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  • अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, ईरान में छह दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू

    अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, ईरान में छह दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू

    नई दिल्ली । ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इस अवसर पर ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सरकारी नेतृत्व की मौजूदगी रही, जबकि कई वरिष्ठ नेता भावुक दिखाई दिए। समारोह से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा की जा रही हैं।

    तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची तथा सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अंतिम प्रार्थना के दौरान गालिबाफ की आंखों में आंसू दिखाई दिए, जबकि अराघची भी श्रद्धांजलि अर्पित करते समय भावुक नजर आए। दोनों नेताओं की भावनात्मक प्रतिक्रिया समारोह का प्रमुख केंद्र बन गई।

    श्रद्धांजलि सभा के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से ढका हुआ रखा गया। बड़ी संख्या में नागरिकों ने अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच लोगों ने उनके सम्मान में प्रार्थनाएं कीं और देशभर से आए समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    ईरानी नेतृत्व ने नागरिकों से बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि छह दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए राजधानी तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। तेहरान में मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अंतिम यात्रा राजधानी की प्रमुख सड़कों से निकलेगी। इसके बाद पवित्र शहर कोम में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां बड़ी संख्या में धार्मिक विद्वानों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। अंतिम चरण में उनका पार्थिव शरीर मशहद ले जाया जाएगा, जिसे उनका पैतृक शहर माना जाता है।

    मशहद में धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही पड़ोसी देश इराक के नजफ और कर्बला जैसे प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में भी विशेष प्रार्थना सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। विभिन्न देशों के शिया समुदायों द्वारा भी अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    गौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हालिया क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष के दौरान हुए हमलों में हुआ था। उनके निधन के बाद मध्य पूर्व की राजनीतिक और सामरिक परिस्थितियों पर व्यापक असर देखा गया। अब अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के बीच दुनिया की नजर ईरान के अगले राजनीतिक कदमों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। फिलहाल देश में शोक का माहौल है और लाखों लोग अपने लंबे समय तक सर्वोच्च नेतृत्व संभालने वाले नेता को अंतिम विदाई देने के लिए श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।

  • लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके ताबूत पर रखा गया विशेष लाल झंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान यह झंडा सबसे प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं, बल्कि शिया परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान राजनीतिक संदेश का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

    खामेनेई के ताबूत पर रखा गया यह लाल झंडा उनके पैतृक शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह से जुड़ा हुआ माना जाता है। शिया परंपरा में इस प्रकार के लाल ध्वज का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, शहादत की स्मृति और न्याय की मांग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी कारण अंतिम विदाई समारोह में इस झंडे की मौजूदगी ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस प्रतीक के माध्यम से खामेनेई की मृत्यु को शिया इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कर्बला की शहादत के संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। सातवीं शताब्दी में कर्बला के युद्ध के दौरान पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत शिया समुदाय की आस्था का केंद्रीय आधार मानी जाती है। उनके बलिदान को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, नैतिक साहस और सत्य के पक्ष में अडिग रहने का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।

    शिया धार्मिक परंपराओं में लाल झंडा अक्सर अधूरे न्याय, शहादत और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है, जबकि काला झंडा शोक और मातम का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार स्थल पर लाल और काले दोनों रंगों के झंडे तथा बैनरों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रतीकों के माध्यम से श्रद्धांजलि के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।

    तेहरान में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। परिसर को धार्मिक प्रतीकों, शोक संदेशों और खामेनेई के चित्रों से सजाया गया। पूरे आयोजन में शिया धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से पालन किया गया, जिससे समारोह को धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्वरूप मिला।

    जानकारों का मानना है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि शिया समुदाय के बीच वैचारिक एकजुटता और ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करने का प्रयास है। इसी क्रम में अंतिम यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि शिया समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाले हैं। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह पूरा आयोजन केवल एक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिया धार्मिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और ईरान की वैचारिक निरंतरता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें


    नई दिल्ली । भारत ने ईरान में मौजूद सुरक्षा हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ कहा है कि परिस्थितियों में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। ऐसे में भारतीय नागरिक अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर जरूरी यात्राओं से बचें और केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही वहां जाने का निर्णय लें।

    दूतावास ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के लिए ईरान की यात्रा बेहद जरूरी है वे पूरी सतर्कता बरतें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। भारतीय मिशन लगातार वहां की बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नई एडवाइजरी जारी की जाएगी।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे बिना आवश्यकता के यात्रा करने से बचें और किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। केवल विश्वसनीय समाचार स्रोतों और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही निर्णय लें।

    दूतावास ने कहा कि सुरक्षा हालात में सुधार के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौजूदा एडवाइजरी को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

    भारतीय नागरिकों से यह भी कहा गया है कि यदि वे ईरान में रह रहे हैं तो अपने संपर्क विवरण भारतीय दूतावास के पास अवश्य दर्ज कराएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे तुरंत संपर्क किया जा सके। दूतावास ने आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।

    यह एडवाइजरी ऐसे समय जारी की गई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। हालांकि क्षेत्र में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी समय स्थिति बदल सकती है। इसी वजह से भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

    भारतीय दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि वह ईरान में रह रहे प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे धैर्य बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में दूतावास द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।

    आपातकालीन संपर्क नंबर

    +989128109115

    +989128109109

    +989128109102

    +989932179359

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ी वैश्विक नजरें, ट्रंप ने आज हस्ताक्षर का जताया भरोसा, तेहरान ने कहा- अंतिम सहमति में लग सकते हैं कुछ और दिन

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ी वैश्विक नजरें, ट्रंप ने आज हस्ताक्षर का जताया भरोसा, तेहरान ने कहा- अंतिम सहमति में लग सकते हैं कुछ और दिन

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौता अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। हालांकि समझौते को लेकर दोनों पक्षों के सार्वजनिक बयानों में समयसीमा को लेकर अंतर देखने को मिला है। अमेरिका ने जहां रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई है, वहीं ईरान ने संकेत दिया है कि दस्तावेज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अभी कुछ और समय लग सकता है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वार्ता का स्वरूप पूर्व की सरकारों के दौरान हुई बातचीत से अलग है और दोनों देशों के बीच इस बार अधिक व्यावहारिक तथा संतुलित समझ विकसित हुई है।

    दूसरी ओर, ईरान ने समझौते की दिशा में हुई प्रगति को स्वीकार किया है, लेकिन तत्काल हस्ताक्षर की संभावना को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन समझौता रविवार को ही अंतिम रूप ले लेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार आने वाले दिनों में समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी समझौते के स्वरूप और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित दस्तावेज लगभग डेढ़ से दो पृष्ठों का है, जिसमें 14 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। इस दस्तावेज पर पिछले दो महीनों से अधिक समय से दोनों देशों के बीच गहन वार्ताएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के प्रत्येक प्रावधान की समीक्षा ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सैन्य नेतृत्व द्वारा की गई है।

    प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर चल रहे संघर्षों के औपचारिक अंत की रूपरेखा तय की गई है। साथ ही दोनों पक्षों द्वारा भविष्य में किसी नए सैन्य टकराव की शुरुआत नहीं करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। इसके अतिरिक्त ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने तथा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने के लिए एक ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है।

    समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर भी विशेष व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके तहत 60 दिनों की एक संक्रमणकालीन अवधि निर्धारित की जा सकती है, जिसके दौरान समुद्री यातायात और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को स्थिर किया जाएगा। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरे चरण में अगले 60 दिनों तक व्यापक वार्ताओं का दौर जारी रखने की योजना बनाई गई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर स्थायी समाधान तलाशना होगा। साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रश्नों पर भी चर्चा की जाएगी।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों पक्ष अंतिम सहमति तक कब पहुंचते हैं और औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया कब पूरी होती है।

  • ट्रंप की धमकी के बीच ईरान की बड़ी तैयारी, आम नागरिकों को दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग

    ट्रंप की धमकी के बीच ईरान की बड़ी तैयारी, आम नागरिकों को दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग



    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान की सैन्य तैयारियों को लेकर बड़े दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) द्वारा देशभर में आम नागरिकों को हथियार चलाने और सैन्य प्रशिक्षण दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

    तेहरान सहित कई शहरों में कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां महिलाओं, पुरुषों और युवाओं को हथियारों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि छोटी उम्र के बच्चों को भी प्रतीकात्मक रूप से हथियार चलाने का अभ्यास कराया गया।

    इसके साथ ही ईरानी सरकारी मीडिया से जुड़े कुछ वायरल वीडियो में एंकरों को हथियारों के साथ अभ्यास करते हुए दिखाया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम उस व्यापक भू-राजनीतिक तनाव का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान अभी भी अनिश्चित स्थिति में है।

    हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के संकेतों ने वैश्विक स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला…. ट्रंप का दावा- पूरी तरह हुई तबाह ईरानी सेना

    तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला…. ट्रंप का दावा- पूरी तरह हुई तबाह ईरानी सेना


    तेहरान।
    अमेरिकी (American) और इजरायली (Israeli) ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को ईरान की राजधानी तेहरान (Tehran) पर अब तक का सबसे भीषण हमला करते हुए 20 से अधिक भारी धमाके किए. शहर के पश्चिमी हिस्सों में हुए इन हमलों के दौरान करीब आधे घंटे तक बमवर्षक विमानों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे कई इलाकों की बिजली गुल हो गई. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि ईरानी सेना पूरी तरह तबाह हो चुकी है और वॉर का अंत करीब है, जबकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने युद्ध का अंत खुद तय करने की हुंकार भरी है।

    दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीबीएस न्यूज से बात करते हुए सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना उनके द्वारा तय किए गए 4-5 हफ्तों के समय से काफी आगे चल रही है।


    ‘मिटा देंगे ईरान का नामोनिशान’

    ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब न तो नौसेना बची है और न ही एयरफोर्स, उनके मिसाइल भंडार और ड्रोन बनाने की फैक्ट्रियां भी तबाह कर दी गई हैं. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अब कोई ‘चालाकी’ की तो उस देश का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा और दुनिया फिर कभी ईरान का नाम नहीं सुनेगी।

    ट्रंप ने आगे कहा कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण लेने के बारे में सोच रहे हैं और चेतावनी दी कि अगर ईरान तेल शिपमेंट रोकने की कोशिश करता है तो ये ईरान के लिए अंत होगा।


    हम तय करेंगे युद्ध का अंत

    ट्रंप के इसी बयान पर पलटवार करते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जोरदार हमला किया है. आईआरजीसी के प्रवक्ता ने कहा, ‘युद्ध का अंत हम ही तय करेंगे, अगर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे तो तेहरान इस क्षेत्र से ‘एक लीटर तेल’ का निर्यात भी नहीं होने देगा। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों को बेतुका बताते हुए चेतावनी दी कि इस इलाके में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए नहीं होगी।


    ईरान में 20 बड़े धमाके

    वहीं, इसी बयानबाजी के बीच अमेरिकी और इजरायली सेना ने बड़े हमले किए. बताया जा रहा है कि इजरायली सेना ने तेहरान के आसपास के इलाके में एयर स्ट्राइक कर 20 से ज्यादा इलाकों में बम बरसाए. ये हमले युद्ध की शुरुआत के बाद तेहरान पर अब तक के सबसे भीषण हमला है। एक रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि पश्चिमी इलाकों में विस्फोट हुए हैं, जहां लगभग आधे घंटे तक बमवर्षक विमानों और लड़ाकू विमानों की आवाजें लगातार सुनाई दीं. कुछ इलाकों में बिजली गुल हो गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए।

