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  • मुख्यमंत्री विजय के बड़े ऐलान से राहत की उम्मीद, मुफ्त सिलेंडर योजना के साथ महिलाओं के लिए विस्तृत बस यात्रा सुविधा

    मुख्यमंत्री विजय के बड़े ऐलान से राहत की उम्मीद, मुफ्त सिलेंडर योजना के साथ महिलाओं के लिए विस्तृत बस यात्रा सुविधा

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के गरीब परिवारों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार के मुताबिक इन फैसलों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के साथ महिलाओं की सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच आसान बनाना है। इसके तहत गरीब परिवारों को हर साल तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने की योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है। साथ ही महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा का दायरा बढ़ाने की बात कही गई है।

    सरकार की ओर से घोषित ‘अन्नपूर्णानी सुपर सिक्स’ योजना पोंगल 2027 से शुरू होने की बात कही गई है। इस योजना के तहत ऐसे परिवारों को लाभ देने का प्रस्ताव है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। पात्र परिवारों को एक साल में तीन LPG सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के अनुमान के अनुसार इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवार लाभान्वित हो सकते हैं।

    इस योजना पर राज्य सरकार के खजाने से हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लाभार्थियों को पहले LPG सिलेंडर खरीदना होगा और इसके बाद सिलेंडर की कीमत सीधे उनके बैंक खाते में जमा किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इस तरह सरकार ने योजना को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता से जोड़ने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। प्रस्तावित सुविधा केवल सामान्य बसों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक्सप्रेस, एलएसएस और डीलक्स बसों में भी महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की बात कही गई है। इसके अलावा अंतर-जिला बस सेवाओं में भी महिलाओं को इस सुविधा का लाभ दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

    महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की यह सुविधा ‘वेट्री पयाना थिट्टम’ के तहत 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके दायरे में ट्रांसजेंडर यात्रियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल अधिक सुगम हो सकता है।

    इन कल्याणकारी घोषणाओं के साथ चेन्नई के प्रस्तावित नए एयरपोर्ट को लेकर भी सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। परंदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना का स्थानीय लोगों की ओर से विरोध किए जाने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार ऐसे वैकल्पिक स्थानों की तलाश कर रही है, जहां एयरपोर्ट निर्माण से परिवार प्रभावित न हों।

    सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए कुछ वैकल्पिक स्थानों की पहचान किए जाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार परंदूर में एयरपोर्ट बनाने के पक्ष में नहीं है। इसके साथ ही चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल-5 बनाने की योजना का भी ऐलान किया गया है।

    मुख्यमंत्री विजय ने किसानों के हितों को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे में सरकार के हालिया फैसलों में एक ओर गरीब परिवारों को घरेलू ईंधन पर राहत देने का प्रयास दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया है। इन घोषणाओं के लागू होने के बाद इनके वास्तविक लाभ और वित्तीय प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

  • तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला अपना निर्देश वापस ले लिया है। सरकार की ओर से यह फैसला 19 अगस्त को लिया गया। इससे पहले 14 अगस्त को कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय की ओर से संबंधित विभागों और संस्थानों को निर्देश जारी किया गया था।

    इस निर्देश में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों तथा युवाओं को राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया था। संबंधित प्रशासनिक और शैक्षणिक अधिकारियों से इस दिशा में कार्रवाई करने की अपेक्षा की गई थी। आदेश सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में इसको लेकर बहस तेज हो गई।

    निर्देश में विशेष रूप से CJP और वामपंथी दलों की ओर से आयोजित आंदोलनों का उल्लेख किया गया था। सरकार का रुख छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने पर केंद्रित था, लेकिन इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे। आलोचकों ने इसे छात्रों की राजनीतिक अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक गतिविधियों में भागीदारी से जोड़कर देखा।

    CJP ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए निर्देश को असंवैधानिक बताया था। संगठन का कहना था कि छात्रों को किसी खास राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी करना उनके अधिकारों के दायरे से जुड़ा गंभीर विषय है। आदेश वापस लिए जाने के बाद इस विवाद को लेकर सरकार का रुख पहले की तुलना में बदला हुआ दिखाई दिया।

    इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने सरकार के शुरुआती निर्देश का समर्थन करते हुए CJP और वामपंथी संगठनों पर छात्रों को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि ऐसे संगठन युवाओं को आंदोलनों में शामिल करते हैं और बाद में उन्हें परिस्थितियों का सामना करने के लिए छोड़ देते हैं।

    तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने राज्य की राजनीति में नई भूमिका बनाई है। सरकार के गठन में कांग्रेस और वामपंथी दलों के समर्थन का भी राजनीतिक संदर्भ मौजूद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वामपंथी दलों ने सरकार को समर्थन दिया है, जबकि उनके किसी नेता को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है।

    ऐसे में छात्रों को वामपंथी संगठनों और CJP के प्रदर्शनों से दूर रखने वाला निर्देश राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया था। सरकार द्वारा इसे वापस लेने के बाद अब संबंधित संस्थानों के लिए पहले जारी प्रतिबंधात्मक निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।

    यह घटनाक्रम तमिलनाडु में छात्र राजनीति, राजनीतिक भागीदारी और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है। सरकार का आदेश वापस लेना इस बात का संकेत है कि फिलहाल छात्रों को इन प्रदर्शनों से दूर रखने संबंधी पहले जारी निर्देश को आगे लागू नहीं किया जाएगा।

    हालांकि, राजनीतिक दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। सरकार के फैसले ने एक ओर प्रशासनिक स्तर पर जारी निर्देश को समाप्त किया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी और संस्थानों की भूमिका को लेकर नए सवाल भी सामने रखे हैं।

  • कर्नाटक में तीन तमिलों की कथित मुठभेड़ पर विवाद गहराया, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच और बढ़े मुआवजे की मांग की

    कर्नाटक में तीन तमिलों की कथित मुठभेड़ पर विवाद गहराया, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच और बढ़े मुआवजे की मांग की


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के चामराजनगर और मैसूर क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ कथित मुठभेड़ में तीन तमिल लोगों की मौत के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। घटना को लेकर तमिलनाडु के राजनीतिक दलों और नेताओं ने सवाल उठाए हैं। मृतकों के परिवारों के लिए घोषित मुआवजे को बढ़ाने के साथ ही मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है।

    बताया गया है कि वन क्षेत्र में तीन लोगों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी। इसमें तीनों लोगों की मौत हो गई। शुरुआती तौर पर उन्हें शिकारी होने के संदेह से जोड़ा गया। हालांकि घटना के बाद सामने आए आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने पूरे मामले की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना के बाद चामराजनगर के हनूर क्षेत्र में मृतकों के परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामले को लेकर तमिलनाडु में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हुई।

    तमिलनाडु के कई नेताओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कर्नाटक सरकार से विस्तृत जांच कराने की मांग की है। कुछ नेताओं ने कथित मुठभेड़ को फर्जी मुठभेड़ करार देते हुए मृतकों के परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।

    तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए हत्या का मामला दर्ज करने और पारदर्शी तथा निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी।

    पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी ने भी मामले को लेकर कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाए और केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों के लिए घोषित पांच लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने वन विभाग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को अस्वीकार्य बताते हुए मामले में गंभीर जांच की जरूरत बताई। उनके अनुसार, घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आनी चाहिए और मृतकों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।

    दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विरोध बढ़ने के बाद मजिस्ट्रेट जांच का निर्णय भी लिया गया है। जांच का उद्देश्य घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, मुठभेड़ की परिस्थितियां क्या थीं और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका क्या रही, जैसे सवालों का जवाब तलाशना है।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रही मांग है। एक तरफ वन विभाग की ओर से घटना को मुठभेड़ की परिस्थितियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिवार और राजनीतिक दल इसे गंभीर संदेह के साथ देख रहे हैं।

    अब निगाह मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि तीनों लोगों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी। फिलहाल मुआवजा बढ़ाने, जिम्मेदारी तय करने और स्वतंत्र जांच की मांग के कारण यह मामला कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने और महिला आरक्षण की मांग

    तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने और महिला आरक्षण की मांग

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में परिसीमन के मुद्दे पर प्रस्ताव पेश करते हुए लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या और राज्यों के बीच सीटों के वर्तमान अनुपात को बनाए रखने की मांग की। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल 543 सीटों को बरकरार रखने और इनके आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अपील की गई है।

    मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव की आशंका को देखते हुए मौजूदा सीट व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र से मांग की कि लोकसभा की 543 सीटों की वर्तमान संख्या को स्थायी रूप से बरकरार रखा जाए और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात भी सुरक्षित रखा जाए।

    विजय ने महिला आरक्षण को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने पर इसके लागू होने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसलिए मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण को किसी प्रकार की रियायत मानने के बजाय संवैधानिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण को जल्द लागू किया जाना आवश्यक है। विजय ने तमिलनाडु में महिलाओं की चुनावी भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने मतदान किया है।

    विधानसभा में पेश प्रस्ताव का एक प्रमुख हिस्सा परिसीमन के संभावित प्रभावों से जुड़ा है। तमिलनाडु की ओर से यह मांग रखी गई है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का वर्तमान अनुपात प्रभावित नहीं होना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि 543 सीटों की मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखते हुए ही भविष्य में प्रतिनिधित्व से जुड़े बदलावों पर विचार किया जाना चाहिए।

    विजय की इस मांग के बीच विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता ईपीएस ने परिसीमन के मुद्दे पर अलग रुख रखा। उन्होंने कहा कि परिसीमन में अपने आप में कुछ गलत नहीं है, लेकिन तमिलनाडु का लोकसभा में मौजूदा 7.18 प्रतिशत हिस्सा किसी भी स्थिति में कम नहीं होना चाहिए।

    इस तरह विधानसभा में परिसीमन को लेकर राज्य के प्रतिनिधित्व और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे एक साथ सामने आए। मुख्यमंत्री विजय के प्रस्ताव में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बनाए रखने, राज्यों के बीच वर्तमान सीट अनुपात को सुरक्षित रखने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग शामिल है।

    विजय ने विशेष रूप से 2029 के लोकसभा चुनाव को महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा के रूप में सामने रखा। उनका तर्क है कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया गया तो इसके प्रभावी होने में देरी हो सकती है। इसलिए मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही इसे लागू किया जाना चाहिए।

    प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के सामने परिसीमन को लेकर अपनी राजनीतिक और संवैधानिक चिंताएं रखी हैं। अब इस मुद्दे पर केंद्र और अन्य राज्यों के रुख के साथ आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से लागू करने की मांग राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व और चुनावी व्यवस्था से जुड़े विमर्श को भी प्रभावित कर सकती है।

  • साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक गंभीर समस्या को लेकर राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच के दौरान उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जबकि संबंधित संदिग्ध लेनदेन में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी है।

    तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन राज्य के करीब 5 हजार पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालक ग्राहकों से ईंधन बिक्री के बदले सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।

    डीलरों के अनुसार किसी ग्राहक के यूपीआई भुगतान की पूरी पृष्ठभूमि की जांच करना उनके लिए संभव नहीं है। पेट्रोल पंप पर भुगतान प्राप्त करते समय कारोबारी के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती जिससे यह पता लगाया जा सके कि ग्राहक के बैंक खाते या उससे पहले हुए किसी लेनदेन का संबंध किसी साइबर अपराध की जांच से है या नहीं।

    डीलरों ने बताया कि डिजिटल भुगतान अब उनके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन करीब 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होने का दावा किया गया है। कई पेट्रोल पंपों पर कुल कारोबार का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और दूसरे कैशलेस माध्यमों से आने की बात कही गई है।

    समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी ग्राहक का भुगतान बाद में साइबर अपराध की जांच में शामिल पाया जाता है। डीलरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा सकते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं।

    पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि एक विवादित लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को रोक देना उनके लिए गंभीर वित्तीय परेशानी पैदा करता है। पेट्रोल पंप का दैनिक संचालन लगातार बैंकिंग सुविधाओं पर निर्भर रहता है। ईंधन की खरीद, कर्मचारियों का वेतन, बिजली और अन्य कारोबारी खर्चों के लिए बैंक खाते का सुचारू रूप से काम करना आवश्यक होता है।

    एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को पूछताछ के लिए सुबह के समय ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें कथित तौर पर यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि किस लेनदेन को जांच के दायरे में रखा गया है।

    डीलरों का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली के जरिए ग्राहक से पैसा स्वीकार करने वाले व्यापारी को केवल इसलिए संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि बाद में उस भुगतान को किसी साइबर अपराध की जांच से जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि कारोबारी और संदिग्ध अपराधी के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

    एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें वैध कारोबारियों के बैंक खातों को पर्याप्त आधार और स्पष्ट प्रक्रिया के बिना फ्रीज न किया जाए। संगठन चाहता है कि जांच एजेंसियां विवादित राशि और पूरे कारोबारी खाते के बीच अंतर करें, ताकि जांच भी जारी रहे और सामान्य कारोबार भी प्रभावित न हो।

    डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान नहीं निकला तो राज्य के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। ऐसा होने पर ग्राहक फिर से नकद भुगतान पर निर्भर हो सकते हैं। इससे तमिलनाडु में तेजी से बढ़े डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर भी असर पड़ने की आशंका है।

  • तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की रिहाई के बाद गरमाई राजनीति, जानिए अभिनेता विशाल ने क्या उठाए बड़े सवाल

    तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की रिहाई के बाद गरमाई राजनीति, जानिए अभिनेता विशाल ने क्या उठाए बड़े सवाल

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध अभिनेता विशाल ने हालिया राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महिला सुरक्षा, फिल्म उद्योग की समस्याओं और राज्य के नए राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत विचार साझा किए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की पुलिस हिरासत के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में इस प्रकार के घटनाक्रम घटित होते रहते हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग फिल्म जगत से जुड़ी महिला कलाकारों के प्रति अनुचित और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं, उनके विरुद्ध भी इसी प्रकार की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    अभिनेता ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि डिजिटल प्लेटफार्मों विशेषकर यूट्यूब पर कई लोग महिला अभिनेत्रियों के खिलाफ खुलेआम अपमानजनक और भद्दी टिप्पणियां करते हैं। उनका मानना है कि ऐसे तत्वों पर नकेल कसना अत्यंत आवश्यक है ताकि फिल्म उद्योग में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक रूप से अभद्र टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए।

    तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव और अभिनेता थलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने पर खुशी जताते हुए विशाल ने कहा कि जनता के इस निर्णय से वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि विजय ने अपने सफल अभिनय करियर को विराम देकर पूर्ण रूप से जनसेवा और राजनीति का रास्ता चुना है। अब पूरे राज्य को उनके चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों और नई नीतियों के धरातल पर लागू होने का इंतजार है।

    फिल्म उद्योग की अपेक्षाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार सिनेमा क्षेत्र को राहत प्रदान करेगी। विशाल ने विशेष रूप से राज्य में लागू दोहरे कराधान के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि देश के किसी अन्य राज्य में इस प्रकार की कर व्यवस्था नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से अपील की कि तमिलनाडु में फिल्म उद्योग पर मंडरा रहे दोहरे कर के बोझ को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए ताकि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत मिल सके।

    राज्य की बुनियादी ढांचागत समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने शहरों में जलभराव और सीवेज प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आम जनता और नागरिकों को जलजमाव की समस्याओं से मुक्ति मिलनी चाहिए। उन्हें पूरी उम्मीद है कि नई सरकार निचले और मध्यम वर्ग के कल्याण के लिए प्रभावी नीतियां बनाएगी और राज्य के विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

    दूसरी ओर, रिहा होने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ अत्यंत अनुचित व्यवहार किया गया और लगभग तीन हजार पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उन्हें चेन्नई से तंजावुर तक 400 किलोमीटर सड़क मार्ग से ले जाया गया। उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री तृषा के विरुद्ध द्विअर्थी टिप्पणी करने के मामले में उन्हें चेन्नई स्थित आवास से हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद तंजावुर में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

  • तृषा से जुड़े कथित बयान पर बढ़ा विवाद, शिकायत के बाद उदयनिधि स्टालिन पर कार्रवाई, आरोपों से किया इनकार

    तृषा से जुड़े कथित बयान पर बढ़ा विवाद, शिकायत के बाद उदयनिधि स्टालिन पर कार्रवाई, आरोपों से किया इनकार


