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  • शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में बीते सप्ताह हुई बिकवाली का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी पर भी दिखाई दिया। भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के मार्केटकैप में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इस दौरान पांच अन्य कंपनियों की बाजार वैल्यूएशन में कुल 55,149.45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

    बीते सप्ताह सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 204.65 अंक यानी 0.83 प्रतिशत फिसलकर 24,366 अंक पर रहा। बाजार में बिकवाली के दबाव का सीधा असर कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिससे उनकी कुल बाजार पूंजी घट गई।

    शीर्ष 10 कंपनियों में सबसे अधिक नुकसान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस को हुआ। कंपनी का मार्केटकैप 34,263.28 करोड़ रुपये घटकर 8.53 लाख करोड़ रुपये रह गया। आईटी क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी की बाजार वैल्यू में आई कमी ने शीर्ष कंपनियों के कुल मार्केटकैप पर भी असर डाला।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार पूंजी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 31,869.13 करोड़ रुपये घटकर 17.70 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली भारतीय कंपनी बनी रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मार्केटकैप में 25,891.88 करोड़ रुपये की कमी आई। सप्ताह के अंत में बैंक का बाजार मूल्यांकन 9.86 लाख करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी बैंक की बाजार पूंजी 7,165.37 करोड़ रुपये घटकर 11.21 लाख करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यूएशन 2,792.65 करोड़ रुपये कम होकर 10.18 लाख करोड़ रुपये रह गई।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में पांच ऐसी भी रहीं जिनके मार्केटकैप में सप्ताह के दौरान बढ़ोतरी हुई। इनमें सबसे ज्यादा फायदा भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी को मिला। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 26,438.49 करोड़ रुपये बढ़कर 5.23 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

    भारती एयरटेल की बाजार पूंजी में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 20,592.13 करोड़ रुपये बढ़कर 12.43 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस बढ़ोतरी के साथ भारती एयरटेल शीर्ष कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरे स्थान पर रही।

    बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 3,548.79 करोड़ रुपये बढ़कर 6.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। लार्सन एंड टुब्रो की बाजार वैल्यूएशन में 2,490.66 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 5.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप भी 2,079.38 करोड़ रुपये बढ़कर 4.91 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    सप्ताह के अंत में बाजार पूंजी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    शीर्ष कंपनियों के मार्केटकैप में यह बदलाव बताता है कि व्यापक बाजार में बिकवाली के बावजूद सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर एक जैसा दबाव नहीं रहा। कुछ कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी से बाजार मूल्य बढ़ा, जबकि दूसरी कंपनियों में बिकवाली के कारण वैल्यूएशन कम हुई। आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा इन कंपनियों के शेयर प्रदर्शन और निवेशकों के रुझान पर निर्भर करेगी।

  • भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों की दमदार वापसी, शीर्ष 10 में शामिल पांच दिग्गजों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपये बढ़ा

    भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों की दमदार वापसी, शीर्ष 10 में शामिल पांच दिग्गजों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपये बढ़ा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह सकारात्मक संकेतों के साथ समाप्त हुआ। मजबूत निवेशक धारणा, चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से पांच के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी और बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां निवेशकों के आकर्षण का केंद्र रहीं, जबकि कुछ बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली।

    सप्ताह के दौरान सबसे अधिक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को मिला। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 72 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ, जिससे उसका कुल बाजार मूल्य 8.20 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। कंपनी के बेहतर तिमाही नतीजों और आने वाली तिमाहियों में कारोबार की संभावनाओं को लेकर प्रबंधन के सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप आईटी क्षेत्र में खरीदारी तेज हुई और कंपनी के शेयरों में मजबूती देखने को मिली।

    निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सप्ताहभर में बैंक के बाजार पूंजीकरण में 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार मूल्य में भी लगभग 24 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस और सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया।

    हालांकि सभी बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के बाजार मूल्यांकन में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार पूंजीकरण में भी कमी देखने को मिली। इसके बावजूद इन कंपनियों की बाजार स्थिति मजबूत बनी रही और वे देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल रहीं।

    सप्ताह के अंत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। यह क्रम भारतीय कॉरपोरेट जगत में इन कंपनियों की मजबूत उपस्थिति और निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

