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  • सिंगरौली ने रचा इतिहास खनिज राजस्व में 4681 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली

    सिंगरौली ने रचा इतिहास खनिज राजस्व में 4681 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली


    सिंगरौली । मध्यप्रदेश का सिंगरौली जिला एक बार फिर अपनी पहचान को मजबूत करते हुए सुर्खियों में आ गया है इस बार वजह है खनिज राजस्व वसूली में बनाया गया ऐतिहासिक रिकॉर्ड वित्तीय वर्ष 2025 26 में जिले ने 4681.05 करोड़ रुपये की शानदार वसूली कर न केवल अपने तय लक्ष्य का 96.86 प्रतिशत हासिल किया बल्कि पूरे प्रदेश में पहला स्थान भी कायम रखा है

    सिंगरौली को देश के प्रमुख खनन क्षेत्रों में गिना जाता है यहां कोयला और अन्य खनिज संसाधनों की प्रचुरता है यही कारण है कि जिले की अर्थव्यवस्था में खनन का अहम योगदान रहता है इस बार प्रशासन ने योजनाबद्ध रणनीति और कड़ी निगरानी के साथ राजस्व वसूली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है

    केवल खनिज राजस्व ही नहीं बल्कि कर वसूली के क्षेत्र में भी जिले ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है प्रशासन ने निर्धारित लक्ष्य का 97.61 प्रतिशत हासिल करते हुए 946.80 करोड़ रुपये की वसूली की है यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि जिले में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था बेहद मजबूत हुई है

    इस उपलब्धि के पीछे प्रशासन की सख्ती और पारदर्शी कार्यप्रणाली को मुख्य कारण माना जा रहा है खासतौर पर अवैध खनन के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति ने बड़ा असर दिखाया है पूरे साल में 289 मामलों में कार्रवाई करते हुए 2.20 करोड़ रुपये की वसूली की गई है इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है बल्कि सरकारी राजस्व में भी वृद्धि हुई है

    जिला प्रशासन का कहना है कि यह सफलता किसी एक विभाग की नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है खनिज विभाग अधिकारियों और मैदानी अमले की लगातार निगरानी और समन्वय के कारण यह संभव हो सका है साथ ही तकनीक के उपयोग और पारदर्शी व्यवस्था ने भी इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है

    सिंगरौली का यह प्रदर्शन पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन गया है यह दिखाता है कि यदि सही रणनीति और कड़ाई से नियमों का पालन किया जाए तो राजस्व वसूली में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है आने वाले समय में भी प्रशासन इस गति को बनाए रखने और नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में काम करता रहेगा

    इस उपलब्धि ने न केवल जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है बल्कि प्रदेश स्तर पर उसकी पहचान को भी और सशक्त किया है सिंगरौली का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है जहां खनन और राजस्व प्रबंधन को लेकर सुधार की आवश्यकता है

  • जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा

    जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा


    नई दिल्ली। सकल जीएसटी संग्रह मार्च 2026 में 2,00,064 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 1,83,845 करोड़ रुपए के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात पर लगने वाले जीएसटी में तेज इजाफे के कारण हुई है। घरेलू सामान पर जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात पर जीएसटी में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रह

    यदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है।

    उपकर संग्रह में गिरावट

    हालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है।

    पिछले महीने का प्रदर्शन

    फरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है।

    विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

    विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।