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  • दिल्ली हत्याकांड ने पकड़ा राजनीतिक तूल, सत्ता-विपक्ष में तीखी बयानबाज़ी..

    दिल्ली हत्याकांड ने पकड़ा राजनीतिक तूल, सत्ता-विपक्ष में तीखी बयानबाज़ी..

    नई दिल्ली। दिल्ली में डिलीवरी बॉय की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना न रहकर राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। इस घटना के बाद राजधानी की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

    घटना के सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से सरकार पर सीधा हमला किया गया। विपक्षी नेता ने इस वारदात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह घटना समाज में असुरक्षा की भावना को दर्शाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित युवक बिहार से था और उसके साथ हुई यह घटना क्षेत्रीय और सामाजिक संवेदनशीलता को उजागर करती है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

    विपक्षी बयान में यह भी कहा गया कि राजधानी में प्रशासनिक जिम्मेदारी कई स्तरों पर बंटी हुई है, ऐसे में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ जाती है। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही।

    इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया। सत्ता पक्ष की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। केंद्रीय स्तर के एक नेता ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से न केवल गलत संदेश जाता है, बल्कि समाज में भ्रम भी पैदा होता है।

    सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार हर नागरिक की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।

    उन्होंने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देकर मुद्दे को भटकाने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक घटना को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना पीड़ित परिवार के साथ न्याय नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाज़ी ने मामले को और जटिल बना दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में राजनीतिक बहस से ज्यादा जरूरी है कि जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

  • तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा

    तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा



    नई दिल्ली।  बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के लिए बड़ा झटका आया है। RJD के उम्मीदवार एडी सिंह के लिए वोट देने के लिए कांग्रेस के तीन और RJD के एक विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। यह स्थिति RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    तेजस्वी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और मायावती की BSP से समर्थन जुटाकर छह अतिरिक्त वोट जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन महागठबंधन के अपने चार विधायकों के अनुपस्थित रहने से यह रणनीति कमजोर पड़ गई।

    कांग्रेस के वाल्मीकि नगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, फारबिसगंज के मनोज विश्वास, मनिहारी के मनोहर प्रसाद सिंह और RJD के ढाका के फैसल रहमान वोटिंग में शामिल नहीं हुए। कुल 243 में से 239 विधायकों ने वोट डाला।

    महागठबंधन की योजना थी कि ओवैसी और मायावती के समर्थन से संख्या 35 से बढ़ाकर 41 हो जाएगी। लेकिन चार विधायकों की अनुपस्थिति से यह घटकर 37 रह गई। इससे एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम की जीत की संभावना मजबूत हो गई है।

    तेजस्वी यादव ने विधानसभा में मौजूद रहकर भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी। उन्होंने कहा कि मतदान शाम 4 बजे तक है और परिणाम आने के बाद ही वह इस पर कुछ कहेंगे।

    विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और कांग्रेस के अंदर मतभेदों को उजागर करती है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के सीट बंटवारे में देरी और किचकिच को पराजय के कारणों में गिना गया था, और यही माहौल अब राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिला।

    एनडीए के अन्य चार उम्मीदवार हैं: नीतीश कुमार (JDU अध्यक्ष और CM), नितिन नवीन (BJP अध्यक्ष), रामनाथ ठाकुर (JDU केंद्रीय मंत्री) और उपेंद्र कुशवाहा (RLM अध्यक्ष)। चार विधायकों के वोट न डालने से एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है और उनके सभी उम्मीदवार दिल्ली पहुंच सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटना महागठबंधन के लिए गंभीर चेतावनी है। कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक कमजोरी और मतभेद गठबंधन की सफलता पर असर डाल सकते हैं। तेजस्वी यादव और RJD को अब संगठन मजबूत करने, सहयोग सुनिश्चित करने और वोटिंग रणनीति पर नजर रखने की जरूरत है।

  • नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा

    नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा


    नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और नीतीश कुमार के लंबे और भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीतिक सफर की सराहना की। शाह ने कहा कि नीतीश का कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और उन्होंने बिहार को जंगलराज से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बिहार की सड़कों और ग्रामीण विकास में भी योगदान दिया और अपनी राजनीतिक यात्रा में किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप कभी नहीं लगा।

    नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा में जाने के बावजूद वे बिहार की नई सरकार को हर तरह से सहयोग देंगे। उन्होंने अपने संसदीय जीवन के महत्व और जनता के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया। नीतीश के इस ऐलान के बाद तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू किया गया है और बीजेपी ने नीतीश को हाईजैक कर दिया। उनका कहना था कि सहयोगी पार्टी को ताकत से दबाकर नीतीश को राज्यसभा भेजा गया।

    नीतीश के राज्यसभा नामांकन की खबर मिलते ही सुबह से ही JDU कार्यकर्ता उनके मुख्यमंत्री आवास पर इकट्ठा होने लगे। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार को कहीं नहीं जाने देंगे। इस दौरान CM हाउस के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिले और कई कार्यकर्ता रोते हुए नजर आए। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों सुरेंद्र मेहता, JDU MLC संजय गांधी और JDU विधायक प्रेम मुखिया को भी CM हाउस से बाहर निकाल दिया।

    JDU कार्यालय में भी नाराज कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और हंगामा किया। कई जिलों जैसे बेगूसराय और नालंदा में नीतीश के राज्यसभा जाने का विरोध हुआ। कार्यकर्ताओं ने ललन सिंह, विजय चौधरी, संजय झा मुर्दाबाद के नारे लगाए, जिसके कारण JDU ऑफिस का गेट बंद कर दिया गया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार के योगदान की चर्चा दशकों तक होती रहेगी और कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला सहज रूप से अपनाना मुश्किल है, लेकिन वे इसे स्वीकार करेंगे।

    अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे और अब लंबे अरसे के बाद राज्यसभा सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। शाह ने उनके प्रशासनिक कौशल, सादगी और बिहार में विकास कार्यों के लिए किए गए योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के हर गांव और घर में बिजली पहुंचाई और पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया।

    नीतीश कुमार ने भी अपने पोस्ट में कहा कि संसदीय जीवन के लिए उनका सपना है कि वे दोनों सदनों का अनुभव लें और बिहार के विकास के लिए काम करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे बिहार की नई सरकार को सहयोग दें और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा के लिए नीतीश का नामांकन और JDU कार्यकर्ताओं का गुस्सा बिहार में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह घटना न केवल राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि आगामी दिनों में बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ सकती है।

    नीतीश कुमार का यह कदम उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में जाने के साथ ही वे राष्ट्रीय स्तर पर फिर से सक्रिय भूमिका निभाएंगे, वहीं कार्यकर्ताओं का विरोध और नाराजगी बीजेपी और JDU के बीच संबंधों की जटिलता को भी दर्शाता है।

  • पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने कहा ये बात, तेजस्वी यादव ने पलटवार कर विधानसभा में मचाया हंगामा

    पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने कहा ये बात, तेजस्वी यादव ने पलटवार कर विधानसभा में मचाया हंगामा



    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा में गुरुवार को अलीनगर से पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर के विवादित बयान ने राजनीति में भूचाल ला दिया है। उन्होंने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे के प्रति स्नेह की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र और दुर्योधन से की। हालांकि मैथिली ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से 2005 से पहले के आरजेडी शासन की ओर इशारा साफ नजर आया।

    तेजस्वी यादव ने पलटवार किया
    आरजेडी के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को इस बयान पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया पर मैथिली का फोटो साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि कुछ लोग विधायक बनते ही राजनीति का पूरा ज्ञान होने का भ्रम पाल लेते हैं। तेजस्वी ने कहा कि “विधानसभा का ए, बी, सी भी ठीक से समझे बिना कुछ लोग ‘जननायक’ पर कटाक्ष करने का दुस्साहस कर रहे हैं।”

    उन्होंने मैथिली पर आरोप लगाया कि दरभंगा में हाल ही में हुई दलित लड़की के दुष्कर्म और हत्या पर वह चुप रही। साथ ही उन्होंने तंज कसा कि जो लोग आरजेडी शासनकाल को “जंगल राज” कहते हैं, उनके परिवार ने हाल ही में मधुबनी में चोरी की शिकायत दर्ज कराई, जबकि राज्य में उनकी ही पार्टी की सरकार है।

    राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस
    मैथिली और तेजस्वी के बीच यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह विवाद अगले कुछ दिनों में और गहराने वाला है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली के महाभारत के उदाहरण और तेजस्वी के तीखे पलटवार ने विधानसभा में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है, और राजनीतिक दल इसे लोकप्रियता और मीडिया कवरेज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

    भविष्य की राजनीति पर असर
    बिहार में इस तरह की बयानबाजी अगले विधानसभा सत्र और स्थानीय राजनीति में भी असर डाल सकती है। तेजस्वी का सोशल मीडिया तंज और मैथिली का विवादित बयान दोनों ही पार्टियों की रणनीतियों का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

  • अपराधियों को पूरा विश्वास… ये सरकार कुछ नहीं उखाड़ सकती', सदन में खूब गरजे तेजस्वी यादव

    अपराधियों को पूरा विश्वास… ये सरकार कुछ नहीं उखाड़ सकती', सदन में खूब गरजे तेजस्वी यादव


    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा में गुरुवार 05 फरवरी, 2026 को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर जमकर भड़ास निकाली. तेजस्वी यादव ने कहा कि आप लोगों ने लोकतंत्र को डरतंत्र बना दिया है. इस सरकार की नींद बेटियों की चीख से भी नहीं टूटती है. तेजस्वी ने कहा कि बिहार की हालत देखकर तो यही लगता है कि अपराधियों को पूरा विश्वास हो गया है कि ये सरकार उसका कुछ नहीं उखाड़ सकती है. बिहार के अपराधियों में डर नहीं बल्कि सरकार में शर्म भी नहीं है.

    तेजस्वी यादव ने सदन में स्पीकर से कहा कि उनके पैर का नाखून पूरा उखड़ गया है इसलिए वे अपनी बात बैठकर कहना चाहते हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने बैठने की अनुमति दे दी. इसके बाद तेजस्वी यादव ने पटना के नीट कांड का जिक्र किया. इसके अलावा उन्होंने अन्य जिलों के बारे में कहा कि मधेपुरा में महिला के साथ दुष्कर्म और हत्या हुई, खगड़िया में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई. मुजफ्फरपुर में महिला और तीन बच्चों का अपहरण और फिर हत्या की गई. इसके साथ ही और भी अपराध को उन्होंने गिनवाया.

    बिहार सरकार को बताया कोल्ड स्टोरेज

    तेजस्वी यादव ने कहा कि थाना खामोश है, प्रशासन बेहोश है और सरकार पूरी तरह मदहोश है. जनता में इस सरकार के लिए अफसोस और आक्रोश है. बिहार सरकार कोल्ड स्टोरेज बन चुकी है. हर मामले को ठंडा करने में लगी हुई रहती है.

    बिहार आखिर किस चीज में नंबर वन?
    आरजेडी नेता ने कहा कि बिहार जब इतना विकास कर रहा है तो एक बात बता दें कि बिहार आखिर किस चीज में नंबर वन है? आर राज्यों के मुकाबले बिहार सबसे ज्यादा गरीब है. सबसे ज्यादा बेरोजगारी है. शिक्षा के मामले में फिसड्डी है. स्वास्थ्य के मामले में फिसड्डी है. भ्रष्टाचार में अव्वल है. अपराधियों का बोलबाला है. प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है. किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. जिन गरीबों का वोट लिया उसके घर को उजाड़ रहे हैं.

  • बजट सत्र के पहले दिन तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे, जानिए वजह

    बजट सत्र के पहले दिन तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे, जानिए वजह


    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा का बजट सत्र आज 2 फरवरी 2026 से शुरू हो गया और पहले दिन ही चर्चा का केंद्र बने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। उन्हें व्हीलचेयर पर विधानसभा परिसर में आते देखा गया।  RJD ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तेजस्वी यादव के पैर में चोट लगी है। पार्टी के अनुसार यह चोट 25 जनवरी को लगी थी, जिससे उनके पैर के अंगूठे का नाखून उखड़ गया। चोट के कारण उन्हें चलने और लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई हो रही है। तेजस्वी यादव फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने विधानसभा में व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया।

    बजट सत्र का पहला दिन
    सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने दोनों सदनों के सदस्यों को संयुक्त रूप से सेंट्रल हॉल में संबोधित किया। वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव 3 फरवरी को वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इस बजट सत्र में न केवल वित्तीय मुद्दों पर चर्चा होगी बल्कि विकास योजनाओं और विभिन्न विभागों के बजट पर भी बहस होगी। यह सत्र 27 फरवरी तक चलेगा।

    विपक्ष की एकजुटता पर रहेगी नजर

    तेजस्वी यादव को शीतकालीन सत्र में नेता प्रतिपक्ष चुना गया था, लेकिन कांग्रेस ने RJD से दूरी बनाकर अलग रणनीति अपनाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट सत्र में विपक्ष एकजुट होकर मुद्दों पर आवाज उठाता है या अलग-अलग रुख अपनाता है। AIMIM पहले ही विपक्ष से अलग हो चुकी है।

  • Bihar: RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    Bihar: RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी


    पटना।
    राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) (Rashtriya Janata Dal – RJD) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक (National Executive Important meeting) 25 जनवरी को पटना (Patna) में बुलाई गई है. यह बैठक पटना के एक बड़े होटल में आयोजित होगी, जिसमें पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक बदलावों को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

    आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो सकता है. अगर यह फैसला होता है तो तेजस्वी यादव को पार्टी के सभी बड़े और अहम निर्णय लेने का अधिकार मिल जाएगा।


    लालू यादव की उम्र और स्वास्थ्य बना वजह

    बताया जा रहा है कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है, ताकि संगठन की जिम्मेदारी युवा नेतृत्व के हाथों में सौंपी जा सके।


    चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव की तैयारी

    विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव और उनकी टीम के फैसलों पर सवाल उठे थे. इसी पृष्ठभूमि में उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, ताकि संगठन को नए सिरे से मजबूत किया जा सके।


    तेज प्रताप की वापसी की संभावना होगी खत्म

    अगर तेजस्वी यादव राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनते हैं, तो पार्टी में तेज प्रताप यादव की वापसी की अटकलों पर भी विराम लग सकता है.


    सितंबर 2025 के बाद पहली बैठक

    सितंबर 2025 में आरजेडी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद यह पहली बैठक होगी. बैठक की अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद यादव करेंगे।


    करीब 200 नेता होंगे शामिल

    इस बैठक में 85 स्थायी सदस्यों को बुलाया गया है. इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों को मिलाकर करीब 200 नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होंगे. बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी डेलीगेट्स के आने की संभावना है।

  • चूड़ा-दही भोज से दूर रहे तेजस्वी, तेजप्रताप का सियासी वार, शायद जयचंदों ने घेर रखा है

    चूड़ा-दही भोज से दूर रहे तेजस्वी, तेजप्रताप का सियासी वार, शायद जयचंदों ने घेर रखा है


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में यादव परिवार के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने चूड़ा-दही भोज में तेजस्वी यादव के नहीं पहुंचने पर न सिर्फ नाराजगी जताई, बल्कि तीखा सियासी तंज भी कसा। तेजप्रताप ने कहा कि उन्होंने खुद 13 जनवरी को तेजस्वी यादव को भोज का निमंत्रण देने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
    इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, हो सकता है उन्हें जयचंदों ने घेर रखा हो।

    तेजप्रताप यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी और संतोष की बात यह रही कि उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कहा, “पिता जी का आना और उनका आशीर्वाद मिलना ही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। उससे ऊपर कुछ नहीं।” तेजप्रताप ने बताया कि चूड़ा-दही भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों के कई बड़े नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निमंत्रण भेजा गया था और कई दलों के नेताओं ने आकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

    इस मौके पर तेजप्रताप यादव ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि लालू यादव की मूल और असली पार्टी जनशक्ति जनता दल है। उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को खुली सलाह देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का विलय जनशक्ति जनता दल में कर देना चाहिए। तेजप्रताप का यह बयान बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।

