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  • जमुई नाबालिग की तस्वीर विवाद पर तेजस्वी ने CM सम्राट चौधरी के खिलाफ सजा की मांग की, जानिए POCSO के कड़े प्रावधान

    जमुई नाबालिग की तस्वीर विवाद पर तेजस्वी ने CM सम्राट चौधरी के खिलाफ सजा की मांग की, जानिए POCSO के कड़े प्रावधान

    नई दिल्ली ।बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जमुई की एक नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात के दौरान ली गई तस्वीर को इस तरह सार्वजनिक किया गया, जिससे बच्ची की पहचान उजागर होने की स्थिति बनी। विवाद सामने आने के बाद पोस्ट को हटा दिया गया। इस मामले को लेकर विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई और सजा की मांग की गई है।

    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले में पॉक्सो यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून का हवाला दिया है। उनका कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून के प्रावधानों के दायरे में आता है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी दोष सिद्ध होना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

    दरअसल, जमुई जिले में 19 सितंबर को दसवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ युवकों द्वारा कथित तौर पर छेड़खानी और बदसलूकी की घटना सामने आई थी। घटना से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। मामले ने कानून-व्यवस्था और नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए।

    इसी मामले के बाद मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद जारी किए गए पोस्ट में बच्ची और उसके परिवार को न्याय का भरोसा दिलाने की बात कही गई थी। पोस्ट में यह भी कहा गया था कि मामले में दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए एक महीने के भीतर कठोर सजा सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। विवाद इस बात को लेकर हुआ कि पोस्ट में पीड़िता की पहचान छिपाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।

    POCSO कानून वर्ष 2012 में बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को संरक्षण दिया जाता है। कानून में बच्चों के खिलाफ होने वाले विभिन्न यौन अपराधों की पहचान, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनके हितों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

    इस कानून में नाबालिग पीड़ित या पीड़िता की पहचान और निजता को लेकर भी विशेष सुरक्षा दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चे को कानूनी कार्रवाई के दौरान ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो या उसकी गरिमा प्रभावित हो।

    POCSO की धारा 23 इसी विषय से संबंधित है। इसके तहत बच्चे से जुड़े मामले की रिपोर्टिंग या टिप्पणी करते समय उसकी निजता और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक है, जिससे बच्चे की पहचान सामने आ सकती है।

    पहचान के दायरे में बच्चे का नाम, पता, तस्वीर, परिवार से जुड़ी जानकारी, स्कूल, पड़ोस या ऐसी कोई अन्य जानकारी शामिल हो सकती है, जिससे उसकी पहचान का पता लगाया जा सके। कानून का उद्देश्य विशेष रूप से यह है कि यौन अपराध से प्रभावित बच्चे की पहचान सार्वजनिक न हो और उसकी निजता सुरक्षित रहे।

    धारा 23 के प्रावधानों के उल्लंघन पर छह महीने से एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। हालांकि किसी विशेष मामले में यह धारा लागू होती है या नहीं, यह संबंधित तथ्यों, जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय किया जाता है।

    जमुई मामले में तस्वीर को लेकर उठे विवाद के बाद अब मुख्य मुद्दा यही है कि नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने के आरोप की कानूनी जांच किस तरह आगे बढ़ती है। राजनीतिक स्तर पर इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जबकि कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।

  • सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

    सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

    नई दिल्ली । बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से AK-47 से फायरिंग के मामले ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को पटना में राजभवन मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय ने भीड़ नियंत्रण और सामान्य विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है।

    सीवान में बिहार बंद और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच एक जवान के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सामने आया था। इस घटना में तीन छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और प्रदर्शनकारियों के बीच इस तरह के घातक हथियार के इस्तेमाल पर जवाब मांगा।

    मामले के सामने आने के बाद संबंधित पुलिस जवान को निलंबित किया गया। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल एक जवान के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और फायरिंग के आदेश तथा पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। घटना को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं, इसलिए पूरे घटनाक्रम की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    तेजस्वी यादव ने सीवान की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग का आदेश किस स्तर से दिया गया। उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने 19 अगस्त को पटना में पार्टी कार्यालय से राजभवन या लोक भवन तक मार्च निकालने का निर्णय लिया है।

    प्रस्तावित मार्च में पार्टी के विधायक, विधान परिषद सदस्य और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होने वाले इस मार्च के जरिए विपक्ष सीवान फायरिंग मामले में जवाबदेही तय करने और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठाएगा।

    इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय के नए निर्देश को महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। निर्देश के अनुसार सामान्य कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की ड्यूटी के दौरान AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है। उग्रवाद, आतंकवाद या बड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियानों जैसी परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सामान्य प्रदर्शन, भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में इन हथियारों के प्रयोग की अनुमति नहीं होगी।

    विशेष परिस्थिति में ऐसे हथियारों को साथ रखना जरूरी होने पर भी भीड़ नियंत्रण के दौरान इनके इस्तेमाल पर रोक लागू रहेगी। जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों और जवानों को नए निर्देशों की जानकारी देने तथा उनके पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

    सीवान की घटना के बाद अब बिहार में पुलिस की भीड़ नियंत्रण नीति और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन ने असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    अब 19 अगस्त को प्रस्तावित तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। सीवान की घटना के बाद लिया गया हथियार संबंधी निर्णय आने वाले समय में बिहार में कानून-व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों से निपटने की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।