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  • तेहरान में अनूठा विरोध… ट्रंप को पिंजरे में कैद कर ईरानी जता रहे अपना गुस्सा…

    तेहरान में अनूठा विरोध… ट्रंप को पिंजरे में कैद कर ईरानी जता रहे अपना गुस्सा…


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बढ़ता तनाव अब केवल कूटनीतिक बयानों और सैन्य सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेहरान की सड़कों पर एक अनोखे विरोध के रूप में सामने आया है। ईरान की राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार तज्रीश स्क्वायर पर एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक बिलबोर्ड (Electronic billboard) से लोहे का पिंजरा लटकाया गया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का हमशक्ल बंद है।

    ईरान सरकार के तेहरान ब्यूटिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन की तरफ से शुरू किए गए 15 दिवसीय इस अभियान का मकसद अमेरिकी हमले की ओर दुनिया का ध्यान खींचना है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी हमलों और ईरान को पाषाण युग में धकेलने जैसे बयानों ने आम ईरानी नागरिकों के गुस्से को भड़का दिया है। अमेरिकी सैन्य ताकत के खिलाफ उपजी एकजुटता को हवा देने के लिए ऐसे प्रदर्शनों को एक नया मनोवैज्ञानिक हथियार माना जा रहा है।

    मास्क और विग पहने कलाकार दिन-रात पिंजरे में रहता है, जहां उसके रहने के लिए बिस्तर, टॉयलेट और सिंक की व्यवस्था की गई है। यह कभी सलाखों को झकझोरता है, तो कभी पॉप म्यूजिक पर डांस करता है।


    यह संदेश न देखना अपराध…

    इस नाटकीय प्रदर्शन के पीछे एक गंभीर राजनीतिक संदेश छिपा है। पिंजरे के पीछे बिलबोर्ड पर लगातार उन तस्वीरों का प्रसारण हो रहा है, जो पिछले महीने ईरान के कुहस्तक कस्बे में एक शादी समारोह पर अमेरिकी बमबारी के भीषण दृश्यों को दिखाती हैं। तस्वीरों के साथ एक पीले रंग की क्राइम सीन टेप पर । लिखा गया है-इस दृश्य को न देखना एक अपराध है।

    चौराहे पर कई जगह पर ऐसे होर्डिंग भी लगाए गए हैं जिसमें ट्रंप के अलावा इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को निशाना बनाया गया है।


    हार्न बजाकर जता रहे समर्थन

    लाइव प्रदर्शन को देखने के लिए राहगीरों और वाहन चालकों की भारी भीड़ जुट रही है। लोग गाड़ियां रोककर वीडियो बना रहे हैं और हॉर्न बजाकर अपना समर्थन जता रहे हैं। अमूमन तेहरान में ऐसे प्रदर्शनों के लिए इंकलाब स्क्वायर का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इस बार व्यापारिक और व्यस्त इलाके तज्जीश स्क्वायर को चुना गया है।

  • ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे

    ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर फिर हमला कर सकता है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी और वैश्विक कारोबार प्रभावित होने का खतरा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना की जानकारी दी है। एक अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हमला होने की स्थिति में समुद्र के नीचे की केबल और सैन्य ठिकानों समेत कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबल तक पहुंच है और वह उन्हें नष्ट कर सकता है।

    ट्रंप बोले- एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकते हैं

    ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई कार्रवाई कब और किस तरह की हो सकती है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या युद्ध को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए या फिर इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास संघर्ष खत्म करने की क्षमता है, लेकिन यह फैसला करना बाकी है कि ऐसा कब किया जाए।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है, जिसकी उसे जरूरत है।

    ट्रंप पहले भी युद्ध के उद्देश्यों और उसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं। इसी महीने उन्होंने कहा था कि अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में अमेरिकी संसद पर नियंत्रण को लेकर फैसला होना है।

    तुर्की और फ्रांस ने नई सैन्य कार्रवाई से किया आगाह

    ईरान पर दोबारा हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव बढ़ा सकता है और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा है। उन्होंने संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताया।

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से किसी को फायदा नहीं होगा और इसका तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न करे।

