Tag: Tamil Nadu elections 2026

  • MP के सांसदों को दक्षिण में झटका: तमिलनाडु-केरल में BJP को हार का सामना

    MP के सांसदों को दक्षिण में झटका: तमिलनाडु-केरल में BJP को हार का सामना

    नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव में जहां बीजेपी को कई जगहों पर सफलता मिली, वहीं मध्य प्रदेश के लिए दक्षिण भारत से निराशाजनक खबर सामने आई है। एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन को क्रमशः तमिलनाडु और केरल में हार का सामना करना पड़ा।

    केरल में जॉर्ज कुरियन तीसरे नंबर पर

    केरल की कांजीरापल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे जॉर्ज कुरियन मुख्य मुकाबले से बाहर नजर आए। उन्हें करीब 26,984 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर सीधा मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच रहा। कांग्रेस के उम्मीदवार रोनी के. बेबी ने 56,646 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि दूसरे स्थान पर डॉ. एन. जयराज रहे। करीब 29 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार ने यह साफ कर दिया कि भाजपा इस सीट पर प्रभाव नहीं बना पाई।

    तमिलनाडु में मुरुगन को कड़ी टक्कर, पर जीत नहीं

    तमिलनाडु की अविनाशी (SC) सीट पर एल. मुरुगन ने जोरदार मुकाबला किया, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। उन्हें करीब 68,836 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए तमिलगा वेत्री कड़गम के उम्मीदवार कमाली एस. ने 84,209 वोटों के साथ जीत दर्ज की। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें विजय की पार्टी का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिला।

     क्षेत्रीय राजनीति का असर भारी

    तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति का असर साफ नजर आया। वहीं केरल में परंपरागत रूप से मजबूत एलडीएफ और यूडीएफ के बीच भाजपा अपनी जगह नहीं बना सकी।

    कौन हैं ये दोनों नेता?

    एल. मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री हैं और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वे दलित चेहरे के रूप में पार्टी के अहम नेता माने जाते हैं।

    वहीं जॉर्ज कुरियन केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं और केरल में भाजपा के पुराने चेहरों में शामिल हैं। उन्हें ईसाई समुदाय और पार्टी के बीच सेतु माना जाता है।

     दक्षिण में चुनौती बरकरार

    तमिलनाडु और केरल के नतीजे यह संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत में भाजपा को अभी भी मजबूत पकड़ बनाने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। क्षेत्रीय दलों और स्थानीय मुद्दों के सामने राष्ट्रीय चेहरों की रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।

  • थलपति से ‘जन नायक’ तक: तमिलनाडु की राजनीति में छाए विजय

    थलपति से ‘जन नायक’ तक: तमिलनाडु की राजनीति में छाए विजय


    नई दिल्ली। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय अब राजनीति में भी ‘जन नायक’ बनकर उभर रहे हैं। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को कड़ी टक्कर मिली। विजय ने खुद पेरंबुर और तिरुचिरापल्ली सीटों से जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है।

    राजनीति में आने का फैसला: कब और क्यों?
    विजय ने 2 फरवरी 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी की घोषणा की थी। कोविड-19 के बाद से ही वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में सक्रिय हो गए थे। सही समय देखकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2026 चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसी के साथ उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बनाने का ऐलान भी कर दिया।

     घोषणापत्र में बड़े वादे: जनता को सीधे साधने की कोशिश
    अप्रैल 2026 में जारी घोषणापत्र में विजय ने कई बड़े और लोकलुभावन वादे किए। इनमें हर परिवार की महिला मुखिया को 2,500 रुपये मासिक सहायता, साल में 6 मुफ्त गैस सिलेंडर, गरीब बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी देने का वादा शामिल है।

    इसके अलावा बेरोजगार युवाओं के लिए स्नातकों को 4,000 रुपये और डिप्लोमा धारकों को 2,500 रुपये का भत्ता देने की बात कही गई। छोटे किसानों के कर्ज माफ करने, बिना गारंटी लोन और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादों ने जनता को आकर्षित किया।

