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  • ITR Filing 2026: आखिरी दिन उमड़ी करदाताओं की भीड़, एक दिन में 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा

    ITR Filing 2026: आखिरी दिन उमड़ी करदाताओं की भीड़, एक दिन में 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा


    नई दिल्ली। आयकर रिटर्न दाखिल करने को लेकर इस साल करदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। आयकर विभाग के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 जुलाई की अंतिम समय सीमा तक देशभर में 5.9 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए गए हैं। विभाग ने समय पर रिटर्न दाखिल करने वाले सभी करदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि समय पर किया गया कर अनुपालन देश की आर्थिक प्रगति में अहम योगदान देता है।

    आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल हुए हैं। विभाग ने करदाताओं के विश्वास और समय पर अनुपालन को भारत की विकास यात्रा को गति देने वाला कदम बताया।

    आंकड़ों के मुताबिक, आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख यानी 31 जुलाई को ही 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा किए गए। यह तारीख उन व्यक्तिगत करदाताओं और ऐसी संस्थाओं के लिए निर्धारित थी, जिन्हें अपने खातों का अनिवार्य ऑडिट नहीं कराना होता है।

    अंतिम दिनों में तेजी से बढ़ी रिटर्न फाइलिंग की रफ्तार

    इस साल आईटीआर दाखिल करने की रफ्तार अंतिम कुछ हफ्तों में काफी तेज रही। आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 11 जुलाई तक 1.7 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल हो चुके थे। इसके बाद 22 जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ के पार पहुंच गई।

    27 जुलाई तक 4 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए गए, जबकि 31 जुलाई को यह आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 5 करोड़ के पार पहुंच गया। दिन खत्म होने से पहले रिटर्न की संख्या 5.5 करोड़ से ज्यादा हो गई और आखिरकार यह आंकड़ा 5.9 करोड़ के स्तर को पार कर गया।

    करदाताओं से पहले ही रिटर्न दाखिल करने की अपील

    आयकर विभाग लगातार करदाताओं से अपील करता रहा कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना रिटर्न दाखिल कर दें। विभाग का कहना था कि आखिरी समय में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक के कारण तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से करदाताओं को जुर्माने और अन्य परेशानियों से बचने में मदद मिलती है। साथ ही, टैक्स व्यवस्था भी अधिक सुचारू रूप से संचालित होती है।

    आईटीआर फॉर्म में किए गए बदलाव

    आकलन वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी किए थे। इनमें दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान, कुछ ट्रेडिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

    इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना है। नए प्रावधानों के जरिए आय और निवेश से जुड़ी जानकारियों को अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।

    पिछले साल भी बढ़ा था टैक्स अनुपालन

    पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिला था। उस दौरान 9 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आईटीआर दाखिल किया था। इसी अवधि में आयकर विभाग ने 4.35 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का टैक्स रिफंड जारी किया था। यह आंकड़ा देश में प्रत्यक्ष कर व्यवस्था के बढ़ते विस्तार और आयकर विभाग की कार्यक्षमता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती आईटीआर फाइलिंग से देश में टैक्स अनुपालन की संस्कृति मजबूत हो रही है। डिजिटल माध्यम से आसान हुई प्रक्रिया और आयकर विभाग की ऑनलाइन सेवाओं ने भी करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

  • संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    नई दिल्ली ।देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 576 हो गई, जबकि आकलन वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 142 था। इस प्रकार पांच वर्षों में इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती है।
    लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि विभिन्न आकलन वर्षों के दौरान इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र रूप से वृद्धि का रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। उनके अनुसार आकलन वर्ष 2022-23 में 301 करदाताओं ने 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित की थी। इसके बाद आकलन वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 284 रह गई, लेकिन अगले वर्षों में फिर तेजी से बढ़ोतरी हुई। आकलन वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 415 तक पहुंचा और 2025-26 में बढ़कर 576 हो गया।
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ‘अरबपति’ शब्द की कोई कानूनी या वैधानिक परिभाषा निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़े केवल उन आयकर रिटर्न पर आधारित हैं, जिनमें संबंधित व्यक्तियों ने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंकड़े घोषित आय के आधार पर तैयार किए गए हैं।
    आय असमानता से जुड़े प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में आय वितरण की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय असमानता में कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों का जिनी गुणांक 2022-23 के 0.266 से घटकर 2023-24 में 0.237 हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 पर आ गया। सरकार का मानना है कि यह बदलाव आय वितरण में अपेक्षाकृत संतुलन आने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
    सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी सुधार का दावा किया। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर वर्ष 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। सरकार का कहना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से श्रम बाजार की स्थिति में सुधार हुआ है।
    सरकार ने संसद में यह भी कहा कि आय असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील कर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही रोजगार सृजन कार्यक्रमों, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लक्षित कर प्रोत्साहनों और विकास आधारित निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करने तथा समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के प्रयास जारी रहें

  • ITR: डेडलाइन के अंतिम दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल हुआ ठप… टैक्सपेयर्स की बढ़ी टेंशन

