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  • इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद

    इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद


    नई दिल्ली।
    विमान कंपनी इंडिगो (Airline company Indigo) ने जुलाई महीने से छह डेस्टिनेशंस (Six Destinations) के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है. विमानन कंपनी ने ये कदम कमजोर मांग और लगातार बढ़ रही ऑपरेटिंग कॉस्ट (Increasing Operating Costs) को देखते हुए उठाया है।

    इंडिगो का ये फैसला गर्मियों की छुट्टियों मौजूदा सीजन में आया है. इंडिगो के मुताबिक, मलेशिया के लांगकावी, थाईलैंड के क्राबी और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी के लिए उड़ानें 1 जुलाई से सस्पेंड यानी बंद कर दी जाएंगी। इसके अलावा, हांगकांग और चीन के शंघाई, कंबोडिया के सिएम रीप के लिए उड़ानों को 3 जुलाई से रोक दिया जाएगा।

    इन सभी छह रूटों पर उड़ानों का सस्पेंशन 30 सितंबर तक लागू रहेगा. ये सभी रूट भारतीय यात्रियों के बीच काफी पॉपुलर हैं. ये रूट दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराते हैं।


    अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी बुकिंग

    इंडिगो ने बताया है कि इन सभी छह रूटों के लिए टिकटों की बुकिंग 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू कर दी जाएगी. हालांकि, अगर मार्किट में मांग में सुधार होता है, तो इन सेवाओं को तय समय से पहले भी बहाल किया जा सकता है. एयरलाइंस ने इस कदम को इंटरनेशनल नेटवर्क में एक सीमित और छोटा सा बदलाव बताया है।

    कंपनी के मुताबिक, साल की ये तिमाही आमतौर पर यात्रा के लिहाज से कमजोर होती है. इसके साथ ही मौजूदा समय में लागत का माहौल भी काफी चुनौतियों से भरा है. अस्थायी कटौती के बावजूद एयरलाइंस ने कहा है कि वो हर हफ्ते 1,800 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रखेगी. कंपनी अपने विदेशी नेटवर्क के बड़े हिस्से को पहले की तरह ही बरकरार रख रही है।

    इंडिगो ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर कोई भी अगला फैसला लेने से पहले मार्किट की कंडीशन, बढ़ती परिचालन लागत और एयरस्पेस के प्रतिबंधों पर नजर रखेगी। इस फैसले से प्रभावित होने वाले यात्रियों को पहले से सूचित किया जाएगा. यात्रियों को रिफंड या दूसरे उपलब्ध विकल्प भी दिए जाएंगे.


    ईरान युद्ध के चलते मैनचेस्टर उड़ान पर भी लगा ब्रेक

    दो दिन पहले ही इंडिगो ने 31 अगस्त से मैनचेस्टर के लिए अपनी उड़ानें बंद करने की बात कही थी. एयरलाइंस ने इसके पीछे ईरान युद्ध के चलते इंटरनेशनल एयरस्पेस में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और बढ़ती परिचालन लागत का हवाला दिया था.

    कंपनी का कहना है कि इन वजहों से ये रूट कमर्शियल रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा था. इंडिगो के मुताबिक, कुछ एयर कॉरिडोर्स के लगातार बंद रहने की वजह से उड़ानों के समय और खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे लंबी दूरी की हवाई सेवाओं को जारी रखना मुश्किल हो गया है.

    इंडिगो फिलहाल दिल्ली और मुंबई से ब्रिटेन के मैनचेस्टर के लिए उड़ानों का संचालन करती है. इस रूट की शुरुआत पिछले साल जुलाई में एयरलाइंस की लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना के तहत की गई थी।

  • Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट

    Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट


    ओटावा।
    कनाडा (Canada) में आने वाले महीनों में बिना वैध दस्तावेजों (Without valid Documents) के रह रहे प्रवासियों (Migrants.) की संख्या में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण लाखों अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट (Temporary Work Permits and Study Permits) का समाप्त होना है, जबकि नई वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास के रास्ते लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कनाडा में रह रहे लाखों अस्थायी निवासियों, विशेष रूप से भारतीयों के लिए एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।