     फिल्मी करियर: बाल कलाकार से सुपरस्टार तक का सफर
    विजय ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1984 में बाल कलाकार के रूप में की थी। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित फिल्म से उन्होंने शुरुआत की। 1992 में ‘नालैया थीरपु’ से लीड एक्टर बने और 1996 की फिल्म ‘पूवे उनाक्कागा’ ने उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित कर दिया।
    इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं और ‘थलपति’ के नाम से लोकप्रिय हो गए। उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ भी जल्द रिलीज होने वाली है।

     निजी जीवन में उतार-चढ़ाव
    राजनीतिक सफर के बीच विजय का निजी जीवन भी सुर्खियों में रहा। उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम के साथ रिश्तों में खटास और तलाक की खबरों ने लोगों को चौंका दिया। 1999 में शादी करने वाले इस कपल के दो बच्चे हैं।

    संपत्ति और लाइफस्टाइल
    चुनावी हलफनामे के अनुसार विजय के पास करीब 404.58 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनके पास 10 मकान और कई लग्जरी गाड़ियां हैं, जो उनके सफल करियर को दर्शाती हैं।

    थलपति’ अब जनता के नेता
    सिनेमा में सुपरस्टार बनने के बाद अब विजय राजनीति में भी मजबूत पकड़ बनाते नजर आ रहे हैं। उनका यह सफर बताता है कि लोकप्रियता और जनसमर्थन के दम पर वे तमिलनाडु की राजनीति में लंबी पारी खेल सकते हैं।

  • विजय की पार्टी के रुझानों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल, परिवार ने मनाया भावुक ‘व्हिसल पोडू’ जश्न

    विजय की पार्टी के रुझानों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल, परिवार ने मनाया भावुक ‘व्हिसल पोडू’ जश्न

    नई दिल्ली। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों ने इस बार राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ रही है, राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाली बात तमिलगा वेट्री कझगम के प्रदर्शन को लेकर रही, जिसने कई क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाकर राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है।

    मतगणना के शुरुआती दौर से ही कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। कुछ क्षेत्रों में उम्मीदवारों के बीच अंतर लगातार बढ़ता-घटता नजर आ रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस चुनाव में मुकाबला बेहद कठिन और अप्रत्याशित है। पेरम्बूर जैसे अहम क्षेत्र में भी स्थिति लगातार बदलती रही, जहां हर दौर के बाद बढ़त का अंतर राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

    इसी बीच अभिनेता से नेता बने विजय के घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जैसे ही रुझानों में उनकी पार्टी के पक्ष में बढ़त की खबरें सामने आईं, उनके घर में उत्सव जैसा वातावरण बन गया। परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक अंदाज में खुशी जाहिर की और ‘व्हिसल पोडू’ के साथ माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया और समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई।

    राजनीतिक हलचल के बीच एक और घटना ने लोगों का ध्यान खींचा, जब अभिनेत्री तृषा कृष्णन विजय के आवास पर पहुंचीं। बताया गया कि वह पहले धार्मिक स्थल पर दर्शन करने के बाद उनसे मिलने पहुंचीं। इस मुलाकात ने चुनावी माहौल में एक अलग तरह की चर्चा को जन्म दिया, हालांकि इसे व्यक्तिगत मुलाकात के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस पर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं।

    चुनाव के रुझानों ने केवल एक पार्टी या एक नेता तक सीमित चर्चा नहीं छोड़ी है, बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित किया है। कई पुराने राजनीतिक समीकरण इस बार कमजोर होते दिख रहे हैं, जबकि नए गठबंधन और संभावनाएं धीरे-धीरे उभर रही हैं। विभिन्न सीटों पर बदलते आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि जनता का रुझान इस बार काफी हद तक नए विकल्पों की ओर झुका है।

    दूसरी ओर, कुछ प्रमुख सीटों पर वरिष्ठ नेताओं की स्थिति भी मजबूत बनी हुई है, जिससे यह चुनाव और अधिक रोचक हो गया है। कई क्षेत्रों में अंतर इतना कम है कि अंतिम परिणाम किसी भी दिशा में जा सकता है। यही कारण है कि पूरे राज्य में राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं और हर दौर की गिनती पर नजरें टिकी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, तमिलनाडु चुनाव 2026 के रुझान इस बात का संकेत दे रहे हैं कि राज्य की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच रही है। विजय के घर में मनाया गया जश्न केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल का प्रतीक बन गया है, जहां हर नया आंकड़ा आने वाले समय की दिशा तय कर सकता है।

  • फिल्मी सितारों के ग्लैमर और राजनीति के चाणक्यों के बीच सीधी जंग, क्या थलपति विजय बनेंगे सियासत के नए 'थलापति'?

