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  • हैदराबादः भगवान राम की मूर्ति हटाने का विरोध.. BJP बोली – कांग्रेस का तेलंगाना में भी होगा UP जैसा हाल

    हैदराबादः भगवान राम की मूर्ति हटाने का विरोध.. BJP बोली – कांग्रेस का तेलंगाना में भी होगा UP जैसा हाल


    हैदराबाद।
    तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) में एक चौराहे से भगवान राम की मूर्ति (Lord Ram – Idol) हटाने जाने का भाजपा (BJP) ने विरोध किया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के ऊपर राम विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस फैसले के बाद उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस ने इसी तरह से भगवान राम की मूर्ति हटाई थी। उसके बाद कांग्रेस वहां से साफ हो गई। यही हाल तेलंगाना में भी होने वाला है। बता दें, यह मूर्ति दशहरा के पहले कुछ हिंदु संगठनों द्वारा लगाई गई थी। बाद में इन संगठनों ने चौराहे का नाम बदलने की अपील की थी।

    दशहरे के कार्यक्रम के पूरा होने के बाद कुछ हिंदू समूहों ने चौराहे का नाम बदलने की अपील करते हुए मूर्ति को यहीं स्थापित रखने पर जोर दिया। प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद नगर प्रशासन ने ट्रस्ट को मूर्ति हटाने का आदेश जारी कर दिया। सोशल मीडिया पर भी भगवान राम की मूर्ति हटाए जाने का वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है।


    प्रशासन ने दिया सुप्रीम कोर्ट का हवाला
    हिंदू संगठनों की तरफ से किए जा रहे विरोध के बीच नगर प्रशासन ने कानून का हवाला दिया। प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के नियम का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों, फुटपाथों और सार्वजनिक ऊपयोग की जगह पर गैर कानूनी रूप से मूर्तियां स्थापित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।


    भाजपा बोली- कांग्रेस का उत्तर प्रदेश जैसा हाल होगा
    भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने कहा कि कांग्रेस को अब जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस सरकार ने भगवान राम की प्रतिमा को हटाने की कोशिश की है। इससे पहले भी 1949 में पंडित नेहरू की सरकार ने प्रतिमा को हटा दिया था। बाद में कांग्रेस उत्तर प्रदेश से गायब हो गई। अब कांग्रेस सरकार ने बशीरबाग में भी अपनी हरकत को दोहराया है। फिर वही हाल कांग्रेस का इंतजार कर रहा है। लोग न भूलते हैं और न ही माफ करते हैं।

    इस घटनाक्रम का भाजपा और विश्व हिंदू परिषद की तरफ से विरोध किया गया। भाजपा के तेलंगाना सोशल मीडिया हैंडल पर कांग्रेस को हिंदू विरोधी मानसिकता का करार दिया गया। पोस्ट में लिखा गया, “कांग्रेस सरकार की हिंदू-विरोधी मानसिकता एक बार फिर सबके सामने आ गई है। हैदराबाद में बशीरबाग मंदिर के पास, दशहरा के पावन अवसर पर हिंदू संगठनों द्वारा स्थापित प्रभु श्री राम की मूर्ति को हटाना, करोड़ों भक्तों का सीधा अपमान है। उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक, जनता ने हमेशा राजनीतिक अहंकार को कुचला है। तेलंगाना की जनता न तो माफ करेगी और न ही चुप बैठेगी।”

    बता दें, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा समेत कई हिंदु संगठन इस चौराहे का नाम बशीबाग से बदलकर श्रीराम चौक करने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। मूर्ति के हटाए जाने के बाद विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविनुथला शशिधर ने कहा कि भविष्य में मंदिर में 108 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब हैदराबाद समेत राज्य के कई शहरों के पुराने नाम बहाल किए जाएंगे।

  • तेलंगाना में फर्जी Form 7 मामले में पहली FIR, BJP बूथ एजेंट पर 30 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप

    तेलंगाना में फर्जी Form 7 मामले में पहली FIR, BJP बूथ एजेंट पर 30 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप

    नई दिल्ली: तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कथित तौर पर फर्जी Form 7 जमा करने के मामले में पहली FIR दर्ज की गई है। हैदराबाद के चिक्कड़पल्ली थाने में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट एस. बालचंदर के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि उन्होंने मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र के 30 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग वाले प्री-प्रिंटेड Form 7 जमा करने की कोशिश की। उपलब्ध शिकायत और जांच के अनुसार, इन 30 मतदाताओं के नाम वाले फॉर्म पहले से तैयार थे और बाद में उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर के पास जमा करने का प्रयास किया गया।

    FIR के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को बालचंदर मतदान केंद्र संख्या 210 के बूथ लेवल ऑफिसर के पास 30 प्री-प्रिंटेड Form 7 लेकर पहुंचे थे। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को हटाने या उसके नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। आरोप है कि इन फॉर्म में उन मतदाताओं के नाम पहले से दर्ज थे, जिनसे बालचंदर का कोई संबंध नहीं था। BLO और BLO सुपरवाइजर ने कथित तौर पर फॉर्म का यह सामूहिक सेट स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बार-बार अनुरोध के बावजूद फॉर्म स्वीकार नहीं किए गए, जिसके बाद बालचंदर उन्हें परिसर में छोड़कर चले गए।

    इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने संबंधित मतदाताओं की वास्तविक स्थिति की जांच की। 30 सितंबर को BLO और सुपरवाइजर ने फील्ड वेरिफिकेशन किया और 1 अक्टूबर को सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी तथा निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी ने भी सत्यापन में हिस्सा लिया। जांच में सभी 30 मतदाता अपने मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज पते पर रहते हुए पाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से 14 मतदाता एक पते पर और बाकी 16 दूसरे पते पर दर्ज थे। इन 30 लोगों में एक कांग्रेस बूथ लेवल एजेंट भी शामिल बताया गया है। सत्यापन के आधार पर संबंधित Form 7 को स्वीकार करने योग्य नहीं माना गया और उन्हें खारिज किए जाने की बात कही गई।

    पुलिस ने यह कार्रवाई मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी टी. प्रवीण कुमार रेड्डी की शिकायत के आधार पर की है। बालचंदर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 और 318(2) के साथ जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 217 गलत जानकारी देकर सरकारी अधिकारी की कानूनी शक्ति के इस्तेमाल को प्रभावित करने से संबंधित है, जबकि धारा 318(2) धोखाधड़ी से जुड़ी है। मामले में प्री-प्रिंटेड फॉर्म तैयार करने और जमा करने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    यह मामला तेलंगाना में मतदाता सूची के SIR के दौरान Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। मुशीराबाद के अलावा हैदराबाद के बहादुरपुरा और गोशामहल विधानसभा क्षेत्रों से भी पहले से भरी हुई जानकारी वाले Form 7 सामने आने की बात सामने आई है। चुनाव अधिकारियों ने ऐसे मामलों में जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा देने वालों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, कांग्रेस ने इस मामले में व्यापक जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि मतदाताओं का डेटा जुटाने तथा फॉर्म तैयार करने में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने पार्टी स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटाने के अभियान के आरोपों को खारिज किया है।

  • तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी के भगवान शिव और राम पर बयान से विवाद, BJP ने कांग्रेस पर लगाया मानसिक दिवालियापन का आरोप

    तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी के भगवान शिव और राम पर बयान से विवाद, BJP ने कांग्रेस पर लगाया मानसिक दिवालियापन का आरोप


    नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भगवान शिव और भगवान राम को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रेवंत रेड्डी ने एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी पर भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी की ओर से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया जाता है, जबकि ‘हर हर महादेव’ का जयघोष नहीं किया जाता। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव को गरीबों का देवता और भगवान राम को अमीरों का भगवान बताया। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

    रेवंत रेड्डी ने अपने संबोधन में भगवान शिव और भगवान राम की आस्था को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भगवान राम की पूजा अधिक होती है, जबकि दक्षिण भारत में भगवान शिव के प्रति आस्था मजबूत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने भगवान राम को राजनीतिक भावना से जोड़ दिया है और उन्हें राजनीतिक प्रतीक बना लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बीजेपी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया जाता है, लेकिन ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाया जाता। इसी दौरान उन्होंने भगवान शिव को ‘गरीबों का भगवान’ और भगवान राम को ‘अमीरों का भगवान’ बताया।

