Tag: Test cricket

  • रिकल्टन के शतक और मुल्डर की पारी ने पलटा मैच, आखिरी दिन सीरीज जीतने के लिए दोनों टीमें आमने-सामने

    रिकल्टन के शतक और मुल्डर की पारी ने पलटा मैच, आखिरी दिन सीरीज जीतने के लिए दोनों टीमें आमने-सामने


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच केपटाउन में खेला जा रहा तीसरा टेस्ट रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को मुकाबले का आखिरी दिन है और दोनों टीमों के सामने सीरीज जीतने की चुनौती होगी। दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज रयान रिकल्टन को उम्मीद है कि मैच का नतीजा जरूर निकलेगा। उनका मानना है कि मुकाबला जीत या हार के साथ समाप्त होगा और ड्रॉ की संभावना बेहद कम है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पिच की धीमी रफ्तार और गेंद की स्थिति को देखते हुए आखिरी दिन तीनों तरह के नतीजे संभव हैं।

    चौथे दिन का खेल समाप्त होने के बाद रिकल्टन ने कहा कि पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत खराब नहीं हुई है लेकिन इसकी धीमी गति के कारण रन बनाना आसान नहीं है। गेंद भी नरम हो चुकी है जिससे बल्लेबाजों के लिए फील्डरों को चकमा देकर रन निकालना मुश्किल हो रहा है। उनके मुताबिक नई गेंद से बल्लेबाजों को रन बनाने के मौके मिल सकते हैं और गेंदबाजों को विकेट हासिल करने में भी मदद मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया के सामने लक्ष्य हासिल करने की चुनौती होगी क्योंकि उसे पूरे दिन एक ऐसे विकेट पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है जो लगातार धीमा होता जा रहा है।

    रिकल्टन ने दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच शुकरी कॉनराड और कप्तान टेम्बा बावुमा की सोच की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोच हमेशा सकारात्मक रुख अपनाते हैं और टीम को भरोसा दिलाते हैं कि उसके पास उपलब्ध संसाधन मुकाबला जीतने के लिए पर्याप्त हैं। कप्तान बावुमा भी खिलाड़ियों को हर दिन कुछ खास करने का अवसर मिलने की बात कहते हैं। रिकल्टन के अनुसार आखिरी दिन किसी खिलाड़ी के पास टीम के लिए यादगार प्रदर्शन करने का मौका होगा।

    मैच की स्थिति पर नजर डालें तो दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 329 रन बनाए थे। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 429 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 100 रन की बढ़त हासिल कर ली। दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने 181 रन पर 5 विकेट गंवा दिए थे। ऐसे मुश्किल समय में रयान रिकल्टन और वियान मुल्डर ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 154 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को 335 रन तक पहुंचाया।

    इस साझेदारी के दौरान रिकल्टन ने शानदार शतक लगाया। वह 101 रन बनाकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए। उनके आउट होने के बाद मुल्डर ने अकेले संघर्ष जारी रखा और आखिरी विकेट के रूप में आउट होने से पहले 115 रन की शतकीय पारी खेली। दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी 387 रन पर समाप्त हुई। टीम अगर रिकल्टन के रन आउट होने के बाद भी कुछ देर टिक पाती और निचले क्रम से सहयोग मिलता तो स्कोर और बड़ा हो सकता था।

    पहली पारी में मिली 100 रन की बढ़त के बाद दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 288 रन का लक्ष्य रखा है। आखिरी दिन दक्षिण अफ्रीका की कोशिश ऑस्ट्रेलिया के सभी 10 विकेट हासिल करने की होगी जबकि कंगारू टीम लक्ष्य तक पहुंचने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है। ऐसे में केपटाउन टेस्ट जीतने वाली टीम सीरीज अपने नाम कर लेगी। यही वजह है कि मुकाबले का आखिरी दिन दोनों टीमों के लिए बेहद अहम और रोमांचक रहने वाला है।

  • ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका का जोरदार पलटवार, बावुमा की कप्तानी पारी से मिली बड़ी जीत, बोले- हर प्रदर्शन पर रहती है दुनिया की नजर

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका का जोरदार पलटवार, बावुमा की कप्तानी पारी से मिली बड़ी जीत, बोले- हर प्रदर्शन पर रहती है दुनिया की नजर


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए पारी और 31 रन से बड़ी जीत दर्ज की और तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-1 से बराबरी हासिल कर ली। इस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा ने 179 रन की यादगार पारी खेली जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा ने वापसी करते हुए गेंद से अहम योगदान दिया। जीत के बाद बावुमा ने कहा कि मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन के तौर पर सभी चाहते हैं कि दक्षिण अफ्रीका मैदान पर उसी स्तर का प्रदर्शन करे और टीम के हर कदम पर लोगों की नजर रहती है।

    मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बावुमा ने कहा कि टीम से विश्व चैंपियन की तरह खेलने की अपेक्षा की जाती है। उनके मुताबिक टीम को अपने प्रदर्शन के साथ इन उम्मीदों पर भी खरा उतरना होता है। उन्होंने माना कि मजबूत विपक्षी टीम के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों को अपनी क्षमता और चुनौतियों का बेहतर अंदाजा मिलता है। बावुमा के इस बयान से साफ है कि दक्षिण अफ्रीका अपनी प्रतिष्ठा के साथ मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने के दबाव को समझती है और हर मुकाबले में मजबूत खेल दिखाने पर ध्यान दे रही है।

    दूसरे टेस्ट में तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा की वापसी भी दक्षिण अफ्रीका के लिए निर्णायक साबित हुई। चोट के कारण वह पहले टेस्ट में नहीं खेल पाए थे और उनकी गैरमौजूदगी में टीम को हार का सामना करना पड़ा था। दूसरे मैच में फिट होकर लौटे रबाडा ने छह विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। बावुमा ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि रबाडा गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करने की जिम्मेदारी लेते हैं। इससे बाकी खिलाड़ियों को अपनी भूमिका बेहतर तरीके से निभाने का मौका मिलता है। उन्होंने रबाडा को दूसरे खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा देने वाला खिलाड़ी भी बताया।

    मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत आसान नहीं रही। टीम ने पहली पारी में महज 110 रन पर छह विकेट गंवा दिए थे और एक समय बड़ा स्कोर बनाना मुश्किल दिखाई दे रहा था। लेकिन कप्तान बावुमा ने मोर्चा संभाला और 179 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को संकट से बाहर निकाला। मार्को जानसेन ने 85 रन बनाए जबकि सिमोन हार्मर ने 82 रन का योगदान दिया। इन पारियों की मदद से दक्षिण अफ्रीका ने नौ विकेट पर 425 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। शुरुआती झटकों के बाद टीम की इस वापसी ने मैच का रुख बदल दिया।

    लक्ष्य के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी केवल 99 रन पर सिमट गई। दक्षिण अफ्रीका की ओर से मार्को जानसेन ने पांच विकेट लेकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाया। बड़ी बढ़त मिलने के कारण ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन खेलना पड़ा। दूसरी पारी में ट्रेविस हेड ने 121 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली और टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारियां नहीं कर सके। पूरी टीम 295 रन पर आउट हो गई और दक्षिण अफ्रीका ने पारी तथा 31 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने सीरीज में वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया है। बावुमा की कप्तानी पारी और रबाडा की प्रभावी गेंदबाजी टीम की जीत के प्रमुख कारण रहे। अब तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का निर्णायक मुकाबला दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण होगा। दक्षिण अफ्रीका की कोशिश इस लय को बरकरार रखने की होगी जबकि ऑस्ट्रेलिया सीरीज जीतने के लिए अपनी कमजोरियों को दूर करने उतरेगा।

  • पार्थिव पटेल के साथ खेलकर शुरू हुआ सफर, न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जीत रावल ने लिया संन्यास

    पार्थिव पटेल के साथ खेलकर शुरू हुआ सफर, न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जीत रावल ने लिया संन्यास


    नई दिल्ली। भारतीय मूल के न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज जीत रावल ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। 38 वर्षीय रावल का क्रिकेट सफर कई मायनों में खास रहा। गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे रावल ने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए न्यूजीलैंड का रुख किया और वहां अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत लंबा नहीं रहा लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। क्रिकेट से विदाई के बाद अब वह चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना काम जारी रखेंगे।

    जीत रावल का जन्म 22 सितंबर 1988 को अहमदाबाद में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेले। इस सपने को साकार करने के लिए परिवार ने बड़ा फैसला लिया और न्यूजीलैंड में बस गया। रावल ने वहां क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाई और न्यूजीलैंड की अंडर-19 टीम तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऑकलैंड और नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की ओर से खेलते हुए लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। उनके लिए न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थी बल्कि उनके पिता के वर्षों पुराने सपने का पूरा होना भी था।

    नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स क्रिकेट एसोसिएशन को दिए गए इंटरव्यू में रावल ने अपने संन्यास के फैसले पर संतुष्टि जाहिर की। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के लिए खेलना उनका और उनके पिता का बचपन का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता ने पूरे परिवार को न्यूजीलैंड ले जाने जैसा बड़ा कदम उठाया था। राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात रही। अब पेशेवर क्रिकेट को अलविदा कहते हुए वह अपने करियर के इस अध्याय को संतोष के साथ समाप्त करना चाहते हैं।

