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  • ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    नई दिल्ली ।भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने किसका साथ दिया था, इसे लेकर अब नया दावा सामने आया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत के साथ मई 2025 में हुए टकराव के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समर्थन किस रूप में दिया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

    भारत ने इस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के तौर पर पेश किया था। अभियान के शुरुआती चरण में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बाद में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला चला।

    इसी घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का नया बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान और ईरान के संबंधों पर दिए गए लिखित जवाब में कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में पिछले दो वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ईरान के समर्थन का उल्लेख किया।

    पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, ईरान ने उस समय पाकिस्तान को मजबूत राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दिया था। हालांकि, डार के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस समर्थन में सैन्य सहायता, खुफिया सहयोग, हथियार या किसी अन्य प्रकार की प्रत्यक्ष मदद शामिल थी या नहीं। इसलिए केवल इस बयान के आधार पर ईरान की सैन्य भूमिका को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    ईरान की भूमिका को समझने के लिए उस समय उसके सार्वजनिक रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ईरान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने पर जोर दिया था। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की कोशिशों का उल्लेख भी सामने आया था।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मई 2025 में ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ईरान के प्रयासों का आभार जताया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी उस दौरान क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क और कूटनीतिक प्रयास किए थे।

    यही वजह है कि पाकिस्तान का ताजा दावा और उस समय ईरान की सार्वजनिक कूटनीतिक भूमिका अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। पाकिस्तान इसे अपने पक्ष में मिले मजबूत समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साफ नहीं होता कि यह समर्थन सैन्य स्तर पर था या मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने भी स्पष्ट किया था कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। भारत का कहना रहा कि कार्रवाई पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ की गई और सैन्य कार्रवाई को लक्षित तथा नियंत्रित रखा गया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 का संघर्ष बाद में युद्धविराम के साथ थमा। इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए थे। अब ईरान की भूमिका को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बयान सामने आने के बाद उस समय के क्षेत्रीय समीकरणों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान ने ईरान के समर्थन का दावा जरूर किया है, लेकिन समर्थन की प्रकृति और सीमा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को किसी प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में सहायता दी थी।

  • भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील..

    भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील..

    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर गंभीर बना दिया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और अस्थिर हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए अहम यात्रा सलाह जारी करते हुए उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से ईरान की यात्रा करने से बचें और जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, अपनी यात्रा स्थगित रखें।

    भारतीय दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल के दिनों में ईरान के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ा है। इसी कारण उन भारतीय नागरिकों को विशेष सलाह दी गई है जो किसी भी उद्देश्य से ईरान जाने की योजना बना रहे हैं। दूतावास का कहना है कि मौजूदा हालात में यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। सुरक्षा स्थिति में सुधार होने के बाद ही यात्रा संबंधी निर्णय लेने पर विचार किया जाना चाहिए।

    एडवाइजरी में उन भारतीय नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं जो पहले से ईरान में मौजूद हैं। दूतावास ने उन्हें उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग करते हुए अस्थायी रूप से ईरान छोड़ने पर विचार करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यात्रा संबंधी निर्णय लेते समय उपलब्ध विकल्पों और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।

    जो भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान में ही रहने का निर्णय लेते हैं, उन्हें अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दूतावास ने कहा है कि सभी नागरिक स्थानीय घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि वाले क्षेत्रों से दूर रहें। विशेष रूप से ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों और प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराने की अपील भी की है। जिन लोगों ने अब तक दूतावास के पास अपना विवरण दर्ज नहीं कराया है, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही नागरिकों से दूतावास की आधिकारिक सूचनाओं पर नियमित नजर बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

    क्षेत्र में जारी तनाव के कारण सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत सरकार भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हालात की लगातार समीक्षा कर रही है। यदि क्षेत्रीय परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसके अनुरूप नई सलाह और आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार का जोर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी बनाए रखने पर है। ऐसी स्थिति में नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और जारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

  • तेहरान में ट्रंप परिवार को लेकर विवादित होर्डिंग, ताबूतों में दिखाया, लिखा- 'खून का बदला खून'

    तेहरान में ट्रंप परिवार को लेकर विवादित होर्डिंग, ताबूतों में दिखाया, लिखा- 'खून का बदला खून'


    नई दिल्‍ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान में एक ऐसा सरकारी समर्थित होर्डिंग लगाया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है. राजधानी तेहरान के फिलिस्तीन स्क्वायर में लगाए गए इस विशाल होर्डिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उनके बच्चों को अमेरिकी झंडे से ढके ताबूतों के ऊपर दिखाया गया है. इसके साथ बड़े अक्षरों में लिखा है- ‘खून का बदला खून’

    रिपोर्ट के मुताबिक यह होर्डिंग अमेरिका और इजरायल के उन हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए थे. होर्डिंग में व्हाइट हाउस की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप परिवार को सीधे निशाने पर दिखाया गया है.

    अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके पूरे परिवार को सीधे जान से मारने और बदला लेने की यह ईरान की ओर से अब तक की सबसे सीधी और आक्रामक चेतावनी है.

    तेहरान में बढ़ रहे आक्रामक संदेश

    यह अकेला पोस्टर नहीं है. हाल के दिनों में तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे पोस्टर और भित्तिचित्र बनाए गए हैं, जिनमें अमेरिका के खिलाफ तीखे संदेश दिए गए हैं. एक अन्य पोस्टर में ट्रंप को खुले काले ताबूत में लेटा हुआ दिखाया गया है, जिसके ऊपर अंग्रेजी और फारसी भाषा में “हम ट्रंप को मार डालेंगे” लिखा गया है.

    ताबूत पर नीचे सफेद रंग से लिखा है ‘मिनाब के बच्चों की याद में’, जो उस ईरानी शहर का संदर्भ है जहां अमेरिकी हमले में एक प्राइमरी स्कूल की चपेट में आने से कई बच्चों की मौत हो गई थी.

    वहीं, कुछ अन्य पोस्टरों में ट्रंप के चेहरे को बंदूक की क्रॉसहेयर (निशाने) में दिखाया गया है. इसके साथ ही, हाल ही में 71 वर्ष की आयु में दम तोड़ने वाले वरिष्ठ अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम के नीचे लिखा गया है- “अगला कौन?”

    फिलिस्तीन स्क्वायर स्थित जिस इमारत पर यह पोस्टर लगाया गया है, उसका इस्तेमाल लंबे समय से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सरकारी संदेशों के प्रदर्शन के लिए किया जाता रहा है. यहां अक्सर ईरान समर्थक समूह फिलिस्तीनी और हिज़्बुल्लाह के झंडों के साथ प्रदर्शन भी करते हैं.

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
    डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि यदि ईरान उनकी हत्या की किसी भी कोशिश में शामिल पाया गया, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया “बेहद विनाशकारी” होगी. दूसरी ओर, खामेनेई की मौत के बाद ईरानी नेताओं और सरकारी समर्थक मीडिया की ओर से लगातार “बदले” की बात कही जा रही है. उनके उत्तराधिकारी आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी कहा है कि जिम्मेदार लोग “अपने बिस्तर पर भी शांतिपूर्वक नहीं मरेंगे.”

    हालांकि, इस पोस्टर को लेकर ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. वहीं, अमेरिका की तरफ से भी इस पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

  • सुप्रीम लीडर की विदाई या नई रणनीति का ऐलान? खामेनेई के अंतिम संस्कार के जरिए ईरान ने दुनिया के सामने रखा अपना राजनीतिक संदेश

    सुप्रीम लीडर की विदाई या नई रणनीति का ऐलान? खामेनेई के अंतिम संस्कार के जरिए ईरान ने दुनिया के सामने रखा अपना राजनीतिक संदेश

    नई दिल्ली । ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देने वाले आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। पूरे देश में लाखों लोगों की मौजूदगी और धार्मिक परंपराओं के बीच आयोजित कार्यक्रम ने यह संकेत देने का प्रयास किया कि सत्ता संरचना, वैचारिक निरंतरता और राष्ट्रीय एकजुटता पहले की तरह कायम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन के माध्यम से देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए हैं।

    विदेश नीति और पश्चिम एशिया मामलों के जानकारों का कहना है कि शिया परंपरा में धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था को अलग-अलग नहीं देखा जाता। इसी कारण सुप्रीम लीडर का पद केवल संवैधानिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसे धार्मिक मार्गदर्शन का भी केंद्र माना जाता है। ऐसे में अंतिम संस्कार जैसे अवसर केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शासन व्यवस्था की निरंतरता और वैचारिक प्रतिबद्धता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी बन जाते हैं।