    मुख्यमंत्री ने अपने बयान में गांधी परिवार और संघ परिवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने गांधी परिवार को देश के लिए बलिदान का प्रतीक बताया, जबकि संघ परिवार पर धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भारत को बांटने का आरोप लगाया। रेवंत रेड्डी ने कहा कि भगवान राम को बीजेपी ने राजनीतिक भावना से जोड़ दिया है। उन्होंने भगवान शिव को गरीबों का देवता बताते हुए कहा कि यही वजह है कि बीजेपी के कार्यक्रमों में ‘हर हर महादेव’ की जगह ‘जय श्री राम’ का नारा सुनाई देता है। उनके इस बयान के बाद धार्मिक प्रतीकों और राजनीति के संबंध को लेकर सियासी बहस तेज हो गई।

    रेवंत रेड्डी की टिप्पणी पर बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री के बयान को मानसिक दिवालियापन बताया। बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी की आलोचना की। उनका कहना है कि भगवान शिव और भगवान राम को अलग-अलग सामाजिक वर्गों से जोड़कर इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी रेवंत रेड्डी के बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में रेवंत रेड्डी की भगवान शिव, भगवान राम और बीजेपी की धार्मिक राजनीति को लेकर की गई टिप्पणियां हैं। मुख्यमंत्री ने ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के नारों का अंतर बताते हुए बीजेपी पर भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक बनाने का आरोप लगाया। वहीं बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने उनके बयान को लेकर कड़ा विरोध जताया और इसे मानसिक दिवालियापन बताया। इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच धार्मिक प्रतीकों, राजनीतिक विचारधारा और उत्तर-दक्षिण भारत के संदर्भ में बयानबाजी तेज हो गई है।

  • तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना में गणेश उत्सव के समापन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। हादसों की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और अलग-अलग घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पूरे राज्य में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। इनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। संबंधित घटनाओं के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक हादसा किस वजह से हुआ।

    गणेश उत्सव के दौरान इस वर्ष तेलंगाना में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। शहरों और कस्बों के अलावा घरों, अपार्टमेंट परिसरों और गेटेड सोसाइटी में भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

    पुलिस और प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हादसे हुए। इन घटनाओं में पुलिस विभाग से जुड़े एक सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हुई है।

    पुलिस महानिदेशक के अनुसार, तेलंगाना में करीब 1.24 लाख गणेश प्रतिमाएं आधिकारिक रूप से स्थापित की गई थीं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्रतिमाएं लोगों ने अपने घरों, अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटी में स्थापित की थीं। इन सभी को मिलाकर राज्य में गणेश प्रतिमाओं की कुल संख्या करीब 3.5 लाख से 4 लाख तक होने का अनुमान लगाया गया है।

    इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों की भारी भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालु जुलूस के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    हादसों में घायल हुए 26 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, मृतकों की घटनाओं और हादसों के कारणों को लेकर पूरी जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहे हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान हुई इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बीच हुए इन हादसों ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। आने वाले समय में जांच और विस्तृत जानकारी के बाद घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • कांग्रेस ने मधु गौड़ याश्की को दी बड़ी जिम्मेदारी, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया

    कांग्रेस ने मधु गौड़ याश्की को दी बड़ी जिम्मेदारी, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया

    हैदराबाद: ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने मधु गौड़ याश्की को ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया है। AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को एक प्रेस बयान में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने याश्की को ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया है।

