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  • अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    नई दिल्ली । अमेरिकी शेयर बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी निवेश पर अब निवेशकों के सवाल बढ़ने लगे हैं। बाजार में यह चिंता है कि कंपनियां जिस तेजी से AI तकनीक पर पूंजी खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे पर्याप्त कमाई और रिटर्न हासिल हो पाएगा। इसी अनिश्चितता का असर अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया है। अक्टूबर में नैसडैक अपने उच्चतम स्तर से 7.8 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

    इस गिरावट के दौरान नैसडैक का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 2 ट्रिलियन डॉलर घट गया। यह रकम एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के अनुमानित बाजार मूल्य के बराबर बताई जा रही है। अक्टूबर का प्रदर्शन मार्च 2025 के बाद नैसडैक के लिए सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा है। टेक कंपनियों के शेयरों में लगातार दबाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

    शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। नैसडैक कंपोजिट इंडेक्स 2.86 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.82 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों के लिए यह जून के बाद सबसे खराब कारोबारी दिन रहा। वहीं डाउ जोंस इंडेक्स भी 572 अंक यानी 1.1 प्रतिशत टूट गया। बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बड़ी टेक कंपनियों के AI निवेश को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता रही।

    मेटा, अल्फाबेट और अमेजन जैसी कंपनियां AI तकनीक के विकास, डेटा सेंटर और संबंधित बुनियादी ढांचे पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि इस निवेश से होने वाली कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ा पूंजीगत खर्च 2030 तक 5.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अकेले 2026 में इस क्षेत्र में करीब 900 अरब डॉलर खर्च होने की संभावना जताई गई है।

    चिप निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंटेल के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कंपनी का शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट गया। यह 1974 के बाद एक कारोबारी दिन में इंटेल के शेयरों की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। कंपनी ने चौथी तिमाही में कमजोर राजस्व का अनुमान जताया है। इसकी एक प्रमुख वजह मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता मांग में कमी आना बताई गई है।

    अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। अमेजन के शेयर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एनवीडिया का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इस गिरावट के बाद एनवीडिया बाजार पूंजीकरण के मामले में ऐपल से पीछे हो गई। अल्फाबेट और मेटा के शेयर अपने शीर्ष स्तर से करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट और स्पेसएक्स के नतीजों में AI पर किए गए निवेश से रिटर्न मिलने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन शुक्रवार को इनके शेयरों में भी कमजोरी रही।

    शेयर बाजार में आई गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति पर भी पड़ा है। एलन मस्क की नेटवर्थ में 48.5 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति घटकर 865 अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा जेफ बेजोस, लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, माइकल डेल, मार्क जकरबर्ग, लैरी एलिसन और जेंसन हुआंग की संपत्ति में भी गिरावट आई।

    अमेरिकी शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति ने AI क्षेत्र में निवेश की रफ्तार और उससे मिलने वाले संभावित मुनाफे को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कंपनियों के भारी खर्च और निवेशकों की रिटर्न संबंधी अपेक्षाओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। आने वाले समय में कंपनियों के वित्तीय नतीजे और AI कारोबार से होने वाली वास्तविक कमाई इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • इंटरनेट दुनिया से जोड़ता है, योग स्वयं से, डिजिटल युग में मानसिक शांति और आत्म-जागरूकता के लिए संतुलन जरूरी

    इंटरनेट दुनिया से जोड़ता है, योग स्वयं से, डिजिटल युग में मानसिक शांति और आत्म-जागरूकता के लिए संतुलन जरूरी

    नई दिल्ली ।डिजिटल युग में इंटरनेट और तकनीक ने लोगों के जीवन को काफी हद तक बदल दिया है। दुनिया भर की जानकारी तक पहुंच, दूर बैठे लोगों से बातचीत और कई कामों को कम समय में पूरा करना अब आसान हो गया है। हालांकि, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मानसिक शांति और स्वयं के साथ समय बिताने का महत्व भी चर्चा में है। योग गुरु महेश अग्रवाल का विचार है कि इंटरनेट मनुष्य को दुनिया से जोड़ता है, जबकि योग उसे स्वयं से जुड़ने का अवसर देता है।