    अंतिम यात्रा के लिए चुने गए मार्ग को भी प्रतीकात्मक महत्व दिया जा रहा है। यात्रा की शुरुआत ईरान के महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों से जुड़ी परंपरा के अनुरूप हुई और इसे शिया आस्था से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की विरासत से जोड़ा गया। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रतीकों के माध्यम से ईरान ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उसकी धार्मिक और राजनीतिक पहचान अब भी मजबूत और संगठित है। साथ ही यह आयोजन इस बात का भी संकेत माना जा रहा है कि सर्वोच्च नेतृत्व की संस्था अपनी वैचारिक और संस्थागत शक्ति बनाए हुए है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, उत्तराधिकार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नए नेतृत्व की भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। सुरक्षा कारणों से संभावित नए सुप्रीम लीडर सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे, जबकि उनकी ओर से लिखित संदेश जारी किए गए। इसे सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम यह दिखाने के लिए भी उठाए जाते हैं कि नेतृत्व परिवर्तन नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है।

    अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने देश के भीतर भावनात्मक माहौल को भी उजागर किया। कई स्थानों पर लोगों ने राष्ट्रीय एकता और नेतृत्व के समर्थन में नारे लगाए। साथ ही पश्चिम एशिया में ईरान के सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह संकेत भी दिया कि क्षेत्रीय स्तर पर उसके पुराने संबंध और रणनीतिक साझेदारियां अब भी सक्रिय हैं। इसे ईरान की क्षेत्रीय नीति और उसके सहयोगी नेटवर्क के सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

    हालांकि आयोजन के दौरान कुछ स्थानों पर अमेरिका और इजरायल के विरोध में नारे और पोस्टर भी दिखाई दिए। ये दृश्य उस जनभावना को दर्शाते हैं जो हालिया क्षेत्रीय तनाव और संघर्षों के बाद देश के एक वर्ग में देखने को मिल रही है। हालांकि भविष्य की नीतियों और किसी भी संभावित कदम को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई नई घोषणा नहीं की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक शीर्ष नेता की विदाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक दिशा, धार्मिक पहचान और सत्ता की निरंतरता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। आने वाले समय में दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि नए नेतृत्व के तहत ईरान अपनी घरेलू और विदेश नीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है तथा पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों में उसकी भूमिका किस प्रकार विकसित होती है।

  • खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी, ईरान ने दुनिया को दिया 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की एकजुटता का संदेश

    खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी, ईरान ने दुनिया को दिया 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की एकजुटता का संदेश

    नई दिल्ली । ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे के दौरान आयोजित अंतिम श्रद्धांजलि समारोह केवल एक धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पश्चिम एशिया की मौजूदा रणनीतिक और राजनीतिक परिस्थितियों का भी महत्वपूर्ण संदेश लेकर सामने आया। इस अवसर पर हमास, हिज्बुल्लाह और यमन के हूती आंदोलन सहित ईरान के कई क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से चर्चा में रहने वाला ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ अब भी सक्रिय और संगठित बना हुआ है।

    समारोह में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने ईरान के नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग और साझा रणनीतिक संबंधों को भी दोहराया। इन संगठनों की उपस्थिति को केवल शोक प्रकट करने तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम एशिया में ईरान के प्रभाव और उसके सहयोगी नेटवर्क की मजबूती के प्रतीक के रूप में भी समझा जा रहा है।

    पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय संघर्ष, इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच ईरान और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है। ऐसे समय में आयोजित यह अंतिम संस्कार समारोह कई देशों और विश्लेषकों की विशेष निगाहों में रहा, क्योंकि इसमें शामिल प्रतिनिधिमंडलों ने सामूहिक उपस्थिति के माध्यम से राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ केवल एक राजनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि उन संगठनों का साझा मंच है जो क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान के साथ निकट सहयोग बनाए रखते हैं। इनमें लेबनान का हिज्बुल्लाह, फिलिस्तीनी संगठन हमास और यमन का हूती आंदोलन प्रमुख माने जाते हैं। इन संगठनों के बीच वर्षों से वैचारिक और रणनीतिक समन्वय देखने को मिलता रहा है।

    जनाजे के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिकों ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी समारोह में भाग लेकर ईरान के साथ अपने संबंधों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने घरेलू स्तर पर राष्ट्रीय एकजुटता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय साझेदारी दोनों को प्रमुखता से सामने रखा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात के बीच इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से कूटनीतिक और रणनीतिक संकेत भी दिए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में सहयोगी देशों और संगठनों की उपस्थिति भविष्य की क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    हाल के वर्षों में इजरायल, गाजा, लेबनान और लाल सागर क्षेत्र में बढ़े तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के बीच समन्वय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। खामेनेई के जनाजे में इन सभी प्रमुख सहयोगियों की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यह क्षेत्रीय नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है और साझा रणनीतिक उद्देश्यों पर आगे भी सहयोग जारी रखने की मंशा रखता है। समारोह से उभरी यह तस्वीर आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों पर होने वाली चर्चाओं में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखी जा रही है।

  • ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, बेटों की मौजूदगी के बीच सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की गैरहाजिरी पर तेज हुई चर्चाएं

    ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, बेटों की मौजूदगी के बीच सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की गैरहाजिरी पर तेज हुई चर्चाएं

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को शनिवार को तेहरान में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार में देश के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नेतृत्व की मौजूदगी रही, जबकि सबसे अधिक चर्चा मौजूदा सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की सार्वजनिक गैरमौजूदगी को लेकर हुई। सुरक्षा कारणों के चलते उनके समारोह में खुलकर शामिल न होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    अंतिम नमाज के दौरान अली खामेनेई के परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे। उनके बेटों मसूद, मेयसाम और मुस्तफा ने अंतिम रस्मों में हिस्सा लिया और अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, देश के कई वरिष्ठ अधिकारी और धार्मिक नेता भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। समारोह के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी अपने पूर्व सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई दी।

    ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम नमाज का नेतृत्व वरिष्ठ धार्मिक नेता आयतुल्ला जाफर सोभानी ने किया। उनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसनी एजेई तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी सहित कई प्रमुख सैन्य अधिकारी भी समारोह का हिस्सा बने।

  • ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, लोगों के शोक पर जताई हैरानी, कहा- पूरी नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाया जा सकता था

    ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, लोगों के शोक पर जताई हैरानी, कहा- पूरी नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाया जा सकता था


    नई दिल्ली ।
    ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अवसर पर ईरान को लेकर कई तीखे बयान दिए, जिनमें संभावित सैन्य कार्रवाई, दोनों देशों के बीच बातचीत और अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ को लेकर उनकी प्रतिक्रिया शामिल रही। उनके बयान ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका चाहता तो ईरान के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ निशाना बनाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि भविष्य में बातचीत की संभावना बनी रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों पक्षों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक वार्ता से कुछ समय का विराम लेने पर सहमति बनाई है। उनके अनुसार इस अवधि में किसी भी पक्ष की ओर से नए हमले नहीं किए जाएंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों और उनके शोक व्यक्त करने पर भी आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले यह धारणा थी कि ईरान के भीतर बड़ी संख्या में लोग खामेनेई के विरोधी हैं, लेकिन अंतिम संस्कार में दिखाई दिए जनसमूह और भावनात्मक माहौल ने उन्हें हैरान कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दृश्य को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं की जा सकती हैं।

    ईरान में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कई चरणों में आयोजित की जा रही है। राजधानी तेहरान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद धार्मिक महत्व वाले शहरों में भी विभिन्न रस्में आयोजित की जा रही हैं। अंतिम चरण में खामेनेई को उनके गृह नगर में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। सुरक्षा कारणों से पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

    इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए परिवार के कुछ प्रमुख सदस्यों के सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि मौजूदा हालात और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    खामेनेई के निधन के बाद मध्य पूर्व की राजनीतिक स्थिति पहले से अधिक संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के कारण दोनों देशों के हर बयान और कदम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में ट्रंप के हालिया बयान को क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा परिदृश्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता, क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बने रहेंगे। फिलहाल ईरान में अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं, जबकि अमेरिका की ओर से दिए गए ताजा बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

  • अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, ईरान में छह दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू

    अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, ईरान में छह दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू

    नई दिल्ली । ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इस अवसर पर ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सरकारी नेतृत्व की मौजूदगी रही, जबकि कई वरिष्ठ नेता भावुक दिखाई दिए। समारोह से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा की जा रही हैं।

    तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची तथा सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अंतिम प्रार्थना के दौरान गालिबाफ की आंखों में आंसू दिखाई दिए, जबकि अराघची भी श्रद्धांजलि अर्पित करते समय भावुक नजर आए। दोनों नेताओं की भावनात्मक प्रतिक्रिया समारोह का प्रमुख केंद्र बन गई।

