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  • सिंगूर में टाटा ग्रुप की वापसी को लेकर सियासत तेज, समिक भट्टाचार्य बोले—बंगाल में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है

    सिंगूर में टाटा ग्रुप की वापसी को लेकर सियासत तेज, समिक भट्टाचार्य बोले—बंगाल में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है

    नई दिल्ली ।  पश्चिम बंगाल की सिंगूर राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने टाटा समूह की संभावित वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सिंगूर या पश्चिम बंगाल में किसी भी रूप में टाटा समूह की वापसी राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और इससे निवेश का माहौल मजबूत होगा। उनके अनुसार राज्य को लंबे समय से औद्योगिक विकास में जो नुकसान हुआ है, उसे सुधारने के लिए बड़े और भरोसेमंद औद्योगिक समूहों की वापसी आवश्यक है।

    समिक भट्टाचार्य ने सिंगूर विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना का राज्य से बाहर जाना पश्चिम बंगाल की औद्योगिक छवि पर गहरा असर छोड़ गया था। उनके मुताबिक उस समय बने माहौल ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा की, जिसका प्रभाव आज भी कहीं न कहीं देखा जाता है। उन्होंने दावा किया कि टाटा समूह जैसी प्रतिष्ठित कंपनी की वापसी से यह संदेश जाएगा कि बंगाल फिर से बड़े उद्योगों के लिए तैयार है।

    भाजपा नेता ने यह भी कहा कि टाटा समूह देश के सबसे पुराने और भरोसेमंद औद्योगिक घरानों में से एक है, और उनकी मौजूदगी किसी भी राज्य के लिए विकास की दृष्टि से सकारात्मक संकेत मानी जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भूमि और निवेश से जुड़ी नीतियों में स्पष्टता और स्थिरता लाई जाए, तो बंगाल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश संभव है।

    सिंगूर प्रकरण पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। नैनो परियोजना के दौरान हुए भूमि अधिग्रहण विवाद ने राज्य में व्यापक आंदोलन को जन्म दिया था, जिसका राजनीतिक असर भी दूरगामी साबित हुआ। उसी दौर में राज्य की औद्योगिक नीति और निवेश माहौल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं, जिनका प्रभाव वर्षों तक बना रहा।

    समिक भट्टाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि स्पष्ट भूमि नीति के बिना बड़े उद्योगों का आना कठिन है, क्योंकि कंपनियां स्थिर और भरोसेमंद नियमों की अपेक्षा करती हैं। उनके अनुसार केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यावहारिक सुधारों से ही औद्योगिक पुनर्जागरण संभव है।

    इस पूरे मुद्दे पर एक बार फिर बंगाल की राजनीति में बहस तेज हो गई है, जहां सिंगूर न केवल एक ऐतिहासिक विवाद का प्रतीक है, बल्कि राज्य के औद्योगिक भविष्य की दिशा तय करने वाला विषय भी बना हुआ है।

  • सिमोन टाटा का निधन: टाटा परिवार की सौतेली मां और लेक्मे की शख्सियत रही प्रेरणा का स्रोत

    सिमोन टाटा का निधन: टाटा परिवार की सौतेली मां और लेक्मे की शख्सियत रही प्रेरणा का स्रोत


    नई दिल्ली । भारतीय उद्योग जगत और टाटा परिवार के लिए एक दुःखद खबर है। रतन टाटा की सौतेली मां और नोएल टाटा की मां, सिमोन दुनोयर टाटा का 95 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में निधन हो गया। स्विट्जरलैंड में जन्मीं सिमोन ने न केवल टाटा परिवार में अपनी जगह बनाई, बल्कि भारतीय कॉस्मेटिक्स उद्योग में भी एक नई पहचान स्थापित की।

    सिमोन दुनोयर टाटा का जन्म स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हुआ था। उनका पूरा नाम सिमोन नेवल दुनोयर था। 1953 में भारत यात्रा पर आईं सिमोन ने टाटा परिवार से जुड़ाव बनाया और 1955 में जेआरडी टाटा के सौतेले भाई, नवल एच. टाटा से विवाह किया। नवल टाटा की पहली पत्नी सूनी कॉमिस्सैरिएट से दो बेटे थे, रतन और जीमी टाटा। सिमोन ने परिवार में संतुलन बनाए रखा और नवजात टाटा परिवार को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके और नवल टाटा के बेटे नोएल टाटा आज टाटा ट्रस्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

    सिमोन टाटा ने 1960 के दशक में टाटा ग्रुप के व्यवसाय में सक्रिय योगदान देना शुरू किया। उन्होंने टाटा ऑयल मिल्स की सब्सिडियरी कंपनी लेक्मे के बोर्ड में शामिल होकर इसकी रणनीति और विकास में अहम भूमिका निभाई। उस समय लेक्मे एक छोटी कंपनी थी, जो हमाम, ओके और मोदी सोप्स जैसे उत्पाद बनाती थी। लेकिन सिमोन ने इसे भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद कॉस्मेटिक ब्रांड बनाने का विजन दिया।

    1982 में सिमोन टाटा लेक्मे की चेयरपर्सन बनीं। उन्होंने भारतीय बाजार में महिलाओं की त्वचा और बालों की देखभाल के लिए विशेष उत्पाद विकसित कर ब्रांड को मजबूत किया। 1996 में भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद, लेक्मे ने हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के साथ 50:50 साझेदारी की और लेक्मे यूनिलीवर लिमिटेड की स्थापना हुई। 1998 में सिमोन ने HUL को अपने 50 प्रतिशत शेयर 200 करोड़ रुपए में बेच दिए। इसके बाद लेक्मे ने कॉस्मेटिक्स से रिटेलिंग की दिशा में कदम बढ़ाया।

    सिमोन टाटा को भारतीय कॉस्मेटिक्स उद्योग की ‘जैज़ीनेरा’ कहा जाता है। उन्होंने लेक्मे को केवल घरेलू उत्पादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय महिलाओं की जरूरतों और समस्याओं को समझते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में लेक्मे ने मार्केट में नई रणनीतियों और साझेदारियों के माध्यम से तेजी से विकास किया।

    1998 में, सिमोन टाटा ने UK की लिटिलवुड्स इंटरनेशनल (इंडिया) कंपनी को खरीदा, जो रेडी-टू-वियर गारमेंट्स बेचती थी। इसी कदम के साथ उन्होंने ट्रेंट लिमिटेड की नींव रखी। लेक्मे लिमिटेड का नाम बदलकर ट्रेंट कर दिया गया और यह टाटा ग्रुप का प्रमुख रिटेल आर्म बन गया। आज ट्रेंट वेस्टसाइड, जुडियो और अन्य रिटेल फॉर्मेट्स चला रहा है। नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और सिमोन टाटा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सिमोन टाटा न केवल एक व्यवसायिक दृष्टिकोण रखने वाली महिला थीं, बल्कि उन्होंने टाटा परिवार में पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों को भी मजबूती से संभाला। उनका जीवन भारतीय उद्योग जगत और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। उनके योगदान ने न केवल महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उद्योग में बदलाव लाया, बल्कि रिटेलिंग और ब्रांड निर्माण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित किए।

    उनकी यह विरासत आज भी टाटा समूह के कार्यों और समाज में उनके प्रभाव में देखी जा सकती है। सिमोन टाटा के निधन से टाटा परिवार और भारतीय उद्योग जगत को एक अनमोल व्यक्तित्व खोना पड़ा है।