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  • बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल

    बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल


    नई दिल्ली। रवींद्र जडेजा ने गॉल टेस्ट में अपने करियर की एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के चुनिंदा महान ऑलराउंडर्स की कतार में खड़ा कर दिया है। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट पूरे किए और इसके साथ ही उन्होंने 4000 से ज्यादा रन तथा 350 से ज्यादा विकेट लेने का ऐतिहासिक डबल भी पूरा कर लिया। जडेजा यह कारनामा करने वाले दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं और भारत की ओर से इस खास क्लब में जगह बनाने वाले सिर्फ दूसरे क्रिकेटर हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि महान ऑलराउंडर कपिल देव ने हासिल की थी।

    जडेजा ने गॉल टेस्ट की तीसरी पारी में श्रीलंका के बल्लेबाजों को अपनी स्पिन से परेशान किया और तीन विकेट हासिल किए। उनके 350 विकेट पूरे होते ही टेस्ट क्रिकेट में उनका नाम भारत के उन गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गया जिन्होंने इस फॉर्मेट में 350 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं। इससे पहले अनिल कुंबले 619 विकेट के साथ भारत के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज हैं। रविचंद्रन अश्विन ने 537 विकेट लिए हैं जबकि कपिल देव के नाम 434 और हरभजन सिंह के नाम 417 टेस्ट विकेट हैं। अब जडेजा 351 विकेट के साथ इस प्रतिष्ठित सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

    हालांकि जडेजा की उपलब्धि सिर्फ विकेटों तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से भी लगातार अहम योगदान देखने को मिला है। जडेजा के नाम 4000 से ज्यादा टेस्ट रन हैं और यही वजह है कि 350 से अधिक विकेट के साथ 4000 से अधिक रन का डबल उन्हें और खास बनाता है। इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दुनिया के खिलाड़ियों में कपिल देव के अलावा इंग्लैंड के इयान बॉथम और न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी भी शामिल हैं। कपिल देव ने टेस्ट में 5248 रन और 434 विकेट लिए। बॉथम के नाम 5200 रन और 383 विकेट हैं जबकि विटोरी ने 4531 रन के साथ 362 विकेट हासिल किए। अब इस क्लब में 4108 रन और 351 विकेट के आंकड़े के साथ जडेजा का नाम भी जुड़ गया है।

    जडेजा ने इस उपलब्धि के साथ टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों की सूची में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। श्रीलंका के रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं। डेनियल विटोरी के नाम 362 विकेट हैं जबकि जडेजा 351 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच चुके हैं। अब विटोरी को पीछे छोड़ने के लिए जडेजा को केवल 12 और विकेट की जरूरत है। अगर वह यह मुकाम हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे।

    जडेजा की गेंदबाजी की खासियत सिर्फ विकेटों की संख्या नहीं बल्कि उनकी विकेट लेने की क्षमता भी है। कम से कम 125 टेस्ट विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में जडेजा का स्ट्राइक रेट 58 के आसपास है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज उनसे आगे हैं। इससे पता चलता है कि जडेजा लंबे स्पेल में दबाव बनाने के साथ जरूरत पड़ने पर तेजी से विकेट निकालने की क्षमता भी रखते हैं।

    गॉल टेस्ट में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई और भारत को 178 रनों की बढ़त मिली। जडेजा ने 21 ओवर में पांच मेडन डालते हुए 57 रन देकर तीन विकेट लिए। मानव सुथार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट अपने नाम किए। उन्होंने 21.4 ओवर में एक मेडन के साथ 76 रन देकर चार विकेट हासिल किए।

    जडेजा की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह सिर्फ गेंदबाज नहीं बल्कि मैच का रुख बदलने वाले ऑलराउंडर हैं। बल्ले से उपयोगी रन बनाने के साथ गेंद से लगातार विकेट निकालना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। कपिल देव के साथ इस ऐतिहासिक क्लब में शामिल होना उनके टेस्ट करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अलग-अलग दौर और अलग-अलग गेंदबाजी शैली के बावजूद जडेजा और कपिल ने साबित किया है कि टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाला ऑलराउंडर टीम के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

  • अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां

    अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। शांत स्वभाव मजबूत तकनीक और मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने अपने करियर में कई ऐसी पारियां खेलीं जिन्होंने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। टेस्ट क्रिकेट में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले इस बल्लेबाज ने कई बार टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला और अपनी कप्तानी से भी अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं उनके करियर की पांच सबसे बड़ी उपलब्धियां जिन्होंने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल किया।

    साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेली गई 147 रन की पारी रहाणे के करियर की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। उस समय ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन रयान हैरिस जोश हेजलवुड और शेन वॉटसन बेहद खतरनाक लय में थे लेकिन रहाणे ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए 147 रन बनाए। विराट कोहली के साथ उनकी बड़ी साझेदारी ने भारत को हार से बचाया और मुकाबला ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।

    इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला गया उनका शतक भी हमेशा याद रखा जाएगा। जब भारतीय टीम शुरुआती झटकों के बाद मुश्किल में थी तब रहाणे ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 103 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत भारत सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा और बाद में मुकाबला जीतकर लॉर्ड्स में 28 साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह पारी उनके धैर्य और जिम्मेदारी का शानदार उदाहरण बनी।

    बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में रहाणे की कप्तानी भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद पूरी दुनिया ने भारतीय टीम को कमजोर माना था। विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शतक जड़ते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी शांत कप्तानी और आत्मविश्वास ने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया। भारत ने बाद में सीरीज 2-1 से जीतकर इतिहास रच दिया।

    साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहाणे ने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया। पहली पारी में उन्होंने 127 रन बनाए जबकि दूसरी पारी में नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। वह पांचवें या उससे नीचे बल्लेबाजी क्रम पर उतरकर टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। यह उपलब्धि उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन की गवाही देती है।

    रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। उन्होंने भारत के लिए छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिनमें चार मुकाबलों में जीत मिली जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। सबसे खास बात यह रही कि उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को एक भी टेस्ट मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा। शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों पर भरोसा रखने की उनकी शैली की क्रिकेट जगत में खूब सराहना हुई।

    अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि धैर्य अनुशासन और टीम के लिए समर्पण किसी भी खिलाड़ी को महान बना सकता है। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धियां प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

  • CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा

    CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट टीम को जल्द ही नया टेस्ट मुख्य कोच मिल सकता है और इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार के रूप में न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान तथा चेन्नई सुपर किंग्स के सबसे सफल कोच स्टीफन फ्लेमिंग का नाम सामने आया है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद फ्लेमिंग को अपनी पहली पसंद माना है। यदि अंतिम औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो फ्लेमिंग इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कमान संभालेंगे और यह उनके कोचिंग करियर का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अध्याय होगा।

    स्टीफन फ्लेमिंग का नाम क्रिकेट जगत के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में लिया जाता है। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई सुपर किंग्स को पांच बार चैंपियन बनाया और टीम को लगातार सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शांत स्वभाव शानदार रणनीति और खिलाड़ियों से बेहतर तालमेल उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। इसी कारण उन्हें आधुनिक क्रिकेट का बेहतरीन मैनेजर और रणनीतिकार माना जाता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने कई उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया लेकिन फ्लेमिंग अनुभव नेतृत्व क्षमता और लंबे समय तक सफल टीम तैयार करने की योग्यता के कारण सबसे आगे निकल गए। उनके सामने टॉम मूडी जोनाथन ट्रॉट और रिचर्ड डॉसन जैसे दावेदार भी थे लेकिन बोर्ड का झुकाव फ्लेमिंग की ओर दिखाई दिया।

    बताया जा रहा है कि इंग्लैंड की टेस्ट टीम में यह बदलाव ब्रेंडन मैकुलम के टेस्ट कोच पद से हटने के बाद किया जा रहा है जबकि सीमित ओवरों की टीम के साथ उनकी भूमिका अलग बनी रह सकती है। ऐसे में इंग्लैंड पहली बार टेस्ट और व्हाइट बॉल क्रिकेट के लिए अलग कोचिंग मॉडल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