    होर्मुज के नीचे मौजूद 7 इंटरनेट केबल निशाने पर

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।

    समुद्र के नीचे बिछी केबल वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जरिए दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचार होता है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    केबल क्षतिग्रस्त होने पर इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं में भी बाधा आने की आशंका है। असर कितना व्यापक होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी जल्दी भेजा जा सकता है और उन नेटवर्क में कितनी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।

    युद्ध की स्थिति में केबल की मरम्मत भी मुश्किल हो सकती है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत में बढ़ोतरी और मरम्मत के लिए अनुमति मिलने में देरी से बहाली का काम प्रभावित हो सकता है।

    खाड़ी देशों के टेक्नोलॉजी निवेश पर भी खतरा

    खाड़ी के देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े केंद्र बनने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ उनकी साझेदारी भी बढ़ी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ईरान के हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ था।

    हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक नेटवर्क मौजूद हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।

    फिलहाल, अमेरिका की ओर से संभावित नई सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट और कारोबारी नेटवर्क पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी नहीं खुली सीमा, पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर ट्रकों में लगाई आग

    आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी नहीं खुली सीमा, पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर ट्रकों में लगाई आग


    इस्लामाबाद/तेहरान।
    पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा पर व्यापारिक आवाजाही बाधित होने से तनाव बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने के बीच रिमदान सीमा क्षेत्र में ट्रेड गेट-250 के पास हथियारबंद लोगों ने कई ट्रकों और व्यावसायिक ढांचों को निशाना बनाया। ताजे फलों से लदे कई भारी वाहनों में आग लगा दी गई। इस घटना से स्थानीय व्यापारियों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। इससे पहले ईरान के एक सांसद ने चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान ने ईरान से आने वाले ट्रकों की आवाजाही पर रोक जारी रखी, तो तेहरान भी अपनी ओर से सीमा बंद कर सकता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद सुरक्षा बलों और हथियारबंद हमलावरों के बीच गोलीबारी हुई। इलाके में दहशत फैलने के बाद आपातकालीन टीमों को मौके पर भेजा गया। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हमलावरों की तलाश और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि हमले का संबंध प्रांत में सक्रिय अन्य उग्रवादी गतिविधियों से तो नहीं है।

    आसिम मुनीर के दौरे के बाद भी विवाद बरकरार

    पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हालिया तेहरान दौरे के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पर ट्रकों की आवाजाही का विवाद नहीं सुलझ सका है। रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर की यात्रा के दौरान सीमा खोलने का मुद्दा भी उठा था।

    ईरान-पाकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख फदाहोसैन मलिकी ने ईरानी समाचार एजेंसी आईएलएनए (ILNA) से कहा कि मुनीर ने तेहरान से ही सीमा खोलने के आदेश दिए थे। हालांकि, उनके मुताबिक पाकिस्तान की ओर से ईरान जाने वाले ट्रकों की आवाजाही शुरू होने के बावजूद ईरान से पाकिस्तान आने वाले वाहनों पर रोक जारी है।

    मलिकी ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में बदलाव नहीं हुआ, तो ईरान भी अपनी तरफ से सीमा बंद कर सकता है। उन्होंने पाकिस्तान के राजदूत को संसद में बुलाने की मांग की। मलिकी ने इस घटनाक्रम को ईरान पर अमेरिकी राजनीतिक दबाव से भी जोड़ा, हालांकि यह उनका दावा है।

    20 अक्टूबर से बाधित है व्यावसायिक आवाजाही

    गबद-रिमदान और ताफ्तान सीमा चौकियों पर 20 अक्टूबर से व्यापारिक आवाजाही बाधित होने की खबर है। पाकिस्तान ने सुरक्षा मजबूत करने और तस्करी रोकने के लिए इसे अस्थायी कदम बताया है। वहीं, ईरान ने तकनीकी दिक्कतों और एहतियाती उपायों का हवाला दिया है। दोनों देशों के बीच समस्या के समाधान के लिए बातचीत जारी है।

    फंसे ट्रक चालकों के सामने बुनियादी सुविधाओं का संकट

    सीमा पर सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने से चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ट्रक चालकों को पीने के पानी और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रक चालक अब्दुल गनी ने बताया कि चालकों को बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।

    सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां ठप होने और ताजा फलों से लदे ट्रकों पर हमले ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो सीमा पार व्यापार और स्थानीय कारोबार पर इसका असर और गहरा सकता है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    नई दिल्ली ।भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने किसका साथ दिया था, इसे लेकर अब नया दावा सामने आया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत के साथ मई 2025 में हुए टकराव के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समर्थन किस रूप में दिया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

    भारत ने इस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के तौर पर पेश किया था। अभियान के शुरुआती चरण में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बाद में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला चला।

    इसी घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का नया बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान और ईरान के संबंधों पर दिए गए लिखित जवाब में कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में पिछले दो वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ईरान के समर्थन का उल्लेख किया।

    पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, ईरान ने उस समय पाकिस्तान को मजबूत राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दिया था। हालांकि, डार के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस समर्थन में सैन्य सहायता, खुफिया सहयोग, हथियार या किसी अन्य प्रकार की प्रत्यक्ष मदद शामिल थी या नहीं। इसलिए केवल इस बयान के आधार पर ईरान की सैन्य भूमिका को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    ईरान की भूमिका को समझने के लिए उस समय उसके सार्वजनिक रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ईरान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने पर जोर दिया था। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की कोशिशों का उल्लेख भी सामने आया था।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मई 2025 में ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ईरान के प्रयासों का आभार जताया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी उस दौरान क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क और कूटनीतिक प्रयास किए थे।

    यही वजह है कि पाकिस्तान का ताजा दावा और उस समय ईरान की सार्वजनिक कूटनीतिक भूमिका अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। पाकिस्तान इसे अपने पक्ष में मिले मजबूत समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साफ नहीं होता कि यह समर्थन सैन्य स्तर पर था या मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने भी स्पष्ट किया था कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। भारत का कहना रहा कि कार्रवाई पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ की गई और सैन्य कार्रवाई को लक्षित तथा नियंत्रित रखा गया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 का संघर्ष बाद में युद्धविराम के साथ थमा। इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए थे। अब ईरान की भूमिका को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बयान सामने आने के बाद उस समय के क्षेत्रीय समीकरणों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान ने ईरान के समर्थन का दावा जरूर किया है, लेकिन समर्थन की प्रकृति और सीमा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को किसी प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में सहायता दी थी।

  • भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील..

    भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील..

    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर गंभीर बना दिया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और अस्थिर हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए अहम यात्रा सलाह जारी करते हुए उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से ईरान की यात्रा करने से बचें और जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, अपनी यात्रा स्थगित रखें।

    भारतीय दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल के दिनों में ईरान के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ा है। इसी कारण उन भारतीय नागरिकों को विशेष सलाह दी गई है जो किसी भी उद्देश्य से ईरान जाने की योजना बना रहे हैं। दूतावास का कहना है कि मौजूदा हालात में यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। सुरक्षा स्थिति में सुधार होने के बाद ही यात्रा संबंधी निर्णय लेने पर विचार किया जाना चाहिए।

    एडवाइजरी में उन भारतीय नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं जो पहले से ईरान में मौजूद हैं। दूतावास ने उन्हें उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग करते हुए अस्थायी रूप से ईरान छोड़ने पर विचार करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यात्रा संबंधी निर्णय लेते समय उपलब्ध विकल्पों और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।

    जो भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान में ही रहने का निर्णय लेते हैं, उन्हें अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दूतावास ने कहा है कि सभी नागरिक स्थानीय घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि वाले क्षेत्रों से दूर रहें। विशेष रूप से ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों और प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराने की अपील भी की है। जिन लोगों ने अब तक दूतावास के पास अपना विवरण दर्ज नहीं कराया है, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही नागरिकों से दूतावास की आधिकारिक सूचनाओं पर नियमित नजर बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

    क्षेत्र में जारी तनाव के कारण सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत सरकार भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हालात की लगातार समीक्षा कर रही है। यदि क्षेत्रीय परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसके अनुरूप नई सलाह और आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार का जोर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी बनाए रखने पर है। ऐसी स्थिति में नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और जारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

  • तेहरान में ट्रंप परिवार को लेकर विवादित होर्डिंग, ताबूतों में दिखाया, लिखा- 'खून का बदला खून'

    तेहरान में ट्रंप परिवार को लेकर विवादित होर्डिंग, ताबूतों में दिखाया, लिखा- 'खून का बदला खून'