    बयान में कहा गया है कि पार्टी निवर्तमान चेयरपर्सन प्रवीण चक्रवर्ती के योगदान की सराहना करती है। तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता, मधु गौड़ याश्की के पास दशकों का अनुभव है और वे पार्टी आलाकमान के साथ करीबी तालमेल के लिए जाने जाते हैं। उच्च शिक्षित मधु गौड़ याश्की पिछड़े वर्गों के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और अपने सभ्य और सौम्य व्यवहार के लिए भी जाने जाते हैं। अलग तेलंगाना राज्य के प्रबल समर्थक, वे पहली बार 2004 में निज़ामाबाद से लोकसभा के लिए चुने गए थे, जिसमें उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी के सैयद यूसुफ अली को 1.37 लाख से अधिक वोटों से हराया था। उन्होंने 2009 में तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के बिगाला गणेश गुप्ता को 60,000 से अधिक वोटों से हराकर अपनी लोकसभा सीट बरकरार रखी।

    याश्की ने कांग्रेस संसदीय दल के डिप्टी चीफ व्हिप के रूप में भी काम किया। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनावों में, वे पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता से हार गए, जिन्होंने तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। याश्की ने 2019 में फिर से चुनाव लड़ा लेकिन काफी पीछे रहते हुए तीसरे स्थान पर रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के धर्मपुरी अरविंद ने यह सीट जीती और TRS की अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी के. कविता को हराया।

    2023 में, याश्की को तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने 2023 के चुनावों में तेलंगाना विधानसभा के लिए असफल चुनाव लड़ा। पार्टी ने याश्की को हैदराबाद के निर्वाचन क्षेत्रों में से एक, LB नगर से मैदान में उतारा था। हालांकि, वे भारत राष्ट्र समिति (BRS) और BJP उम्मीदवारों के बाद तीसरे स्थान पर रहे। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के तत्कालीन अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्हें 2024 में राज्य कांग्रेस प्रमुख के पद के लिए प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा था। हालांकि, पार्टी ने महेश कुमार गौड़ को TPCC प्रमुख चुना।

  • रेवंत रेड्डी ने ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति पर उठे सवाल खारिज किए, बोले मोदी और शाह से कम नहीं देशभक्ति

    रेवंत रेड्डी ने ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति पर उठे सवाल खारिज किए, बोले मोदी और शाह से कम नहीं देशभक्ति

    नई दिल्ली ।तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की देशभक्ति को लेकर खुलकर उनका बचाव किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों नेताओं की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देशभक्ति और देश की रक्षा के मामले में असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कम नहीं हैं।

    रेवंत रेड्डी ने यह बयान हैदराबाद में चंचलगुडा-संतोषनगर चार लेन वाले नवनिर्मित स्टील फ्लाईओवर के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने ओवैसी भाइयों को देश के खिलाफ बताया है, लेकिन वह इस धारणा को स्वीकार नहीं करते। उनके मुताबिक राजनीतिक विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की देशभक्ति पर सवाल खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने असदुद्दीन ओवैसी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय सैनिकों के समर्थन में आयोजित रैली में कांग्रेस नेताओं के साथ शामिल हुए थे। उन्होंने अभियान में शामिल सैनिकों की सलामती के लिए प्रार्थना भी की थी। रेवंत रेड्डी ने इसी आधार पर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ओवैसी भाइयों की प्रतिबद्धता को लेकर किसी को उंगली नहीं उठानी चाहिए।

    रेवंत रेड्डी ने कहा कि राजनीतिक टिप्पणियां अलग-अलग हो सकती हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के अपने राजनीतिक विचार हो सकते हैं। हालांकि, जब बात देशभक्ति और देश की रक्षा की आती है तो ओवैसी भाइयों की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के मामले में दोनों पीछे हटने वाले नहीं हैं।

    इस दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी तेलंगाना की राजनीति को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि उनकी पार्टी का समर्थन किसी राजनीतिक दल को नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को है। ओवैसी के इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    रेवंत रेड्डी और ओवैसी के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर तेलंगाना में पहले भी चर्चा होती रही है। AIMIM का प्रभाव मुख्य रूप से हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में माना जाता है, जबकि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ दल है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच से ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति का बचाव करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से असदुद्दीन ओवैसी की देशभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से कम देशभक्त नहीं हैं। उन्होंने अपने बयान में अकबरुद्दीन ओवैसी को भी शामिल करते हुए दोनों भाइयों की देश के प्रति प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया।

