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  • शिक्षक भर्ती संकट गहराया: हजारों चयनित उम्मीदवार सड़क पर, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

    शिक्षक भर्ती संकट गहराया: हजारों चयनित उम्मीदवार सड़क पर, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही लगातार देरी अब गंभीर विवाद का रूप ले चुकी है। चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों ने राजधानी भोपाल में पहुंचकर लोक शिक्षण संचालनालय के सामने प्रदर्शन किया और अपनी नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी के खिलाफ आवाज उठाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन सूची जारी हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे उनका भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है।

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और कई चरण पूरे होने के बाद भी अंतिम नियुक्ति तक मामला नहीं पहुंच पाया है। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार चयन सूची जारी होने के बाद निर्धारित समय में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि अब तक न तो पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई है और न ही चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। इस वजह से पूरी भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है और चयनित उम्मीदवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वे लगातार संबंधित विभागों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

    प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि नियुक्ति में हो रही देरी का असर उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ रहा है। कई उम्मीदवार वर्षों से इस नौकरी की तैयारी कर रहे थे और चयन के बाद भी नियुक्ति न मिलने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और स्थिर रोजगार का इंतजार अब लंबा खिंचता जा रहा है।

    स्थिति और गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बताई जा रही है। कई विद्यालय ऐसे हैं जहां पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब स्कूलों में पहले से ही पद खाली हैं, तो नियुक्ति प्रक्रिया में देरी क्यों की जा रही है।

    प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि अब और इंतजार संभव नहीं है और वे अपने अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करते रहेंगे। कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि वे कई बार प्रशासनिक स्तर पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।

    कुल मिलाकर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी ने हजारों चयनित उम्मीदवारों को अनिश्चितता में डाल दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग कब इस मामले में ठोस निर्णय लेता है और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर चयनित अभ्यर्थियों को राहत देता है।

  • TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग

    TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर बड़ा फैसला जल्द सामने आ सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग नए सिरे से आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगा और किन्हें छूट या सरलीकरण मिलेगा। इस संबंध में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

    नए आदेश में तय होगी अनिवार्यता और छूट
    आयुक्त ने कहा कि प्रस्तावित आदेश में यह बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा कि किन श्रेणी के शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी होगा। साथ ही नियमों के तहत कुछ शिक्षकों को राहत देने के प्रावधानों को भी परिभाषित किया जाएगा, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

    सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारी
    मामले को लेकर विभाग शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहा है। राय मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया था।

    बैठक में कई अहम प्रशासनिक निर्णय
    सोमवार को आयोजित बैठक में शिक्षक संगठनों और अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें लंबित वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने पर सहमति बनी।

    प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम की तैयारी
    यदि न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो TET में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।

    DPI स्तर पर परामर्श बैठक का निर्णय
    लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालना है।

    शिक्षक संगठनों में असंतोष
    हालांकि इस बैठक को लेकर कुछ शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि सभी प्रभावित संगठनों को शामिल नहीं किया गया, जिससे लिए गए निर्णयों की वैधता पर सवाल उठते हैं। कुछ संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ ही चर्चा को मान्यता देंगे।

    क्या है TET परीक्षा?
    TET यानी Teacher Eligibility Test एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की योग्यता निर्धारित करती है और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत इसकी वैधानिकता तय की गई है।

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
    1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें TET पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।

  • मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक चयन परीक्षाओं में घोषित किए गए पदों की संख्या पर बढ़ते विरोध के चलते मंगलवार को भोपाल में एक बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेशभर से लगभग 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय DPI तथा जनजातीय कार्य विभाग का घेराव करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हजारों खाली पदों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बहुत कम घोषित की गई है जिससे न सिर्फ योग्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल रहा बल्कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

    आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे कठोर चरणों में बदल देंगे। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में किया जा रहा है।

    प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षक के लिए लगभग 99197 और प्राथमिक शिक्षक के लिए 131152 पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में केवल 10800 और 13089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं जो खाली पदों के मुकाबले बेहद कम हैं।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि इन कम पदों के कारण लाखों योग्य उम्मीदवार अपनी योग्यताएं साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कई विषयों में शून्य पद घोषित करने का भी आरोप लगाया है जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा और आक्रोश है। उनका कहना है कि यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

    शिक्षक संगठनों ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है क्योंकि यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को सुधारने की बात की गई है लेकिन पर्याप्त नियुक्तियां किए बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।

    अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती के सभी विषयों में कम से कम 3000 पदों की वृद्धि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 25000 करना और द्वितीय काउंसलिंग जल्द शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पदों के साथ पूरी नहीं हो जाती तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।

    यह आंदोलन केवल पदों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और हजारों युवा उम्मीदवारों को रोजगार देने का एक संघर्ष बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल हो पाता है