Tag: Tamil Nadu Election 2026

  • दक्षिण भारत में सियासी भूचाल: तमिलनाडु में TVK का ऐतिहासिक उभार, केरल में कांग्रेस की वापसी, असम में BJP की सत्ता बरकरार; पुडुचेरी में भी NDA आगे

    दक्षिण भारत में सियासी भूचाल: तमिलनाडु में TVK का ऐतिहासिक उभार, केरल में कांग्रेस की वापसी, असम में BJP की सत्ता बरकरार; पुडुचेरी में भी NDA आगे


    नई दिल्ली। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के चार राज्यों तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी की 2026 विधानसभा चुनावों की मतगणना ने शुरुआती रुझानों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर दिखाया है। कई दिग्गज दल पीछे होते नजर आ रहे हैं, जबकि नई और क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत स्थिति में उभरकर सामने आई हैं।

    तमिलनाडु में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को लगा है। यहां 234 सीटों में से DMK केवल 41 सीटों पर आगे है, जबकि अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर बढ़त बना ली है और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। वहीं अन्नाद्रमुक 63 सीटों पर आगे चल रही है। शुरुआती रुझानों के बाद चेन्नई स्थित DMK कार्यालय में गतिविधियां शांत पड़ गईं और कई तैयारियां रोक दी गईं।

    द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी सीट कोलाथुर से पीछे बताए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर टीवीके  कार्यकर्ताओं में कोयंबटूर सहित कई शहरों में जश्न का माहौल देखा गया।

    केरल में कांग्रेस की बड़ी वापसी
    केरल में 140 सीटों के रुझानों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन 93 सीटों पर आगे है, जबकि सीपीआई(एम)  के नेतृत्व वाला LDF 44 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। यह रुझान राज्य में सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई मंत्री पीछे चल रहे हैं।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे “बदलाव की लहर” बताया और कहा कि मतदाताओं ने नई राजनीतिक दिशा चुनी है।

    असम में फिर BJP की मजबूत पकड़
    असम की 126 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) 95 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 29 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपनी जालुकबारी सीट से आगे हैं, जबकि अधिकांश मंत्री भी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं। गुवाहाटी में BJP कार्यालय में जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

    पुडुचेरी में भी NDA की बढ़त
    पुडुचेरी की 30 सीटों में से भाजपा गठबंधन 22 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस गठबंधन 6 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी अपनी सीट पर मिश्रित स्थिति में हैं।

    विजय और TVK का राजनीतिक उभार
    टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री अब बड़ा फैक्टर बनती दिख रही है। शुरुआती रुझानों में उनकी पार्टी सबसे आगे चल रही है, जिससे तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण बन गया है।

    कुल मिलाकर तस्वीर
    शुरुआती रुझानों ने साफ संकेत दिया है कि दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जहां तमिलनाडु में नया राजनीतिक उभार दिख रहा है, वहीं केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत और असम में मौजूदा सरकार की पकड़ मजबूत नजर आ रही है। हालांकि अंतिम नतीजों के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी

  • ई दिल्ली में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल, मौन अवधि उल्लंघन के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

    ई दिल्ली में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल, मौन अवधि उल्लंघन के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली। में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला है। अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम को लेकर उठे आरोपों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मतदान से पहले लागू मौन अवधि के दौरान कथित तौर पर प्रचार गतिविधियों की योजना को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिससे चुनावी नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई है।

    निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदान से 48 घंटे पहले मौन अवधि लागू की जाती है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को बिना किसी बाहरी प्रभाव के स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अवसर देना होता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का प्रचार, चाहे वह सार्वजनिक रूप से हो या डिजिटल माध्यमों के जरिए, प्रतिबंधित रहता है। इसी संदर्भ में आरोप सामने आए हैं कि संबंधित पार्टी इस अवधि के दौरान ऑनलाइन प्रचार अभियान चलाने की तैयारी कर रही है, जो नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

    इस मामले में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि चुनावी कानूनों के तहत इस तरह की गतिविधियों पर स्पष्ट रोक है। आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने की बात भी सामने आई है, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए संभावित प्रचार सामग्री को हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यह राजनीतिक दल पहली बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहा है। राज्य की राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही इस पार्टी के लिए यह विवाद एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी पार्टी पर आचार संहिता से जुड़े कुछ मामलों को लेकर चर्चा हो चुकी है, जिससे उसकी छवि पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस प्रकार के आरोप किसी भी पार्टी के लिए संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है और चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के लिए नियमों का पालन करना और जिम्मेदार आचरण बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।

    तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के प्रचार पर रोक को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    यह पूरा घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि आधुनिक चुनावों में डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते चुनावी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना और तकनीकी स्तर पर सतर्कता बढ़ाना समय की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।