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  • भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति

    भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति



    नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की विदेश नीति इन दिनों चर्चा में है। बांग्लादेश की नई सरकार एक तरफ India के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ भी नजदीकियां बनाए रखना चाहती है। अमेरिकी भू-राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने इसे “बैलेंसिंग स्ट्रेटेजी” बताया है।

    विश्लेषकों के मुताबिक बांग्लादेश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध बेहद जरूरी हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत के साथ मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते ढाका के लिए आर्थिक फायदे ला सकते हैं। साथ ही सीमा सुरक्षा, बिजली साझेदारी और साझा नदियों जैसे मुद्दों पर सहयोग भी बांग्लादेश के हित में माना जा रहा है।

    पाकिस्तान से दूरी भी नहीं चाहता ढाका
    रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ भी रिश्तों में गर्मजोशी बनाए रखना चाहता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच वीजा नियमों में ढील और यात्रा संपर्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई संघ यानी सार्क को मजबूत करने, “ग्लोबल साउथ” के साथ जुड़ाव बढ़ाने और तुर्की जैसी मध्यम ताकतों के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर ढाका और इस्लामाबाद की सोच काफी हद तक मिलती है।

    भारत विरोधी भावना का भी असर
    विश्लेषक माइकल कुलेगमैन का कहना है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत विरोधी भावना रखने वाला एक बड़ा वर्ग मौजूद है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाए रखना घरेलू राजनीति में भी तारिक रहमान सरकार को फायदा पहुंचा सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर ढाका वास्तव में भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है तो पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना जोखिम भरा कदम हो सकता है।

    ‘दोनों से फायदा’ चाहती है बांग्लादेश सरकार
    रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश ऐसी विदेश नीति अपनाना चाहता है जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध बने रहें और किसी भी पक्ष को नाराज न किया जाए। ढाका का फोकस आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक फायदे हासिल करने पर है।विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में बांग्लादेश की यही संतुलन नीति दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh.) के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tariq Rahman.) के शपथग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi.) नहीं जाएंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) को भारत बांग्लादेश भेज रहा है। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी होंगे। यह समारोह 17 फरवरी को ढाका के राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित होगा।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल भारत-बांग्लादेश के गहरे और स्थायी दोस्ती को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण मिला था, लेकिन वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट की तैयारी के कारण नहीं जा पा रहे।

    हाल ही में बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी जीत दर्ज की। तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से वापस लौटे थे, अब प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बीएनपी के संस्थापक थे और मां खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री रही हैं। 2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों में देश छोड़ने वाले रहमान ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहला था। रहमान ने जीत के बाद राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और कहा कि वे लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेंगे।


    भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते

    प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी और उन्हें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी बलिदानों को याद किया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया, जिसमें चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का प्रतीक है। बीएनपी ने हमेशा भारत के साथ संतुलित संबंधों पर जोर दिया है और रहमान ने कहा है कि वे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रखेंगे, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाएंगे।

    यह शपथ ग्रहण समारोह बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक माना जा रहा है। तारिक रहमान ने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती और रोजगार सृजन का वादा किया है। भारत के लिए बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है और दोनों देश साझा इतिहास, संस्कृति व सीमा से जुड़े हैं। ओम बिरला और विक्रम मिस्री की उपस्थिति से व्यापार, सुरक्षा, जल संसाधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलने की उम्मीद है। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करेंगे, जो दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए अहम है।

  • पाकिस्तान समर्थक सेना अधिकारी से मिले तारिक रहमान, भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान

    पाकिस्तान समर्थक सेना अधिकारी से मिले तारिक रहमान, भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान

    पाकिस्तान समर्थक सेना अधिकारी से मिले तारिक रहमान, भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान
    ढाका। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अंतरिम अध्यक्ष तारिक रहमान ने पूर्व बांग्लादेश आर्मी अधिकारी और भारत-विरोधी ब्रिगेडियर जनरल अमन आजमी से मुलाकात की। अमन आजमी विवादास्पद जमात नेता गुलाम आजम के बेटे हैं, जिससे बीएनपी के चुनाव के बाद के लक्ष्यों पर सवाल उठ रहे हैं। बुधवार शाम ढाका में यह मुलाकात हुई। इससे बीएनपी के पाकिस्तान और उसकी जासूसी एजेंसी ISI के साथ भविष्य के संबंधों पर संदेह पैदा होता है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे कदम भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।