    श्रद्धांजलि सभा के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से ढका हुआ रखा गया। बड़ी संख्या में नागरिकों ने अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच लोगों ने उनके सम्मान में प्रार्थनाएं कीं और देशभर से आए समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    ईरानी नेतृत्व ने नागरिकों से बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि छह दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए राजधानी तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। तेहरान में मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अंतिम यात्रा राजधानी की प्रमुख सड़कों से निकलेगी। इसके बाद पवित्र शहर कोम में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां बड़ी संख्या में धार्मिक विद्वानों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। अंतिम चरण में उनका पार्थिव शरीर मशहद ले जाया जाएगा, जिसे उनका पैतृक शहर माना जाता है।

    मशहद में धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही पड़ोसी देश इराक के नजफ और कर्बला जैसे प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में भी विशेष प्रार्थना सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। विभिन्न देशों के शिया समुदायों द्वारा भी अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    गौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हालिया क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष के दौरान हुए हमलों में हुआ था। उनके निधन के बाद मध्य पूर्व की राजनीतिक और सामरिक परिस्थितियों पर व्यापक असर देखा गया। अब अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के बीच दुनिया की नजर ईरान के अगले राजनीतिक कदमों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। फिलहाल देश में शोक का माहौल है और लाखों लोग अपने लंबे समय तक सर्वोच्च नेतृत्व संभालने वाले नेता को अंतिम विदाई देने के लिए श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।

  • लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके ताबूत पर रखा गया विशेष लाल झंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान यह झंडा सबसे प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं, बल्कि शिया परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान राजनीतिक संदेश का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

    खामेनेई के ताबूत पर रखा गया यह लाल झंडा उनके पैतृक शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह से जुड़ा हुआ माना जाता है। शिया परंपरा में इस प्रकार के लाल ध्वज का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, शहादत की स्मृति और न्याय की मांग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी कारण अंतिम विदाई समारोह में इस झंडे की मौजूदगी ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस प्रतीक के माध्यम से खामेनेई की मृत्यु को शिया इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कर्बला की शहादत के संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। सातवीं शताब्दी में कर्बला के युद्ध के दौरान पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत शिया समुदाय की आस्था का केंद्रीय आधार मानी जाती है। उनके बलिदान को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, नैतिक साहस और सत्य के पक्ष में अडिग रहने का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।

    शिया धार्मिक परंपराओं में लाल झंडा अक्सर अधूरे न्याय, शहादत और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है, जबकि काला झंडा शोक और मातम का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार स्थल पर लाल और काले दोनों रंगों के झंडे तथा बैनरों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रतीकों के माध्यम से श्रद्धांजलि के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।

    तेहरान में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। परिसर को धार्मिक प्रतीकों, शोक संदेशों और खामेनेई के चित्रों से सजाया गया। पूरे आयोजन में शिया धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से पालन किया गया, जिससे समारोह को धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्वरूप मिला।

    जानकारों का मानना है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि शिया समुदाय के बीच वैचारिक एकजुटता और ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करने का प्रयास है। इसी क्रम में अंतिम यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि शिया समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाले हैं। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह पूरा आयोजन केवल एक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिया धार्मिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और ईरान की वैचारिक निरंतरता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें


    नई दिल्ली । भारत ने ईरान में मौजूद सुरक्षा हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ कहा है कि परिस्थितियों में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। ऐसे में भारतीय नागरिक अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर जरूरी यात्राओं से बचें और केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही वहां जाने का निर्णय लें।

    दूतावास ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के लिए ईरान की यात्रा बेहद जरूरी है वे पूरी सतर्कता बरतें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। भारतीय मिशन लगातार वहां की बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नई एडवाइजरी जारी की जाएगी।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे बिना आवश्यकता के यात्रा करने से बचें और किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। केवल विश्वसनीय समाचार स्रोतों और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही निर्णय लें।

    दूतावास ने कहा कि सुरक्षा हालात में सुधार के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौजूदा एडवाइजरी को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

    भारतीय नागरिकों से यह भी कहा गया है कि यदि वे ईरान में रह रहे हैं तो अपने संपर्क विवरण भारतीय दूतावास के पास अवश्य दर्ज कराएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे तुरंत संपर्क किया जा सके। दूतावास ने आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।

    यह एडवाइजरी ऐसे समय जारी की गई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। हालांकि क्षेत्र में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी समय स्थिति बदल सकती है। इसी वजह से भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

    भारतीय दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि वह ईरान में रह रहे प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे धैर्य बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में दूतावास द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।

    आपातकालीन संपर्क नंबर

    +989128109115

    +989128109109

    +989128109102

    +989932179359