    रेवंत रेड्डी के बयान ने तेलंगाना की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि राजनीतिक मतभेदों को देशभक्ति के आकलन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ओवैसी भाइयों के सार्वजनिक आचरण और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों के समर्थन में उनकी भागीदारी का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।

  • हैदराबाद विजयवाड़ा हाईवे पर भीषण बस हादसा, कंटेनर की लोहे की छड़ों ने मचाई तबाही, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

    हैदराबाद विजयवाड़ा हाईवे पर भीषण बस हादसा, कंटेनर की लोहे की छड़ों ने मचाई तबाही, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

    नई दिल्ली ।तेलंगाना के सूर्यपेट जिले में बुधवार को हैदराबाद विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। यात्रियों से भरी बस की कंटेनर ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद ट्रक में लदी लोहे की लंबी छड़ें बस के अगले हिस्से को चीरती हुई अंदर तक घुस गईं। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 यात्री घायल हुए हैं।

    बताया गया कि बस में कुल 42 यात्री सवार थे। हादसा इतना गंभीर था कि बस के आगे के हिस्से में बैठे यात्रियों को संभलने या बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। लोहे की छड़ें सीधे बस के अगले हिस्से में घुसने के कारण वहां बैठे यात्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के साथ स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। घायल यात्रियों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस ने हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं 20 अन्य यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है। हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए यात्रियों की विस्तृत पहचान तथा अन्य संबंधित जानकारी अधिकारियों की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    घटना की जानकारी सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

    पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू करते हुए दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में बस की तेज रफ्तार और चालक को स्टीयरिंग पर झपकी आने की संभावना की चर्चा है। हालांकि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले हादसे की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

    दुर्घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है। बस और कंटेनर की स्थिति, सड़क पर वाहनों की गति तथा हादसे से पहले दोनों वाहनों की गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। इसके अलावा चालक की स्थिति और अन्य परिस्थितियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    हैदराबाद विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे मार्गों पर भारी वाहनों और यात्री वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी तथा सावधानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस हादसे में कंटेनर में लदी लोहे की छड़ों के बस में घुसने से दुर्घटना की गंभीरता और बढ़ गई।

    फिलहाल पुलिस हादसे की सटीक वजह पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार, चालक की थकान और भारी वाहनों में लदे सामान की सुरक्षित व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।

  • देश में 1,800 किलोमीटर नए एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी, 7,000 करोड़ रुपये के निवेश से मजबूत होगी गैस आपूर्ति

    देश में 1,800 किलोमीटर नए एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी, 7,000 करोड़ रुपये के निवेश से मजबूत होगी गैस आपूर्ति

    नई दिल्ली । देश में रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक मजबूत, सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड ने लगभग 1,800 किलोमीटर लंबे नए एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क के विकास को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 7,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। नई पाइपलाइनों के जरिए एलपीजी की लंबी दूरी तक आपूर्ति को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    स्वीकृत परियोजनाएं तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा में विकसित की जाएंगी। इनका उद्देश्य देश के एलपीजी परिवहन ढांचे का विस्तार करना और विभिन्न क्षेत्रों में रसोई गैस की आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाना है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिसके बाद इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाता है।

    नई पाइपलाइन परियोजनाओं के पूरा होने से आयातित एलपीजी को संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पाइपलाइन के जरिए परिवहन से सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होगी और एलपीजी की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले टैंकरों की संख्या में भी कमी आ सकती है।

    स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में तेलंगाना के चेरलापल्ली से महाराष्ट्र के नागपुर तक 556 किलोमीटर लंबी एलपीजी पाइपलाइन शामिल है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी से उत्तराखंड के सितारगंज तक 611 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन विकसित की जाएगी। महाराष्ट्र के शिकरापुर से गोवा और कर्नाटक के हुबली तक 633 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन परियोजना को भी मंजूरी दी गई है।