    समूचे शेयर बाजार का प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 582 अंकों से अधिक की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी भी 127 अंकों से अधिक मजबूत होकर बंद हुआ। विभिन्न सेक्टरों में सूचना प्रौद्योगिकी सबसे अधिक लाभ देने वाला सूचकांक रहा। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस, ऑटो, सर्विसेज, सार्वजनिक उपक्रम और ऊर्जा क्षेत्रों में भी सकारात्मक बढ़त देखने को मिली।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट नतीजों, बेहतर आर्थिक संकेतकों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास के कारण भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। यदि आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप रहते हैं और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर बनी रहती हैं, तो बाजार में यह सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल शीर्ष कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में आई यह बढ़ोतरी भारतीय इक्विटी बाजार की मजबूती और निवेशकों के भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

  • आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

    आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते सेंसेक्स 700 अंक से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने 24,200 के स्तर को फिर से पार कर लिया। बाजार में यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी, मेटल, ऑयल एंड गैस, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया।

    बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के बेहतर कारोबारी संकेतों और सकारात्मक तिमाही प्रदर्शन की उम्मीदों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसका असर यह रहा कि आईटी क्षेत्र के बड़े शेयरों में शुरुआती कारोबार से ही मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी का प्रभाव निफ्टी आईटी इंडेक्स पर भी स्पष्ट दिखाई दिया, जिसमें उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। इससे पूरे बाजार का निवेशक मनोबल मजबूत हुआ और अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुख बना रहा।

    आईटी क्षेत्र की मजबूती के साथ-साथ मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया। धातु कंपनियों में बढ़ती खरीदारी और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की व्यापक मजबूती को और बल दिया। बड़े औद्योगिक समूहों के शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को अतिरिक्त समर्थन मिला। ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला और कई दिग्गज कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते रहे।

    वित्तीय क्षेत्र की कुछ प्रमुख गैर-बैंकिंग कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं तो घरेलू शेयर बाजार में यह मजबूती आगे भी जारी रह सकती है। लगातार दूसरे दिन आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशक फिर से गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में उभरकर सामने आया है। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है। यदि खरीदारी का यह सिलसिला आगे भी कायम रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में नए ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, तिमाही नतीजों और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में दिखी व्यापक खरीदारी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित तेजी और बड़े शेयरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी से बाजार का समग्र वातावरण सकारात्मक बना रहा। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही परिणाम और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत यह तय करेंगे कि घरेलू शेयर बाजार अपनी इस तेजी को कितनी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाता है।

  • चुनौतीपूर्ण माहौल में TCS के तिमाही नतीजे जारी, मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

    चुनौतीपूर्ण माहौल में TCS के तिमाही नतीजे जारी, मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। कंपनी ने तिमाही आधार पर शुद्ध लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की है, जबकि सालाना आधार पर लाभ और राजस्व दोनों में वृद्धि देखने को मिली है। साथ ही कंपनी ने अपने शेयरधारकों को 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड देने की घोषणा भी की है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    अप्रैल से जून 2026 की अवधि में टीसीएस का समेकित शुद्ध लाभ 13,349 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत कम है। हालांकि, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कंपनी के लाभ में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक आईटी उद्योग पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभाव बना हुआ है।

    कंपनी की परिचालन आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। पहली तिमाही में टीसीएस का राजस्व बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक है। वहीं, तिमाही आधार पर भी कंपनी की आय में करीब दो प्रतिशत का इजाफा हुआ। इससे संकेत मिलता है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद कंपनी की सेवाओं की मांग बनी हुई है और उसका कारोबार स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है।

    निदेशक मंडल ने निवेशकों के लिए 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है। इसके लिए 15 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है, जबकि पात्र निवेशकों को 31 जुलाई 2026 को डिविडेंड का भुगतान किया जाएगा। कंपनी के इस फैसले को निवेशकों के प्रति सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और इससे शेयरधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितताओं के बावजूद टीसीएस ने मजबूत कारोबारी प्रदर्शन बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में कंपनी को 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बड़े ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जो भविष्य में कंपनी की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के एआई कारोबार का वार्षिक राजस्व रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवसरों को दर्शाता है।