    ITR: डेडलाइन के अंतिम दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल हुआ ठप… टैक्सपेयर्स की बढ़ी टेंशन


    नई दिल्ली।
    अगर आपने अभी तक अपना ITR फाइल नहीं किया है, तो अलर्ट हो जाइए। 31 जुलाई की आखिरी तारीख से ठीक पहले इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) का ई-फाइलिंग पोर्टल (E-filing portal) कई यूजर्स के लिए ठप पड़ गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि न तो वेबसाइट खुल रही है, न लॉगिन हो रहा है और न ही टैक्स पेमेंट या ITR फाइल हो पा रहा है। 31 जुलाई को इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return 2026- ITR) भरने की आखिरी तारीख है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अपना रिटर्न दाखिल करने और बाकी टैक्स का पेमेंट करने में जुटे हैं। लेकिन कई टैक्सपेयर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिकायत की कि इनकम टैक्स विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है।


    टैक्सपेयर्स ने की शिकायत

    यूजर्स के मुताबिक पोर्टल पर लॉगिन करने में दिक्कत आ रही है। कई लोगों का कहना है कि वे आईटीआर फाइल नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स टैक्स पेमेंट भी नहीं कर सके। एक यूजर ने लिखा कि पिछले दो घंटे से पोर्टल काम नहीं कर रहा है और इनकम टैक्स पर भी वेबसाइट का इस तरह बंद होना हैरान करने वाला है।


    आखिरी दिनों में पोर्टल पर बढ़ा ट्रैफिक

    इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट के मुताबिक असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं। हर साल की तरह इस बार भी आखिरी कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोग रिटर्न फाइल करने के लिए पोर्टल पर पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि बढ़ते ट्रैफिक की वजह से भी तकनीकी दिक्कतें सामने आ सकती हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    31 जुलाई है आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख
    फिलहाल इनकम टैक्स विभाग की ओर से पोर्टल में आई दिक्कतों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही 31 जुलाई की आखिरी तारीख बढ़ाने को लेकर भी कोई घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में जिन लोगों का आईटीआर अभी तक फाइल नहीं हुआ है, उन्हें सलाह दी जाती है कि पोर्टल सामान्य होते ही तुरंत अपना रिटर्न दाखिल करें। जब तक इनकम टैक्स विभाग की ओर से कोई नई सूचना नहीं आती, तब तक 31 जुलाई की अंतिम तारीख पहले की तरह ही लागू रहेगी।

  • करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

    करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग ने शनिवार को करदाताओं से आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025–26) के लिए अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए ईमेल संदेशों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने करदाताओं से त्रुटिपूर्ण ईमेल को नजरअंदाज करने की अपील की है।

    आयकर विभाग ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि उसे करदाताओं से गलत जानकारी वाले ईमेल मिलने की शिकायतें प्राप्त हुई है। विभाग ने इस मुद्दे को ध्यान में लाने के लिए करदाताओं का धन्यवाद किया और असुविधा के लिए माफी मांगी है। आयकर ने बताया कि संचार प्रणाली के लिए जिम्मेदार सेवा प्रदाता के समन्वय से इस मामले को सुलझाया जा रहा है।

    आयकर विभाग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए करदाताओं से इन ईमेल को फिलहाल नजरअंदाज करने की अपील की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए कुछ ईमेल में महत्वपूर्ण लेन-देन से संबंधित गलत विवरण थे। दरअसल यह समस्या आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए भेजे गए ईमेल में सामने आई है। विभाग ने करदाताओं को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।

    विभाग ने करदाताओं से अनुरोध किया है कि वे पहले भेजे गए त्रुटिपूर्ण ईमेल को अनदेखा करें। विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे अपनी लेन-देन की जानकारी की पुष्टि आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध अनुपालन पोर्टल के ‘ई-अभियान’ टैब के जरिए करें। ये संचार केवल करदाताओं को उनकी वित्तीय जानकारी की समीक्षा करने और अग्रिम कर का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करते हैं। विभाग ने इस प्रक्रिया में करदाताओं से सहयोग की अपेक्षा की है।

    उल्लेखनीय है कि पिछले एक-दो दिनों से कई करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) को आयकर विभाग की ओर से ‘नज’ ईमेल भेजे जा रहे थे। विभाग के इन ईमेल में यह कहा गया था कि करदाता द्वारा किया गया एडवांस टैक्स भुगतान उनके वित्तीय लेन-देन से मेल नहीं खाता है। इसके साथ ही ईमेल में उस साल के दौरान किए गए कुछ ‘महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन’ का भी जिक्र किया गया था। इसके बाद आयकर विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है।

  • करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    Tax

    नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे।

    नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।


    फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी

    कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’


    किन्हें देनी होगी जानकारी?

    अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है।


    कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

    एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो।


    परिवार को किराया देना अब भी मान्य

    नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा।


    जानकारी न देने पर क्या होगा?

    अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है।


    ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई

    नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है।


    कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया

    मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

    ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा
    नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए।

    उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।

  • इस साल आयकर कानून में हुए कई अहम बदलाव… करदाताओं को मिली बड़ी राहत

    इस साल आयकर कानून में हुए कई अहम बदलाव… करदाताओं को मिली बड़ी राहत


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central government) ने वर्ष 2025 में आयकर कानून (Income Tax Law) में कई अहम बदलाव किए हैं। इनका मकसद टैक्स प्रणाली (Tax system) को सरल बनाना, आम करदाता को राहत देना और डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करना है। नए नियमों से नौकरीपेशा, वरिष्ठ नागरिक, मध्यम वर्ग और छोटे करदाता सभी को फायदा मिलेगा।


    1. नया आयकर कानून-2025

    2025 का सबसे बड़ा बदलाव रहा नया आयकर बिल-2025, जो 60 साल से भी ज्यादा पुराने आयकर कानून-1961 की जगह लेगा। संसद ने अगस्त 2025 में नए कानून को पास किया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें भाषा आसान होगी, धाराएं कम होंगी और टैक्स विवादों में कमी आएगी। यह कानून टैक्सपेयर्स के लिए ज्यादा पारदर्शी होगा।


    2. Tax Year की नई परिभाषा

    नए कानून में ‘आकलन वर्ष’ और ‘वित्तीय वर्ष’ की जगह ‘कर वर्ष’ की अवधारणा लाई गई है। इससे टैक्स गणना आसान होगी और आम लोगों को नियम समझने में दिक्कत नहीं होगी। इसमें शून्य टीडीएस सर्टिफिकेट जैसे नए टूल्स होंगे, जो करदाता की तैयारी में मदद करेंगे।


    3. ₹12 लाख तक कोई Tax नहीं

    इस साल पेश बजट में इनकम टैक्स स्लैब स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया। नई कर व्यवस्था को चुनने वाले लोगों के लिए टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई। 75 हजार रुपये की मानक कटौती जोड़ने के बाद वेतनभोगी टैक्सपेयर्स को 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं देना पड़ेगा।


    4. रिटर्न संशोधन की समय सीमा बढ़ी

    पहले संशोधित आयकर रिटर्न (आईटीआर-यू) दाखिल करने की समय सीमा 24 महीने थी, जिस बढ़ाकर अब 48 महीने कर दिया गया है। मतलब, अगर रिटर्न में कोई गलती हो गई या अतिरिक्त कमाई जोड़नी है, तो चार साल तक सुधार का मौका मिलेगा। ये बदलाव उन लोगों के लिए बड़ा सहारा है जो जल्दबाजी में गलती कर बैठते हैं।


    5. किराये पर टैक्स छूट में बढ़ोतरी

    किराए पर रहने वालों के लिए बड़ी राहत दी गई है। मकान किराया भत्ता (एचआरए) के तहत कर छूट की सीमा ₹2.4 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख कर दी गई है। इससे छोटे-मध्यम किराए पर टीडीएस का झंझट कम हो जाएगा। पहले लोग छोटी रकम पर भी टीडीएस काटने में उलझ जाते थे, लेकिन अब ये प्रक्रिया सरल हो गई है।


    6. वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत

    वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक और डाकघर की ब्याज आय पर मिलने वाली कर छूट बढ़ाकर एक लाख कर दी गई है। पहले यह सीमा 50 हजार रुपये थी। इससे पेंशनभोगियों और बुजुर्गों की कर देनदारी कम होगी और नियमित आय पर सुरक्षा मिलेगी।


    7. टीडीएस/टीसीएस में देरी पर मुकदमा नहीं

    टैक्स समय पर चुका दिया गया हो तो अब टीसीएस स्टेटमेंट देरी से जमा करने पर मुकदमा नहीं चलेगा। साथ ही, ऊंची टीडीएस दर सिर्फ तब लगेगी जब पैन नंबर न हो। इससे असमंजस और जुर्माने का खतरा कम होगा। ये बदलाव कर प्रणाली को टैक्सपेयर्स के लिए आसान बनाएगा और कर अनुपालन को बढ़ावा देगा।


    8. आईटीआर फॉर्म में बदलाव

    आकलन वर्ष 2025-26 के लिए नए और संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी किए गए हैं। इनमें नए कॉलम जोड़े गए हैं और फॉर्म के ढांचे में भी बदलाव किया गया है। इनके जरिए टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फॉर्म भरना पहले से आसान हो गया है।


    9. कैपिटल गेन टैक्स में बड़े बदलाव

    2025 में कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में भी अहम बदलाव किए गए। इक्विटी पर छोटी अवधि के कैपिटल गेन टैक्स की दर को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। वहीं, कर मुक्त लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ को दायरा बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये तक कर दिया गया है। इससे ज्यादा के लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।


    10. विदेश रकम भेजने की सीमा बढ़ी

    विदेश में पैसे भेजने (एलआरएस) पर टीसीएस की सीमा अब 7 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। साथ ही, पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस बिल्कुल हटा दिया गया। इससे छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।