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  • कुछ व्यक्तियों को बनाया गया निशाना… SC ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं को बताया एकतरफा

    कुछ व्यक्तियों को बनाया गया निशाना… SC ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं को बताया एकतरफा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को 12 ‘प्रतिष्ठित’ व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका कथित हेट स्पीच (Hate Speech) के लिए केवल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों (BJP Ruled States Chief Ministers) को निशाना बना रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं को छोड़ दिया गया है।


    मामला क्या है?

    याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन को रोकने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों और नौकरशाहों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ से कहा कि देश का माहौल जहरीला हो गया है और केवल सुप्रीम कोर्ट ही इसे सुधार सकता है। हालांकि, पीठ ने तुरंत यह इशारा किया कि याचिका में समस्या को उजागर करते समय चुनिंदा रूप से केवल कुछ व्यक्तियों का नाम लिया गया है।


    सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

    अदालत ने याचिका के एकतरफा होने पर सवाल उठाए और कहा- यह याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रही है, जबकि उन अन्य लोगों को छोड़ दिया गया है जो नियमित रूप से ऐसे हेट स्पीच देते हैं। याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं देना चाहिए कि वे केवल कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रहे हैं।

    CJI ने कहा कि एक निष्पक्ष और तटस्थ याचिका के साथ आएं। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। अंततः, सभी पक्षों की ओर से बोलने में संयम होना चाहिए। हम यह कहना चाहेंगे कि सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना चाहिए और अपने भाषणों में संयम बरतना चाहिए। कोई भी दिशानिर्देश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

    पीठ ने कहा कि कई राजनीतिक दल अपनी सांप्रदायिक विचारधारा के आधार पर बेशर्मी से भाषण देते हैं और खुलेआम नफरत फैलाते हैं। कोर्ट ने सिब्बल से कहा- आपने दूसरे पक्ष का एक भी उदाहरण पेश नहीं किया है।


    याचिका में किनका नाम था?

    याचिकाकर्ताओं में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब जंग, जॉन दयाल और अशोक कुमार शर्मा शामिल थे। उन्होंने अपनी याचिका में कथित हेट स्पीच के लिए कई भाजपा नेताओं का नाम लिया था:
    – हिमंत बिस्वा सरमा (असम के मुख्यमंत्री)
    – योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री)
    – देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री)
    – पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड के मुख्यमंत्री)
    – अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
    – गिरिराज सिंह (केंद्रीय मंत्री)
    – इसके अलावा कुछ नौकरशाहों की टिप्पणियों का भी जिक्र था।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘राजनीतिक दलों के नेताओं को भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। अदालतें आदेश पारित कर सकती हैं, लेकिन इसका असली समाधान राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थानों द्वारा संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के प्रति वफादार रहने में ही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भाषण की उत्पत्ति विचार प्रक्रिया से होती है। क्या अदालत के आदेश से किसी व्यक्ति की विचार प्रक्रिया को बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?’

    जस्टिस बागची: उन्होंने सिब्बल से कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट याचिका है। इसे एक लोकलुभावन कवायद बनाने के बजाय, इसे एक रचनात्मक संवैधानिक प्रयास होने दें। राजनीति का शोर-शराबा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने का आधार नहीं होना चाहिए।

    जब कपिल सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से व्यक्तियों के सभी संदर्भ हटा देंगे, तो पीठ ने जवाब दिया कि आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही वह जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सिब्बल ने याचिका में संशोधन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।


    याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य मांगे हैं:

    यह घोषणा की जाए कि संवैधानिक पदों या सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण संवैधानिक नैतिकता के अधीन होने चाहिए और वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें। संवैधानिक पदधारियों और नौकरशाहों के सार्वजनिक भाषण को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि बिना पूर्व प्रतिबंध या सेंसरशिप के संवैधानिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

  • 'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस वक्त भड़क गईं जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलने पहुंचीं मगर उनसे कोई मिलना नहीं आया. अपर्णा यादव, रमीज और धर्मांतरण के मामले को लेकर केजीएमयू पहुंचीं थीं. इसके बाद एक प्रेस वार्ता में अपर्णा ने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नहीं आईं. उन्होंने कहा कि पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचओडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

    यादव ने दावा किया कि पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई? उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष काम कर रहे हैं.यादव ने विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है. अपर्णा ने दावा किया कि विशाखा कमेटी को अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर बताए गए.

    उन्होंने पूछा कि क्या महिला आयोग, संवैधानिक संस्था नहीं है?

    केजीएमयू वीसी से मुलाकात के संदर्भ में यादव ने कहा कि हमारी कुछ बात होती जिस पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचते. शायद तब मैं प्रेसवार्ता भी नहीं करती. मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार विधि और न्याय सम्मत काम करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ इन मामलों में सचेत रहते हैं.

    महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा-केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है, यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है.

    यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो इस बात को जानेंगी तो वह भी इसे गंभीरतापूर्वक समझेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक यहां से भागा तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू के संपर्क में रहे. केजीएमयू प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?