    यह विचार आधुनिक जीवन की एक अहम चुनौती की ओर ध्यान दिलाता है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से व्यक्ति लगातार बाहरी गतिविधियों से जुड़ा रहता है। समाचार, संदेश और डिजिटल सामग्री की निरंतर उपलब्धता के कारण ध्यान बार-बार भटक सकता है। यदि तकनीक का इस्तेमाल जरूरत से अधिक होने लगे, तो कुछ लोगों को मानसिक थकान, एकाग्रता में कमी और अपने लिए समय निकालने में परेशानी महसूस हो सकती है।

    तकनीक को पूरी तरह गलत मानना इस समस्या का समाधान नहीं है। इंटरनेट शिक्षा, जानकारी, संवाद और व्यक्तिगत विकास के लिए उपयोगी साधन है। इसका लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति इसका उपयोग किस उद्देश्य से और कितनी देर तक करता है। तकनीक को जीवन का सहायक बनाने और उस पर अनावश्यक निर्भरता से बचने के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

    महेश अग्रवाल के विचार में योग व्यक्ति को बाहरी गतिविधियों से ध्यान हटाकर अपने भीतर देखने का अवसर देता है। योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। नियमित अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर, सांस और विचारों पर ध्यान केंद्रित करना सीख सकता है। इससे उसे अपनी मानसिक स्थिति को समझने और रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच कुछ समय शांत रहने में मदद मिल सकती है।

    योग का एक महत्वपूर्ण पहलू आत्म-जागरूकता भी है। दिनभर की भागदौड़ में व्यक्ति अक्सर अपनी भावनाओं, विचारों और जरूरतों पर ध्यान नहीं दे पाता। ध्यान और सांस से जुड़े अभ्यास उसे कुछ समय रुककर अपने अनुभवों को समझने का अवसर देते हैं। स्वयं के विचारों और भावनाओं के प्रति सजग होने की इस प्रक्रिया को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।

    डिजिटल उपकरणों के लगातार इस्तेमाल से होने वाली थकान के बीच स्क्रीन से कुछ समय का विराम भी उपयोगी हो सकता है। इसके लिए हर व्यक्ति को तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाने की आवश्यकता नहीं है। दिन के कुछ हिस्सों में मोबाइल फोन को अलग रखना, सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना व्यावहारिक उपाय हो सकते हैं।

    योग और डिजिटल वेलबीइंग के बीच संतुलन बनाने के लिए शुरुआत छोटे बदलावों से की जा सकती है। सुबह उठने के बाद कुछ समय बिना मोबाइल देखे बिताना, सहज श्वास पर ध्यान देना और अपनी क्षमता के अनुसार सरल योगासन करना दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। ध्यान के दौरान सांसों पर ध्यान केंद्रित करना भी मन को वर्तमान क्षण में लाने का एक सरल तरीका है। अभ्यास करते समय अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है और किसी परेशानी की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

    आज तकनीक से पूरी तरह अलग रहना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन उसके इस्तेमाल की आदतों में सुधार किया जा सकता है। इंटरनेट और डिजिटल उपकरण बाहरी दुनिया से जुड़ने के अवसर देते हैं, जबकि योग स्वयं की जरूरतों और मानसिक स्थिति को समझने में सहायक हो सकता है। दोनों के बीच संतुलन बनाकर व्यक्ति तकनीक के लाभ उठाने के साथ अपने स्वास्थ्य, एकाग्रता और आंतरिक शांति के लिए भी समय निकाल सकता है।

  • छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग

    छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग


    नई दिल्ली ।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ अब छोटे कारोबारियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। किराना दुकान, कपड़ों का कारोबार, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और छोटी विनिर्माण इकाइयों में AI की मदद से रोजमर्रा के कई काम आसान बनाए जा सकते हैं। इससे कारोबारियों को समय बचाने, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और अपने व्यवसाय के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।

    छोटे कारोबारों में अक्सर सीमित कर्मचारी ही बिक्री, स्टॉक, हिसाब-किताब, प्रचार और ग्राहक सेवा जैसी जिम्मेदारियां संभालते हैं। इसके मुकाबले बड़ी कंपनियों के पास अलग-अलग कामों के लिए विशेष टीमें होती हैं। ऐसे में डिजिटल उपकरण और AI आधारित सुविधाएं छोटे कारोबारियों के लिए सहायक बन सकती हैं। हालांकि, तकनीक का चुनाव कारोबार की जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

    किराना दुकानदार बिक्री और स्टॉक से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ज्यादा बिकने वाली वस्तुओं की पहचान करने और दोबारा सामान मंगाने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। कपड़ों के कारोबार में पिछले बिक्री रिकॉर्ड और मौसमी मांग को समझकर खरीदारी की योजना बेहतर बनाई जा सकती है। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल कारोबार से जुड़े फैसलों को व्यवस्थित करने में सहायक हो सकता है।

    रेस्टोरेंट संचालक AI की मदद से मेन्यू के विवरण, प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर सकते हैं। ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देने में भी ऐसे उपकरण उपयोगी हो सकते हैं। कोचिंग सेंटरों में प्रवेश, फीस, कक्षाओं के समय और पाठ्यक्रम से संबंधित नियमित पूछताछ को व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं, छोटी विनिर्माण इकाइयां ऑर्डर, स्टॉक और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी को संभालने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग कर सकती हैं।

    छोटे कारोबारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर काम के लिए महंगे AI सॉफ्टवेयर की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी दुकानदार को बिलिंग और स्टॉक का हिसाब रखने में परेशानी है, तो सामान्य बिलिंग या इन्वेंटरी सॉफ्टवेयर ही उसकी जरूरत पूरी कर सकता है। दूसरी ओर, जहां बड़ी संख्या में ग्राहकों की पूछताछ आती है, वहां AI आधारित चैटबॉट सामान्य सवालों के जवाब देने और जानकारी को संबंधित कर्मचारी तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

    सभी ऑटोमेशन उपकरण AI आधारित नहीं होते। कुछ सॉफ्टवेयर पहले से तय नियमों के अनुसार काम करते हैं, जबकि AI आधारित प्रणालियां भाषा समझने, सामग्री तैयार करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने जैसे कार्य कर सकती हैं। इसलिए किसी समाधान को अपनाने से पहले उसकी उपयोगिता, लागत और मौजूदा कार्यप्रणाली के साथ अनुकूलता की जांच करनी चाहिए।

    AI का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। इससे तैयार की गई जानकारी या बिक्री संबंधी अनुमान हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसले लेने से पहले परिणामों की जांच करनी चाहिए। ग्राहकों की निजी जानकारी, भुगतान विवरण और कारोबार के गोपनीय आंकड़ों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी गोपनीयता नीति और डेटा उपयोग की शर्तों को समझना चाहिए।

    छोटे कारोबारी शुरुआत किसी एक काम से कर सकते हैं। मसलन, प्रचार सामग्री तैयार करना, ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देना या बिक्री के आंकड़ों को समझना। इसके बाद यह देखा जा सकता है कि संबंधित उपकरण से कितना समय बचा, खर्च कितना हुआ और काम में कितना सुधार आया। यदि परिणाम उपयोगी हों, तो धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छोटे कारोबारों की असली ताकत अनुभव, स्थानीय बाजार की समझ और ग्राहकों के साथ भरोसेमंद संबंध हैं। AI इन खूबियों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने का साधन बन सकता है। कारोबारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे तकनीक को केवल नया चलन समझकर नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से अपनाएं।

  • पेट्रोल पंप का नोजल टंकी फुल होते ही अपने आप कैसे बंद हो जाता है, जानिए पूरी तकनीक

    पेट्रोल पंप का नोजल टंकी फुल होते ही अपने आप कैसे बंद हो जाता है, जानिए पूरी तकनीक

    नई दिल्ली । कार या बाइक में पेट्रोल-डीजल भरवाते समय आपने अक्सर देखा होगा कि फ्यूल टंकी भरते ही पेट्रोल पंप का नोजल अपने आप बंद हो जाता है। इस दौरान कर्मचारी को न तो कोई बटन दबाना पड़ता है और न ही मशीन को अलग से बंद करने की जरूरत होती है। नोजल का ट्रिगर अपने आप रिलीज हो जाता है और ईंधन का प्रवाह रुक जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य दिखाई देती है, लेकिन इसके पीछे एक खास तकनीक काम करती है। इसे ऑटोमैटिक शट-ऑफ या ऑटो कट-ऑफ सिस्टम कहा जाता है।

    आधुनिक पेट्रोल पंपों पर इस्तेमाल होने वाले अधिकांश नोजल में यह व्यवस्था मौजूद होती है। इसका मुख्य उद्देश्य फ्यूल टंकी भर जाने पर ईंधन की सप्लाई को अपने आप रोकना है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह सामान्य तौर पर किसी इलेक्ट्रॉनिक सेंसर या बाहरी बिजली की मदद के बिना काम करता है। इसके बजाय इसमें हवा के दबाव और वैक्यूम के सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाता है।

    नोजल की नोक के पास होता है छोटा छेद

    ऑटो कट-ऑफ सिस्टम को समझने के लिए नोजल की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। इसकी नोक के पास एक छोटा-सा छेद होता है, जो नोजल के भीतर मौजूद एक पतली ट्यूब से जुड़ा रहता है। ईंधन भरने के दौरान यह छेद हवा के प्रवाह में मदद करता है। नोजल के अंदर वेंचुरी प्रभाव के कारण दबाव में अंतर पैदा होता है, जो ऑटोमैटिक शट-ऑफ व्यवस्था को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    जब तक फ्यूल टंकी में पर्याप्त खाली जगह रहती है, तब तक नोजल की नोक के पास मौजूद छेद खुला रहता है। इस स्थिति में हवा का प्रवाह जारी रहता है और ईंधन लगातार टंकी में पहुंचता रहता है। जैसे-जैसे टंकी में पेट्रोल या डीजल का स्तर बढ़ता है, ईंधन नोजल की नोक के करीब आने लगता है। टंकी भरने पर ईंधन इस छोटे छेद को ढक देता है, जिससे हवा का रास्ता बंद हो जाता है।

    छेद बंद होते ही नोजल के अंदर दबाव की स्थिति बदल जाती है और वैक्यूम का प्रभाव बढ़ता है। यह बदलाव नोजल के भीतर मौजूद डायफ्राम को सक्रिय करता है। इसके बाद ट्रिगर को पकड़े रखने वाला मैकेनिज्म रिलीज हो जाता है। नतीजतन, नोजल का वाल्व बंद हो जाता है और पेट्रोल या डीजल की सप्लाई तुरंत रुक जाती है। इस तरह बिना किसी कर्मचारी के हस्तक्षेप के नोजल को पता चल जाता है कि टंकी भर चुकी है।

    ऑटो कट-ऑफ के बाद दोबारा न दबाएं ट्रिगर

    कई वाहन चालक नोजल के पहली बार अपने आप बंद होने के बाद भी उसमें से अतिरिक्त ईंधन भरने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे ट्रिगर को दोबारा दबाते हैं, ताकि टंकी में कुछ और पेट्रोल या डीजल भरा जा सके। हालांकि, ऐसा करने से बचना चाहिए। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम का सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि ईंधन टंकी भरने के स्तर तक पहुंच चुकी है।

    जरूरत से ज्यादा ईंधन भरने की कोशिश करने पर पेट्रोल या डीजल बाहर छलक सकता है। इससे ईंधन की बर्बादी के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इसलिए नोजल पहली बार अपने आप बंद हो जाए तो ईंधन भरना रोक देना बेहतर है।

    पेट्रोल पंप के नोजल में मौजूद यह व्यवस्था ईंधन भरने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने में मदद करती है। हवा के प्रवाह, दबाव में बदलाव और वैक्यूम के सिद्धांत से काम करने वाला यह मैकेनिज्म टंकी भरने पर सप्लाई रोक देता है। यही वजह है कि पेट्रोल पंप कर्मचारी को हर वाहन की टंकी भरने पर मशीन को हाथ से बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 517 अंक चढ़ा, आईटी शेयरों में खरीदारी से मिला सहारा

    तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 517 अंक चढ़ा, आईटी शेयरों में खरीदारी से मिला सहारा

    नई दिल्ली । लगातार तीन कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे। सेंसेक्स 416.25 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,665.64 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 ने 54.55 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,742.20 पर शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 73,249.39 और निफ्टी 22,687.65 पर बंद हुआ था।

    कारोबार आगे बढ़ने के साथ सेंसेक्स की तेजी बढ़ी और उसने 517.12 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,766.51 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 करीब 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 22,787.25 के स्तर तक पहुंचा। बाजार में आई इस तेजी के बावजूद सभी श्रेणियों के शेयरों में खरीदारी का माहौल नहीं दिखा। व्यापक बाजार में दबाव बना रहा और छोटे तथा मझोले शेयरों के सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में करीब 2 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे संकेत मिला कि प्रमुख सूचकांकों में बढ़त के बावजूद व्यापक बाजार की स्थिति कमजोर बनी हुई थी। निवेशकों की खरीदारी चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रही और कई प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट में कारोबार करते दिखे।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन में आईटी शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया। निफ्टी आईटी सूचकांक में 1.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी, ऑटो, पीएसयू बैंक और मीडिया सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट रही। इस तरह बाजार की शुरुआती तेजी के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये में मामूली मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया तीन पैसे बढ़कर 94.79 पर खुला। इससे पिछले कारोबारी दिन गुरुवार को यह 94.82 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि, रुपये में सुधार सीमित रहा और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने रहे।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख कमजोर रहा। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, जबकि अमेरिकी बाजार भी अधिकांशतः नुकसान के साथ बंद हुए। अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पर बढ़ते खर्च और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताओं ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की। अमेरिकी तकनीकी शेयरों में बिकवाली के बीच नैस्डैक सूचकांक 2.6 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। एशिया में जापान का निक्केई सूचकांक शुरुआती कारोबार में लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे आ गया।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर तक पहुंचना अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय है। दूसरी ओर, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट और रुपये में मजबूती को सकारात्मक संकेत माना गया। विश्लेषकों का कहना है कि ये कारक विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

    बाजार की आगे की दिशा को लेकर विश्लेषकों ने निफ्टी के लिए 22,600 से 22,650 के स्तर को तत्काल समर्थन और 22,900 से 23,000 के स्तर को प्रतिरोध क्षेत्र बताया। निफ्टी का सापेक्ष शक्ति सूचकांक यानी आरएसआई 43.98 पर रहा, जबकि इसका औसत 38.86 था। पुट-कॉल अनुपात यानी पीसीआर घटकर 0.82 पर आ गया।

    गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,459 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,891 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला। विश्लेषकों ने यह भी अनुमान जताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में लगाए गए 3.73 लाख करोड़ रुपये में से तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि शेयर आवंटन के बाद अगले सोमवार तक व्यवस्था में लौट सकती है। उनके मुताबिक, इससे अगले सप्ताह बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है, हालांकि बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों पर भी निर्भर करेगी।

  • तुर्किये-पाकिस्तान के साथ इंडोनेशिया के रक्षा समझौते से ब्रह्मोस तकनीक पर सवाल, विशेषज्ञों ने बताई भारत की सुरक्षा रणनीति

    तुर्किये-पाकिस्तान के साथ इंडोनेशिया के रक्षा समझौते से ब्रह्मोस तकनीक पर सवाल, विशेषज्ञों ने बताई भारत की सुरक्षा रणनीति

    नई दिल्ली । तुर्किये, कतर, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए हुए बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के बाद भारत के रक्षा हितों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इस समझौते का उद्देश्य सैन्य उत्पादन, रक्षा क्षमताओं, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस साझेदारी से भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए मिसाइल सौदों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है और क्या भारत की संवेदनशील सैन्य तकनीक उसके प्रतिद्वंद्वी देशों तक पहुंचने का जोखिम पैदा हो सकता है।

    भारत ने जुलाई 2026 में इंडोनेशिया के साथ करीब 630 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5,300 करोड़ रुपये के दो रक्षा समझौते किए थे। इनमें ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की बिक्री से संबंधित समझौते शामिल हैं। ऐसे में चार देशों के नए रक्षा सहयोग को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि इंडोनेशिया के दूसरे देशों के साथ बढ़ते सैन्य संबंधों का इन सौदों पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में विशेषज्ञों ने केवल बद्र MoU के आधार पर भारतीय मिसाइल तकनीक को खतरा मानने की आशंका को उचित नहीं बताया है।

    डीआरडीओ के चेयरमैन एमेरिटस और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व महानिदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार मिश्रा के अनुसार, इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों में तकनीकी जानकारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया को हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित उपयोगकर्ता पुस्तिका दी जाएगी, न कि तकनीक हस्तांतरण से जुड़ी पुस्तिका। उनके मुताबिक, समझौतों में डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार और रक्षा संप्रभुता से जुड़े सख्त प्रावधान भी शामिल हैं, जिनका पालन इंडोनेशिया को करना होगा।

    मिश्रा की राय में, इन सुरक्षा उपायों के रहते ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की संवेदनशील तकनीक भारत के प्रतिद्वंद्वियों तक पहुंचने की आशंका नहीं है। हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी जानकारी साझा करना और उनके निर्माण या तकनीकी विकास से जुड़ी विस्तृत जानकारी हस्तांतरित करना अलग-अलग बातें हैं। यही अंतर भारत के रक्षा निर्यात समझौतों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत ने भी भारत-इंडोनेशिया रक्षा सौदों के प्रभावित होने की अटकलों को खारिज किया। वह सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज में वरिष्ठ फेलो हैं। उनके अनुसार, किसी समझौता ज्ञापन को सैन्य गठबंधन के बराबर नहीं माना जा सकता। केवल एक MoU पर हस्ताक्षर होने से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पहले से तय रक्षा निर्यात सौदे खतरे में पड़ गए हैं।

    अहलावत ने बद्र समझौते की भाषा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास में सहयोग और कार्य विभाजन की व्यवस्था के रूप में देखा। उनके मुताबिक, यह साझा इस्लामी पहचान वाले देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने की कोशिश भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को इस घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन इसे लेकर अनावश्यक चिंता नहीं करनी चाहिए। किसी देश को हथियार बेचने का अर्थ यह नहीं है कि उसे उनके निर्माण और विकास की पूरी तकनीक भी सौंप दी जाए।

    भारत के लिए आगे सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बद्र MoU के तहत चारों देशों के बीच रक्षा अनुसंधान, सैन्य उत्पादन और तकनीकी सहयोग किस स्तर तक बढ़ता है। साथ ही, भारत-इंडोनेशिया समझौतों में तय सुरक्षा प्रावधान किस तरह लागू होते हैं, यह भी अहम रहेगा। फिलहाल विशेषज्ञों की राय है कि नए रक्षा सहयोग पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन केवल इस समझौते के आधार पर ब्रह्मोस और अस्त्र की तकनीक की सुरक्षा को लेकर खतरे का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

  • भारत और एस्टोनिया के बीच डिजिटल सेवाओं और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं, व्यापार समझौते पर भी नजरें

    भारत और एस्टोनिया के बीच डिजिटल सेवाओं और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं, व्यापार समझौते पर भी नजरें

    नई दिल्ली । भारत और एस्टोनिया के बीच डिजिटल सेवाओं, तकनीक और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। भारत में एस्टोनिया की राजदूत क्रिस्टी कारेलसोहन ने 21 अक्टूबर 2026 को कहा कि दोनों देशों के बीच खासकर सेवा क्षेत्र में व्यावसायिक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता इस साल के अंत तक लागू हो सकता है। उनके अनुसार, इस समझौते से कारोबार में आने वाली कई बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

    कारेलसोहन ने कहा कि एस्टोनिया की कंपनियां भारतीय कंपनियों की तुलना में आकार में अपेक्षाकृत छोटी हैं। देश में बड़े पैमाने पर विनिर्माण भी सीमित है। ऐसे में भारत जैसे विशाल बाजार में बड़े स्तर पर वस्तुओं का व्यापार और निर्यात करना एस्टोनियाई कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एस्टोनिया का घरेलू बाजार भी छोटा है, इसलिए वहां की कंपनियों के लिए भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    राजदूत के मुताबिक, एस्टोनिया की कंपनियों की प्रमुख ताकत सेवाओं के क्षेत्र में है। डिजिटल सेवाओं, तकनीकी समाधान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी की अच्छी संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप सेवाएं और समाधान उपलब्ध कराकर व्यावसायिक संबंधों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि एस्टोनिया की कंपनियां इन क्षेत्रों में आगे विकास और सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं।

    वस्तुओं के व्यापार के संबंध में उन्होंने बताया कि एस्टोनिया की कुछ कंपनियां भारत में लकड़ी से बने उत्पाद, खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति करती हैं। देश में कुछ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, लेकिन उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी स्तर पर नहीं होतीं। इसके बावजूद गुणवत्ता को प्राथमिकता देने वाले ग्राहकों के बीच ऐसे उत्पादों की मांग हो सकती है। इस वजह से भारत में एस्टोनिया के उत्पादों के लिए सीमित लेकिन संभावित बाजार मौजूद है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। एस्टोनिया यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में शामिल है। कारेलसोहन ने उम्मीद जताई कि समझौता वर्ष 2026 के अंत तक लागू हो सकता है। उनके अनुसार, इससे मौजूदा सीमा शुल्क में कमी लाने के साथ-साथ गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने में भी मदद मिल सकती है। ऐसी बाधाएं विशेष रूप से छोटी कंपनियों के लिए दूसरे देशों के बाजारों में कारोबार करना कठिन बनाती हैं।

    राजदूत ने कहा कि भारत एस्टोनिया के लिए व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण बाजार है। कई देशों की तरह एस्टोनिया की भी प्राथमिकता भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना है। वह दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्कों को और विकसित करना चाहती हैं। भारत का बड़ा बाजार एस्टोनियाई कंपनियों के लिए अपनी सेवाओं और उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

    कुल मिलाकर, भारत और एस्टोनिया के बीच सहयोग की संभावनाएं केवल पारंपरिक वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल सेवाएं, तकनीक और साइबर सुरक्षा ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें दोनों देशों के व्यावसायिक संबंध आगे बढ़ सकते हैं। प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से भी कारोबार की परिस्थितियों में बदलाव आने की उम्मीद है। हालांकि, समझौते के लागू होने और उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे होने वाले निर्णयों तथा व्यापारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

  • इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    मध्य प्रदेश: में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

    समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग की विभिन्न तकनीकों, विनिर्माण की संभावनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा होगी। चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

    समिट के दौरान 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी। प्रदर्शनी में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, तकनीकी उपकरण, विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कंपनियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में आठ पैनल चर्चाएं, पांच राउंडटेबल बैठकें और दो मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से उद्योग की जरूरतों, तकनीकी विकास और निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    पहले दिन की चर्चाओं में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा फैबलेस इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी अधोसंरचना, बौद्धिक संपदा और इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    दूसरे दिन का कार्यक्रम चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े विषयों पर बैठकें होंगी। इन चर्चाओं में तकनीकी नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रम के समापन समारोह में मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। इससे इस क्षेत्र में नए उद्यमों को सामने लाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

    सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत पात्र निवेश परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी और 10 साल तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन प्रोत्साहनों के जरिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

    इसी क्षेत्र में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं। समिट में निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा के साथ उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। तकनीकी अधोसंरचना, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का विकास इस क्षेत्र के विस्तार से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।

  • पीयूष गोयल का दावा, भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा

    पीयूष गोयल का दावा, भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा


    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति को गति देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनके मुताबिक, देश की युवा आबादी, विशाल उपभोक्ता बाजार और उद्यमशीलता की क्षमता भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को मजबूती देती है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एसआरसीसी शताब्दी सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया के कई देश भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ओर बढ़ती दिलचस्पी का प्रमुख कारण यहां की युवा और महत्वाकांक्षी आबादी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय भारत की क्षमता को पहचान रहा है और आने वाले समय में देश अंतरराष्ट्रीय विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आकांक्षाओं से भरा युवा भारत वैश्विक विकास का नेतृत्व करने की स्थिति में है। उन्होंने प्रौद्योगिकी और वैश्विक व्यापार में देश की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, भारत आने वाले वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में प्रगति को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकता है। उन्होंने देश की विकास क्षमता को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़कर प्रस्तुत किया।

    भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए गोयल ने जनसांख्यिकीय क्षमता, युवा आबादी और बड़े उपभोक्ता बाजार को देश की प्रमुख ताकत बताया। उन्होंने कहा कि इन विशेषताओं के साथ उद्यमशील ऊर्जा भी भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में योगदान देगी। उनके अनुसार, इन क्षमताओं के कारण भारत आने वाले दो से ढाई दशकों तक तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

    गोयल ने कहा कि भारत की आबादी और बाजार का आकार देश को भविष्य के वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की आर्थिक प्रगति केवल वर्तमान उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों में भी इसके व्यापक प्रभाव की संभावना है। हालांकि, उनके संबोधन में इस अनुमान के समर्थन में कोई विशिष्ट आर्थिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया।

    केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के नागरिकों को सामूहिक रूप से योगदान देना होगा। उनके मुताबिक, राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी स्वीकार करना आवश्यक है और लोगों को चुनौतियों से बचने की मानसिकता छोड़कर अपने दायित्वों को निभाने पर ध्यान देना चाहिए।

    गोयल ने कहा कि समाज के एक बड़े वर्ग में समस्याओं से बचने की प्रवृत्ति दिखाई देती है और लोग कई बार यह स्वीकार नहीं करते कि भविष्य को दिशा देने की जिम्मेदारी उनके अपने हाथों में है। उन्होंने इस सोच में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य सभी के प्रयासों से ही पूरा हो सकता है।

    अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने की महत्वाकांक्षा को आधुनिक भारत की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यही महत्वाकांक्षा देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के पीछे प्रमुख कारणों में से एक है। उनके वक्तव्य का मुख्य संदेश यह रहा कि भारत की युवा शक्ति, आर्थिक क्षमता और सामूहिक जिम्मेदारी आने वाले दशकों में देश की विकास यात्रा को दिशा देने में अहम होंगी।

  • राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारत को अपनी रक्षा विनिर्माण क्षमता मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ते हुए कहा कि देश में जिस चीज का निर्माण संभव है, उसे घरेलू स्तर पर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।

    राजधानी में आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सोच स्पष्ट है कि जो वस्तु देश में बनाई जा सकती है, उसके लिए आयात पर निर्भरता कम की जाए। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर जहाजों तक और छोटे स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक घरेलू उत्पादन की क्षमता विकसित करना भारत को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बनाएगा।

    रक्षा मंत्री ने स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और देश की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के अहम हिस्सों का निर्माण देश में करने और उन पर नियंत्रण रखने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी तथा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी।

    सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लंबी अवधि की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करना और पूरे विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को गति देने के लिए कई संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं।

    रक्षा मंत्री ने युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह दूरसंचार तकनीक 2जी से 5जी तक पहुंची, उसी तरह युद्ध भी तकनीक के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आधुनिक संघर्षों में तकनीकी क्षमता सैन्य अभियानों और उनके परिणामों को तेजी से प्रभावित कर रही है।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा अब आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन रही हैं। भारत इन क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा नवाचार के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।

    सिंह के अनुसार, भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों से निपटने की क्षमता बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के समय निर्भरता कम रहे।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों में फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करने वाले देशों के पास बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम साधन होंगे।

    रक्षा मंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और स्वायत्त प्रणालियों जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक युवा केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि देश की भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए तकनीक विकसित करने में भी योगदान दे रहे हैं।