    रावल की कहानी का एक दिलचस्प पहलू भारत में बिताए उनके स्कूल के दिन भी हैं। न्यूजीलैंड जाने से पहले वह विद्यानगर स्कूल में पढ़ते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल से हुई थी। दोनों स्कूल क्रिकेट में साथ खेलते थे और पारी की शुरुआत करते थे। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि दोनों खिलाड़ी आगे चलकर अलग-अलग क्रिकेट सफर तय करेंगे। पार्थिव पटेल ने भारतीय टीम में अपनी पहचान बनाई जबकि रावल ने न्यूजीलैंड की टेस्ट टीम का प्रतिनिधित्व किया।

    रावल ने नवंबर 2016 में 28 वर्ष की उम्र में न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उन्होंने देश के लिए 24 टेस्ट मैच खेले। टेस्ट की 39 पारियों में उनके बल्ले से एक शतक और सात अर्धशतकों की मदद से 1143 रन निकले। उन्हें न्यूजीलैंड की ओर से वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।

    प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रावल ने 164 मैचों में 24 शतक और 50 अर्धशतक लगाते हुए 10432 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर 256 रन रहा। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 96 मैचों में 2714 रन बनाए जिसमें चार शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं 76 टी20 मुकाबलों में उन्होंने आठ अर्धशतकों के साथ 1484 रन बनाए। नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के क्रिकेट जनरल मैनेजर इयान सैंडब्रुक ने भी उन्हें अनुभवी खिलाड़ी और शानदार नेतृत्वकर्ता बताते हुए उनकी तारीफ की। उनके मुताबिक टीम को रावल के अनुभव और शांत नेतृत्व की कमी खलेगी। क्रिकेट से संन्यास के बाद रावल अब चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना पेशेवर सफर आगे बढ़ाएंगे।

  • ऑस्ट्रेलिया को लगा बड़ा झटका, पेट की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहला टेस्ट मिस कर सकते हैं कैमरून ग्रीन

    ऑस्ट्रेलिया को लगा बड़ा झटका, पेट की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहला टेस्ट मिस कर सकते हैं कैमरून ग्रीन


    नई दिल्ली। मेड में पहला टेस्ट मुकाबला शुरू होने वाला है। इस अहम मुकाबले से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता बढ़ गई है। स्टार ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन के पहले टेस्ट से बाहर बैठने की संभावना जताई जा रही है। ग्रीन फिलहाल पेट की मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या से उबर रहे हैं और उनकी फिटनेस को लेकर टीम कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

    कैमरून ग्रीन को यह चोट साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले के दौरान लगी थी। बताया गया कि हुक शॉट खेलने के प्रयास में उनके पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आया था। इसके बाद ग्रीन को ऑस्ट्रेलिया के दो दिवसीय वार्म अप मुकाबले में भी नहीं उतारा गया। उन्हें फिलहाल केवल हल्की फिजिकल कंडीशनिंग तक सीमित रखा गया है। ऐसे में पहले टेस्ट में उनकी उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    ग्रीन की चोट ऑस्ट्रेलिया के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह टीम में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में अहम भूमिका निभाते हैं। हालिया वनडे सीरीज के दौरान भी उन्हें कंधे में दर्द की समस्या थी जिसके कारण उनकी गेंदबाजी का वर्कलोड सीमित किया गया था। अब पेट की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों प्रभावित हो सकते हैं।

    ग्रीन के पहले टेस्ट से बाहर होने की स्थिति में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के उनके साथी कूपर कोनोली को प्लेइंग इलेवन में जगह मिल सकती है। कोनोली एक बैटिंग ऑलराउंडर हैं और मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी के साथ लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाजी का विकल्प भी देते हैं। डरबन की परिस्थितियों को देखते हुए उनका चयन ऑस्ट्रेलिया के लिए उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है।

    ग्रीन हाल के समय में बल्ले से अच्छी फॉर्म में भी नजर आए हैं। उन्होंने डार्विन में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट मुकाबले में शानदार शतक लगाया था। इस सीरीज में वह स्टीव स्मिथ के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल रहे थे। ऐसे में उनका बाहर होना टीम के बल्लेबाजी क्रम के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार ग्रीन की नजर दूसरे या तीसरे टेस्ट में वापसी पर हो सकती है। हालांकि उनकी अंतिम उपलब्धता उनकी फिटनेस और मेडिकल आकलन पर निर्भर करेगी। उनकी अनुपस्थिति की स्थिति में ब्यू वेबस्टर को भी प्लेइंग इलेवन में अपनी जगह मजबूत करने का मौका मिलेगा। ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज सैम हार्पर और अनुभवी निक मैडिनसन को भी शामिल किया गया है।