    परिचालन प्रदर्शन की बात करें तो पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 24 प्रतिशत और नेट मार्जिन 19.2 प्रतिशत रहा। परिचालन गतिविधियों से कंपनी ने 12,412 करोड़ रुपये का नकद प्रवाह अर्जित किया, जो उसके शुद्ध लाभ का लगभग 93 प्रतिशत है। तिमाही के अंत तक टीसीएस में कुल 5,93,798 कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि आईटी सेवाओं के कारोबार में पिछले 12 महीनों की एट्रिशन दर 13.6 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत ऑर्डर बुक, एआई क्षेत्र में बढ़ती हिस्सेदारी और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन आने वाली तिमाहियों में कंपनी की विकास यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों की शुरुआत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालात बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों की निगाहें घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर बने घटनाक्रमों पर बनी रहेंगी।

    आने वाले सप्ताह में पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। इसकी शुरुआत देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों से होगी। बाजार को उम्मीद है कि इस तिमाही के नतीजे आईटी सेक्टर के साथ-साथ अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर शुरुआती संकेत देंगे। यही कारण है कि निवेशकों के लिए यह परिणाम विशेष महत्व रखते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव नियंत्रित रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऊर्जा कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार, महंगाई और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगी। बीते सप्ताह शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में उन्होंने फिर से खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। यदि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ता है तो इससे बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है, जबकि लगातार बिकवाली दबाव बढ़ा सकती है।

    पिछला कारोबारी सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ सप्ताह का समापन किया। निवेशकों की खरीदारी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक मजबूती दर्ज की गई। हेल्थकेयर, डिफेंस, एफएमसीजी, मेटल और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर पीएसयू बैंक, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला, जिससे इन सूचकांकों ने सप्ताह का समापन गिरावट के साथ किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता, तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। वहीं वैश्विक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जैसी परिस्थितियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऐसे में आगामी सप्ताह निवेशकों के लिए सतर्कता और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। बाजार की चाल काफी हद तक कॉर्पोरेट प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी, इसलिए कारोबारियों की नजर हर प्रमुख आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

  • ट्रेड सीक्रेट मामले में टीसीएस की कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत; करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त देनदारी बढ़ी

    ट्रेड सीक्रेट मामले में टीसीएस की कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत; करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त देनदारी बढ़ी

    नई दिल्ली । भारत की अग्रणी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस को अमेरिका में लंबे समय से चल रहे ट्रेड सीक्रेट विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने निचली अदालतों द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा की मांग की थी। शीर्ष अदालत के इस निर्णय के बाद कंपनी के खिलाफ पूर्व में दिए गए हर्जाने के आदेश प्रभावी बने रहेंगे और टीसीएस को इस मामले में कुल लगभग 220 मिलियन डॉलर का वित्तीय प्रभाव झेलना पड़ेगा।

    कंपनी द्वारा नियामकीय सूचना में बताया गया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पुनर्समीक्षा करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अपीलीय अदालत द्वारा पहले दिए गए फैसले को चुनौती देने की सभी प्रमुख कानूनी संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। इस घटनाक्रम को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और वित्तीय झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला कई वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा था।

    विवाद की जड़ वर्ष 2019 में दायर एक मुकदमे से जुड़ी है। आरोप लगाया गया था कि टीसीएस ने एक बीमा क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रौद्योगिकी प्रोजेक्ट के दौरान प्रतिस्पर्धी कारोबारी जानकारी और गोपनीय व्यावसायिक प्रक्रियाओं का अनुचित लाभ उठाया। शिकायतकर्ताओं का दावा था कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद प्राप्त जानकारी का उपयोग प्रतिस्पर्धी तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने में किया गया, जिससे उनके व्यावसायिक हित प्रभावित हुए।

    मामले की सुनवाई के दौरान अमेरिकी अदालत में कई स्तरों पर बहस हुई। वर्ष 2023 में जूरी ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी द्वारा ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग से संबंधित दावों में पर्याप्त आधार मौजूद है। इसके बाद जूरी ने 210 मिलियन डॉलर के भुगतान की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में संघीय न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया। संशोधित राशि में वास्तविक हर्जाना और दंडात्मक हर्जाना दोनों शामिल थे।