    तारिक रहमान ने हाल ही में अपनी नई छवि में भारत के प्रति स्वागत योग्य दिखाई है, जो यह संकेत देता है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री चुना जाता है तो वे सामान्य साझेदारी स्थापित करने के लिए इच्छुक हैं। हालांकि, जानकार कहते हैं कि उनके पुराने आईएसआई और जमात-ए-इस्लामी से संबंध फिर से उभर सकते हैं। रहमान के भविष्य के कदमों पर नजर रखने की जरूरत है क्योंकि जमात किसी भविष्य की सरकार में शामिल होने के लिए उतावली दिख रही है।
    अमन आजमी के पिता कौन थे

    गुलाम आजम 1971 के मुक्ति युद्ध के दौरान बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख नेता थे। उन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता का सक्रिय रूप से विरोध किया और पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग किया। उन्होंने प्रो-पाकिस्तान पीस कमेटियों का गठन और नेतृत्व किया, जो रजाकारों, अल-बद्र और अल-शम्स जैसे क्रूर अर्धसैनिक समूहों के लिए भर्ती करते थे। ये समूह युद्ध अपराधों, नरसंहार और बुद्धिजीवियों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे।

    बाद में गुलाम आजम के खिलाफ बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया और दोषी ठहराया गया। आजम को 90 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन 2013 में 91 साल की उम्र के कारण उन्हें मृत्युदंड से छूट दी गई। 2014 में उनकी मृत्यु हो गई। अमन आजमी शेख हसीना के शासन के अंतिम चरण में गुमनाम रहे, लेकिन उनके हटाए जाने के तुरंत बाद वे फिर से सक्रिय हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से उन्होंने कई सीनियर आर्मी अधिकारियों के खिलाफ अपहरण और हत्याओं में शामिल होने के आरोप लगाने में अहम भूमिका निभाई।
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    सऊदी अरब ने अमेरिकी ऐक्शन का किया स्वागत, मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं आतंकवादी संगठन घोषित
    रियाद । सऊदी अरब ने अमेरिका के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र, जॉर्डन और लेबनान की शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि यह कदम उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करता है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और अरब देशों की समृद्धि को बढ़ावा देता है।

    अमेरिकी ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने 13 जनवरी 2026 को यह घोषणा की थी। अमेरिका ने मिस्र और जॉर्डन की मुस्लिम ब्रदरहुड शाखाओं को ‘स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट’ और लेबनान की शाखा (अल-जमाआ अल-इस्लामिया) को ‘फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन’ घोषित किया। अमेरिका का आरोप है कि ये शाखाएं हमास को समर्थन देती हैं, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं, हथियार बनाती हैं (जैसे रॉकेट और ड्रोन), लड़ाकों की भर्ती करती हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नवंबर 2025 में जारी कार्यकारी आदेश पर आधारित है, जिसके तहत मुस्लिम ब्रदरहुड की कुछ शाखाओं को निशाना बनाया गया।

    सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा- सऊदी अरब का विदेश मंत्रालय अमेरिका द्वारा मिस्र, जॉर्डन और लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाओं को आतंकवादी समूह घोषित करने का स्वागत करता है। मंत्रालय ने जोर दिया कि सऊदी अरब उग्रवाद और आतंकवाद की सभी रूपों की निंदा करता है तथा अरब देशों, क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा, स्थिरता एवं समृद्धि के लिए हर संभव सहयोग का समर्थन करता है।

    यह कदम मध्य पूर्व में मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रति विभाजित रुख को दर्शाता है। मिस्र ने 2013 से, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है, जबकि कतर और तुर्की जैसे देशों में इसका प्रभाव अधिक है। मिस्र ने भी इस अमेरिकी फैसले का स्वागत किया और इसे उग्र विचारधारा पर मजबूत प्रहार बताया। मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र शाखा ने इस फैसले को खारिज किया और कहा कि यह बिना किसी ठोस सबूत के लिया गया है।