    अब सबकी नजर ग्रीन की फिटनेस रिपोर्ट पर होगी। ऑस्ट्रेलिया नहीं चाहेगा कि जल्द वापसी के प्रयास में उनकी चोट और गंभीर हो जाए। इसलिए पहले टेस्ट में उन्हें आराम देने का फैसला लिया जाता है या नहीं यह मुकाबले से पहले टीम मैनेजमेंट के लिए सबसे अहम सवाल बना हुआ है।

  • सचिन का वर्ल्ड रिकॉर्ड अब जो रूट के नाम 69 अर्धशतकों के साथ दिग्गज बल्लेबाजों की लिस्ट में मचाई हलचल

    सचिन का वर्ल्ड रिकॉर्ड अब जो रूट के नाम 69 अर्धशतकों के साथ दिग्गज बल्लेबाजों की लिस्ट में मचाई हलचल


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट ने टेस्ट क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में रूट ने ऐसी शानदार पारी खेली जिसने इंग्लैंड को जीत दिलाने के साथ उनके नाम एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी दर्ज कर दिया। रूट ने 69 गेंदों में नाबाद 62 रन बनाए और इसी पारी के दौरान उन्होंने भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का 13 साल पुराना रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। अब जो रूट टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।

    पाकिस्तान ने इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 130 रन का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने अपने शुरुआती विकेट गंवा दिए। इसके बाद जो रूट ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। रूट ने बिना किसी दबाव के रन बनाए और अपनी पारी को अर्धशतक में बदल दिया। जैसे ही उन्होंने 50 रन का आंकड़ा पार किया वैसे ही उनका नाम क्रिकेट इतिहास के एक खास रिकॉर्ड के साथ जुड़ गया।

    जो रूट की यह टेस्ट क्रिकेट में 69वीं फिफ्टी थी। इससे पहले सबसे ज्यादा टेस्ट अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था। सचिन ने अपने शानदार टेस्ट करियर में 68 अर्धशतक लगाए थे। रूट ने अब 69वीं फिफ्टी पूरी करके सचिन को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में वेस्टइंडीज के दिग्गज शिवनारायण चंद्रपॉल 66 अर्धशतकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। भारत के राहुल द्रविड़ और ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर के नाम 63 63 टेस्ट अर्धशतक दर्ज हैं।

    रूट की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सचिन तेंदुलकर का यह रिकॉर्ड लंबे समय से कायम था। सचिन ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था और उसके बाद से कई बड़े बल्लेबाज इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचे लेकिन कोई भी इसे पार नहीं कर सका। अब इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए यह मुकाम हासिल कर लिया है। उनकी बल्लेबाजी में निरंतरता उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है और यही वजह है कि वह टेस्ट क्रिकेट के कई बड़े रिकॉर्ड के आसपास लगातार नजर आ रहे हैं।

    पाकिस्तान के खिलाफ इसी मुकाबले में रूट ने एक और खास उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने एजबेस्टन के मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में अपने 1000 रन पूरे कर लिए। यह दुनिया का चौथा मैदान है जहां रूट ने टेस्ट क्रिकेट में एक हजार या उससे ज्यादा रन बनाए हैं। इससे पहले लॉर्ड्स मैनचेस्टर और द ओवल में भी वह यह कारनामा कर चुके हैं। उनके अलावा केवल जैक कैलिस और रिकी पोंटिंग ही चार अलग अलग मैदानों पर टेस्ट में 1000 से ज्यादा रन बनाने की उपलब्धि हासिल कर सके हैं।

    इस मुकाबले का नतीजा भी इंग्लैंड के लिए बेहद खास रहा। इंग्लैंड ने पाकिस्तान को आठ विकेट से हराकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया। पाकिस्तान पहली पारी में केवल 133 रन पर सिमट गया था। इसके बाद दूसरी पारी में टीम ने वापसी करते हुए 449 रन बनाए जिसमें शान मसूद ने 95 बाबर आजम ने 76 और रजाउल्लाह ने 81 रन की पारी खेली। इसके बावजूद इंग्लैंड की पहली पारी का 453 रन का स्कोर निर्णायक साबित हुआ और पाकिस्तान ने इंग्लैंड के सामने केवल 130 रन का लक्ष्य रखा।

    इंग्लैंड ने इस लक्ष्य को सिर्फ दो विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। जो रूट 62 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि जॉर्डन कॉक्स ने भी 59 रन की नाबाद पारी खेली। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पाकिस्तान का सीरीज में पूरी तरह सफाया कर दिया और जो रूट ने अपने बल्ले से एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।

  • हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ 14 पारियों में पूरे किए 1000 टेस्ट रन, लेकिन सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा बरकरार

    हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ 14 पारियों में पूरे किए 1000 टेस्ट रन, लेकिन सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा बरकरार

    नई दिल्ली । हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट में अर्धशतक लगाकर खास उपलब्धि हासिल की। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 14 पारियों में 1000 रन पूरे कर लिए। हालांकि, इस मामले में वह पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए।

    इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जा रहा है। पाकिस्तान की पहली पारी 133 रनों पर सिमटने के बाद इंग्लैंड की शुरुआत भी मुश्किल रही। मेजबान टीम ने 39 रन के स्कोर पर अपने तीन विकेट गंवा दिए थे।

    ऐसे समय में हैरी ब्रूक ने पारी को संभाला और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एमिलियो गे के साथ शतकीय साझेदारी की, जिससे इंग्लैंड को पाकिस्तान के खिलाफ पहली पारी में बढ़त हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद ब्रूक ने अपना अर्धशतक पूरा किया और इसी के साथ पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन भी पूरे कर लिए।

    हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ यह आंकड़ा नौ टेस्ट की 14 पारियों में हासिल किया है। पाकिस्तान के खिलाफ उनका बल्लेबाजी औसत 79.46 का है। इस उपलब्धि के बावजूद वह सबसे कम पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम नहीं कर सके।

    वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन सिर्फ 11 पारियों में पूरे किए थे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने भी पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन बनाने के लिए 11 पारियां ही ली थीं। इस तरह सहवाग और वॉर्नर इस सूची में संयुक्त रूप से शीर्ष पर बने हुए हैं।

    ब्रूक ने हालांकि कुछ दिग्गज बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग से कम पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन पूरे किए। दोनों बल्लेबाजों ने यह उपलब्धि 15-15 पारियों में हासिल की थी।

    इस सूची में उस्मान ख्वाजा भी 14 पारियों के साथ ब्रूक के बराबर हैं। वहीं सहवाग और वॉर्नर 11 पारियों के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद ख्वाजा और ब्रूक का नंबर आता है, जबकि संगकारा और पोंटिंग ने 15 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था।

    तीसरे टेस्ट के पहले दिन पाकिस्तान की टीम 133 रन पर ऑलआउट हो गई। इसके जवाब में इंग्लैंड ने दिन का खेल समाप्त होने तक चार विकेट खोकर 156 रन बना लिए थे। इस तरह मेजबान टीम को पहली पारी में 23 रन की बढ़त हासिल हो गई।

    हैरी ब्रूक अभी भी क्रीज पर मौजूद हैं, जिससे इंग्लैंड को अपनी बढ़त को और मजबूत करने की उम्मीद है। टीम की कोशिश दूसरे दिन अपने स्कोर को 300 रन के पार पहुंचाने की होगी। इससे पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ सकता है।

    तीन मैचों की सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले इंग्लैंड ने जीते हैं। ऐसे में टीम पहले ही सीरीज में अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है। अब उसकी नजर तीसरा टेस्ट जीतकर सीरीज में पाकिस्तान का क्लीन स्वीप करने पर है। ब्रूक की पारी इस मुकाबले में इंग्लैंड के लिए अहम साबित हो रही है।

  • लॉर्ड्स में भी पाकिस्तान की किरकिरी: इंग्लैंड ने 194 रन से रौंदा, टेस्ट इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा शर्मनाक हाल

    लॉर्ड्स में भी पाकिस्तान की किरकिरी: इंग्लैंड ने 194 रन से रौंदा, टेस्ट इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा शर्मनाक हाल


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लीड्स के बाद लॉर्ड्स में भी पाकिस्तान को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को 194 रनों से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। इस हार के साथ पाकिस्तान के नाम टेस्ट क्रिकेट में ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया जो टीम कभी नहीं चाहेगी। पाकिस्तान की पूरी टीम लगातार चौथी पारी में 200 रन के आंकड़े को पार करने में नाकाम रही और टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि पाकिस्तान लगातार चार पारियों में 200 से कम रन पर ऑलआउट हुआ है।

    लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान की टीम महज 110 रन पर सिमट गई थी। इससे पहले लीड्स टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान ने 171 रन बनाए थे जबकि दूसरी पारी में पूरी टीम सिर्फ 135 रन पर ढेर हो गई थी। लॉर्ड्स में दूसरी पारी में भी बल्लेबाजों ने निराश किया और 389 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की टीम 194 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह लगातार चार पारियों में पाकिस्तान का स्कोर 200 रन तक भी नहीं पहुंच सका। लॉर्ड्स टेस्ट की दोनों पारियों को मिलाकर पाकिस्तान के बल्लेबाज सिर्फ 529 गेंदों का सामना कर सके।

