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  • करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

    करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग ने शनिवार को करदाताओं से आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025–26) के लिए अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए ईमेल संदेशों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने करदाताओं से त्रुटिपूर्ण ईमेल को नजरअंदाज करने की अपील की है।

    आयकर विभाग ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि उसे करदाताओं से गलत जानकारी वाले ईमेल मिलने की शिकायतें प्राप्त हुई है। विभाग ने इस मुद्दे को ध्यान में लाने के लिए करदाताओं का धन्यवाद किया और असुविधा के लिए माफी मांगी है। आयकर ने बताया कि संचार प्रणाली के लिए जिम्मेदार सेवा प्रदाता के समन्वय से इस मामले को सुलझाया जा रहा है।

    आयकर विभाग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए करदाताओं से इन ईमेल को फिलहाल नजरअंदाज करने की अपील की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए कुछ ईमेल में महत्वपूर्ण लेन-देन से संबंधित गलत विवरण थे। दरअसल यह समस्या आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए भेजे गए ईमेल में सामने आई है। विभाग ने करदाताओं को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।

    विभाग ने करदाताओं से अनुरोध किया है कि वे पहले भेजे गए त्रुटिपूर्ण ईमेल को अनदेखा करें। विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे अपनी लेन-देन की जानकारी की पुष्टि आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध अनुपालन पोर्टल के ‘ई-अभियान’ टैब के जरिए करें। ये संचार केवल करदाताओं को उनकी वित्तीय जानकारी की समीक्षा करने और अग्रिम कर का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करते हैं। विभाग ने इस प्रक्रिया में करदाताओं से सहयोग की अपेक्षा की है।

    उल्लेखनीय है कि पिछले एक-दो दिनों से कई करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) को आयकर विभाग की ओर से ‘नज’ ईमेल भेजे जा रहे थे। विभाग के इन ईमेल में यह कहा गया था कि करदाता द्वारा किया गया एडवांस टैक्स भुगतान उनके वित्तीय लेन-देन से मेल नहीं खाता है। इसके साथ ही ईमेल में उस साल के दौरान किए गए कुछ ‘महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन’ का भी जिक्र किया गया था। इसके बाद आयकर विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है।

  • करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    Tax

    नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे।

    नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।


    फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी

    कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’


    किन्हें देनी होगी जानकारी?

    अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है।


    कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

    एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो।


    परिवार को किराया देना अब भी मान्य

    नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा।


    जानकारी न देने पर क्या होगा?

    अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है।


    ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई

    नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है।


    कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया

    मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

    ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा
    नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए।

    उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।

  • इस साल आयकर कानून में हुए कई अहम बदलाव… करदाताओं को मिली बड़ी राहत

    इस साल आयकर कानून में हुए कई अहम बदलाव… करदाताओं को मिली बड़ी राहत


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central government) ने वर्ष 2025 में आयकर कानून (Income Tax Law) में कई अहम बदलाव किए हैं। इनका मकसद टैक्स प्रणाली (Tax system) को सरल बनाना, आम करदाता को राहत देना और डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करना है। नए नियमों से नौकरीपेशा, वरिष्ठ नागरिक, मध्यम वर्ग और छोटे करदाता सभी को फायदा मिलेगा।


    1. नया आयकर कानून-2025

    2025 का सबसे बड़ा बदलाव रहा नया आयकर बिल-2025, जो 60 साल से भी ज्यादा पुराने आयकर कानून-1961 की जगह लेगा। संसद ने अगस्त 2025 में नए कानून को पास किया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें भाषा आसान होगी, धाराएं कम होंगी और टैक्स विवादों में कमी आएगी। यह कानून टैक्सपेयर्स के लिए ज्यादा पारदर्शी होगा।


    2. Tax Year की नई परिभाषा

    नए कानून में ‘आकलन वर्ष’ और ‘वित्तीय वर्ष’ की जगह ‘कर वर्ष’ की अवधारणा लाई गई है। इससे टैक्स गणना आसान होगी और आम लोगों को नियम समझने में दिक्कत नहीं होगी। इसमें शून्य टीडीएस सर्टिफिकेट जैसे नए टूल्स होंगे, जो करदाता की तैयारी में मदद करेंगे।


    3. ₹12 लाख तक कोई Tax नहीं

    इस साल पेश बजट में इनकम टैक्स स्लैब स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया। नई कर व्यवस्था को चुनने वाले लोगों के लिए टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई। 75 हजार रुपये की मानक कटौती जोड़ने के बाद वेतनभोगी टैक्सपेयर्स को 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं देना पड़ेगा।


    4. रिटर्न संशोधन की समय सीमा बढ़ी

    पहले संशोधित आयकर रिटर्न (आईटीआर-यू) दाखिल करने की समय सीमा 24 महीने थी, जिस बढ़ाकर अब 48 महीने कर दिया गया है। मतलब, अगर रिटर्न में कोई गलती हो गई या अतिरिक्त कमाई जोड़नी है, तो चार साल तक सुधार का मौका मिलेगा। ये बदलाव उन लोगों के लिए बड़ा सहारा है जो जल्दबाजी में गलती कर बैठते हैं।


    5. किराये पर टैक्स छूट में बढ़ोतरी

    किराए पर रहने वालों के लिए बड़ी राहत दी गई है। मकान किराया भत्ता (एचआरए) के तहत कर छूट की सीमा ₹2.4 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख कर दी गई है। इससे छोटे-मध्यम किराए पर टीडीएस का झंझट कम हो जाएगा। पहले लोग छोटी रकम पर भी टीडीएस काटने में उलझ जाते थे, लेकिन अब ये प्रक्रिया सरल हो गई है।


    6. वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत

    वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक और डाकघर की ब्याज आय पर मिलने वाली कर छूट बढ़ाकर एक लाख कर दी गई है। पहले यह सीमा 50 हजार रुपये थी। इससे पेंशनभोगियों और बुजुर्गों की कर देनदारी कम होगी और नियमित आय पर सुरक्षा मिलेगी।


    7. टीडीएस/टीसीएस में देरी पर मुकदमा नहीं

    टैक्स समय पर चुका दिया गया हो तो अब टीसीएस स्टेटमेंट देरी से जमा करने पर मुकदमा नहीं चलेगा। साथ ही, ऊंची टीडीएस दर सिर्फ तब लगेगी जब पैन नंबर न हो। इससे असमंजस और जुर्माने का खतरा कम होगा। ये बदलाव कर प्रणाली को टैक्सपेयर्स के लिए आसान बनाएगा और कर अनुपालन को बढ़ावा देगा।


    8. आईटीआर फॉर्म में बदलाव

    आकलन वर्ष 2025-26 के लिए नए और संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी किए गए हैं। इनमें नए कॉलम जोड़े गए हैं और फॉर्म के ढांचे में भी बदलाव किया गया है। इनके जरिए टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फॉर्म भरना पहले से आसान हो गया है।


    9. कैपिटल गेन टैक्स में बड़े बदलाव

    2025 में कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में भी अहम बदलाव किए गए। इक्विटी पर छोटी अवधि के कैपिटल गेन टैक्स की दर को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। वहीं, कर मुक्त लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ को दायरा बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये तक कर दिया गया है। इससे ज्यादा के लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।


    10. विदेश रकम भेजने की सीमा बढ़ी

    विदेश में पैसे भेजने (एलआरएस) पर टीसीएस की सीमा अब 7 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। साथ ही, पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस बिल्कुल हटा दिया गया। इससे छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।