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  • पुष्पा झुकेगा नहीं’ लिखी पिकअप से सागौन तस्करी: खंडवा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

    पुष्पा झुकेगा नहीं’ लिखी पिकअप से सागौन तस्करी: खंडवा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई


    खंडवा। जिले के कालीभीत वन क्षेत्र में सागौन तस्करी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां फिल्मी अंदाज में ‘पुष्पा झुकेगा नहीं साला’ जैसे डायलॉग लिखी पिकअप गाड़ी से अवैध लकड़ी की तस्करी का खुलासा हुआ। वन विभाग की टीम ने मंगलवार देर रात घेराबंदी कर वाहन को पकड़ लिया, हालांकि अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर मौके से फरार हो गए। जांच में वाहन से करीब 3 घनमीटर सागौन लकड़ी बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद पूरा मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

    जंगल में रोशनी देखकर बढ़ा शक, फिर शुरू हुई कार्रवाई
    मामला पश्चिम कालीभीत वन परिक्षेत्र के सिरालिया सब रेंज के भुरकुला जंगल क्षेत्र का है। नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों को जंगल के अंदर संदिग्ध वाहन की रोशनी दिखाई दी। देर रात जंगल में वाहन की मौजूदगी संदिग्ध लगने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने इलाके की घेराबंदी कर वाहन को रोका। जैसे ही टीम नजदीक पहुंची, तस्करों ने वन विभाग की गाड़ियों की रोशनी देख वाहन छोड़कर जंगल में भागने में सफलता पा ली।

    गाड़ी से मिला सागौन का बड़ा जखीरा
    घेराबंदी के बाद जब वाहन की जांच की गई तो वह लॉक मिला। वन विभाग ने लॉक तोड़कर जब तलाशी ली तो अंदर सागौन के करीब 20 लट्ठे भरे हुए पाए गए। इसके बाद वाहन और लकड़ी दोनों को जब्त कर लिया गया। वन विभाग की कार्रवाई के बाद पिकअप पर लिखे फिल्मी डायलॉग भी सुर्खियों में आ गए हैं, जिससे यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

    पहले से संदिग्ध थी गाड़ी की गतिविधियां
    वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रम सिंह भदौरिया ने बताया कि यह वाहन पहले भी कई बार रात के समय जंगल क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घूमता देखा गया था। हालांकि तब पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण कार्रवाई संभव नहीं हो सकी थी। इस बार वाहन को सागौन लकड़ी के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिससे तस्करी की पुष्टि हो गई है। अब विभाग इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है।

    तस्करी नेटवर्क की जांच तेज, मालिक से पूछताछ की तैयारी
    प्रारंभिक जांच में यह पिकअप वाहन वनग्राम कोटवारिया निवासी रामकिशन पाटिल के नाम पर दर्ज बताया जा रहा है। वन विभाग अब वाहन मालिक सहित अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश कर रहा है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

  • खैर-सागौन तस्करी पर वन विभाग का मास्टर स्ट्रोक: देशभर में तस्करी के नेटवर्क का खुलासा, लाखों की लकड़ी जब्त

    खैर-सागौन तस्करी पर वन विभाग का मास्टर स्ट्रोक: देशभर में तस्करी के नेटवर्क का खुलासा, लाखों की लकड़ी जब्त


    शहडोल । देशभर में खैर लकड़ी की बढ़ती मांग ने इसे तस्करी का नया हॉटस्पॉट बना दिया है, और इस स्थिति का लाभ उठाते हुए तस्कर दिन-ब-दिन अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। लेकिन शहडोल वन विभाग ने अब एक जबरदस्त कार्रवाई की है, जिससे तस्करी के इस गहरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है और वन संपदा की लूट में संलिप्त तत्वों को कड़ा संदेश दिया गया है। शहडोल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए छापे में खैर और सागौन की लाखों रुपये मूल्य की लकड़ी जब्त की गई है।

    वन विभाग की यह कार्रवाई बुढ़ार वन परिक्षेत्र के ग्राम बुगरा में शुरू हुई, जहां एक घर से 104 नग सागौन लकड़ी 3.109 घनमीटर बरामद हुई। पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि यह लकड़ी रात के समय पिकअप वाहन से लाई गई थी। वन अपराध के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। इसके बाद, ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के कोलमी वार्ड में अशोक कुमार अवस्थी के घर से सागौन लकड़ी के छिलके, बोरे और लकड़ी के टुकड़े, साथ ही 13 चेन-सॉ मशीनें और एक बैटरी चालित चेन-सॉ मशीन बरामद की गई।

    इसके साथ ही, ग्राम पटदई में एक ढाबे से 130 नग सागौन लकड़ी 2.079 घनमीटर भी जब्त की गई। इन कार्रवाईयों के दौरान, लगभग 5 से 6 घन मीटर लकड़ी की तस्करी के प्रमाण मिले, जिससे तस्करों की गतिविधियों का जाल साफ तौर पर उजागर हुआ।खैर और सागौन लकड़ी की बढ़ती तस्करी की वजह से इनकी मांग बढ़ गई है, और यही कारण है कि अब इनकी जड़ें और छिलके भी तस्करी के शिकार हो रहे हैं। इस पर वन विभाग की डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे ने बताया कि तस्करी की इस समस्या को लेकर विभाग ने एक सख्त रणनीति अपनाई है।
    जिसमें लगातार निगरानी रखी जा रही है और तस्करों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जंगल की संपदा की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की इस तरह की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी कीमत पर अवैध तस्करी और जंगल की लूट को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। विभाग अब आने वाले दिनों में इस नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए और भी प्रभावी कदम उठाएगा।