    पाकिस्तान की दूसरी पारी में सऊद शकील ने अकेले मोर्चा संभालने की कोशिश की। उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 97 रन की पारी खेली और टीम को लक्ष्य के करीब ले जाने का प्रयास किया लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी बल्लेबाज का पर्याप्त साथ नहीं मिला। कप्तान बाबर आजम का प्रदर्शन एक बार फिर निराशाजनक रहा। वह दोनों पारियों में प्रभाव नहीं छोड़ सके और पूरे मैच में उनके बल्ले से कुल 14 रन ही निकले। शान मसूद ने दूसरी पारी में 26 रन बनाए लेकिन टीम को संकट से बाहर नहीं निकाल सके। पाकिस्तान के छह बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा तक नहीं छू सके।

    इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पाकिस्तान की कमजोर बल्लेबाजी का पूरा फायदा उठाया। ओली रॉबिन्सन ने दोनों पारियों में शानदार गेंदबाजी करते हुए मैच में कुल आठ विकेट अपने नाम किए। जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने भी पाकिस्तान के बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और दोनों गेंदबाजों ने मैच में पांच-पांच विकेट हासिल किए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने पाकिस्तान की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखरी हुई नजर आई और टीम एक बार फिर बड़े लक्ष्य का पीछा करने में नाकाम रही।

    पाकिस्तान के लिए विदेश में टेस्ट क्रिकेट का प्रदर्शन भी चिंता बढ़ाने वाला है। दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में 2018 से खेले गए 18 टेस्ट मैचों में पाकिस्तान को 16वीं हार मिली है। टीम को इन देशों में आखिरी टेस्ट जीत 2018 में मिली थी। लगातार खराब प्रदर्शन ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी और टीम संयोजन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    दूसरे टेस्ट में मिली इस हार ने न केवल पाकिस्तान को सीरीज गंवा दी बल्कि टीम के टेस्ट इतिहास में एक बेहद खराब रिकॉर्ड भी जोड़ दिया। इंग्लैंड ने लगातार दो टेस्ट जीतकर अपना दबदबा कायम कर लिया है। अब पाकिस्तान की नजर तीसरे और आखिरी टेस्ट पर होगी जहां टीम कम से कम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। वहीं इंग्लैंड की कोशिश सीरीज का आखिरी मुकाबला जीतकर पाकिस्तान का पूरी तरह सफाया करने की होगी।

  • लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान की हार का ठीकरा बल्लेबाजों पर: बाबर बोले- हमने हालात का फायदा उठाया लेकिन बैटिंग में चूक गए

    लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान की हार का ठीकरा बल्लेबाजों पर: बाबर बोले- हमने हालात का फायदा उठाया लेकिन बैटिंग में चूक गए


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में 194 रनों की करारी हार के बाद पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम ने टीम की बल्लेबाजी को हार की सबसे बड़ी वजह बताया है। 389 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की पूरी टीम दूसरी पारी में सिर्फ 194 रन पर सिमट गई। इस हार के साथ ही पाकिस्तान ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज भी गंवा दी है। लगातार दो मुकाबले हारने के बाद अब पाकिस्तानी टीम के सामने आखिरी टेस्ट में सम्मान बचाने की चुनौती है।

    मैच के बाद बाबर आजम ने कहा कि टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला मौसम और पिच की परिस्थितियों को देखते हुए किया था। आसमान में बादल छाए होने के कारण पाकिस्तान के गेंदबाजों ने शुरुआती परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाया और इंग्लैंड को पहली पारी में 290 रन तक रोक दिया। इसके बाद उम्मीद थी कि पाकिस्तानी बल्लेबाज भी परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

    बाबर ने माना कि गेंदबाजों ने दोनों पारियों में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन बल्लेबाज उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरी पारी में भी पाकिस्तान की बल्लेबाजी बिखर गई और 389 रनों के लक्ष्य के सामने पूरी टीम 194 रन पर ऑलआउट हो गई। कप्तान के मुताबिक टीम के पास मुकाबले में वापसी करने के मौके थे लेकिन खिलाड़ी उन मौकों को जीत में बदलने में नाकाम रहे।

    पाकिस्तान की गेंदबाजी की तारीफ करते हुए बाबर आजम ने तेज गेंदबाज मोहम्मद अब्बास के प्रदर्शन को खास तौर पर सराहा। अब्बास ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट अपने नाम किए और इंग्लैंड की बल्लेबाजी को परेशानी में डाला। बाबर ने कहा कि लॉर्ड्स में पांच विकेट लेना अब्बास के लिए यादगार पल है। कप्तान ने सऊद शकील की बल्लेबाजी की भी तारीफ की और कहा कि वह जिस तरह से खेल रहे थे उससे उनकी क्लास और समर्पण नजर आया।

