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  • मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश: के शिक्षकों को स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया के बीच बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए शिक्षकों को वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो मैरिज सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।

    राज्य में चल रही ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने शिकायत की थी कि वर्षों पहले विवाह होने के बावजूद उनके पास विवाह प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे निर्धारित श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करने से वंचित हो रहे थे। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों ने लगातार विभाग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की थी।

    शिक्षक संगठनों का तर्क था कि कई शिक्षकों का विवाह दो दशक या उससे भी पहले हुआ है, जब विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया वर्तमान की तरह व्यापक नहीं थी। ऐसे मामलों में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता उन्हें अनावश्यक परेशानी में डाल रही थी। विभाग ने इन आपत्तियों पर विचार करते हुए अब वैकल्पिक दस्तावेजों को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

    नए निर्देशों के अनुसार शिक्षक विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर लोकसेवक समग्र कार्ड, सेवा पुस्तिका का सत्यापित पृष्ठ अथवा अन्य मान्य दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर वैवाहिक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। विभाग के इस कदम को शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

    गौरतलब है कि ऑनलाइन ट्रांसफर आवेदन की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले यह राहत दी गई है। इससे उन शिक्षकों को विशेष लाभ मिलेगा जो दस्तावेजी बाधाओं के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थानांतरण सूची 27 या 28 जून तक जारी की जा सकती है। ऐसे में अंतिम चरण में किया गया यह बदलाव बड़ी संख्या में आवेदकों को प्रक्रिया में शामिल रहने का अवसर देगा।

    हालांकि सभी वर्गों के शिक्षकों की समस्याओं का समाधान अभी नहीं हो पाया है। विशेष रूप से दिव्यांग शिक्षकों के बीच कुछ नियमों को लेकर असंतोष बना हुआ है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र के संबंध में निर्धारित शर्तों को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार उनके पास वैध प्रमाण पत्र मौजूद हैं, फिर भी एक वर्ष के भीतर जारी प्रमाण पत्र की मांग के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    शिक्षा विभाग का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल दस्तावेज संबंधी बाधाएं कम होंगी, बल्कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी भी बढ़ेगी। अब शिक्षकों की निगाहें स्थानांतरण सूची के प्रकाशन और लंबित मांगों पर विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी

    शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

    दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़

    भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।

    TET अनिवार्यता पर जताया विरोध
    संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।
    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

    दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़

    भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।

    TET अनिवार्यता पर जताया विरोध
    संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता 
    शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

    सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी

    संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

    जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।

    शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

    सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी

    संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

    जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।

  • MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक

    MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के नए आदेश के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    राजधानी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में इस आदेश के विरोध में एक साथ आंदोलन हुआ। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने टीईटी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।


    डीपीआई आदेश बना विरोध की वजह

    हाल ही में डीपीआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। यही प्रावधान अब शिक्षकों के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह बन गया है।


    “सुप्रीम कोर्ट के नाम पर अन्याय”

    प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर सरकार ऐसा फैसला थोप रही है, जिससे हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में शिक्षक भोपाल पहुंचे और डीपीआई के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना है।


    पुराने शिक्षकों पर नई शर्त का विरोध

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद 2011 से टीईटी अनिवार्य किया गया, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” निर्णय है, जो अन्यायपूर्ण और कानूनी रूप से भी कमजोर है।


    1.5 लाख शिक्षक प्रभावित

    संगठनों के मुताबिक इस आदेश का असर करीब 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें लगभग 70 हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय यह शर्त लागू नहीं थी, इसलिए अब इसे आधार बनाकर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा करना उचित नहीं है।


    संयुक्त मोर्चा की चेतावनी

    प्रदर्शन के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने डीपीआई अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बाहर मौजूद शिक्षकों को आश्वासन दिया गया कि उनकी बात शासन तक पहुंचाई जाएगी। वहीं, शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे, जबकि 18 अप्रैल को प्रदेशव्यापी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके भविष्य, सम्मान और वर्षों की सेवा का सवाल है और इसके लिए अब वे आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।