    फिल्मी सितारों के ग्लैमर और राजनीति के चाणक्यों के बीच सीधी जंग, क्या थलपति विजय बनेंगे सियासत के नए 'थलापति'?

    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति का सिनेमा के साथ अटूट और दशकों पुराना रिश्ता रहा है, लेकिन साल 2026 का विधानसभा चुनाव इस रिश्ते को एक नए और निर्णायक मोड़ पर ले जाता दिख रहा है। इस बार चुनावी मैदान में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि फिल्मी पर्दे के वे महानायक भी उतरे हैं जिनकी एक झलक पाने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ती है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस बार ग्लैमर और जनसेवा का ऐसा मेल देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुपरस्टार विजय थलपति से लेकर खुशबू सुंदर और उदयनिधि स्टालिन जैसे चर्चित चेहरों ने इस चुनावी जंग को न केवल रोचक बना दिया है, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह से उलझा दिया है।

    इस पूरे चुनावी परिदृश्य में सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे हैं जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया ‘विजय थलपति’ के नाम से जानती है। अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के साथ पहली बार चुनावी मैदान में उतरे विजय ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। अपनी पार्टी को अकेले चुनाव लड़ाने के फैसले के साथ विजय ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल एक विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि सत्ता के मुख्य दावेदार के रूप में उभरे हैं। उनके विशाल फैन बेस और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और विपक्षी AIADMK के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है। विजय की सभाओं में उमड़ रही भीड़ इस बात का संकेत है कि तमिलनाडु की जनता अब नए चेहरों और नई सोच की ओर आकर्षित हो रही है।

    दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की ओर से खुशबू सुंदर एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं। बीजेपी की उपाध्यक्ष और मशहूर अभिनेत्री खुशबू ने राजनीति के साथ-साथ अपने अभिनय करियर को भी बखूबी संभाला है, लेकिन इस चुनाव में उनकी पूरी ताकत पार्टी के विस्तार और एनडीए की सीटों को बढ़ाने में लगी है। वहीं, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन सत्ता को बचाए रखने के लिए फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। उदयनिधि ने भले ही सिनेमा को अलविदा कह दिया हो, लेकिन युवाओं के बीच उनकी पकड़ और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर उनका नियंत्रण उन्हें इस चुनाव का सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है।

    इस चुनावी बिसात पर केवल ये तीन नाम ही नहीं, बल्कि गौतमी ताड़ीमाल्ला और आर. सरथकुमार जैसे दिग्गज भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गौतमी जहां AIADMK के टिकट पर चुनावी समर में कूदी हैं, वहीं सरथकुमार अपनी पार्टी के बीजेपी में विलय के बाद एनडीए के लिए जोरदार प्रचार कर रहे हैं। इनके साथ ही नाम तमिलर काची (NTK) के प्रमुख सीमैन अपनी क्षेत्रीय पहचान की राजनीति के साथ मजबूती से डटे हुए हैं। कुल मिलाकर, 2026 का यह चुनाव केवल वोट और जीत का आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की उस विरासत की परीक्षा है जहां सिनेमाई नायक अक्सर राजनीतिक भाग्य विधाता बनते रहे हैं। अब देखना यह है कि जनता इस बार पर्दे के किस नायक को असल जिंदगी का जननायक चुनती है।

  • PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार

    PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार


    नई दिल्‍ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अब चार महीने दूर हैं और इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को मदुरान्दगम में एक विशाल जनसभा के माध्यम से एनडीए (NDA) के चुनाव अभियान का बिगुल फूकेंगे। मदुरान्दगम चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राज्य के भाजपा नेता इस जनसभा की तैयारियों में जुट गए हैं। मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस कार्यक्रम में NDA से जुड़ रहे कुछ राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठबंधन की घोषणा भी की जा सकती है।

