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  • मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश। के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।
    नई दिल्ली ।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।

  • UP: टीचर ने पेंट में पेशाब करने पर बच्चे को दी खौफनाक सजा…. चाकू से दागा प्राइवेट पार्ट

    UP: टीचर ने पेंट में पेशाब करने पर बच्चे को दी खौफनाक सजा…. चाकू से दागा प्राइवेट पार्ट


    वाराणसी।
    यूपी (UP) के वाराणसी (Varanasi) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक बच्चे के पैंट में पेशाब (Peeing in Pants) करने पर टीचर (Teacher) ने खौफनाक सजा दे डाली। टीचर ने मासूम के प्राइवेट पार्ट को गर्म चाकू से दाग दिया। उधर, बच्चे के परिजन ने अब इस घटना की शिकायत थाने में की है। वहीं, ये घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर, पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

    ये मामला अकथा के जेडी नगर कॉलोनी का है। यहां रहने वाले अधिवक्ता केशरी जायसवाल ने शनिवार को शिक्षिका, प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ लालपुर पांडेयपुर थाने में तहरीर दी। आरोप है कि उनके पांच साल के बेटे ने पैंट में पेशाब कर दिया। इससे गुस्साई शिक्षिका ने चाकू गरम कर प्राइवेट पार्ट दाग दिया। तहरीर में बताया है कि बेटा नर्सरी का छात्र हैं। वह अकथा स्थित एक स्कूल में पढ़ता है। शनिवार को स्कूल में उसने अपनी शिक्षिका से बाथरूम जाने के लिए कहा। टीचर ने मना किया तो बच्चे ने पैंट में ही पेशाब कर दिया। जिससे टीचर नाराज हो गई।

    आरोप है कि बच्चे को दूसरे कमरे में ले जाकर गैस जलाकर चाकू लाल करके उसके प्राइवेट पार्ट को दाग दिया। मारपीट कर धमकी दी कि दोबारा पैंट में पेशाब की तो इससे भी बुरा हाल करेगी। घर आने के बच्चे ने सारी बात बताई। शिकायत करने पर प्रधानाचार्य हेमलता सिंह और प्रबंधक ने भी धमकी दी। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराते हुए केस दर्ज कर लिया है। घटना को लेकर दर्जनों अधिवक्ता थाने पर जुट गए थे।

    छात्र के बाल न कटवाने पर केवीएस ने नाम काटा
    उधर, कानपुर में बाल न कटवाने पर एक छात्र का नाम स्कूल से ही काट दिया गया। जब परिजन की शिकायत लेकर स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने टीसी काटकर थमा दिया। जिसके बाद परिजन बच्चे को लेकर डीएम ऑफिस पहुंचे और जिलाधिकारी से इस बात की शिकायत की। वहीं, ये मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    पहले पढ़ाई के दौरान लंबे बालों को लेकर स्कूल की टीचर और प्रबंधन काफी नाराज हुआ करते थे। बदलते दौर में ऐसी शिकायतें होना बंद हो गई लेकिन फिर भी कुछ स्कूल ऐसे हैं जो आज भी बच्चों को अनुशासन में रखना पसंद करते हैं। ऐसे ही एक मामले में स्कूल ने छात्र को लंबे बाल काटने को कहा। छात्र ने चेतावनी के बाद भी ऐसा नहीं किया तो स्कूल ने छात्र का नाम ही काट दिया। अब छात्र के परिजन कानपुर प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। शुक्रवार को डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह का जनता दर्शन चल रहा था। उसी दौरान मीरपुर कैंट की रहने वाली एक महिला अपने बेटे के साथ पहुंची।

  • MP: रीवा के सरकारी स्कूल में पढ़ाना छोड़ कानों में एयर फोन लगाकर गाने सुन रही मैडम, छात्र झाल रहा पंखा…

    MP: रीवा के सरकारी स्कूल में पढ़ाना छोड़ कानों में एयर फोन लगाकर गाने सुन रही मैडम, छात्र झाल रहा पंखा…


    रीवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रीवा (Rewa) से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां एक सरकारी स्कूल (Government School) में महिला हेडमास्टर (Female Headmaster) खुद कुर्सी पर बैठकर आराम करती नजर आईं, जबकि एक छात्र उनसे पंखा झलवाता दिखा. इतना ही नहीं, हेडमास्टर के कान में ईयरफोन भी लगा हुआ था. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला यह मामला रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के शासकीय माध्यमिक शाला पनासी का बताया जा रहा है. जहां स्कूल की महिला हेडमास्टर वर्षा मांझी एक छात्र से पंखा झलवाती नजर आईं।

    https://twitter.com/priyarajputlive/status/2041876637890048412
    वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हेडमास्टर कुर्सी पर आराम से बैठी हुई हैं, उनके कान में ईयरफोन लगा हुआ है, जबकि एक छात्र हाथ में पंखा लेकर उन्हें हवा कर रहा है. यह दृश्य न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों की स्थिति पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करती है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पहले से ही सवालों के घेरे में है और अब इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ

    होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ

    सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल की मासूम बच्ची को होमवर्क पूरा न करने की ऐसी सजा मिली कि उसका हाथ टूट गया। इंग्लिश टीचर ने बच्ची को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह जमीन पर गिरी और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। अब बच्ची के हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है। हैरानी की बात यह है कि जब पिता स्कूल पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो प्रबंधन ने रटा-रटाया जवाब दे दिया कि “कैमरे खराब हैं”।
    फिलहाल पिता की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने सम्बंधित टीचर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    बर्थडे, होमवर्क और टीचर की सजा
    दरअसल पूरा मामला शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले अमौधा स्थित सीएमए विद्यालय का है। यहां पतेरी के चौहान नगर निवासी पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया की बच्ची मंगलवार को स्कूल गई थी। घर पर छोटी बहन का जन्मदिन होने के कारण वह अपना इंग्लिश का होमवर्क पूरा नहीं कर पाई थी। क्लास में जब इंग्लिश टीचर सपना खरे ने होमवर्क चेक किया और अधूरा पाया, तो वे गुस्से में तमतमा गईं।

    उन्होंने बच्ची को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ लगते ही मासूम का संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़ी, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई।
    डरी सहमी बच्ची घर पहुंची और…

    स्कूल से लौटने के बाद डरी-सहमी बच्ची ने शाम को हाथ में दर्द की शिकायत की। मां को लगा मामूली चोट होगी, इसलिए बाम लगा दिया और बच्ची सो गई। बुधवार सुबह जब स्कूल जाने के लिए बच्ची को उठाया गया, तो उसका हाथ बुरी तरह सूजा हुआ था। परिजन घबराकर उसे जिला अस्पताल ले गए। वहां एक्स-रे करने पर फ्रैक्चर की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने तुरंत प्लास्टर चढ़ाया है।
    सीसीटीवी फुटेज की मांग पर क्या बोला स्कूल

    बेटी की हालत देख पिता का गुस्सा फूट पड़ा है। वे पहले सिविल लाइन थाने गए और फिर स्कूल पहुंचे।

    पिता ने प्रिंसिपल से घटना की शिकायत की और क्लासरूम का सीसीटीवी फुटेज दिखाने को कहा। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाते हुए कह दिया कि कैमरे कई दिनों से खराब हैं। परिजनों का यह भी आरोप है की कभी कभार फीस लेट हो जाने पर बच्ची को परीक्षा में न बैठने की धमकी भी दी जा चुकी है। स्कूल में अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ शारीरिक हिंसा की जा रही है, जो कानूनन अपराध है। प्रबंधन आरोपी टीचर को बचाने की कोशिश कर रहा है।

    वही, सिविल लाइन पुलिस ने पिता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित शिक्षिका के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज लिया है और मामले पर आंगे जांच कर रही है।