    इसके बाद कंपनी ने फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाया। अपीलीय अदालत ने भी निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा। टीसीएस ने अपने पक्ष में यह तर्क रखा था कि शिकायतकर्ता पक्ष वास्तविक वित्तीय नुकसान को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका है और दंडात्मक हर्जाने की राशि भी अत्यधिक है। इसके बावजूद अदालतों ने पूर्व निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं किया।

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार न किए जाने के बाद कंपनी को अब मामले से जुड़े वित्तीय प्रावधानों में वृद्धि करनी होगी। कंपनी पहले ही इस विवाद से संबंधित बड़ी राशि का प्रावधान अपने खातों में कर चुकी थी। अब अतिरिक्त देनदारियों, ब्याज और कानूनी व्ययों को शामिल करते हुए और राशि अलग रखी जाएगी। यह प्रभाव आगामी वित्तीय तिमाहियों के परिणामों में एक असाधारण खर्च के रूप में दिखाई देगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वैश्विक आईटी उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। तकनीकी सेवाओं, डेटा प्रबंधन और बौद्धिक संपदा से जुड़े क्षेत्रों में कंपनियों के लिए ट्रेड सीक्रेट संरक्षण और अनुपालन मानकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को विभिन्न देशों के कानूनी ढांचे के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

    हालांकि वित्तीय प्रभाव उल्लेखनीय है, फिर भी टीसीएस जैसी बड़ी वैश्विक कंपनी की समग्र कारोबारी क्षमता पर इसका दीर्घकालिक असर सीमित माना जा रहा है। इसके बावजूद यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस, बौद्धिक संपदा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी विवादों के संदर्भ में आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।

  • भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

    भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने एआई क्षेत्र की अग्रणी संस्था एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी कर अपने डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई दिशा देने का फैसला किया है। इस सहयोग का उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में एआई आधारित समाधानों के विकास को गति देना और ग्राहकों को उन्नत तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    इस साझेदारी के तहत टीसीएस अपने लगभग 50 हजार कर्मचारियों को Claude AI प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। इस पहल का लाभ इंजीनियरिंग, वित्त, कानूनी सेवाओं, विपणन, बिक्री और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत पेशेवरों को मिलेगा। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों को अत्याधुनिक एआई उपकरणों से जोड़ने से उत्पादकता बढ़ेगी और जटिल कार्यों को अधिक दक्षता के साथ पूरा किया जा सकेगा।

    टीसीएस इस सहयोग के अंतर्गत एक विशेष विशेषज्ञ टीम का गठन भी करेगी, जो Claude एआई मॉडल पर आधारित नए तकनीकी समाधान विकसित करेगी। कंपनी को इन एआई क्षमताओं और टूल्स तक शुरुआती पहुंच मिलने से वह अपने ग्राहकों के लिए तेजी से नवाचार करने की स्थिति में होगी। इससे एंटरप्राइज ग्राहकों को अत्याधुनिक एआई तकनीकों का लाभ अपेक्षाकृत कम समय में मिल सकेगा।

    दोनों कंपनियां मिलकर बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी प्रशासन, जीवन विज्ञान, विमानन, दूरसंचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करेंगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां डेटा सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं। ऐसे क्षेत्रों में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना इस साझेदारी का प्रमुख लक्ष्य माना जा रहा है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को एआई टूल्स से जोड़ना भविष्य की कार्यशैली को बदल सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि संगठन के भीतर नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी मजबूत होगी। आधुनिक व्यवसायों में एआई की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कदम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    यह साझेदारी ग्राहकों के लिए भी कई नए अवसर लेकर आएगी। कंपनियां ऐसे एआई समाधान विकसित करेंगी जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पुराने तकनीकी ढांचे को आधुनिक बनाने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इससे डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं की गति बढ़ने और परिचालन लागत को कम करने की संभावना भी जताई जा रही है।

    एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच यह सहयोग भारत के तकनीकी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर एआई अपनाने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय आईटी कंपनियां नई तकनीकों में निवेश कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। टीसीएस और एंथ्रोपिक की यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

    उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित समाधान व्यवसायों की कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। ऐसे में बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण, उन्नत प्लेटफॉर्म तक पहुंच और उद्योग-विशिष्ट समाधानों का विकास कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।

  • TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज

    TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज


    नासिक।
    टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) (Tata Consultancy Services – TCS) में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए गठित विशेष जांच दल ने अब राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी) (State Intelligence Department – SID)), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) (Anti-Terrorism Squad -ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से तकनीकी सहायता मांगी है। उधर, जांच एजेंसियों ने फरार एचआर मैनेजर निदा खान की तलाश तेज कर दी है। 

    पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने बताया कि आरोपियों के संपर्कों और गतिविधियों की गहन छानबीन के लिए जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर सभी विवरण सौंप दिए गए हैं। अब तक कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, धमकी देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले में अब तक छह कर्मचारियों और यूनिट ऑपरेशन मैनेजर अश्विनी चैनानी को गिरफ्तार किया है, जो 28 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में हैं। हालांकि, मुख्य साजिशकर्ता एचआर मैनेजर निदा खान अभी भी फरार है।

    सुरक्षा के चलते वर्क फ्रॉम होम के निर्देश
    मामले के तूल पकड़ने के बाद टीसीएस ने नासिक कार्यालय में बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओ) का परिचालन अस्थाई रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। कंपनी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

  • बाजार में बिकवाली का असर: टीसीएस का मार्केट कैप घटा, रिलायंस इंडस्ट्रीज कायम शीर्ष पर

    बाजार में बिकवाली का असर: टीसीएस का मार्केट कैप घटा, रिलायंस इंडस्ट्रीज कायम शीर्ष पर


    नई दिल्‍ली ।
    मुंबई में इस हफ्ते शेयर बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली और देश की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इस गिरावट का सबसे बड़ा शिकार बनी। टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 90,198.92 करोड़ रुपए घटकर 9,74,043.43 करोड़ रुपए पर आ गया। इस गिरावट के साथ ही टीसीएस देश की टॉप कंपनियों में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनी बनकर उभरी।

    विस्तृत बिकवाली के माहौल में टॉप-10 कंपनियों में शामिल छह कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक घट गया। बीएसई का प्रमुख सूचकांक 953.64 अंक यानी 1.14 प्रतिशत गिरा, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर नजर आया। आईटी सेक्टर में टीसीएस और इंफोसिस सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। इंफोसिस का बाजार पूंजीकरण 70,780.23 करोड़ रुपए घटकर 5,55,287.72 करोड़ रुपए पर आ गया। आईटी शेयरों में आई यह गिरावट पूरे बाजार पर असर डाल रही है।

    निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप भी प्रभावित हुआ और इसमें 54,627.71 करोड़ रुपए की कमी आई, जिससे इसका कुल मार्केट कैप 13,93,621.92 करोड़ रुपए रह गया। वहीं देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप भी घटकर 19,21,475.79 करोड़ रुपए रह गया, हालांकि यह अब भी शीर्ष पर कायम है।

    बीमा क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मार्केट कैप 23,971.74 करोड़ रुपए घटकर 5,46,226.80 करोड़ और भारती एयरटेल का मार्केट कैप 19,244.61 करोड़ रुपए घटकर 11,43,044.03 करोड़ रुपए रह गया।

    हालांकि सभी कंपनियों के लिए यह हफ्ता नुकसान भरा नहीं रहा। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई का मार्केट कैप 1,22,213.38 करोड़ रुपए बढ़कर 11,06,566.44 करोड़ रुपए पर पहुंच गया और यह इस हफ्ते सबसे अधिक लाभ कमाने वाली कंपनी बनी। इसके साथ ही बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 26,414.44 करोड़ रुपए बढ़कर 6,37,244.64 करोड़ और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुर्बो (एलएंडटी) का मार्केट कैप 14,483.9 करोड़ रुपए बढ़कर 5,74,028.93 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप भी 5,719.95 करोड़ रुपए बढ़कर 10,11,978.77 करोड़ रुपए पर पहुंचा। इस गिरावट के बावजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही और टॉप-10 कंपनियों की रैंकिंग में एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, इंफोसिस और एलआईसी का स्थान रहा।

    कुल मिलाकर यह हफ्ता बाजार के लिए मिलाजुला रहा। आईटी कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट हुई, लेकिन बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कुछ कंपनियों ने लाभ दिखाया। निवेशकों के लिए यह हफ्ता सीख और सतर्कता का संकेत भी लेकर आया।

  • देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS ने हासिल किया 1 अरब डॉलर का बड़ा ऑर्डर

    देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS ने हासिल किया 1 अरब डॉलर का बड़ा ऑर्डर


    नई दिल्ली।
    भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी (India’s Largest Software Services Company), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) (Tata Consultancy Services -TCS) ने स्पेनिश दूरसंचार दिग्गज टेलीफोनिका (Spanish Telecommunications Giant Telefónica) की ब्रिटिश शाखा, टेलीफोनिका यूके से 10 साल में 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का एक बड़ा ऑर्डर हासिल किया है। इस सौदे के साथ, कंपनी को लगभग दो साल बाद इतने बड़े कांट्रैक्ट की प्राप्ति हुई है। टेलीफोनिका यूके ब्रिटेन में O2 मोबाइल सेवा ब्रांड चलाती है।


    क्या है कांट्रैक्ट में

    मुंबई स्थित टीसीएस इस कान्ट्रैक्ट के तहत एप्लिकेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा कार्य करेगी। इस सौदे का अधिकतर हिस्सा कंपनी के लिए नया काम है। दो अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त रखी। आने वाले हफ्तों में इसकी आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है।


    यूके में चौथी बड़ी डील

    यह टीसीएस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन के कार्यकाल में यूनाइटेड किंगडम से मिला चौथा 1 अरब डॉलर का अनुबंध है। कृतिवासन ने जून 2023 में पदभार संभाला था। उसी महीने, कंपनी ने यूके की सबसे बड़ी वर्कप्लेस पेंशन योजना, यूके नेशनल एम्प्लॉयमेंट सेविंग्स ट्रस्ट के साथ 1.1 अरब डॉलर का अनुबंध किया था।

    तीन महीने बाद, उसे जगुआर लैंड रोवर के साथ 1 अरब डॉलर का डिजिटल परिवर्तन अनुबंध मिला। पिछले साल जनवरी में, कंपनी को ब्रिटिश बीमा कंपनी एविवा के साथ 2.5 अरब डॉलर का, 15 साल का प्रशासनिक अनुबंध मिला था, जो अब तक का सबसे बड़ा सौदा है।

    यूके है अहम बाजार
    टीसीएस के लिए अमेरिका के बाद यूनाइटेड किंगडम दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है, जो उसके 30.18 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व में लगभग 17% का योगदान करता है। इस खबर के प्रकाशन के समय तक, टीसीएस और टेलीफोनिका की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला था।


    मुनाफे पर असर का डर

    पहले जिक्र किए गए दोनों अधिकारियों ने टेलीफोनिका यूके सौदे में मुनाफे की दर कम होने की ओर इशारा किया है। उन्होंने दावा किया कि यह दर टीसीएस के 24.2% के परिचालन मार्जिन से कम है, हालांकि उन्होंने अधिक विवरण नहीं दिए।

    यह रणनीति में बदलाव का संकेत है, क्योंकि आईटी आउटसोर्सिंग कंपनी पारंपरिक रूप से कंपनी के समग्र मुनाफे से कम दर वाले अनुबंध करने से बचती रही है। यह दूसरा ऐसा सौदा है जो एक दूरसंचार कंपनी के साथ है और कंपनी के समग्र मार्जिन को नुकसान पहुंचा रहा है।


    बीएसएनल सौदे जैसी स्थिति

    सार्वजनिक दूरसंचार ऑपरेटर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के साथ कंपनी का 1.83 अरब डॉलर का अनुबंध भी एक ऐसा ही सौदा था जिसने कंपनी की लाभप्रदता को नुकसान पहुंचाया। उस सौदे के तहत टीसीएस ने बीएसएनएल के लिए 4जी नेटवर्क तैनात किया था। हालांकि, एक अधिकारी के अनुसार, टेलीफोनिका यूके सौदे का परिचालन मार्जिन बीएसएनएल के साथ किए गए सौदे से अधिक होने की उम्मीद है।


    राजस्व पर प्रभाव

    फिलहाल, 10 साल में 1 अरब डॉलर के अनुबंध का मतलब है आईटी सेवा कंपनी के लिए सालाना 100 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त आय। सीधे शब्दों में कहें तो, अगर टीसीएस इस साल कोई व्यवसाय नहीं खोती है, तो अगले वित्तीय वर्ष में उसका राजस्व 0.3% बढ़ने की उम्मीद है।