    इन सभी परियोजनाओं के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी गेल इंडिया लिमिटेड संभालेगी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड द्वारा अधिकृत सामान्य वाहक एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क की कुल लंबाई करीब 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगी। इस तरह देश के अधिकृत एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग 23.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

    यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब देश में एलपीजी के सुरक्षित और कम लागत वाले परिवहन के लिए पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। इससे पहले कांडला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। लगभग 2,757 किलोमीटर लंबी यह परियोजना देश की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन परियोजना मानी जाती है।

    नियामक के अनुसार, एलपीजी को पाइपलाइन के माध्यम से परिवहन करना सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर विकल्प है। सड़क परिवहन में बड़ी संख्या में टैंकरों की आवाजाही होती है, जबकि पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से इस निर्भरता को कम किया जा सकता है।

    टैंकरों की आवाजाही घटने से सड़क सुरक्षा में सुधार और परिवहन व्यवस्था पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत और ईंधन खपत में कमी आ सकती है। पाइपलाइन आधारित परिवहन से कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलने की संभावना है।

    नियामक बोर्ड का दीर्घकालिक लक्ष्य एलपीजी को बॉटलिंग संयंत्रों तक पहुंचाने में सड़क परिवहन पर निर्भरता को न्यूनतम करना है। छह राज्यों में प्रस्तावित नई परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इनके पूरा होने से देश के एलपीजी परिवहन ढांचे का विस्तार होने के साथ ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।

  • तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द, केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का आरोप लगाकर सरकार पर साधा निशाना

    तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द, केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का आरोप लगाकर सरकार पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा रद्द हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया है कि केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिलने के कारण मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की अमेरिका यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। रेवंत रेड्डी फिलहाल लंदन के दौरे पर हैं और अमेरिका की यात्रा के बजाय लंदन से सीधे हैदराबाद लौट सकते हैं।

    मुख्यमंत्री का विदेश दौरा राज्य में निवेश, शिक्षा और विभिन्न संस्थानों के साथ संभावित सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लंदन के बाद रेवंत रेड्डी को 24 अगस्त को अमेरिका पहुंचना था। वहां कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित थीं। दौरे में तेलंगाना राइजिंग टीम के अधिकारी भी शामिल थे।

    जानकारी के मुताबिक, रेवंत रेड्डी 20 अगस्त को लंदन पहुंचे थे। लंदन प्रवास के दौरान उनके ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और लंदन बिजनेस स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने का कार्यक्रम था। इन मुलाकातों के जरिए शिक्षा, कौशल, निवेश और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत की योजना बनाई गई थी।

    लंदन के बाद अमेरिका में भी मुख्यमंत्री के कई कार्यक्रम निर्धारित थे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी एमआईटी में जाने की योजना थी। इसके अलावा बोस्टन में 25 अगस्त को एक टीम के साथ बातचीत और 26 अगस्त को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित था।

    मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, विदेश मंत्रालय से आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण अमेरिका की यात्रा रद्द करनी पड़ी। कार्यालय ने कहा कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना राइजिंग प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका जाने की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।

    अमेरिका दौरे के दौरान जिन संस्थानों और प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित थीं, उनमें से कुछ कार्यक्रमों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय आगे की तारीखों के लिए निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में कार्यक्रमों को पुनर्निर्धारित करने के लिए कहा गया है।

    मुख्यमंत्री के इस दौरे की पृष्ठभूमि में तेलंगाना में निवेश आकर्षित करने और राज्य के विकास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को मजबूत करने की कोशिश भी देखी जा रही थी। प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा के दौरान उद्योग, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद की संभावना थी।

    रेवंत रेड्डी 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे। इसके बाद वह 20 अगस्त को लंदन के लिए रवाना हुए। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार उनकी विदेश यात्रा के बाद 30 अगस्त को हैदराबाद लौटने की योजना थी। हालांकि अमेरिका दौरा रद्द होने के बाद अब उनकी वापसी की समय-सारणी में बदलाव हो सकता है।

    अमेरिकी यात्रा को लेकर अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा केंद्र और तेलंगाना सरकार के बीच राजनीतिक मतभेदों को लेकर भी चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अनुमति नहीं मिलने की बात कही है, जबकि इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार के आगामी विदेश संपर्क कार्यक्रमों में भी बदलाव की संभावना बनी हुई है।