  • नेतन्याहू ने IDF को तेहरान पर हमले और तेज करने का आदेश दिया

    नेतन्याहू ने IDF को तेहरान पर हमले और तेज करने का आदेश दिया


    तेल अवीव। इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा संकेत देते हुए सेना को ईरान के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह घोषणा उन्होंने रक्षा मुख्यालय ‘किर्या’ में उच्चस्तरीय बैठक के बाद की।
    बैठक में रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज, सेना प्रमुख इयाल जमीर और खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्नेया शामिल थे। इसके बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ईरान के खिलाफ अपने ऑपरेशन को और व्यापक रूप देगी।
    तेहरान पर लगातार हमलों का दावा

    इजरायल ने कहा कि उसकी सेना Israel Defense Forces पहले से ही तेहरान को निशाना बनाकर कार्रवाई कर रही है और आने वाले दिनों में यह और तेज होगी। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक इजरायल अपने सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता।

    खामेनेई की मौत के बाद भड़का तनाव

    यह बयान उस घटनाक्रम के बाद आया जिसमें संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान ने हमलों को “अवैध कार्रवाई” बताते हुए जवाबी मिसाइल हमले शुरू किए।

    इजरायल में नागरिक हताहत
    नेतन्याहू ने बताया कि ईरानी हमलों में इजरायल के कई नागरिकों की मौत हुई। तेल अवीव में एक महिला की जान गई, जबकि बेत शेमेश में नौ लोगों के मारे जाने की सूचना है।

    उन्होंने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    ‘पूरी ताकत से जारी रहेगा अभियान’

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में इजरायल की पूरी सैन्य क्षमता लगाई गई है और इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिल रहा है, जिसमें अमेरिका का सहयोग शामिल बताया गया है। उनके अनुसार यह अभियान लंबे समय से घोषित सुरक्षा नीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य देश को भविष्य के खतरों से सुरक्षित करना है।

  • ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार

    ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के अगले दिन ही देश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। 67 वर्षीय अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी।

    खामनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है। वहीं, ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की चेतावनी दी और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई।

    अमेरिका-इजराइल ने किया आक्रमण

    इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त हमले में ईरान पर 24 घंटे में 1,200 से अधिक बम गिराए। इस हमले में सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हुई। उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला हुआ। हमले में उनके परिवार के सदस्य और 40 कमांडर्स भी मारे गए। इजराइल के पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने खामनेई की मौत की पुष्टि की।

    इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए और 740 से ज्यादा घायल हुए। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई।

    ईरान का जवाबी हमला

    ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इसमें इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दुबई में पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला हुआ।

    पृष्ठभूमि और विवाद

    ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच विवाद के मुख्य कारण हैं: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर शक, बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास, क्षेत्रीय अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में राजनीतिक दखल। अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कठोर बयान देने जैसे कदम उठाए।

    अयातुल्ला अली खामनेई का जीवन

    खामनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ। उन्होंने 1963 में शाह के खिलाफ भाषण दिया और गिरफ्तार हुए। 1979 की इस्लामी क्रांति में वे प्रमुख आंदोलनकारी बने। 1981 में उन पर बम हमले हुए, उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक कट्टर शासन का आरोप लगाते हैं।

  • तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

    तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026 को अचानक तनावपूर्ण हो गया है जब Israel ने Iran पर एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बताया कि यह हमला पहले से किया गया हमला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था जिसका उद्देश्य देश पर संभावित खतरे को दूर करना है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक नाजुक हो गई है। इजरायल ने देश भर में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि संभावित मिसाइलों या जवाबी हमलों का खतरा बना हुआ है।

    तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
    ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में आज सुबह कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और धुएं का गुबार भी उठता देखा गया। ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी के रिपब्लिक और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट जैसे इलाकों में मिसाइलें गिरीं जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया है लेकिन फिलहाल किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से धुएं के काले बादल उठते हुए देखे गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की गई है। इस हमले की पृष्ठभूमि और विस्तृत रणनीतिक वजहों पर अभी तक पूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

    क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

    विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला उन वर्षों से चल रहे तनावों का नवीनतम चरण है जिसमें इजरायल और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल विकास और सैन्य विवाद शामिल रहे हैं। इजरायल लगातार चेतावनी देता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताएं उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष और मिसाइल दागे जाने जैसे कई घटनाक्रम भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज का हमला इसी तनाव की परिणति भी माना जा रहा है।

    आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान
    इजरायल में आपातकाल के लागू होने के बाद वहां के नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों से निपटने के लिए चेतावनी जारी की गई है। सेना ने एयर राइड सायरन बजाने के साथ सुरक्षा आश्रयों के पास रहने की सलाह दी है और लोगों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को कहा गया है। वहीं ईरान ने भी अपनी एयर स्पेस बंद कर दी है और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव दिख सकता है।

  • ईरान की राजधानी तेहरान के एक बाजार में लगी भीषण आग… मची अफरा-तफरी

    ईरान की राजधानी तेहरान के एक बाजार में लगी भीषण आग… मची अफरा-तफरी


    तेहरान।
    ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान (Tehran) से एक बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार को तेहरान के पश्चिमी इलाके, जन्नत आबाद (Jannat Abaad) में स्थित एक बाजार में अचानक भीषण आग (Market Massive Fire) लग गई। आग के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है, लेकिन जैसे ही आग की सूचना मिली, बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिए गए। दमकल की कई टीमों को मौके पर भेजा गया है और आग बुझाने के प्रयास जारी हैं।


    आग की लपटें और काले धुएं ने मचाई दहशत

    तेहरान की आपातकालीन सेवाओं के अधिकारी मोहम्मद बेहनिया ने बताया कि अब तक इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, आग इतनी भयंकर थी कि उसकी लपटें और काले धुएं के घने बादल शहर के कई हिस्सों से स्पष्ट रूप से देखे जा रहे थे। यह आग जन्नत आबाद इलाके के एक शॉपिंग सेंटर में लगी, जो सैकड़ों दुकानों और छोटे-छोटे स्टॉल से भरा हुआ था।


    सुबह के समय लगी आग, विक्रेताओं और ग्राहकों में अफरातफरी

    आग सुबह करीब 10 बजे जन्नत आबाद शोमाली इलाके के एक बड़े बाजार में लगी। इस दौरान बाजार में विक्रेता और ग्राहक दोनों मौजूद थे। जैसे ही आग फैलने लगी, वहां मौजूद लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। दमकल विभाग को तुरंत सूचित किया गया और वे घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।


    दमकलकर्मियों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी

    घटना के बाद, दमकलकर्मियों ने बताया कि आग बहुत तेज़ी से फैल रही थी और मौके पर पहुँचने के बाद वे तुरंत कई दिशाओं से आग को काबू करने का प्रयास करने लगे। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दमकल टीमें घटनास्थल पर पहुंची और कई मोर्चों से अग्निशमन कार्य शुरू किया।


    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

    इस बीच, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में बाजार से उठता हुआ घना काला धुंआ और लपटों की ऊंची लहरें साफ देखी जा सकती हैं। आसपास के आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अफरातफरी का माहौल है। तेहरान के नागरिकों को यह दृश्य बेहद डरावना प्रतीत हो रहा है।


    राहत कार्य जारी, स्थिति नियंत्रण में

    हालांकि अब तक किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, राहत कार्य जारी है और दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अभी तक इस घटना में घायलों या संभावित मौतों की संख्या के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है और अतिरिक्त जानकारी बाद में जारी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि आग को आसपास की इमारतों और आवासीय क्षेत्रों में फैलने से रोकने पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।