    NDA में गठबंधन की तस्वीर 23 जनवरी को हो सकती है साफ
    तमिलनाडु में NDA का नेतृत्व AIADMK के पास है और पार्टी ने संकेत दे दिया है कि वह DMDK एक्टर विजयकांत की पार्टी) के साथ चुनावी गठबंधन को अंतिम रूप देने के करीब है। वहीं, BJP चाहती है कि O. पन्नीरसेल्वम और AMMK के नेता T.T.V. दिनकरण को भी NDA में शामिल किया जाए, लेकिन अभी तक AIADMK महासचिव E. पलनिस्वामी से इस पर सहमति नहीं बनी है।सूत्रों के अनुसार, TTV दिनकरण की पार्टी को NDA के घटक दल के रूप में शामिल किया जा सकता है और इसका ऐलान 23 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हो सकता है। हालांकि, O. पन्नीरसेल्वम के साथ निजी रंजिश के कारण पलनिस्वामी उन्हें NDA में शामिल करने के लिए तैयार नहीं हैं।

    इस बीचAIADMK ने पहले ही PMK के एक धड़े के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। PMK के मुखिया डॉ. रामदोस ने अपने बेटे अंबु मणि रामदोस की बगावत के बावजूद चुनावी गठबंधन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं, उनके बेटे अंबुमणि ने AIADMK के साथ मिलकर NDA का हिस्सा बनने का फैसला किया है। इस तरह तमिलनाडु में NDA के गठबंधन की पूरी तस्वीर 23 जनवरी की पीएम मोदी की जनसभा में स्पष्ट होने की संभावना है।

    मजबूत NDA गठबंधन बनाने की कोशिश
    AIADMK और BJP इस बार तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने के लिए मजबूत NDA गठबंधन बनाने में जुटी हैं। इस गठबंधन में एक्टर विजय की पार्टी DMDK TVK को भी शामिल किया जा सकता है, जिसे इस चुनाव का X फैक्टर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विजय का राजनीतिक असर रजनीकांत और कमल हासन की तुलना में ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने अपनी फिल्मी लोकप्रियता के चरम पर रहते हुए राजनीति में कदम रखा। यही वजह है कि NDA इस बार चुनावी रणनीति में उनके योगदान को अहम मान रही है। NDA के लिए यह गठबंधन न सिर्फ चुनावी ताकत बढ़ाने का मौका है, बल्कि राज्य में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने का भी प्रमुख हथियार बन सकता है।

    तमिलनाडु चुनाव में विजय की दिशा तय नहीं
    एक्टर विजय और उनकी पार्टी TVK ने स्पष्ट किया है कि वे DMK और BJP दोनों से समान दूरी बनाकर चलेंगे। हालांकि, AIADMK के कुछ नेता उनके साथ गठबंधन को लेकर बैकडोर बातचीत में लगे हुए हैं। इस बीच राजनीतिक हलकों में यह अटकलें भी लग रही हैं कि अगर TVK और AIADMK के बीच समझौता होता है, तो BJP की स्थिति क्या होगी। तमिलनाडु में यह भी चर्चा है कि विजय की फिल्म जन नायक को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलने और करूर भगड़ग मामले में CBI से पूछताछ को भाजपा की साजिश के रूप में पेश किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में विजय और उनकी पार्टी की दिशा NDA और DMK-कांग्रेस गठबंधन दोनों के लिए अहम हो सकती है।

    स्टालिन सरकार के खिलाफ गुस्से को भुनाने की रणनीति
    BJP का मानना है कि लॉ एंड आर्डर और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर तमिलनाडु में लोगों के मन में स्टालिन सरकार के खिलाफ नाराजगी है, जिससे उनके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण पार्टी ने अपने सबसे बड़े ट्रम्प कार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी कैंपेन की शुरूआत के लिए बुलाने का फैसला किया है। 23 जनवरी को PM मोदी मदुरान्दगम में विशाल जनसभा के साथ NDA अभियान की शुरुआत करेंगे, ताकि उनकी लोकप्रियता का लाभ पार्टी को मिल सके। विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह पीएम मोदी ने चुनाव से चार महीने पहले ही दौरा शुरू करने वाले हैं उससे लगता है कि आने वाले दिनों में उनके कई दौरे तमिलनाडु में होने की संभावना है।