों से ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं जहां दर्शक फिल्म देखते समय अत्यधिक भावुक हो रहे हैं, रो रहे हैं और कुछ लोग इस अनुभव को गहराई से महसूस कर रहे हैं।

    इसी संदर्भ में आरजे बालाजी ने दर्शकों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि थिएटर में कोई व्यक्ति अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया दे रहा हो या उसकी तबीयत या स्थिति असामान्य लग रही हो, तो उसके प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति दिखाना जरूरी है। उन्होंने दर्शकों से अनुरोध किया कि ऐसे समय में उस व्यक्ति को अकेला महसूस न होने दें, बल्कि उसे पानी उपलब्ध कराएं, उसे स्थान दें और जरूरत पड़ने पर थिएटर स्टाफ को सूचित करें ताकि उचित सहायता मिल सके।

    निर्देशक ने यह भी कहा कि थिएटर का माहौल सिर्फ मनोरंजन का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक साझा भावनात्मक अनुभव भी बन चुका है। ऐसे में हर दर्शक की जिम्मेदारी है कि वह दूसरों की भावनाओं का सम्मान करे और किसी भी स्थिति में किसी को असहज महसूस न होने दे। उन्होंने थिएटर मालिकों और स्टाफ से भी आग्रह किया कि वे ऐसे संवेदनशील पलों के लिए पहले से तैयार रहें और दर्शकों के साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करें।

    फिल्म ‘करुप्पु’ में सूर्या के साथ तृषा कृष्णन मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं, जबकि फिल्म का संगीत साई अभ्यंकर ने तैयार किया है। फिल्म को न केवल इसकी कहानी और अभिनय के लिए सराहा जा रहा है, बल्कि इसके भावनात्मक प्रभाव को भी दर्शकों द्वारा खास तौर पर महसूस किया जा रहा है।

    बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत करने वाली यह फिल्म अब धीरे-धीरे सुपरहिट की दिशा में बढ़ती नजर आ रही है। दर्शकों की भीड़ और सोशल मीडिया पर मिल रहे सकारात्मक रिएक्शन यह संकेत दे रहे हैं कि ‘करुप्पु’ लंबे समय तक चर्चा में बनी रह सकती है।

  • OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक

    OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक


    नई दिल्ली । ओटीटी की भीड़ में कई बार बेहतरीन फिल्में चुपचाप आकर निकल जाती हैं। साल 2026 में ZEE5 पर रिलीज हुई तमिल फिल्म सिराई भी कुछ ऐसी ही फिल्म है जो बड़े स्टार्स की फिल्मों के शोर में दब गई। कहा जा रहा है कि धुरंधर की चर्चा के बीच इस फिल्म पर कम लोगों की नजर पड़ी लेकिन कंटेंट के मामले में यह किसी से कम नहीं। IMDb पर 8.2 की दमदार रेटिंग के साथ सिराई उन फिल्मों में गिनी जा रही है जो सिस्टम की सच्चाई को बेधड़क सामने रखती हैं।

    फिल्म में लीड रोल निभाया है विक्रम प्रभु ने। उनके साथ कई अनुभवी तमिल कलाकार नजर आते हैं जो कहानी को मजबूत आधार देते हैं। यह फिल्म तमिल में बनी है लेकिन अच्छी बात यह है कि ओटीटी पर यह हिंदी में भी उपलब्ध है इसलिए भाषा दर्शकों के लिए रुकावट नहीं बनती।

    सिराई का अर्थ है जेल या कैद और फिल्म का मूल भी इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की है जिसे एक हाई-प्रोफाइल कैदी को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह एक सामान्य ड्यूटी लगती है लेकिन सफर के दौरान उसे पता चलता है कि जिस कैदी को वह ले जा रहा है वह असल में निर्दोष है। उसे कुछ ताकतवर लोगों ने अपने फायदे के लिए फंसाया है।

    यहीं से कहानी में असली संघर्ष शुरू होता है। एक तरफ सिस्टम का दबाव और वर्दी की जिम्मेदारी दूसरी तरफ इंसानियत और अंतरात्मा की आवाज। क्या वह आदेश का पालन करेगा या सच का साथ देगा? फिल्म इसी नैतिक दुविधा को बेहद सधे हुए अंदाज में पेश करती है।

    इस फिल्म की खास बात यह है कि इसमें मसाला एंटरटेनमेंट वाला ओवर-द-टॉप एक्शन नहीं है। यहां सब कुछ रियलिस्टिक है पुलिसिया पूछताछ मानसिक दबाव सत्ता का खेल और कानून की खामियां। यही यथार्थवाद फिल्म को असरदार बनाता है।

    अगर आपको जय भीम और विसरानई जैसी फिल्में पसंद आई थीं तो सिराई भी आपको जरूर प्रभावित करेगी। यह सिर्फ पुलिस और कैदी की कहानी नहीं है बल्कि यह न्याय व्यवस्था की परतें खोलती है और सवाल पूछती है कि सच की कीमत आखिर कितनी भारी होती है।

    विक्रम प्रभु ने अपने किरदार में गजब की गंभीरता दिखाई है। उनके चेहरे के भाव आंखों की बेचैनी और भीतर चल रहे द्वंद्व को उन्होंने बारीकी से निभाया है। फिल्म आपको अंत तक बांधे रखती है और सोचने पर मजबूर करती है। 

  • Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली। थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर चल रहा सेंसर सर्टिफिकेट विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को तुरंत फिल्म को UA सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही फिल्म की रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
    फिल्म के निर्माताओं ने CBFC द्वारा सर्टिफिकेशन में हो रही देरी को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया था कि बिना किसी ठोस वजह के सर्टिफिकेट रोका जा रहा है, जिससे प्रोड्यूसर्स को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए 6 जनवरी को CBFC द्वारा जारी उस पत्र को भी रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजने की बात कही गई थी।
    CBFC चेयरपर्सन पर भी कोर्ट की टिप्पणी
    मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि CBFC चेयरपर्सन के पास फिल्म को दोबारा रिव्यू कमेटी के पास भेजने का अधिकार नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, फिल्म के खिलाफ की गई शिकायतें बाद में सोची-समझी प्रतीत होती हैं और यदि ऐसी शिकायतों को महत्व दिया गया, तो यह एक खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है।
    UA सर्टिफिकेट के साथ रिलीज का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद ‘जना नायकन’ को बिना किसी और देरी के UA सर्टिफिकेट देने का फैसला लिया गया। UA सर्टिफिकेट का मतलब है कि यह फिल्म बच्चों सहित सभी दर्शकों के लिए उपयुक्त है, हालांकि छोटे बच्चों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है।

    सुनवाई में शामिल रहे दिग्गज वकील
    इस मामले में फिल्म प्रोडक्शन हाउस की ओर से सीनियर एडवोकेट सतीश पारासरन और CBFC की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरसन ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने निर्माताओं के हक में फैसला सुनाया।

    गौरतलब है कि थलपति विजय की यह फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण रिलीज टल गई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद ‘जना नायकन’ के आसपास बना सारा विवाद खत्म हो चुका है और दर्शक जल्द ही इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे।