Tag: Tamil Nadu Politics

  • पुडुचेरी के लग्जरी रिसॉर्ट में ठहरे AIADMK विधायक, टूट और सेंधमारी की आशंका से गरमाई राजनीति

    पुडुचेरी के लग्जरी रिसॉर्ट में ठहरे AIADMK विधायक, टूट और सेंधमारी की आशंका से गरमाई राजनीति

    नई दिल्ली। तमिलनाडु में हाल ही में आए विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। राज्य में नए समीकरण बन रहे हैं और सत्ता की दिशा को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच एक बार फिर ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि AIADMK के कई नवनिर्वाचित विधायकों को पुडुचेरी के एक निजी रिसॉर्ट में ठहराए जाने की बात सामने आई है।

    सूत्रों के अनुसार, पार्टी के लगभग 15 विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। इस कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि विधायकों को किसी भी प्रकार के बाहरी संपर्क, राजनीतिक दबाव या संभावित तोड़फोड़ से दूर रखा जा सके।

    रिसॉर्ट में विधायकों की मौजूदगी की तस्वीरें सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यह पहली बार नहीं है जब दक्षिण भारतीय राजनीति में विधायकों को इस तरह से सुरक्षित स्थान पर रखा गया हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसे काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर अस्थिरता या टूट की आशंका को दर्शाता है।

    बताया जा रहा है कि चुनाव परिणामों के बाद पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है और आंतरिक असंतोष की स्थिति भी देखने को मिल रही है। ऐसे में विधायकों की एकजुटता बनाए रखना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी कारण उन्हें एक साथ रखने और लगातार निगरानी में रखने की रणनीति अपनाई गई है।

    इसी बीच राज्य की राजनीति में नए उभरते राजनीतिक दल की मजबूत मौजूदगी ने पारंपरिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। इस दल ने अपने पहले ही बड़े चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया केंद्र उभरता दिखाई दे रहा है। इस बदलाव ने न केवल सत्तारूढ़ बल्कि प्रमुख विपक्षी दलों की रणनीति को भी प्रभावित किया है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बदलते हालात में विभिन्न दलों के बीच परोक्ष बातचीत और रणनीतिक समझ बनाने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह के गठबंधन या समझौते की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक माहौल इस ओर संकेत जरूर कर रहा है कि आने वाले समय में नए गठजोड़ देखने को मिल सकते हैं।

    सरकार गठन के लिए आवश्यक बहुमत का गणित भी इस समय बेहद नाजुक स्थिति में है। किसी भी दल के लिए स्थिर सरकार बनाना आसान नहीं दिख रहा, जिसके चलते छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    फिलहाल पुडुचेरी के रिसॉर्ट में विधायकों को रखने की यह रणनीति तमिलनाडु की राजनीति में अनिश्चितता और बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल एक एहतियाती कदम है या फिर राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत का संकेत।

  • तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस: विजय को बहुमत साबित करने की शर्त, राज्यपाल ने 118 विधायकों के समर्थन पर अड़ा रुख

    तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस: विजय को बहुमत साबित करने की शर्त, राज्यपाल ने 118 विधायकों के समर्थन पर अड़ा रुख


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है, जहां एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी TVK के लिए सरकार गठन फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने साफ संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री पद की शपथ तभी संभव है जब विजय विधानसभा में स्पष्ट बहुमत साबित करें।

    राज्यपाल की शर्त: 118 विधायकों का समर्थन जरूरी
    सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय से कहा है कि वे राज्य में “स्थिर सरकार” चाहते हैं। इसी वजह से उन्हें सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाने को कहा गया है।विजय ने बुधवार को 113 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा था, लेकिन राज्यपाल ने इसे पर्याप्त नहीं माना और बहुमत के लिए अतिरिक्त समर्थन की मांग की।

    TVK को और समर्थन की जरूरत
    234 सदस्यीय विधानसभा में:

    टीवीके  के पास कुल 108 सीटें हैंविजय के पास दो सीटें होने के कारण एक सीट छोड़ने के बाद संख्या 107 रह जाती हैबहुमत के लिए 118 का आंकड़ा जरूरी है। इस स्थिति में TVK को अभी भी कम से कम 11 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के 5 विधायकों ने पार्टी को समर्थन दिया है।

    लगातार दूसरे दिन राज्यपाल से मुलाकात
    विजय गुरुवार को लगातार दूसरे दिन राज्यपाल से मिलने लोकभवन पहुंचे। करीब एक घंटे की बैठक के बाद वह वहां से रवाना हुए। इससे पहले भी वे समर्थन पत्र लेकर पहुंचे थे, लेकिन मामला अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।

    DMK और AIADMK में संभावित हलचल
    राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि DMK और AIADMK के बीच सरकार गठन को लेकर अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्नाद्रमुक सरकार बनाने पर विचार कर सकती हैद्रमुक बाहर से समर्थन दे सकती हैछोटे दलों को भी इस संभावित फॉर्मूले में शामिल किया जा सकता हैहालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    बीजेपी की नजर बंगाल और तमिलनाडु दोनों पर
    इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे को लेकर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। वे वहां सरकार गठन की रणनीति पर चर्चा करेंगे। बीजेपी ने उन्हें बंगाल का ऑब्जर्वर नियुक्त किया है।

  • थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज

    थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज


    नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शुमार थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखकर सबको चौंका दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं।

    234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में पार्टी बहुमत से थोड़ी दूर रह गई है, लेकिन विपक्षी और सत्ता दोनों खेमों में इस नतीजे ने हलचल मचा दी है।

    दो सीटों पर जीत, अब एक छोड़ना तय

    विजय ने इस चुनाव में दो सीटों चेन्नई की पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीत हासिल की है। लेकिन नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार एक ही सीट रख सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि विजय पेरंबूर सीट अपने पास रखेंगे, जबकि तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से इस्तीफा दिया जा सकता है। इसी सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

    क्या तृषा कृष्णन राजनीति में आएंगी?

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा नाम सामने आया है अभिनेत्री तृषा कृष्णन का। चर्चा है कि TVK उन्हें उपचुनाव में तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से उम्मीदवार बनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता वोट बैंक को मजबूत कर सकती है।

    हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक तृषा अभी राजनीति में आने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं हैं और इस प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। उनका अब तक किसी राजनीतिक दल से सीधा जुड़ाव नहीं रहा है।

     गठबंधन की तलाश में TVK
    सरकार बनाने के लिए TVK को किसी बड़ी पार्टी का समर्थन चाहिए। इसी वजह से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी का झुकाव या तो DMK या AIADMK की ओर हो सकता है, हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    क्या विजय बनेंगे मुख्यमंत्री?
    सूत्रों के मुताबिक विजय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का अवसर देने की मांग की है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़
    थलापति विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। एक तरफ गठबंधन की सियासत, दूसरी तरफ उपचुनाव की तैयारी और तीसरी तरफ तृषा कृष्णन की संभावित एंट्री—इन सबने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विजय किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या वाकई सिनेमा की एक और बड़ी स्टार राजनीति में उतरती हैं।

  • तमिलनाडु में सत्ता समीकरण बदले, TVK के साथ आई कांग्रेस, भाजपा को दूर रखने की शर्त…

    तमिलनाडु में सत्ता समीकरण बदले, TVK के साथ आई कांग्रेस, भाजपा को दूर रखने की शर्त…

    नई दिल्ली।  तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिला है, जहां कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को सरकार गठन के लिए समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इस निर्णय के साथ राज्य की राजनीति में गठबंधन समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गठजोड़ों में दरार की स्थिति भी बन गई है।

    कांग्रेस द्वारा लिए गए इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन कुछ शर्तों के साथ दिया गया है, जिसमें सबसे अहम शर्त यह है कि सरकार में किसी भी तरह की सांप्रदायिक ताकतों की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में नए गठबंधन की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।

    TVK ने हालिया राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत प्रदर्शन करते हुए विधानसभा में उल्लेखनीय सीटें हासिल की हैं। पार्टी को 100 से अधिक सीटों पर सफलता मिली है, जिससे वह सरकार गठन की स्थिति में पहुंच गई है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    इस नए राजनीतिक समीकरण का सबसे बड़ा असर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के पुराने गठबंधन पर पड़ता दिखाई दे रहा है। दोनों दल पिछले कई वर्षों से एक साथ राजनीति करते रहे हैं, लेकिन इस नए घटनाक्रम के बाद उनके रिश्तों में दूरी की स्थिति बनती नजर आ रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि औपचारिक तौर पर बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।

    कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जनता ने इस बार एक ऐसी सरकार के पक्ष में मतदान किया है जो धर्मनिरपेक्ष और विकासोन्मुख हो। इसी आधार पर TVK को समर्थन देने का निर्णय लिया गया है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका समर्थन तमिलनाडु में एक स्थिर और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित सरकार के गठन के लिए है।

    TVK की ओर से कांग्रेस से समर्थन की औपचारिक अपील की गई थी, जिसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर विचार किया और तमिलनाडु इकाई को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। राज्य इकाई और विधायक दल की बैठक के बाद इस समर्थन पर अंतिम मुहर लगाई गई।

    इस नए गठबंधन को केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भविष्य की राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर लोकसभा और राज्यसभा चुनावों तक इस गठबंधन का असर देखने की संभावना जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है, जहां पारंपरिक गठबंधन समीकरण बदलते दिखाई देंगे। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित हो सकती है।

  • करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत

    करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां फिल्म स्टार थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं। सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी का यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में ‘विजय युग’ की शुरुआत माना जा रहा है।

    234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, और TVK इससे सिर्फ 10 सीट पीछे रहकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इससे विजय के मुख्यमंत्री बनने की राह लगभग साफ मानी जा रही है।

    इस ऐतिहासिक जीत के बीच मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा (RGV) ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर शेयर कर सियासी हलचल बढ़ा दी। तस्वीर में एम करुणानिधि फीता काटते नजर आ रहे हैं, और उनके पीछे एक युवा लड़का खड़ा है—जो कोई और नहीं बल्कि खुद विजय हैं।

    इस फोटो को शेयर करते हुए RGV ने तंज कसते हुए लिखा कि करुणानिधि ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके पीछे खड़ा यह लड़का एक दिन उनकी पार्टी को इतनी बड़ी चुनौती देगा।

    सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और यूजर्स भी दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ‘किस्मत का खेल’ बता रहे हैं, तो कुछ विजय को नया करुणानिधि तक कह रहे हैं।

    विजय की इस जीत ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को बड़ा झटका दिया है। पिछले चुनाव में 133 सीटें जीतने वाली DMK इस बार सिर्फ 59 सीटों पर सिमट गई है। यानी करीब 74 सीटों का नुकसान, जो पार्टी के लिए करारी हार साबित हुआ है।

    करीब 60 साल तक तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही, लेकिन विजय ने महज दो साल में इस राजनीतिक चक्र को तोड़ दिया।

    कुल मिलाकर, एक पुरानी तस्वीर ने आज की राजनीति की तस्वीर बदल दी है—जहां कभी करुणानिधि के पीछे खड़ा एक लड़का आज तमिलनाडु की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है।

  • तमिलनाडु राजनीति: विजय की टीवीके ने NDA से गठबंधन की अटकलें खारिज कीं, कहा भाजपा हमारी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी

    तमिलनाडु राजनीति: विजय की टीवीके ने NDA से गठबंधन की अटकलें खारिज कीं, कहा भाजपा हमारी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में हाल के दिनों में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर शनिवार को पार्टी ने साफ तौर पर विराम लगा दिया। टीवीके के नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी का एनडीए के साथ किसी भी प्रकार का चुनावी गठबंधन करने का कोई इरादा नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह से अफवाह हैं।

    पार्टी के संयुक्त महासचिव सी. टी. आर. निर्मल कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनडीए के साथ गठबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनकी पार्टी की वैचारिक प्रतिद्वंद्वी है और टीवीके पहले भी यह विषय पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया और सोशल मीडिया पर टीवीके को लेकर कई तरह की अटकलें और खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    निर्मल कुमार ने बताया कि 13 मार्च को पार्टी के जिला सचिवों के साथ एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का उद्देश्य आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी की संगठनात्मक ताकत का आकलन करना और संभावित चुनावी रणनीतियों पर चर्चा करना था। हालांकि, इस बैठक को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि टीवीके एनडीए के साथ गठबंधन पर विचार कर रही है। उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बैठक का गठबंधन से कोई संबंध नहीं था।

    उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें। निर्मल कुमार ने कहा कि टीवीके के बारे में अटकलों पर आधारित कई खबरें रोजाना प्रसारित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना है।

    इधर, तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने भी इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। पत्रकारों द्वारा टीवीके के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मीडिया गठबंधन को लेकर ज्यादा चिंतित है, जबकि उनका ध्यान राज्य के वास्तविक मुद्दों पर है। नागेंद्रन ने कहा कि तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं और इन्हीं विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के सक्रिय राजनीति में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में नई हलचल देखने को मिल रही है। ऐसे में विभिन्न दलों के साथ संभावित गठबंधनों को लेकर समय-समय पर अटकलें लगना स्वाभाविक है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि फिलहाल एनडीए के साथ किसी भी तरह की चुनावी साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है और टीवीके ने यह संकेत दे दिया है कि वह अपनी राजनीतिक रणनीति स्वतंत्र रूप से तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।