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब डीएमके नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को एक कथित विवादित बयान के मामले में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अभिनेत्री तृषा से जुड़ी कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई। मामले के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

    पुलिस कार्रवाई के बाद उदयनिधि स्टालिन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को वास्तविक संदर्भ से हटाकर संपादित किया गया और सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। उनके अनुसार उन्होंने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की थी और पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।

    उदयनिधि ने कहा कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को “कट, कॉपी और पेस्ट” कर अलग अर्थ देने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी का अपमान करने की मंशा से कोई टिप्पणी नहीं की और यदि पूरा भाषण देखा जाए तो वास्तविक संदर्भ स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करेंगे और मामले का जवाब कानून के दायरे में देंगे।

    यह विवाद एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिए गए उनके संबोधन से जुड़ा बताया जा रहा है। सभा के दौरान मौजूद लोगों के एक समूह ने अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर नारे लगाए थे। इसके बाद उदयनिधि द्वारा कही गई एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर उस बयान के विभिन्न वीडियो क्लिप वायरल हुए, जिसके बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

    विवाद बढ़ने के बाद अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की महिला इकाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है और अभिनेत्री तृषा को लेकर आपत्तिजनक संकेत देती है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की।

    मामले ने राजनीतिक सीमाओं से आगे बढ़कर मनोरंजन जगत का भी ध्यान आकर्षित किया। गायिका चिन्मयी श्रीपादा और अभिनेत्री तथा राजनेता खुशबू सुंदर ने सार्वजनिक रूप से इस कथित बयान की आलोचना की। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं को महिलाओं के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना चाहिए और किसी भी प्रकार की विवादित टिप्पणी से बचना चाहिए।

    हालांकि उदयनिधि स्टालिन लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनके बयान की गलत व्याख्या की गई है। उनका कहना है कि पूरा भाषण देखने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि वायरल किए गए वीडियो और वास्तविक संदर्भ में अंतर है। उन्होंने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय पूरे तथ्य सामने आने का इंतजार करें।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है, जहां सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। आने वाले दिनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।

  • विजय थलापति की विदाई फिल्म 'जन नायकन' का दमदार आगाज, पहले दिन 41 करोड़ की कमाई के साथ कई रिकॉर्ड किए अपने नाम

    विजय थलापति की विदाई फिल्म 'जन नायकन' का दमदार आगाज, पहले दिन 41 करोड़ की कमाई के साथ कई रिकॉर्ड किए अपने नाम

    नई दिल्ली । विजय थलापति की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ ने सिनेमाघरों में रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत दर्ज की है। यह फिल्म अभिनेता के अभिनय करियर की अंतिम फिल्म मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के बाद फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसी वजह से दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई थी। पहले दिन मिले दर्शकों के अच्छे समर्थन ने फिल्म को शुरुआती बढ़त दिलाई, हालांकि ट्रेड विशेषज्ञों की अपेक्षा के अनुरूप यह 50 करोड़ या उससे अधिक की घरेलू ओपनिंग हासिल नहीं कर सकी।

    देशभर में फिल्म के लिए पहले दिन 13 हजार से अधिक शो आयोजित किए गए। व्यापक रिलीज का लाभ उठाते हुए ‘जन नायकन’ ने पहले दिन 41 करोड़ रुपये का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दर्ज किया। फिल्म गुरुवार को रिलीज हुई, जिसे आमतौर पर वीकेंड से पहले का दिन माना जाता है। ऐसे में कारोबार पर कार्यदिवस का असर देखने को मिला। अब उद्योग को उम्मीद है कि शुक्रवार, शनिवार और रविवार को दर्शकों की संख्या बढ़ने के साथ फिल्म की कमाई में उल्लेखनीय उछाल आ सकता है।

    ओपनिंग डे कलेक्शन के लिहाज से ‘जन नायकन’ ने हालिया चर्चित फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने पहले दिन 28.60 करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जबकि विक्की कौशल की ‘छावा’ ने 33.10 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इस तुलना में विजय थलापति की फिल्म का 41 करोड़ रुपये का शुरुआती संग्रह बेहतर माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अभिनेता की लोकप्रियता और फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का सीधा असर बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिला।

    फिल्म का प्रदर्शन केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। विदेशी बाजारों में भी ‘जन नायकन’ को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और पहले दिन करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। इसके साथ फिल्म का कुल वैश्विक कलेक्शन 78.27 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रिलीज से पहले कई ट्रेड विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि फिल्म पहले ही दिन 100 करोड़ रुपये का वैश्विक आंकड़ा पार कर सकती है। वास्तविक कमाई इस अनुमान से कम रही, लेकिन शुरुआती प्रदर्शन को उद्योग अब भी सकारात्मक मान रहा है।

    ‘जन नायकन’ में विजय थलापति के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल और प्रकाश राज जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म को दर्शकों से मिश्रित लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। कई प्रशंसकों के लिए यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि अभिनेता के लंबे फिल्मी सफर को विदाई देने वाला भावनात्मक अवसर भी बन गई है। रिलीज के दिन कई सिनेमाघरों में प्रशंसकों ने जश्न मनाया, जबकि कुछ जगहों पर भावुक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।

    विजय थलापति का अभिनय से संन्यास लेना इस फिल्म को और अधिक खास बनाता है। राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के उनके निर्णय के बाद ‘जन नायकन’ को उनके फिल्मी करियर की अंतिम प्रस्तुति माना जा रहा है। यही कारण है कि फिल्म को लेकर दर्शकों की भावनात्मक जुड़ाव भी काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजरें पहले वीकेंड के कारोबार पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि फिल्म शुरुआती रफ्तार को कितनी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाती है।

  • इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का पारंपरिक शिल्प कौशल केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का एक सशक्त आधार भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, आधुनिक सोच और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारतीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर रोजगार, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। उनका कहना था कि यदि पारंपरिक कौशल को आधुनिक अवसरों के साथ जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने इस विषय पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विचारों को साझा करते हुए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद विशिष्ट उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आजीविका मजबूत हो रही है और भारत की पारंपरिक विरासत को भी नई पहचान मिल रही है।

    वित्त मंत्री ने चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग ने भारतीय कारीगरों को वैश्विक फैशन उद्योग से जोड़ने का नया रास्ता खोला है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से फ्रांस की उच्चस्तरीय फैशन परंपरा और भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई कला का सफल समन्वय हुआ है। इससे भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों के लिए उच्च मूल्य वाले कार्य अवसर भी विकसित हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भी इस पहल का उल्लेख किया गया था, जिससे भारतीय शिल्प कौशल की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत मिलता है। भारत लौटने के बाद उन्होंने तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला का दौरा किया और वहां कार्यरत कारीगरों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें यह जानकर विशेष संतोष हुआ कि कंपनी ने अपनी कार्यशाला को शहर से गांव में स्थानांतरित करने का निर्णय इसलिए लिया ताकि पारंपरिक कौशल रखने वाले ग्रामीण परिवारों को उनके अपने क्षेत्र में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्यतः रोजगार की तलाश में ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन इस पहल ने विपरीत दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांवों में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभा को अपने क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इससे पारंपरिक शिल्प की निरंतरता भी बनी रहती है और नई पीढ़ी का इस कला से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

    उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लंबे समय से सूखे की चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे समय में जब खेती प्रभावित होती थी, तब ग्रामीण परिवार सूती और रेशमी वस्त्रों पर बारीक कढ़ाई कर अपनी आजीविका चलाते थे। यही परंपरा आज आधुनिक बाजारों तक पहुंचकर नए अवसरों का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि धैर्य, अनुशासन और बारीकी जैसी विशेषताओं से परिपूर्ण भारतीय कारीगरों की यह कला देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक विकास की भी मजबूत आधारशिला बन सकती है।

  • आस्था और तकनीक का बेजोड़ संगम: कहीं धड़कता है भगवान का दिल तो कहीं आता है साक्षात पसीना, जानें इन तीन रहस्यमयी मंदिरों की गाथा

    आस्था और तकनीक का बेजोड़ संगम: कहीं धड़कता है भगवान का दिल तो कहीं आता है साक्षात पसीना, जानें इन तीन रहस्यमयी मंदिरों की गाथा


