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  • टीम इंडिया की चयन समिति में बड़ा फेरबदल, अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को जिम्मेदारी; रमेश पोवार की भी वापसी

    टीम इंडिया की चयन समिति में बड़ा फेरबदल, अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को जिम्मेदारी; रमेश पोवार की भी वापसी


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने पुरुष क्रिकेट टीम की चयन समिति में बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को नया चीफ सेलेक्टर नियुक्त किया है। वह अजीत अगरकर की जगह यह अहम जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही पूर्व भारतीय क्रिकेटर और अनुभवी कोच रमेश पोवार को भी चयन समिति में शामिल किया गया है। नई नियुक्तियों के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की पांच सदस्यीय चयन समिति का पुनर्गठन पूरा हो गया है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि नई समिति भविष्य की सीरीज और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए टीम इंडिया का चयन किस रणनीति के तहत करती है।

    प्रज्ञान ओझा को चयन समिति का अध्यक्ष बनाने के पीछे उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में टेस्ट मैचों की वरिष्ठता को आधार बताया गया है। बाएं हाथ के पूर्व स्पिन गेंदबाज ओझा ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है और अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई। अब उन्हें खिलाड़ियों के चयन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। चयन समिति का काम केवल टीम में खिलाड़ियों के नाम तय करना नहीं होता बल्कि टीम की जरूरतों घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन खिलाड़ियों की फिटनेस और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर सही संयोजन तैयार करना भी होता है। ऐसे में ओझा के सामने प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को मौका देने और अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती होगी।

    वहीं रमेश पोवार को चयन समिति में शामिल करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पोवार भारतीय टीम के लिए दो टेस्ट और 31 वनडे मुकाबले खेल चुके हैं। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोचिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं। इसके अलावा मुंबई और गुजरात की टीमों के साथ भी कोच के रूप में काम कर चुके हैं। बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभालने का अनुभव भी उनके पास है। महिला टीम के साथ उनके कार्यकाल में भारत ने एशिया कप का खिताब जीता और कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक हासिल किया। उनके अनुभव से चयन समिति को खिलाड़ियों की तकनीक और प्रदर्शन का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

    रमेश पोवार के नाम की सिफारिश बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति ने की। इस समिति में अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे शामिल थे। दोनों ने बीसीसीआई मुख्यालय में आवेदकों की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पोवार के नाम पर सर्वसम्मति से सहमति जताई। इसके बाद उन्हें चयन समिति में शामिल करने की सिफारिश की गई।

    बीसीसीआई ने पूर्व चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के योगदान की भी जमकर सराहना की है। अगरकर ने जुलाई 2023 में चयन समिति के अध्यक्ष का पद संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने तीन आईसीसी ट्रॉफियां और दो एशिया कप खिताब जीते। इसके अलावा भारत ने लगातार दो एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किए। इन उपलब्धियों के चलते उनके कार्यकाल को भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नई चयन समिति में प्रज्ञान ओझा अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे जबकि शिव सुंदर दास आरपी सिंह अजय रात्रा और रमेश पोवार अन्य सदस्य होंगे। अब इस नई टीम के सामने भारतीय क्रिकेट की मजबूती बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।

  • रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो बना हार की बड़ी वजह, स्पिन अटैक और टीम चयन पर उठे गंभीर सवाल

    रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो बना हार की बड़ी वजह, स्पिन अटैक और टीम चयन पर उठे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के कई कारण रहे लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा युवा लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के प्रदर्शन की हो रही है। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में बिना कोई विकेट लिए 60 रन खर्च किए और तीन नो बॉल फेंक दीं। टी20 जैसे छोटे प्रारूप में किसी स्पिनर का इतना महंगा साबित होना और लगातार नो बॉल करना भारत की गेंदबाजी रणनीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।

    भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 190 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और शुरुआती ओवरों में दो विकेट जल्दी गिर गए। ऐसे समय भारतीय टीम के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने का सुनहरा मौका था लेकिन बीच के ओवरों में रवि बिश्नोई की गेंदबाजी ने मेजबान टीम को मुकाबले में वापसी का रास्ता दे दिया।

    सबसे निर्णायक मोड़ उनके 17वें ओवर में आया। इस ओवर में उन्होंने तीन नो बॉल फेंकी जिससे इंग्लैंड को लगातार फ्री हिट मिली। बल्लेबाज जैकब बेथेल ने इन अतिरिक्त मौकों का पूरा फायदा उठाया और तेजी से रन बटोरकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। टी20 क्रिकेट में अनुशासन बेहद अहम माना जाता है और किसी स्पिनर से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जाती।

    बिश्नोई की गेंदबाजी शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्हें लेग स्पिनर माना जाता है लेकिन उनकी गेंदबाजी मुख्य रूप से गुगली पर आधारित रहती है। जब बल्लेबाज उनकी गुगली को पढ़ लेते हैं तब उनके पास न तो ज्यादा टर्न का विकल्प बचता है और न ही बल्लेबाजों को चकमा देने वाली विविधता दिखाई देती है। मैनचेस्टर में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उनकी रणनीति को आसानी से समझ लिया और खुलकर रन बनाए।

    हाल के समय में आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय रहा है। लखनऊ सुपर जायंट्स से अलग होने के बाद वह राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बने लेकिन वहां भी उनकी भूमिका पूरी तरह स्थिर नहीं रही। ऐसे में भारतीय टीम में लगातार मौके मिलने को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञ और प्रशंसक सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि टीम प्रबंधन को प्रदर्शन के आधार पर स्पष्ट चयन नीति अपनानी चाहिए।

    हालांकि केवल एक खराब मैच के आधार पर किसी खिलाड़ी के करियर पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। रवि बिश्नोई युवा गेंदबाज हैं और उन्होंने पहले भी कई मैचों में टीम को जीत दिलाई है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रभावी बने रहने के लिए उन्हें अपनी पारंपरिक लेग ब्रेक पर काम करना होगा और गेंदबाजी में अधिक विविधता लानी होगी। साथ ही नो बॉल जैसी बुनियादी गलतियों से बचना भी बेहद जरूरी होगा।

    भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 सीरीज अभी बाकी है और टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले मुकाबले में स्पिन विभाग में बदलाव किया जाए या फिर बिश्नोई पर भरोसा बरकरार रखा जाए। आने वाले मैचों में उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि वह आलोचनाओं का जवाब मैदान पर किस तरह देते हैं।