    इंग्लैंड ने इस मुकाबले में पहली पारी में 290 रन बनाए थे जिसके जवाब में पाकिस्तान की टीम महज 110 रन पर ढेर हो गई। इसके बाद इंग्लैंड ने दूसरी पारी में 208 रन बनाकर पाकिस्तान के सामने 389 रनों का लक्ष्य रखा। पाकिस्तानी बल्लेबाज एक बार फिर इंग्लिश गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके और टीम 194 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड ने मुकाबला 194 रनों से अपने नाम कर लिया।

    इससे पहले सीरीज के पहले टेस्ट में भी पाकिस्तान को बेहद निराशाजनक हार मिली थी। इंग्लैंड ने वह मुकाबला एक पारी और 103 रनों से जीता था। लगातार दो टेस्ट में हार के साथ पाकिस्तान ने सीरीज गंवा दी है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में टीम के नाम लगातार चार पारियों में 200 से कम रन पर ऑलआउट होने का निराशाजनक रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ है।

    अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन के मैदान पर खेला जाएगा। बाबर आजम ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान आखिरी मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन के इरादे से उतरेगा। टीम की सबसे बड़ी चुनौती उसकी बल्लेबाजी होगी क्योंकि गेंदबाजों के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद लगातार कम स्कोर पाकिस्तान की हार का कारण बन रहे हैं।

  • दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट योद्धा का आखिरी सलाम! डीन एल्गर ने किया संन्यास का ऐलान, परिवार को दी पहली प्राथमिकता

    दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट योद्धा का आखिरी सलाम! डीन एल्गर ने किया संन्यास का ऐलान, परिवार को दी पहली प्राथमिकता


    नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका के दिग्गज क्रिकेटर और पूर्व कप्तान डीन एल्गर ने प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। करीब डेढ़ दशक तक क्रिकेट के मैदान पर अपनी जुझारू बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले एल्गर 2026 काउंटी चैम्पियनशिप सीजन के समाप्त होने के बाद क्रिकेट के सभी प्रारूपों से विदाई ले लेंगे। 39 वर्षीय इस अनुभवी बल्लेबाज ने अपने फैसले के पीछे परिवार को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका मानना है कि अब क्रिकेट के लंबे सफर को विराम देने और जिंदगी के अगले अध्याय की ओर बढ़ने का सही समय आ गया है। एल्गर ने दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट में जो योगदान दिया उसे वहां की क्रिकेट विरासत में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

    डीन एल्गर की पहचान एक ऐसे टेस्ट बल्लेबाज के रूप में रही जिसने मुश्किल परिस्थितियों में डटकर मुकाबला किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए 86 टेस्ट मुकाबले खेले और 35.92 की औसत से 5347 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 23 अर्धशतक निकले। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 199 रन रहा जो उन्होंने 2017 में बांग्लादेश के खिलाफ बनाया था। एल्गर की बल्लेबाजी में आक्रामकता से ज्यादा धैर्य और लंबी पारी खेलने की क्षमता नजर आती थी। वह नई गेंद के सामने घंटों टिककर बल्लेबाजी करने और विपक्षी गेंदबाजों को थकाने के लिए जाने जाते थे। यही वजह रही कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका के सबसे भरोसेमंद टेस्ट ओपनरों में गिना गया।

    टेस्ट क्रिकेट के अलावा एल्गर ने दक्षिण अफ्रीका के लिए 8 वनडे मुकाबले भी खेले जिसमें उनके नाम 104 रन दर्ज हैं। उन्होंने 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और करीब 12 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट टीम के अहम सदस्य बने रहे। 2024 की शुरुआत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। भारत के खिलाफ केपटाउन में खेला गया टेस्ट उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला बना। इस मैच में चोटिल टेम्बा बावुमा की गैरमौजूदगी में उन्हें दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी भी करनी पड़ी थी। संयोग देखिए कि अपने विदाई टेस्ट को उन्होंने यादगार भी बना दिया। एल्गर ने शानदार 185 रनों की पारी खेली और दक्षिण अफ्रीका को मुकाबले में मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। मेजबान टीम ने वह मुकाबला पारी से जीता और सीरीज 1-1 से बराबर करने में कामयाब रही।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई के बाद भी एल्गर का बल्ला रुका नहीं। उन्होंने इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट को अपनी दूसरी पारी के तौर पर चुना। टेस्ट क्रिकेट के सीमित होते शेड्यूल को देखते हुए उन्होंने एसेक्स का रुख किया जहां उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली। वह टीम में दिग्गज एलेस्टेयर कुक की जगह भरने पहुंचे थे। 2024 में एसेक्स से जुड़ते ही एल्गर ने शानदार प्रदर्शन किया और काउंटी चैम्पियनशिप में 1000 से ज्यादा रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की। उन्हें क्लब का बैटर ऑफ द ईयर भी चुना गया। टी20 ब्लास्ट में भी उन्होंने 300 से ज्यादा रन बनाए। इससे पहले वह समरसेट और सरे के लिए भी काउंटी क्रिकेट खेल चुके थे।

