Tag: targeted

  • मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

    मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना पर हमला करने की खबरों से इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का निशाना सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इससे पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने मक्का और मदीना की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है। कई इलाकों में मिसाइलों का मलबा गिरने की भी जानकारी दी गई थी।

    हूती समूह के इस बयान से सऊदी अरब और यमन के बीच सीमा पार तनाव बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा कि जब भी वे सैन्य अभियान चलाते हैं, तो उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं। सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के इनकार और उनके बताए लक्ष्यों पर तत्काल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी।

    सऊदी अरब ने मिसाइलें रोकने का किया दावा

    सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों का मलबा मक्का के पास और जेद्दा, ताइफ तथा रबिघ में मिलने की जानकारी सामने आई।

    शनिवार को सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा के लोगों को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। करीब 10 मिनट बाद एजेंसी ने बताया कि खतरा टल गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइलों के मलबे की जानकारी वाले सभी स्थानों पर वास्तव में क्या हुआ और क्या कोई मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंची थी। हूतियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मक्का और मदीना को निशाना नहीं बनाया।

    रियाद एयरपोर्ट और अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों पर हमले किए। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा, रबिघ तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशन और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।

    प्रवक्ता ने दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नज्रान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के एक हवाई अड्डे को भी निशाना बनाने का दावा किया।

    वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। हालांकि, हूतियों की ओर से बताए गए अन्य ठिकानों पर हमलों की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने भी इन दावों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर मिसाइल हमले का आरोप

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया है। यमन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से दो मिसाइलें तटरक्षक बल के मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही इलाके में तटरक्षक बल की एक इमारत पर गिरी।

    दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। उन्होंने अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन ठिकानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।

    2022 के युद्धविराम पर फिर मंडराया खतरा

    ताजा घटनाक्रम से यमन में संघर्ष रोकने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है। वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी।

    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों का राजधानी सना और देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

    ईरान के साथ जारी व्यापक अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है। इसी महीने की शुरुआत में हूतियों ने विमानन कंपनियों को सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, उस चेतावनी में मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को अलग रखा गया था।

  • ईरान से तेल-पेट्रोकेमिकल डील पर US की बड़ी कार्रवाई: इंडिया-बेस्ड 4 कंपनियों पर प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर

    ईरान से तेल-पेट्रोकेमिकल डील पर US की बड़ी कार्रवाई: इंडिया-बेस्ड 4 कंपनियों पर प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर


    नई दिल्ली। ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी ने 4 इंडिया-बेस्ड कंपनियों और 3 भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन कंपनियों पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में शामिल होने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित लेनदेन की कुल कीमत करीब 119 मिलियन डॉलर है।

    यह कार्रवाई ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि इसका उद्देश्य उन आर्थिक रास्तों को निशाना बनाना है, जिनका इस्तेमाल ईरान राजस्व जुटाने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।

    सदाशिव ओवरसीज पर 69 मिलियन डॉलर के आयात का आरोप
    अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, इंडिया-बेस्ड सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इनमें कुछ शिपमेंट ऐसी कंपनी से जुड़े बताए गए हैं, जिस पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है।

    इसके अलावा PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 25-25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप लगाया गया है। इन तीनों कंपनियों के कारोबार को मिलाकर कुल रकम करीब 119 मिलियन डॉलर बताई गई है।

    चौथी कंपनी पर पेट्रोकेमिकल शिपमेंट में मदद का आरोप
    अमेरिका ने पोर्टईज पार्टनर्स LLP पर भी कार्रवाई की है। आरोप है कि कंपनी ने ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेप भारत लाने में मदद की। अमेरिका ने कंपनियों के अलावा तीन भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। इनमें PP सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग, पोर्टईज पार्टनर्स से जुड़े इदरीसमिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी शामिल हैं।

    अमेरिका ने देशों को दी चेतावनी
    अमेरिका पहले ही विभिन्न देशों को चेतावनी दे चुका है कि वे ईरान को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए तय समयसीमा का पालन करें। ऐसा नहीं करने पर संबंधित कंपनियों और संस्थाओं को भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस अभियान का मकसद ईरान के उन आर्थिक रास्तों को बंद करना है, जिनके जरिए वह राजस्व हासिल करता है और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है।

  • कुछ व्यक्तियों को बनाया गया निशाना… SC ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं को बताया एकतरफा

    कुछ व्यक्तियों को बनाया गया निशाना… SC ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं को बताया एकतरफा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को 12 ‘प्रतिष्ठित’ व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका कथित हेट स्पीच (Hate Speech) के लिए केवल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों (BJP Ruled States Chief Ministers) को निशाना बना रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं को छोड़ दिया गया है।


    मामला क्या है?

    याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन को रोकने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों और नौकरशाहों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ से कहा कि देश का माहौल जहरीला हो गया है और केवल सुप्रीम कोर्ट ही इसे सुधार सकता है। हालांकि, पीठ ने तुरंत यह इशारा किया कि याचिका में समस्या को उजागर करते समय चुनिंदा रूप से केवल कुछ व्यक्तियों का नाम लिया गया है।


    सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

    अदालत ने याचिका के एकतरफा होने पर सवाल उठाए और कहा- यह याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रही है, जबकि उन अन्य लोगों को छोड़ दिया गया है जो नियमित रूप से ऐसे हेट स्पीच देते हैं। याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं देना चाहिए कि वे केवल कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रहे हैं।

    CJI ने कहा कि एक निष्पक्ष और तटस्थ याचिका के साथ आएं। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। अंततः, सभी पक्षों की ओर से बोलने में संयम होना चाहिए। हम यह कहना चाहेंगे कि सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना चाहिए और अपने भाषणों में संयम बरतना चाहिए। कोई भी दिशानिर्देश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

    पीठ ने कहा कि कई राजनीतिक दल अपनी सांप्रदायिक विचारधारा के आधार पर बेशर्मी से भाषण देते हैं और खुलेआम नफरत फैलाते हैं। कोर्ट ने सिब्बल से कहा- आपने दूसरे पक्ष का एक भी उदाहरण पेश नहीं किया है।


    याचिका में किनका नाम था?

    याचिकाकर्ताओं में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब जंग, जॉन दयाल और अशोक कुमार शर्मा शामिल थे। उन्होंने अपनी याचिका में कथित हेट स्पीच के लिए कई भाजपा नेताओं का नाम लिया था:
    – हिमंत बिस्वा सरमा (असम के मुख्यमंत्री)
    – योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री)
    – देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री)
    – पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड के मुख्यमंत्री)
    – अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
    – गिरिराज सिंह (केंद्रीय मंत्री)
    – इसके अलावा कुछ नौकरशाहों की टिप्पणियों का भी जिक्र था।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘राजनीतिक दलों के नेताओं को भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। अदालतें आदेश पारित कर सकती हैं, लेकिन इसका असली समाधान राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थानों द्वारा संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के प्रति वफादार रहने में ही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भाषण की उत्पत्ति विचार प्रक्रिया से होती है। क्या अदालत के आदेश से किसी व्यक्ति की विचार प्रक्रिया को बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?’

    जस्टिस बागची: उन्होंने सिब्बल से कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट याचिका है। इसे एक लोकलुभावन कवायद बनाने के बजाय, इसे एक रचनात्मक संवैधानिक प्रयास होने दें। राजनीति का शोर-शराबा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने का आधार नहीं होना चाहिए।

    जब कपिल सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से व्यक्तियों के सभी संदर्भ हटा देंगे, तो पीठ ने जवाब दिया कि आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही वह जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सिब्बल ने याचिका में संशोधन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।


    याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य मांगे हैं:

    यह घोषणा की जाए कि संवैधानिक पदों या सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण संवैधानिक नैतिकता के अधीन होने चाहिए और वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें। संवैधानिक पदधारियों और नौकरशाहों के सार्वजनिक भाषण को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि बिना पूर्व प्रतिबंध या सेंसरशिप के संवैधानिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

  • 'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस वक्त भड़क गईं जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलने पहुंचीं मगर उनसे कोई मिलना नहीं आया. अपर्णा यादव, रमीज और धर्मांतरण के मामले को लेकर केजीएमयू पहुंचीं थीं. इसके बाद एक प्रेस वार्ता में अपर्णा ने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नहीं आईं. उन्होंने कहा कि पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचओडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

    यादव ने दावा किया कि पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई? उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष काम कर रहे हैं.यादव ने विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है. अपर्णा ने दावा किया कि विशाखा कमेटी को अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर बताए गए.

    उन्होंने पूछा कि क्या महिला आयोग, संवैधानिक संस्था नहीं है?

    केजीएमयू वीसी से मुलाकात के संदर्भ में यादव ने कहा कि हमारी कुछ बात होती जिस पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचते. शायद तब मैं प्रेसवार्ता भी नहीं करती. मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार विधि और न्याय सम्मत काम करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ इन मामलों में सचेत रहते हैं.

    महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा-केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है, यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है.

    यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो इस बात को जानेंगी तो वह भी इसे गंभीरतापूर्वक समझेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक यहां से भागा तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू के संपर्क में रहे. केजीएमयू प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?