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  • न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी…

    न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी…


    नई दिल्ली।
    न्यूयॉर्क से दिल्ली (New York to Delhi) की तरफ आ रही एयर इंडिया (Air India flight) की फ्लाइट संख्या ए350 को तकनीकी खराबी (Technical fault) की वजह से आयरलैंड की तरफ मोड़ दिया गया है। यहां शैनन शहर में विमान की इमरजैंसी लैंडिग (Emergency Landing) की जाएगी। तकनीकि जांच के बाद फ्लाइट फिर से उड़ान भर पाने में सक्षम होगी। सूत्रों के अनुसार विमान में करीब 300 लोग सवार हैं। शैनन शहर की ओर मोड़े जाने से पहले यह 6 घंटे की यात्रा पूरी कर चुका था।

    एअरलाइन ने शाम को जारी एक बयान में इस घटना की जानकारी दी। एयरलाइन की तरफ से कहा गया, “15 मार्च को न्यूयॉर्क (जेएफके) से दिल्ली जा रहे विमान एआई102 को तकनीकी खराबी की आशंका के चलते एहतियाती तौर पर आयरलैंड के शैनन की ओर मोड़ दिया गया। एयर इंडिया के उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप विमान का वर्तमान में व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसमें अतिरिक्त समय लगेगा।”सूत्रों ने बताया कि विमान में कंपन और शोर उत्पन्न हुआ, जिसके बाद उसे शैनन की ओर मोड़ दिया गया।

    इस विमान को अप्रैल 2024 में एअर इंडिया के बेड़े में शामिल किया गया था। यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए एअर इंडिया ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि यात्री जल्द से जल्द अपनी दिल्ली की यात्रा जारी रख सकें। इससे पहले दिन में एअरलाइन ने कहा कि विमान स्थानीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे शैनन हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतर गया और सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं। प्रवक्ता ने कहा, “तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है।” फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विमान शैनन की ओर मोड़े जाने से पहले लगभग छह घंटे तक हवा में रहा।

  • तकनीकी खराबी के कारण ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ को कोच्चि में दी गई डॉकिंग की अनुमति

    तकनीकी खराबी के कारण ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ को कोच्चि में दी गई डॉकिंग की अनुमति


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार ने श्रीलंका के दक्षिण में हुए ‘आईआरआईएस डेना’ से जुड़े घटनाक्रम से कुछ दिन पहले ईरान ने अपने एक अन्य युद्धपोत आईआरआईएस लावान को भारत में शरण देने का अनुरोध किया था।

    भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक पोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति देने का आग्रह किया था। उस समय यह पोत अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आ जाने के कारण तत्काल डॉकिंग की आवश्यकता बताई गई थी। भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद ईरानी युद्धपोत 4 मार्च को केरल के कोच्चि स्थित बंदरगाह पर पहुंचकर सुरक्षित रूप से डॉक हो गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज के तकनीकी मुद्दों के समाधान तक उसके चालक दल के 183 सदस्यों को कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। वहां उन्हें आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कदम मानवीय आधार और समुद्री परंपराओं के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या आपात स्थिति में सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का हिस्सा माना जाता है।

    गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कोच्चि में आईआरआईएस लावान की डॉकिंग केवल तकनीकी समस्या के कारण की गई है और यह नियमित समुद्री सहायता की प्रक्रिया के तहत हुई है।

    सूत्रों ने यह भी बताया कि जहाज की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद उसके आगे के कार्यक्रम के बारे में निर्णय लिया जाएगा।सूत्रों ने बताया कि ईरान ने 28 फरवरी 2026 को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक पोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति देने का आग्रह किया था। उस समय यह पोत अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आ जाने के कारण तत्काल डॉकिंग की आवश्यकता बताई गई थी।

    भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद ईरानी युद्धपोत 4 मार्च को केरल के कोच्चि स्थित बंदरगाह पर पहुंचकर सुरक्षित रूप से डॉक हो गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज के तकनीकी मुद्दों के समाधान तक उसके चालक दल के 183 सदस्यों को कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। वहां उन्हें आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कदम मानवीय आधार और समुद्री परंपराओं के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या आपात स्थिति में सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का हिस्सा माना जाता है।

    गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कोच्चि में आईआरआईएस लावान की डॉकिंग केवल तकनीकी समस्या के कारण की गई है और यह नियमित समुद्री सहायता की प्रक्रिया के तहत हुई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जहाज की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद उसके आगे के कार्यक्रम के बारे में निर्णय लिया जाएगा।