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  • पायल और बिछिया का कालापन हटाने के आसान घरेलू उपाय, गर्म पानी और बेकिंग सोडा से करें चांदी की सफाई

    पायल और बिछिया का कालापन हटाने के आसान घरेलू उपाय, गर्म पानी और बेकिंग सोडा से करें चांदी की सफाई

    नई दिल्ली ।चांदी के गहने जैसे पायल, बिछिया, अंगूठी और अन्य आभूषण लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद अक्सर काले या फीके दिखाई देने लगते हैं। कई बार गहनों की चमक इतनी कम हो जाती है कि वे पुराने नजर आने लगते हैं। खासकर रोजाना पहने जाने वाले चांदी के आभूषणों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। हालांकि, चांदी का काला होना हमेशा गंदगी की वजह से नहीं होता।

    चांदी के काले पड़ने की मुख्य वजह एक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसे टार्निशिंग कहा जाता है। हवा में मौजूद सल्फर या हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसों के संपर्क में आने पर चांदी की सतह पर सिल्वर सल्फाइड की परत बन सकती है। यही परत गहनों को काला या मटमैला दिखाती है। नमी, पसीना और रोजमर्रा के इस्तेमाल से भी इस प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है।

    चांदी के गहनों को साफ करने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए थोड़े गुनगुने पानी में करीब एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को मुलायम कपड़े या बहुत नरम ब्रश की मदद से गहने की सतह पर हल्के हाथों से लगाएं। कुछ देर बाद इसे बिना ज्यादा दबाव के साफ करें और पानी से धोकर मुलायम कपड़े से सुखा लें।

    अगर गहने पर ज्यादा कालापन जमा है तो एल्युमिनियम फॉयल वाला तरीका भी अपनाया जा सकता है। एक बर्तन में गर्म पानी लें और उसमें एल्युमिनियम फॉयल का टुकड़ा रखें। इसमें थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा और नमक डालकर घोल तैयार किया जा सकता है। इसके बाद चांदी के गहनों को कुछ मिनट के लिए इसमें रखें और फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।

    इस तरीके में एल्युमिनियम और चांदी के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिए टार्निश की परत को हटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर तरह के चांदी के गहने इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त हों, यह जरूरी नहीं है। खासतौर पर नाजुक डिजाइन, ऑक्सीडाइज्ड चांदी, मोती, कीमती पत्थरों या चिपकाए गए सजावटी हिस्सों वाले गहनों पर यह तरीका सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।

    हल्के दाग और सामान्य गंदगी के लिए साबुन और गुनगुना पानी अपेक्षाकृत सरल तरीका है। गहने को कुछ समय के लिए गुनगुने पानी में रखने के बाद हल्के साबुन से धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। इसके बाद साफ पानी से धोकर सूती या मुलायम कपड़े से पूरी तरह सुखाना जरूरी है।

    चांदी की सफाई करते समय बहुत कठोर ब्रश या ज्यादा रगड़ने से बचना चाहिए। इससे गहने की सतह पर खरोंच आ सकती है। इसी तरह तेज रसायनों या ऐसे क्लीनर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिनके बारे में यह स्पष्ट न हो कि वे चांदी के लिए सुरक्षित हैं।

    सफाई के बाद चांदी के गहनों को नमी से दूर, सूखी और बंद जगह पर रखना बेहतर होता है। उन्हें परफ्यूम, कॉस्मेटिक, पसीने और घरेलू रसायनों के सीधे संपर्क से बचाने पर कालापन अपेक्षाकृत देर से आ सकता है। यदि गहना बहुत महंगा, बेहद नाजुक या कीमती पत्थरों से जड़ा हुआ है, तो घरेलू प्रयोग करने के बजाय विशेषज्ञ से सफाई कराना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

  • महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं

    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं


    कश्‍मीर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कैदियों की जेल बदलने पर बड़ा बयान दिया। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजन है कि जम्मू-कश्मीर के कैदियों को अन्य जगहों की जेलों से वापस घर लाने के आग्रह वाली उनकी याचिका को उच्च न्यायालय में खारिज कर दिया गया। स्थानीय कैदियों के स्थानांतरण का आग्रह करते हुए महबूबा मुफ्ती की ओर से दायर जनहित याचिका को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। एचसी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसे राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दायर किया गया है। महबूबा ने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘अदालत का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक है।’
    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उच्च न्यायालय का कहना है कि कोई भी आम आदमी जनहित याचिका दायर कर सकता है, लेकिन चूंकि वह एक राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उनकी जनहित याचिका राजनीतिक कारणों से है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘उच्च न्यायालय यह भूल रहा है कि राजनीतिक नेता जमीनी हकीकतों से गहराई से जुड़े रहते हैं। मैं एक राजनीतिक नेता होने के नाते जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्थिति से भली-भांति परिचित हूं। गरीब लोग जेल में बंद अपने परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। वे अपना मुकदमा कैसे लड़ेंगे!’ पीडीपी प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया।
    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज

    पीडीपी चीफ ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक नेता के रूप में मुझे कोई भी मुद्दा उठाने का पूरा अधिकार है। अदालत को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। उसे सरकार से पूछना चाहिए था कि कितने विचाराधीन कैदी जेलों में हैं और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।’ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत में चर्चा उनके पेशे से परे इस मुद्दे पर होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘अदालत ने मेरा मामला खारिज करने के लिए अजीब तर्क दिए हैं। यह फैसला तर्क पर आधारित होना चाहिए था, लेकिन मुझे खेद है कि अदालत ने ऐसा फैसला सुनाते हुए कहा कि मैं राजनीति कर रही हूं। अनुच्छेद 21 के तहत हमें इन मुद्दों को उठाने और अदालतों में जाने का मौलिक अधिकार है।’
    कुलदीप सिंह सेंगर मामले पर क्या कहा

    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को खत्म नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल उन कैदियों को स्थानांतरित करने तक सीमित थी, जिन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है और इस फैसले ने न्यायपालिका में विश्वास को ठेस पहुंचाई है। बलात्कार के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर महबूबा ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ न्यायाधीश अब भी सत्ता के सामने खड़े होने को तैयार हैं। उनका इशारा सूरजपुर जिला न्यायालय की ओर से अखलाक मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने से इनकार किए जाने की ओर था। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी ने सरकार से लड़ाई लड़ी और उनसे कहा कि वे मामला वापस नहीं ले सकते, तथा आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन की जाए। महबूबा ने कहा, ‘इसका मतलब है कि स्थिति मिली-जुली है। अगर अधिकतर न्यायाधीश राजनीति से प्रभावित हो गए हैं, तो द्विवेदी जैसे न्यायाधीश बहुत कम हैं।’