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  • तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।

    कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

    हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

    तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

  • 5 राज्यों के नतीजों से सियासत में भूचाल: बंगाल से तमिलनाडु तक बड़े उलटफेर के दावे, कई समीकरण बदले

    5 राज्यों के नतीजों से सियासत में भूचाल: बंगाल से तमिलनाडु तक बड़े उलटफेर के दावे, कई समीकरण बदले



    नई दिल्ली। देश के 5 राज्योंपश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। अलग-अलग दावों और आंकड़ों के बीच राजनीतिक तस्वीर को लेकर बहस जारी है।पश्चिम बंगाल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। कुछ रिपोर्ट्स में BJP की बड़ी बढ़त और सत्ता परिवर्तन के दावे किए जा रहे हैं, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी को झटका लगने की बात कही जा रही है।हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी मानी जा रही है।

    तमिलनाडु में नई राजनीतिक एंट्री
    तमिलनाडु में अभिनेता थलपति विजय की पार्टी को लेकर चर्चा तेज है। दावों के मुताबिक, उन्होंने पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती दी है।
    लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इन नतीजों की पुष्टि के लिए आधिकारिक डेटा का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।

    केरल और असम का समीकरण
    केरल में कांग्रेस की वापसी की बातें सामने आ रही हैं, जबकि असम में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन की मजबूती बरकरार रहने के संकेत मिल रहे हैं।

    रणनीति और संगठन की चर्चा
    इन चुनावों में बूथ स्तर की रणनीति, ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल और माइक्रो मैनेजमेंट को लेकर काफी चर्चा हो रही है। खासकर अमित शाह की रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस जारी है।

    जीत-हार पर बयानबाजी तेज
    जहां एक ओर सत्ताधारी दल जीत को जनादेश बता रहे हैं, वहीं विपक्ष चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहा है।
    इससे सियासी टकराव और तेज हो गया है।

    असली तस्वीर क्या?
    विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े दावों के बीच अंतिम और आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार करना जरूरी है। बिना पुष्टि के निष्कर्ष निकालना भ्रामक हो सकता है।
    कुल मिलाकर, 5 राज्यों के चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। असली तस्वीर साफ होने के बाद ही यह तय होगा कि किसका पलड़ा कितना भारी रहा।

  • 5 राज्यों के चुनाव नतीजों ने बदला सियासी समीकरण: बंगाल से तमिलनाडु तक बड़े उलटफेर के दावे, राजनीतिक हलचल तेज

    5 राज्यों के चुनाव नतीजों ने बदला सियासी समीकरण: बंगाल से तमिलनाडु तक बड़े उलटफेर के दावे, राजनीतिक हलचल तेज


    नई दिल्ली। देश के 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरीके विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विभिन्न दलों के प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

    बंगाल में सबसे ज्यादा चर्चा
    पश्चिम बंगाल को लेकर सबसे बड़े बदलाव के दावे किए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि BJP ने बड़ी बढ़त हासिल की है, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी को झटका लगा है।
    हालांकि आधिकारिक और अंतिम आंकड़ों की पुष्टि अभी भी जरूरी है।

    तमिलनाडु में नई ताकत की एंट्री?
    तमिलनाडु में भी चौंकाने वाले नतीजों के दावे सामने आए हैं। अभिनेता थलपति विजय की पार्टी को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि उसने पारंपरिक दलों को चुनौती दी है।
    लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इन दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक डेटा का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।

    केरल और असम का समीकरण
    केरल में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होने की बातें कही जा रही हैं, जबकि असम में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन की वापसी के संकेत मिल रहे हैं।

    रणनीति और ग्राउंड मैनेजमेंट पर चर्चा
    इन चुनावों में बूथ स्तर की रणनीति, माइक्रो मैनेजमेंट और संगठन की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। कई जगहों पर ‘पन्ना प्रमुख’ जैसी रणनीतियों को प्रभावी बताया जा रहा है।

    नेताओं के बयान और आरोप-प्रत्यारोप
    चुनाव नतीजों के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे अपनी रणनीति और मेहनत की जीत बता रहे हैं।

     क्या है असली तस्वीर?
    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े दावों के बीच आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग की पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।बिना पुष्टि के निष्कर्ष निकालना भ्रामक हो सकता है। कुल मिलाकर, 5 राज्यों के चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। असली तस्वीर पूरी तरह साफ होने के बाद ही सियासी दिशा का स्पष्ट अंदाजा लगाया जा सकेगा।

  • एक वोट ने पलटा चुनावी परिणाम, तमिलनाडु में मंत्री की हार, तिरुप्पत्तूर सीट बनी चर्चा का केंद्र

    एक वोट ने पलटा चुनावी परिणाम, तमिलनाडु में मंत्री की हार, तिरुप्पत्तूर सीट बनी चर्चा का केंद्र

    तिरुप्पत्तूर। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। तमिलगा वेत्री कझगम की जीत के बीच तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट पर बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला, जहां हार-जीत का फैसला सिर्फ एक वोट से हुआ।

    इस सीट पर के.आर. पेरियाकरुप्पन, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के वरिष्ठ नेता और मंत्री हैं, उन्हें महज एक वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ टीवीके उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर विजयी रहे। मतगणना पूरी होने के बाद सामने आया कि सीनिवास सेतुपति को कुल 83,375 वोट मिले, जो पेरियाकरुप्पन से सिर्फ एक वोट अधिक थे। इस बेहद करीबी मुकाबले ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में हर एक वोट की कितनी अहमियत होती है।

    कम अंतर से हुए इस नतीजे को हाल के चुनावों के सबसे कड़े मुकाबलों में गिना जा रहा है। यह परिणाम उन उदाहरणों में शामिल हो गया है, जहां जीत या हार का फैसला एक ही वोट से हुआ हो।

    पूरे राज्य के नतीजों की बात करें तो 234 विधानसभा सीटों की गिनती पूरी हो चुकी है, जिसमें तमिलगा वेत्री कझगम 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 47 सीटें मिलीं। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की और पीएमके के खाते में 4 सीटें आईं।

  • बंगाल-असम में BJP ने की बड़ी जीत दर्ज, केरल में UDF की वापसी, तमिलनाडु में TVK का कमाल

    बंगाल-असम में BJP ने की बड़ी जीत दर्ज, केरल में UDF की वापसी, तमिलनाडु में TVK का कमाल


    नई दिल्ली। देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों की मतगणना पूरी हो चुकी है, जिसमें कई बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिले हैं। पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। वहीं पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वापसी करते हुए जीत हासिल की है, जबकि तमिलनाडु में नई पार्टी टीवीके ने दमदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत के करीब पहुंचकर सबको चौंका दिया है।

    पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने बहुमत के लिए जरूरी 148 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए 206 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस नतीजे के साथ ही राज्य में लंबे समय से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका लगा है और वह 81 सीटों पर सिमट गई। इसे राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    असम में भी बीजेपी ने कांग्रेस को बड़े अंतर से हराते हुए अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। वहीं तमिलनाडु में नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत के करीब पहुंचकर राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) बहुमत हासिल करने में सफल रहा है, जिससे राज्य में उसकी वापसी मानी जा रही है।

    बंगाल की पावन धरा पर एक नया सूर्योदय हुआ है- PM मोदी
    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत को “नया सूर्योदय” बताते हुए इसे जनता का भरोसा करार दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन का परिणाम है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आज देश के 20 से अधिक राज्यों में बीजेपी-एनडीए की सरकारें हैं और पार्टी विकास व सुशासन के आधार पर जनता का विश्वास जीत रही है।

    ममता बनर्जी आज शाम 4 बजे करेंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
    उधर, पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार शाम 4 बजे कालीघाट स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी चुनाव नतीजों और हार के कारणों पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकती हैं। इससे पहले भी उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे।

  • कमल हासन और श्रुति हासन ने साथ डाला वोट, लोकतंत्र के पर्व में सितारों की चमक..

    कमल हासन और श्रुति हासन ने साथ डाला वोट, लोकतंत्र के पर्व में सितारों की चमक..


    नई दिल्ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्यभर में मतदान का माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा, जहां आम नागरिकों के साथ-साथ फिल्मी जगत की कई बड़ी हस्तियों ने भी लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और हर वर्ग के मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्साहित नजर आए। चेन्नई सहित राज्य के कई हिस्सों में मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग प्रक्रिया जारी रही, जिससे लोकतंत्र की मजबूती का संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    इस दौरान सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली उपस्थिति अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन तथा उनकी बेटी अभिनेत्री श्रुति हासन की रही। दोनों चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर एक साथ पहुंचे और सुबह ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिता और पुत्री की यह जोड़ी मतदान केंद्र पर आकर्षण का केंद्र बनी रही, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गए। मतदान के बाद श्रुति हासन ने लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करते हुए संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने सभी से अपने अधिकार का प्रयोग करने की अपील की। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और कई युवाओं ने भी मतदान को लेकर उत्साह दिखाया।

    कमल हासन, जो लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं, इस चुनाव में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर लोगों को जागरूक करते नजर आए। उन्होंने मतदान को हर नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से वोट डालने की अपील की। मतदान केंद्र पर उनकी उपस्थिति के दौरान माहौल काफी उत्साहित रहा और समर्थकों की भीड़ ने उन्हें देखने के लिए काफी देर तक इंतजार किया।

    इसी बीच तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने भी अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाला। अभिनेता रजनीकांत ने चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर पहुंचकर शांतिपूर्वक मतदान किया और लोगों से अपील की कि वे लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में वोट करें। उनके आने से वहां भी भारी भीड़ इकट्ठा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय रहना पड़ा। अभिनेता धनुष ने भी मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया और युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया।

    इसके अलावा अभिनेता अजित कुमार भी मतदान केंद्र पर सफेद पारंपरिक पोशाक में नजर आए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से वोट डालने के बाद अपने फैंस का अभिवादन किया और वहां से रवाना हुए। उनकी मौजूदगी से भी मतदान केंद्र पर उत्साह का माहौल बन गया। इसी तरह अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी अलग-अलग केंद्रों पर जाकर मतदान किया और लोगों को अपने अधिकार के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

    पूरे राज्य में मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। हर मतदान केंद्र पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात था ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। सुबह से शाम तक चली इस प्रक्रिया में राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। अब सभी की निगाहें आगामी परिणामों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव सिनेमाई सितारों की लोकप्रियता और राजनीतिक भविष्य का नया इम्तिहान

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव सिनेमाई सितारों की लोकप्रियता और राजनीतिक भविष्य का नया इम्तिहान

    नई दिल्ली/चेन्नई। दक्षिण भारत की राजनीति में सिनेमा और सत्ता का अटूट रिश्ता एक बार फिर इतिहास के पन्ने पलटने को तैयार है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के इस दौर में चुनावी मैदान केवल घोषणापत्रों और नारों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह सिल्वर स्क्रीन के नायकों की जमीनी पकड़ का सबसे बड़ा परीक्षण केंद्र बन गया है। दशकों से राज्य की जनता ने अपने पसंदीदा अभिनेताओं को पलकों पर बिठाया है और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया है। वर्तमान चुनाव इस विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ रहे हैं जहां फिल्मी चमक दमक और जनसेवा के वादों के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। इस बार के चुनाव में नए राजनीतिक दलों का उदय और बड़े फिल्मी नामों की सीधी भागीदारी ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को चुनौती दी है।

    चुनावी सरगर्मी के बीच यह स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है कि मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग विशेष रूप से युवा पीढ़ी अपने चहेते सितारों की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। अभिनेताओं ने अपने विशाल प्रशंसक समूहों को राजनीतिक कार्यकर्ताओं में तब्दील कर दिया है जो घर घर जाकर नए भविष्य का सपना बेच रहे हैं। हालांकि राजनीति की यह राह उतनी आसान नहीं है जितनी फिल्मों की पटकथा होती है। स्थापित राजनीतिक दलों ने भी अपनी किलेबंदी मजबूत कर ली है और वे फिल्मी ग्लैमर के मुकाबले अपने संगठनात्मक अनुभव और कल्याणकारी योजनाओं का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में मुकाबला केवल व्यक्ति विशेष का न रहकर विचारधारा और कार्यशैली के बीच का संघर्ष बन गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और प्रशासनिक सुधारों के वादे के साथ फिल्मी सितारे जनता के बीच जा रहे हैं जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या उससे भी अधिक जटिल होने की संभावना बढ़ गई है।

    क्षेत्रीय मुद्दों की बात करें तो कृषि ऋण की माफी शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन और महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता जैसे विषय चर्चा के केंद्र में हैं। फिल्मी सितारों ने अपने चुनावी घोषणापत्रों में इन संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता दी है जिससे आम जनमानस में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। उनकी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि सिनेमाई करिश्मा आज भी जनता के दिलों पर राज करता है। परंतु मतदान केंद्र तक इस भीड़ को वोटों में तब्दील करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बुनियादी सुविधाओं की मांग प्रबल है वहां फिल्मी सितारों की साख और उनकी योजनाओं की व्यवहारिकता की कड़ी जांच हो रही है।

    राज्य की राजनीति में दशकों पुराने द्रविड़ वर्चस्व को चुनौती देना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए कठिन कार्य रहा है। लेकिन इस बार के चुनाव में बदलाव की बयार महसूस की जा रही है क्योंकि फिल्मी चेहरों ने सीधे तौर पर व्यवस्था परिवर्तन की बात कही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं है बल्कि यह राज्य की राजनीतिक संस्कृति के भविष्य को भी तय करेगा। क्या जनता एक बार फिर पर्दे के नायक को अपना वास्तविक नेता चुनेगी या फिर अनुभव और पुरानी निष्ठा जीत का आधार बनेगी यह आने वाले परिणाम ही स्पष्ट करेंगे। फिलहाल पूरे राज्य में चुनावी शोर अपने चरम पर है और हर तरफ केवल इसी बात की चर्चा है कि इस बार बॉक्स ऑफिस की सफलता मतपेटियों में कितनी प्रभावी साबित होगी।

  • तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

    तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी प्रचार तेज हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से संपर्क कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अभी तक राज्य में चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं।

    मोदी का सक्रिय अभियान
    पिछले दो महीनों में मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा कर नागरकोइल में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका प्रचार अभियान भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए माहौल बनाने पर केंद्रित है।

    राहुल गांधी की अनुपस्थिति और DMK के साथ दूरी
    राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में प्रचार अभियान नहीं चलाया। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस और DMK गठबंधन में चल रहे मनमुटाव से जोड़ रहे हैं। 2021 में राहुल गांधी चुनाव से पहले ही राज्य में तीन दिवसीय दौरे पर थे, लेकिन इस बार उनकी गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुडुचेरी में संकेत मिले दूरियों के
    हाल ही में पुडुचेरी में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। वहीं स्टालिन भी उसी दिन वहां मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग समय पर निर्धारित किए गए थे। राजनीतिक जानकार इसे सीट बंटवारे और गठबंधन खींचतान का परिणाम मान रहे हैं।

    पार्टियों की सफाई और आगे की योजना
    DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।

  • तमिलनाडु राजनीति: विजय की टीवीके ने NDA से गठबंधन की अटकलें खारिज कीं, कहा भाजपा हमारी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी

    तमिलनाडु राजनीति: विजय की टीवीके ने NDA से गठबंधन की अटकलें खारिज कीं, कहा भाजपा हमारी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में हाल के दिनों में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर शनिवार को पार्टी ने साफ तौर पर विराम लगा दिया। टीवीके के नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी का एनडीए के साथ किसी भी प्रकार का चुनावी गठबंधन करने का कोई इरादा नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह से अफवाह हैं।

    पार्टी के संयुक्त महासचिव सी. टी. आर. निर्मल कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनडीए के साथ गठबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनकी पार्टी की वैचारिक प्रतिद्वंद्वी है और टीवीके पहले भी यह विषय पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया और सोशल मीडिया पर टीवीके को लेकर कई तरह की अटकलें और खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    निर्मल कुमार ने बताया कि 13 मार्च को पार्टी के जिला सचिवों के साथ एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का उद्देश्य आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी की संगठनात्मक ताकत का आकलन करना और संभावित चुनावी रणनीतियों पर चर्चा करना था। हालांकि, इस बैठक को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि टीवीके एनडीए के साथ गठबंधन पर विचार कर रही है। उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बैठक का गठबंधन से कोई संबंध नहीं था।

    उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें। निर्मल कुमार ने कहा कि टीवीके के बारे में अटकलों पर आधारित कई खबरें रोजाना प्रसारित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना है।

    इधर, तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने भी इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। पत्रकारों द्वारा टीवीके के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मीडिया गठबंधन को लेकर ज्यादा चिंतित है, जबकि उनका ध्यान राज्य के वास्तविक मुद्दों पर है। नागेंद्रन ने कहा कि तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं और इन्हीं विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के सक्रिय राजनीति में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में नई हलचल देखने को मिल रही है। ऐसे में विभिन्न दलों के साथ संभावित गठबंधनों को लेकर समय-समय पर अटकलें लगना स्वाभाविक है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि फिलहाल एनडीए के साथ किसी भी तरह की चुनावी साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है और टीवीके ने यह संकेत दे दिया है कि वह अपनी राजनीतिक रणनीति स्वतंत्र रूप से तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने शनिवार देर रात चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा कि तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित सत्ता-साझाकरण गठबंधनों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी के 40 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

    चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने इन वार्ताओं को “रचनात्मक और पार्टी को मजबूत करने पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों तरह के सत्र आयोजित किए ताकि राज्य के नेता “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सकें।”

    हालांकि गठबंधन या सत्ता-साझाकरण की मांगों के विशिष्ट विवरण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन श्री वेणुगोपाल ने पुष्टि की कि राज्य इकाई की चिंताओं को विस्तार से सुना गया है। उन्होंने कहा, “बैठक ने सर्वसम्मति से माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को चुनावी रणनीति से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

    पार्टी हाई कमान पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर निर्णय लेगा।”

    पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सार्वजनिक अटकलों को रोकने के लिए हाई कमान ने बयानों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। श्री वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सभी नेताओं को अनुशासित रहना चाहिए और सोशल मीडिया सहित किसी भी मंच पर व्यक्तिगत शिकायतों या अटकलों को साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेताओं को एक सुर में बोलने की सलाह दी गई है।”

    पुडुचेरी के संबंध में नेतृत्व ने घोषणा की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी 21 जनवरी से एक बड़ी ‘पदयात्रा’ शुरू करेगी। यह मार्च पूरे राज्य को कवर करेगा, जिसमें वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, जहां स्थानीय इकाइयां कथित तौर पर शासन और सीटों के बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं।