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  • हरतालिका तीज पर बाजार की मूर्ति नहीं मिट्टी से बनाएं शिवलिंग इसके पीछे छिपी है माता पार्वती की कठोर तपस्या की कहानी

    हरतालिका तीज पर बाजार की मूर्ति नहीं मिट्टी से बनाएं शिवलिंग इसके पीछे छिपी है माता पार्वती की कठोर तपस्या की कहानी

    नई दिल्ली । हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं। इस साल हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस व्रत की पूजा में एक खास परंपरा देखने को मिलती है जिसमें महिलाएं मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करती हैं। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या कारण है और मिट्टी से बने शिवलिंग का क्या महत्व है आइए जानते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने की परंपरा का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से माना जाता है। हरतालिका तीज की कथा में बताया जाता है कि माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसी दौरान उनके विवाह की चर्चा भगवान विष्णु से होने लगी। माता पार्वती भगवान शिव को ही पति के रूप में चाहती थीं इसलिए वह अपनी सखियों के साथ वन में चली गईं और वहां उन्होंने महादेव को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या शुरू की।

    मान्यता है कि तपस्या के दौरान माता पार्वती ने मिट्टी या रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना जारी रखी। माता पार्वती की भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी कथा की स्मृति में हरतालिका तीज के दिन मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने और उसकी पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

    इस परंपरा का एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जाता है। मिट्टी को पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग को अपने हाथों से बनाकर पूजा करना इस बात का संकेत माना जाता है कि भगवान की आराधना के लिए किसी महंगी वस्तु की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची श्रद्धा संकल्प और भक्ति ही पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। व्रती महिलाएं जब अपने हाथों से शिवलिंग तैयार करती हैं तो वह माता पार्वती की साधना और उनके अटूट संकल्प को भी याद करती हैं।

    हरतालिका तीज की पूजा में मिट्टी से शिवलिंग के साथ शिव पार्वती और गणेश की आकृति बनाने की परंपरा भी कई स्थानों पर है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल चंदन अक्षत फूल और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। अगर शिवलिंग बालू से बना हो तो बहुत अधिक जल चढ़ाने से उसे नुकसान हो सकता है इसलिए प्रतीकात्मक रूप से जल अर्पित करना उचित माना जाता है।

    माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर चूड़ी मेहंदी और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है और भगवान शिव के मंत्र का जाप करते हुए आरती की जाती है।

    व्रत के समापन के बाद मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। आज के समय में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए घर पर ही साफ पात्र में विसर्जन कर मिट्टी को पौधे या गमले की मिट्टी में मिलाना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। इस तरह हरतालिका तीज की यह परंपरा माता पार्वती की भक्ति तपस्या और अटूट संकल्प की याद दिलाने के साथ प्रकृति से जुड़ाव का संदेश भी देती है।

  • हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। सावन में चारों ओर दिखाई देने वाली हरियाली के कारण इस पर्व को हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं हरी चूड़ियां धारण करती हैं मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके झूला झूलने के साथ तीज के लोकगीत गाती हैं।

    इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर 14 और 15 अगस्त के बीच कंफ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त से शुरू हो रही है लेकिन उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 शनिवार को रखा जाएगा। दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग भी 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का पर्व बता रहा है। हालांकि अलग अलग शहरों के पंचांग में तिथि शुरू होने और समाप्त होने के समय में अंतर हो सकता है।

    पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त को सुबह 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।因此 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण इसी दिन व्रत और पर्व मनाया जाएगा। अपने शहर के अनुसार पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

    हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। कुछ परंपराओं में बालू या मिट्टी से शिव पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है जबकि भगवान शिव को बेलपत्र फल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है। इसके बाद धूप दीप जलाकर आरती की जाती है और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से विवाहित महिलाएं इस दिन शिव और पार्वती की पूजा करके अपने दांपत्य जीवन में प्रेम सुख और स्थिरता की कामना करती हैं।

    इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत की कठोरता से बचना और अपनी सेहत को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है। पूजा के साथ महिलाएं सास या घर की वरिष्ठ महिलाओं को सुहाग सामग्री और उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी ले सकती हैं।

    हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना इस पर्व की पारंपरिक पहचान है। इसके अलावा पौधरोपण को भी इस दिन शुभ माना जाता है। सावन और हरियाली से जुड़े इस पर्व पर एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा सकता है।

    इस तरह 14 अगस्त से तृतीया तिथि शुरू होने के बावजूद हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इसलिए 14 या 15 अगस्त को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। व्रत रखने वाली महिलाएं 15 अगस्त को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा कर सकती हैं।