    नई दिल्‍ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान में एक ऐसा सरकारी समर्थित होर्डिंग लगाया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है. राजधानी तेहरान के फिलिस्तीन स्क्वायर में लगाए गए इस विशाल होर्डिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उनके बच्चों को अमेरिकी झंडे से ढके ताबूतों के ऊपर दिखाया गया है. इसके साथ बड़े अक्षरों में लिखा है- ‘खून का बदला खून’

    रिपोर्ट के मुताबिक यह होर्डिंग अमेरिका और इजरायल के उन हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए थे. होर्डिंग में व्हाइट हाउस की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप परिवार को सीधे निशाने पर दिखाया गया है.

    अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके पूरे परिवार को सीधे जान से मारने और बदला लेने की यह ईरान की ओर से अब तक की सबसे सीधी और आक्रामक चेतावनी है.

    तेहरान में बढ़ रहे आक्रामक संदेश

    यह अकेला पोस्टर नहीं है. हाल के दिनों में तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे पोस्टर और भित्तिचित्र बनाए गए हैं, जिनमें अमेरिका के खिलाफ तीखे संदेश दिए गए हैं. एक अन्य पोस्टर में ट्रंप को खुले काले ताबूत में लेटा हुआ दिखाया गया है, जिसके ऊपर अंग्रेजी और फारसी भाषा में “हम ट्रंप को मार डालेंगे” लिखा गया है.

    ताबूत पर नीचे सफेद रंग से लिखा है ‘मिनाब के बच्चों की याद में’, जो उस ईरानी शहर का संदर्भ है जहां अमेरिकी हमले में एक प्राइमरी स्कूल की चपेट में आने से कई बच्चों की मौत हो गई थी.

    वहीं, कुछ अन्य पोस्टरों में ट्रंप के चेहरे को बंदूक की क्रॉसहेयर (निशाने) में दिखाया गया है. इसके साथ ही, हाल ही में 71 वर्ष की आयु में दम तोड़ने वाले वरिष्ठ अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम के नीचे लिखा गया है- “अगला कौन?”

    फिलिस्तीन स्क्वायर स्थित जिस इमारत पर यह पोस्टर लगाया गया है, उसका इस्तेमाल लंबे समय से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सरकारी संदेशों के प्रदर्शन के लिए किया जाता रहा है. यहां अक्सर ईरान समर्थक समूह फिलिस्तीनी और हिज़्बुल्लाह के झंडों के साथ प्रदर्शन भी करते हैं.

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
    डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि यदि ईरान उनकी हत्या की किसी भी कोशिश में शामिल पाया गया, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया “बेहद विनाशकारी” होगी. दूसरी ओर, खामेनेई की मौत के बाद ईरानी नेताओं और सरकारी समर्थक मीडिया की ओर से लगातार “बदले” की बात कही जा रही है. उनके उत्तराधिकारी आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी कहा है कि जिम्मेदार लोग “अपने बिस्तर पर भी शांतिपूर्वक नहीं मरेंगे.”

    हालांकि, इस पोस्टर को लेकर ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. वहीं, अमेरिका की तरफ से भी इस पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

  • सुप्रीम लीडर की विदाई या नई रणनीति का ऐलान? खामेनेई के अंतिम संस्कार के जरिए ईरान ने दुनिया के सामने रखा अपना राजनीतिक संदेश

    सुप्रीम लीडर की विदाई या नई रणनीति का ऐलान? खामेनेई के अंतिम संस्कार के जरिए ईरान ने दुनिया के सामने रखा अपना राजनीतिक संदेश

    नई दिल्ली । ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देने वाले आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। पूरे देश में लाखों लोगों की मौजूदगी और धार्मिक परंपराओं के बीच आयोजित कार्यक्रम ने यह संकेत देने का प्रयास किया कि सत्ता संरचना, वैचारिक निरंतरता और राष्ट्रीय एकजुटता पहले की तरह कायम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन के माध्यम से देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए हैं।

    विदेश नीति और पश्चिम एशिया मामलों के जानकारों का कहना है कि शिया परंपरा में धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था को अलग-अलग नहीं देखा जाता। इसी कारण सुप्रीम लीडर का पद केवल संवैधानिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसे धार्मिक मार्गदर्शन का भी केंद्र माना जाता है। ऐसे में अंतिम संस्कार जैसे अवसर केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शासन व्यवस्था की निरंतरता और वैचारिक प्रतिबद्धता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी बन जाते हैं।

    अंतिम यात्रा के लिए चुने गए मार्ग को भी प्रतीकात्मक महत्व दिया जा रहा है। यात्रा की शुरुआत ईरान के महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों से जुड़ी परंपरा के अनुरूप हुई और इसे शिया आस्था से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की विरासत से जोड़ा गया। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रतीकों के माध्यम से ईरान ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उसकी धार्मिक और राजनीतिक पहचान अब भी मजबूत और संगठित है। साथ ही यह आयोजन इस बात का भी संकेत माना जा रहा है कि सर्वोच्च नेतृत्व की संस्था अपनी वैचारिक और संस्थागत शक्ति बनाए हुए है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, उत्तराधिकार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नए नेतृत्व की भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। सुरक्षा कारणों से संभावित नए सुप्रीम लीडर सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे, जबकि उनकी ओर से लिखित संदेश जारी किए गए। इसे सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम यह दिखाने के लिए भी उठाए जाते हैं कि नेतृत्व परिवर्तन नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है।

    अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने देश के भीतर भावनात्मक माहौल को भी उजागर किया। कई स्थानों पर लोगों ने राष्ट्रीय एकता और नेतृत्व के समर्थन में नारे लगाए। साथ ही पश्चिम एशिया में ईरान के सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह संकेत भी दिया कि क्षेत्रीय स्तर पर उसके पुराने संबंध और रणनीतिक साझेदारियां अब भी सक्रिय हैं। इसे ईरान की क्षेत्रीय नीति और उसके सहयोगी नेटवर्क के सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

    हालांकि आयोजन के दौरान कुछ स्थानों पर अमेरिका और इजरायल के विरोध में नारे और पोस्टर भी दिखाई दिए। ये दृश्य उस जनभावना को दर्शाते हैं जो हालिया क्षेत्रीय तनाव और संघर्षों के बाद देश के एक वर्ग में देखने को मिल रही है। हालांकि भविष्य की नीतियों और किसी भी संभावित कदम को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई नई घोषणा नहीं की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक शीर्ष नेता की विदाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक दिशा, धार्मिक पहचान और सत्ता की निरंतरता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। आने वाले समय में दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि नए नेतृत्व के तहत ईरान अपनी घरेलू और विदेश नीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है तथा पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों में उसकी भूमिका किस प्रकार विकसित होती है।

  • खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी, ईरान ने दुनिया को दिया 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की एकजुटता का संदेश

    खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी, ईरान ने दुनिया को दिया 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की एकजुटता का संदेश

    नई दिल्ली । ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे के दौरान आयोजित अंतिम श्रद्धांजलि समारोह केवल एक धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पश्चिम एशिया की मौजूदा रणनीतिक और राजनीतिक परिस्थितियों का भी महत्वपूर्ण संदेश लेकर सामने आया। इस अवसर पर हमास, हिज्बुल्लाह और यमन के हूती आंदोलन सहित ईरान के कई क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से चर्चा में रहने वाला ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ अब भी सक्रिय और संगठित बना हुआ है।

    समारोह में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने ईरान के नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग और साझा रणनीतिक संबंधों को भी दोहराया। इन संगठनों की उपस्थिति को केवल शोक प्रकट करने तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम एशिया में ईरान के प्रभाव और उसके सहयोगी नेटवर्क की मजबूती के प्रतीक के रूप में भी समझा जा रहा है।

    पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय संघर्ष, इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच ईरान और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है। ऐसे समय में आयोजित यह अंतिम संस्कार समारोह कई देशों और विश्लेषकों की विशेष निगाहों में रहा, क्योंकि इसमें शामिल प्रतिनिधिमंडलों ने सामूहिक उपस्थिति के माध्यम से राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ केवल एक राजनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि उन संगठनों का साझा मंच है जो क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान के साथ निकट सहयोग बनाए रखते हैं। इनमें लेबनान का हिज्बुल्लाह, फिलिस्तीनी संगठन हमास और यमन का हूती आंदोलन प्रमुख माने जाते हैं। इन संगठनों के बीच वर्षों से वैचारिक और रणनीतिक समन्वय देखने को मिलता रहा है।

    जनाजे के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिकों ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी समारोह में भाग लेकर ईरान के साथ अपने संबंधों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने घरेलू स्तर पर राष्ट्रीय एकजुटता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय साझेदारी दोनों को प्रमुखता से सामने रखा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात के बीच इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से कूटनीतिक और रणनीतिक संकेत भी दिए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में सहयोगी देशों और संगठनों की उपस्थिति भविष्य की क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    हाल के वर्षों में इजरायल, गाजा, लेबनान और लाल सागर क्षेत्र में बढ़े तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के बीच समन्वय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। खामेनेई के जनाजे में इन सभी प्रमुख सहयोगियों की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यह क्षेत्रीय नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है और साझा रणनीतिक उद्देश्यों पर आगे भी सहयोग जारी रखने की मंशा रखता है। समारोह से उभरी यह तस्वीर आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों पर होने वाली चर्चाओं में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखी जा रही है।

  • ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, बेटों की मौजूदगी के बीच सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की गैरहाजिरी पर तेज हुई चर्चाएं

    ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, बेटों की मौजूदगी के बीच सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की गैरहाजिरी पर तेज हुई चर्चाएं

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को शनिवार को तेहरान में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार में देश के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नेतृत्व की मौजूदगी रही, जबकि सबसे अधिक चर्चा मौजूदा सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की सार्वजनिक गैरमौजूदगी को लेकर हुई। सुरक्षा कारणों के चलते उनके समारोह में खुलकर शामिल न होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    अंतिम नमाज के दौरान अली खामेनेई के परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे। उनके बेटों मसूद, मेयसाम और मुस्तफा ने अंतिम रस्मों में हिस्सा लिया और अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, देश के कई वरिष्ठ अधिकारी और धार्मिक नेता भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। समारोह के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी अपने पूर्व सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई दी।

    ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम नमाज का नेतृत्व वरिष्ठ धार्मिक नेता आयतुल्ला जाफर सोभानी ने किया। उनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसनी एजेई तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी सहित कई प्रमुख सैन्य अधिकारी भी समारोह का हिस्सा बने।

  • ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, लोगों के शोक पर जताई हैरानी, कहा- पूरी नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाया जा सकता था

    ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, लोगों के शोक पर जताई हैरानी, कहा- पूरी नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाया जा सकता था


    नई दिल्ली ।
    ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अवसर पर ईरान को लेकर कई तीखे बयान दिए, जिनमें संभावित सैन्य कार्रवाई, दोनों देशों के बीच बातचीत और अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ को लेकर उनकी प्रतिक्रिया शामिल रही। उनके बयान ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका चाहता तो ईरान के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ निशाना बनाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि भविष्य में बातचीत की संभावना बनी रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों पक्षों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक वार्ता से कुछ समय का विराम लेने पर सहमति बनाई है। उनके अनुसार इस अवधि में किसी भी पक्ष की ओर से नए हमले नहीं किए जाएंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों और उनके शोक व्यक्त करने पर भी आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले यह धारणा थी कि ईरान के भीतर बड़ी संख्या में लोग खामेनेई के विरोधी हैं, लेकिन अंतिम संस्कार में दिखाई दिए जनसमूह और भावनात्मक माहौल ने उन्हें हैरान कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दृश्य को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं की जा सकती हैं।

    ईरान में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कई चरणों में आयोजित की जा रही है। राजधानी तेहरान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद धार्मिक महत्व वाले शहरों में भी विभिन्न रस्में आयोजित की जा रही हैं। अंतिम चरण में खामेनेई को उनके गृह नगर में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। सुरक्षा कारणों से पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

    इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए परिवार के कुछ प्रमुख सदस्यों के सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि मौजूदा हालात और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    खामेनेई के निधन के बाद मध्य पूर्व की राजनीतिक स्थिति पहले से अधिक संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के कारण दोनों देशों के हर बयान और कदम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में ट्रंप के हालिया बयान को क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा परिदृश्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता, क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बने रहेंगे। फिलहाल ईरान में अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं, जबकि अमेरिका की ओर से दिए गए ताजा बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।