    अब 2026 सीजन उनके प्रोफेशनल क्रिकेट करियर का अंतिम अध्याय होगा। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की इच्छा के साथ एल्गर ने मैदान से विदाई का फैसला किया है। उनके करियर को सिर्फ आंकड़ों से नहीं बल्कि उस जज्बे से भी याद किया जाएगा जिसके साथ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। दक्षिण अफ्रीका को एक भरोसेमंद ओपनर और अनुभवी नेतृत्व देने वाले एल्गर अब जल्द ही क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। उनका आखिरी सीजन उनके शानदार और संघर्षपूर्ण क्रिकेट सफर को एक भावुक विदाई देने का मौका होगा।

  • भारत के सामने श्रीलंका की हालत पस्त! फॉलोऑन खेलते ही ढहा टॉप ऑर्डर, 6 विकेट लेकर जीत की ओर टीम इंडिया

    भारत के सामने श्रीलंका की हालत पस्त! फॉलोऑन खेलते ही ढहा टॉप ऑर्डर, 6 विकेट लेकर जीत की ओर टीम इंडिया


    नई दिल्ली। कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है और अब श्रीलंका की हार लगभग सामने खड़ी नजर आ रही है। सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के चौथे दिन बारिश ने खेल जरूर रोक दिया लेकिन उससे पहले भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। फॉलोऑन खेलने उतरी मेजबान टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में 6 विकेट गंवाकर 229 रन बना लिए हैं। श्रीलंका के पास अब भारत के खिलाफ सिर्फ 16 रन की बढ़त है और उसके चार विकेट बाकी हैं। ऐसे में पांचवें दिन भारतीय टीम की कोशिश श्रीलंका की पारी को जल्द से जल्द समेटकर जीत पर मुहर लगाने की होगी।

    इससे पहले भारत ने अपनी पहली पारी 503 रन पर 9 विकेट के नुकसान पर घोषित की थी। टीम इंडिया की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही थी और 66 रन के भीतर केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल के विकेट गिर गए थे। इसके बाद देवदत्त पड्डिकल और कप्तान शुभमन गिल ने पारी को संभाला और तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी की। गिल ने 50 रन बनाए जबकि पड्डिकल ने शानदार शतक लगाते हुए 117 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे।

    पड्डिकल के बाद रवींद्र जडेजा के साथ उनकी 74 रन की साझेदारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद ऋषभ पंत ने चोट से उबरकर मैदान पर वापसी की और ध्रुव जुरेल के साथ मिलकर 112 रन जोड़े। पंत ने 63 रन बनाए जबकि जुरेल ने नाबाद 115 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को 500 के पार पहुंचाया। जुरेल की पारी में 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे।

    भारत के विशाल स्कोर के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर सिमट गई। पसिंदु सूरियाबंदारा ने 80 रन और सोनल दिनुषा ने 103 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन श्रीलंका फॉलोऑन बचाने के लिए जरूरी स्कोर से 14 रन दूर रह गया। भारत की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार ने तीन तीन विकेट चटकाए जबकि सारांश जैन ने दो विकेट हासिल किए। भारत को पहली पारी में 213 रन की बड़ी बढ़त मिली जिसके बाद श्रीलंका को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    दूसरी पारी में श्रीलंका ने शुरुआत में ही एक विकेट गंवा दिया लेकिन इसके बाद पसिंदु सूरियाबंदारा ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने कामिल मिशारा और कामिंदु मेंडिस के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। कामिंदु ने 55 रन बनाए जबकि पसिंदु 92 रन बनाकर आउट हुए। कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 23 रन जोड़े। हालांकि भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रहे और दूसरी पारी में भी श्रीलंका के छह विकेट गिर चुके हैं।

    अब मुकाबले का आखिरी दिन बेहद रोमांचक होने वाला है। श्रीलंका के पास केवल 16 रन की बढ़त है और चार विकेट शेष हैं। अगर भारतीय गेंदबाज शुरुआती सत्र में इन विकेटों को हासिल कर लेते हैं तो टीम इंडिया के सामने जीत के लिए बेहद छोटा लक्ष्य होगा। बारिश के कारण चौथे दिन खेल समय से पहले खत्म होने के बाद अब सभी की निगाहें पांचवें दिन पर टिकी हैं। भारत के पास जीत का सुनहरा मौका है और श्रीलंका के लिए अब मैच बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।