  • जनआंदोलन से राजनीति तक का सफर कितना सफल, कई दलों ने बदली सत्ता तो कई उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे

    जनआंदोलन से राजनीति तक का सफर कितना सफल, कई दलों ने बदली सत्ता तो कई उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे

    नई दिल्ली । हाल के दिनों में चर्चा में रही कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर चल रहे अपने विरोध प्रदर्शन को समाप्त कर दिया है। आंदोलन का केंद्र पेपर लीक का मुद्दा था और इसकी प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़ी थी। मांग पूरी होने के बाद इस आंदोलन को समर्थकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा है। हालांकि अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या कोई आंदोलन राजनीतिक दल का रूप लेकर लंबे समय तक प्रभावी भूमिका निभा सकता है या उसकी सफलता केवल आंदोलन तक ही सीमित रह जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी आंदोलन की लोकप्रियता और राजनीतिक सफलता दो अलग-अलग चरण होते हैं। किसी मुद्दे पर जनता को एकजुट करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन उसी समर्थन को स्थायी राजनीतिक आधार में बदलना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए मजबूत संगठन, स्पष्ट विचारधारा, सक्षम नेतृत्व और लगातार जनसंपर्क की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि सभी आंदोलन राजनीतिक सफलता में परिवर्तित नहीं हो पाते।

    भारत में आम आदमी पार्टी को आंदोलन से निकले सबसे प्रमुख राजनीतिक दलों में गिना जाता है। भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन से उभरे इस दल ने राजनीति में प्रवेश के बाद कम समय में दिल्ली में अपनी मजबूत पहचान बनाई। शुरुआती चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और लगातार कई वर्षों तक सत्ता में बनी रही। हालांकि समय के साथ उसे राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन यह उदाहरण बताता है कि यदि आंदोलन को मजबूत संगठनात्मक ढांचे में बदला जाए तो दीर्घकालिक राजनीतिक सफलता संभव है।

    तेलंगाना आंदोलन भी इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक चले जन आंदोलन ने व्यापक जनसमर्थन हासिल किया। इसी आंदोलन के आधार पर गठित राजनीतिक नेतृत्व ने राज्य गठन के बाद सत्ता प्राप्त की और लंबे समय तक सरकार का नेतृत्व किया। इससे स्पष्ट होता है कि जब आंदोलन किसी व्यापक जनभावना से जुड़ा हो और उसे प्रभावी राजनीतिक दिशा मिले तो वह चुनावी सफलता में बदल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लंबे संघर्ष से उभरे अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ने लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित होने के बाद सत्ता संभाली और देश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। वहीं ब्राजील में मजदूरों और ट्रेड यूनियनों के आंदोलन से बनी वर्कर्स पार्टी ने भी समय के साथ राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया और उसके नेतृत्व ने देश की सर्वोच्च कार्यकारी जिम्मेदारी संभाली।

    इसके विपरीत कई ऐसे आंदोलन भी रहे जिनसे राजनीतिक दल तो बने, लेकिन वे अपेक्षित जनसमर्थन या चुनावी सफलता हासिल नहीं कर सके। कुछ दल शुरुआती लोकप्रियता के बावजूद संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व संकट, आंतरिक मतभेद या बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण सीमित प्रभाव तक सिमट गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल आंदोलन की सफलता किसी राजनीतिक दल की दीर्घकालिक सफलता की गारंटी नहीं होती।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए राजनीतिक दल का भविष्य उसके आंदोलन से अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि वह जनता के भरोसे को कितनी निरंतरता के साथ बनाए रखता है। यदि संगठन मजबूत हो, नीतियां स्पष्ट हों और नेतृत्व विश्वसनीय बना रहे तो आंदोलन से निकला दल भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय राजनीति में स्थायी स्थान बना सकता है। वहीं इन तत्वों के अभाव में शुरुआती लोकप्रियता समय के साथ कमजोर पड़ सकती है।