    तेजप्रताप यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बीजेपी समेत कई राजनीतिक दलों से ऑफर मिल चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे किसके साथ जाना है, इसका फैसला वे खुद लेंगे। उन्होंने कहा, “जो बिहार के हित में काम करेगा, जनता की बात करेगा, जनशक्ति जनता दल उसी का साथ देगा।”

    पार्टी के भविष्य को लेकर तेजप्रताप यादव ने बड़े ऐलान करते हुए कहा कि जनशक्ति जनता दल आने वाले समय में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव और बिहार में इस साल होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव में भी पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।

    गौरतलब है कि आरजेडी से बाहर होने के बाद तेजप्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल का गठन किया था। उन्होंने इसी पार्टी के सिंबल पर महुआ सीट से बिहार विधानसभा 2025 का चुनाव भी लड़ा, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद तेजप्रताप अपने बयानों और सियासी गतिविधियों के जरिए लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार की राजनीति में किसी भी कीमत पर अपनी अलग पहचान और मजबूत भूमिका बनाए रखने के मूड में हैं।

  • दही-चूड़ा के बहाने सियासी संदेश: तेजप्रताप यादव मकर संक्रांति पर बुलाएंगे तेजस्वी-नीतीश को

    दही-चूड़ा के बहाने सियासी संदेश: तेजप्रताप यादव मकर संक्रांति पर बुलाएंगे तेजस्वी-नीतीश को


    नई दिल्‍ली । बिहार में दही-चूड़ा भोज के बहाने सियासत गरमाने लगी है। जनशक्ति जनता दल के मुखिया और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज का ऐलान किया है। तेजप्रताप यादव इस भोज में आने के लिए कई मेहमानों को लगातार आमंत्रित कर रहे हैं। खास बात यह है कि तेजप्रताप ने खुद कहा है कि वो इस भोज में अपने भाई तेजस्वी यादव को भी आमंत्रित करेंगे। इस भोज में सीएम नीतीश कुमार को भी बुलाने की बात तेजप्रताप यादव ने कही है।
    तेजप्रताप यादव ने बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर उन्हें दही-चूड़ा भोज में आने का न्योता दिया। मंत्री दीपक प्रकाश से मुलाकात की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए तेजप्रताप यादव ने एक्स पर लिखा, ‘आज पंचायती राज विभाग के मंत्री श्री दीपक प्रकाश जी से उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर 26 M स्ट्रैंड रोड स्थित मेरे सरकारी आवास पर “दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम” हेतु आमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया। साथ ही नए जिम्मेदारियों हेतु दीपक प्रकाश जी को बधाई दिया।

    मीडिया से बातचीत में तेजप्रताप यादव ने कहा कि दही-चूड़ा भोज में वो सभी को आमंत्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी आमंत्रित करेंगे। तेजप्रताप यादव ने कहा कि इस भोज में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी न्योता दिया जाएगा।

    राबड़ी आवास गए थे तेजप्रताप यादव
    इससे पहले तेजप्रताप यादव नए साल के पहले दिन अपनी मां से मिलने पटना स्थित उनके आवास पर भी गए थे। दरअसल इस दिन राबड़ी देवी का जन्मदिन था और तेजप्रताप अचानक 10 सर्कुलर रोड स्थित अपनी मां के आवास पर गए थे। तेजप्रताप यादव ने बाद में मां से मुलाकात की तस्वीर भी शेयर की थी। तेजप्रताप यादव ने घर से निकलने के बाद कहा था कि उनकी मां उन्हें बहुत मानती हैं। मां के जन्मदिन पर वो उनके घर गए थे और उनके साथ बैठकर केक काटा था।

    बिहार में दही-चूड़ा का भोज मकर संक्रांति के अवसर पर एक पारंपरिक आयोजन रहा है। तेजप्रताप यादव को पिछले ही साल उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने पार्टी और घर से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी अलग JJD पार्टी बनाई थी। यह पार्टी बिहार विधानसभाा चुनाव के दंगल में भी उतरी थी। लेकिन खुद तेजप्रताप यादव भी चुनाव हार गए थे। अब दही-चूड़ा के बहाने तेजप्रताप यादव अपने परिवार के सदस्य, सरकार और विपक्ष के नेताओं को न्योता दे रहे हैं। 14 जनवरी को इस भोज का आयोजन किया गया है।