    मिसिसॉगा (कनाडा) स्थित इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सेराह के अनुसार, 2026 के मध्य तक कम से कम 10 लाख भारतीय अपनी कानूनी स्थिति खोने के जोखिम में हैं। यह अनुमान इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि 2025 के अंत तक लगभग 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में आगे 9.27 लाख वर्क परमिट की समाप्ति होने वाली है। ये आंकड़े सेराह ने शेयर किए हैं। सेराह ने चेतावनी दी है कि कनाडा में कुल मिलाकर 20 लाख लोग अवैध रूप से रहने वाले हो सकते हैं, जिनमें से आधे भारतीय होंगे। उन्होंने इसे “बहुत रूढ़िवादी अनुमान” बताया और कहा कि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त हो रहे हैं, साथ ही कई शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    वैध दर्जा समाप्त होने का खतरा

    वर्क परमिट की अवधि समाप्त होते ही संबंधित व्यक्ति का कनाडा में वैध दर्जा भी खत्म हो जाता है, जब तक कि वह नया वीजा हासिल न कर ले या स्थायी निवास की ओर ट्रांजिशन न कर पाए। हालांकि, कनाडा सरकार ने हाल के समय में अस्थायी श्रमिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों को सख्त किया है। साथ ही शरण आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए भी नए उपाय लागू किए गए हैं, जिससे वैध रास्ते और सीमित हो गए हैं।


    2026 में ‘बॉटलनेक’ की चेतावनी

    कंवर सेराह ने चेतावनी दी कि कनाडा ने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आउट ऑफ स्टेटस होते नहीं देखा है। उनके अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3,15,000 परमिट समाप्त होने वाले हैं, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम में गंभीर बॉटलनेक पैदा होगा। तुलना करें तो 2025 की आख़िरी तिमाही में यह संख्या लगभग 2,91,000 थी।

    आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सरकार ने टेम्परेरी रेजिडेंट्स की संख्या घटाने का लक्ष्य रखा है। 2026-2028 इमिग्रेशन लेवल्स प्लान में टेम्परेरी रेजिडेंट्स को 2026 में 3.85 लाख तक सीमित किया गया है, जो 2025 से 43% कम है। इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट भी आधे से कम हो गए हैं।

    सेराह का अनुमान है कि मध्य-2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग बिना वैध कानूनी दर्जे के रह रहे हो सकते हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत भारतीय नागरिक हो सकते हैं। उन्होंने इसे बहुत ही सतर्क अनुमान बताया, क्योंकि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त होंगे और बड़ी संख्या में शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    ग्रेटर टोरंटो एरिया में सामाजिक असर

    बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या का असर अब ग्रेटर टोरंटो एरिया के कुछ हिस्सों में दिखने लगा है। खासकर ब्रैंपटन और कैलेडन जैसे इलाकों में जंगलनुमा क्षेत्रों में टेंट कॉलोनियां उभर आई हैं, जहां कथित तौर पर बिना वैध दर्जे के लोग रह रहे हैं।

    ब्रैम्पटन-आधारित पत्रकार निति चोपड़ा, जिन्होंने ऐसी ही एक टेंट सिटी को डॉक्यूमेंट किया, उनका कहना है कि अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार कई भारतीय मूल के आउट-ऑफ-स्टेटस प्रवासी कैश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ फ्लाई-बाय-नाइट ऑपरेटर सुविधा के लिए शादियों की व्यवस्था करने वाले दफ्तर खोल रहे हैं।


    विरोध प्रदर्शन और मांगें

    इस बीच, श्रमिक अधिकारों की वकालत करने वाला समूह नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जनवरी में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क के टोरंटो-आधारित कार्यकर्ता बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर मोमेंटम बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिना वैध रास्तों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को उजागर किया जा सके।

    नेटवर्क का अभियान नारा- काम करने के लिए काफी अच्छा, रहने के लिए काफी अच्छा – इस मांग को दर्शाता है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें देश में कानूनी रूप से बने रहने का अवसर भी मिलना चाहिए।


    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत स्तर पर जल्द समाधान नहीं खोजा गया, तो बढ़ती अवैध आबादी न सिर्फ मानवीय संकट पैदा करेगी, बल्कि श्रम बाज़ार, आवास और सामाजिक सेवाओं पर भी दबाव बढ़ाएगी। कनाडा सरकार के लिए आने वाला समय इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित रखने की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।