    नई दिल्ली । भारत के दक्षिणी राज्यों में स्थित प्राचीन मंदिर अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्ता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। लेकिन तमिलनाडु के तीन ऐसे विशिष्ट मंदिर भी हैं, जहाँ की मूर्तियां निर्जीव पत्थरों की होने के बावजूद इंसानों की तरह व्यवहार करती दिखाई देती हैं। इन विग्रहों में मानवीय धड़कन महसूस होने, भीषण गर्मी में साक्षात पसीना आने और चेहरे पर मूंछों के बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ने के दावे किए जाते हैं। आधुनिक विज्ञान और शोधकर्ताओं के लिए यह चमत्कारी घटनाएं आज भी एक अबूझ पहेली बनी हुई हैं, जबकि श्रद्धालुओं के लिए यह ईश्वर की प्रत्यक्ष उपस्थिति का प्रमाण है।

    तमिलनाडु में स्थित चिदंबरम नटराज मंदिर भगवान शिव के सबसे पवित्र और प्रमुख धामों में से एक माना जाता है, जहाँ शिव जी नटराज स्वरूप में विराजमान हैं। इस मंदिर को लेकर वैज्ञानिक जगत और शोधकर्ताओं के बीच लंबे समय से अध्ययन जारी है। प्रामाणिक मान्यताओं के अनुसार यदि मंदिर की मुख्य विग्रह के हृदय वाले स्थान पर अत्यंत ध्यानपूर्वक महसूस किया जाए, तो वहाँ एक निरंतर धड़कन की ध्वनि सुनाई देती है। यह कंपन बिल्कुल किसी जीवित मनुष्य के हृदय की गति के समान प्रतीत होता है। विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि यह देवालय पृथ्वी के चुंबकीय केंद्र पर निर्मित है, जिससे यहाँ एक अत्यंत तीव्र और शक्तिशाली ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

    रहस्य की इस कड़ी में अगला नाम तिरुनेलवेली के थिरुमालीरुंचोलई मंदिर का आता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस पावन परिसर में ग्रीष्म ऋतु के दौरान एक अत्यंत विस्मयकारी दृश्य देखने को मिलता है। जब बाहरी वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब गर्भगृह के भीतर स्थापित भगवान विष्णु की पाषाण निर्मित मूर्ति को साक्षात पसीना आने लगता है। मूर्ति के मुखमंडल और शरीर पर स्वेद की छोटी-छोटी बूंदें स्पष्ट रूप से उभर आती हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और मंदिर के सेवादार प्रतिदिन अत्यंत आदर भाव से सूती वस्त्र की सहायता से इस जल को पोंछते हैं।

    तीसरा चमत्कार कोयंबटूर के निकट स्थित पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर से जुड़ा हुआ है, जो अपनी प्राचीन कलाकृति के साथ-साथ एक विशेष मूर्ति के लिए चर्चा में रहता है। मंदिर परिसर में स्थापित एक विशिष्ट विग्रह की मूंछों के बाल समय के साथ प्राकृतिक रूप से बड़े होते जाते हैं। स्थानीय परंपराओं और पीढ़ियों से सेवा कर रहे पुजारियों के अनुसार, एक निश्चित समयावधि के पश्चात इन बालों को तराशना पड़ता है। पाषाण खंड पर इस तरह से बालों का विकास होना विज्ञान के सभी स्थापित नियमों को चुनौती देता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार इन घटनाओं के पीछे पत्थरों की विशिष्ट प्रकृति, वातावरण की आर्द्रता, भौगोलिक स्थिति अथवा कोई अज्ञात भू-गर्भीय या रासायनिक प्रतिक्रिया उत्तरदायी हो सकती है। हालांकि, कड़े और नियंत्रित वातावरण के भीतर भी इन विसंगतियों का कोई ठोस वैज्ञानिक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं किया जा सका है। हमारे पूर्वजों ने किस अदृश्य तकनीक और वैज्ञानिक चेतना के बल पर इन दिव्य संरचनाओं का निर्माण किया था, यह रहस्य आज भी इतिहास के गर्भ में छिपा हुआ है, लेकिन इन स्थलों के प्रति जनमानस की अगाध श्रद्धा निरंतर बनी हुई है।