    फ्लेमिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड की टेस्ट टीम को फिर से मजबूत बनाना होगी। उन्हें नए कप्तान के चयन टीम संयोजन युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और आगामी बड़ी टेस्ट सीरीज के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनका शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देने की शैली इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    हालांकि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन लगभग सभी प्रमुख रिपोर्ट्स में फ्लेमिंग को इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बताया गया है। यदि नियुक्ति तय होती है तो यह केवल इंग्लैंड क्रिकेट ही नहीं बल्कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट के इतिहास में भी एक बड़ा बदलाव माना जाएगा क्योंकि IPL के सबसे सफल कोचों में शामिल फ्लेमिंग अब अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी करेंगे

  • इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में सपना हुआ साकार पहली बार टेस्ट टीम में मिली जगह श्रीलंका दौरे पर दिखाएंगे दम

    इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में सपना हुआ साकार पहली बार टेस्ट टीम में मिली जगह श्रीलंका दौरे पर दिखाएंगे दम


    इंदौर  इंदौर के लिए गर्व का पल सामने आया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया है जिसमें मध्यप्रदेश के होनहार स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। वर्षों की मेहनत निरंतर प्रदर्शन और धैर्य के बाद आखिरकार सारांश का टीम इंडिया तक पहुंचने का सपना पूरा हो गया है। उनके चयन से न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

    33 वर्षीय सारांश जैन लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए टीम की ओर से दूसरे चार दिवसीय मुकाबले में उन्होंने नाबाद 70 रन बनाने के साथ छह विकेट लेकर अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। यही प्रदर्शन उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खोलने में निर्णायक साबित हुआ।

    प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सारांश का रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 2223 रन बनाए हैं और 188 विकेट अपने नाम किए हैं। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में लगातार योगदान देने की उनकी क्षमता उन्हें एक उपयोगी ऑलराउंडर बनाती है। यही वजह है कि चयनकर्ताओं ने श्रीलंका दौरे के लिए उन पर भरोसा जताया है।

    सारांश जैन का क्रिकेट सफर इंदौर के विजय क्लब से शुरू हुआ था। इसी मैदान पर उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं और अपने खेल को निखारा। इसी क्लब में भारतीय बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी उन्होंने अभ्यास किया। वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद अब उन्हें देश की सर्वोच्च क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।

    सारांश के चयन के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी प्रेरणादायक है। उनके पिता सुबोध जैन मध्यप्रदेश की ओर से रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। उनका सपना भारत के लिए खेलना था लेकिन वह पूरा नहीं हो सका। अब बेटे सारांश के जरिए उनका सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। कठिन परिस्थितियों में भी पिता ने बेटे का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। वहीं बड़े भाई ने अपना क्रिकेट करियर छोड़कर सारांश के सपनों को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।

    भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर होगा। इस दौरे पर सारांश के पास टेस्ट कैप हासिल कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने करियर की शानदार शुरुआत करने का सुनहरा अवसर होगा।

    भारतीय टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे जबकि केएल राहुल उपकप्तान होंगे। बल्लेबाजी में यशस्वी जायसवाल ऋषभ पंत देवदत्त पडिक्कल और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। वहीं स्पिन विभाग में रविंद्र जडेजा कुलदीप यादव मानव सुथार और सारांश जैन पर बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो यह उनके करियर का सबसे यादगार क्षण होगा और भारतीय क्रिकेट में एक नई शुरुआत भी।

  • 5 साल बाद बांग्लादेश टेस्ट टीम में हिंदू क्रिकेटर की वापसी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए अनुभवी सौम्य सरकार को मिला मौका

    5 साल बाद बांग्लादेश टेस्ट टीम में हिंदू क्रिकेटर की वापसी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए अनुभवी सौम्य सरकार को मिला मौका


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने अपनी टीम में बड़ा बदलाव करते हुए अनुभवी ऑलराउंडर सौम्य सरकार की टेस्ट टीम में वापसी कराई है। करीब पांच साल बाद लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी वापसी हुई है। टीम प्रबंधन ने ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें टीम में शामिल किया है। सौम्य सरकार की वापसी ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश की टीम चोटिल खिलाड़ियों की समस्या से जूझ रही है।

    दरअसल तेज गेंदबाज नाहिद राणा और शोरीफुल इस्लाम चोट के कारण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। दोनों खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ जिसके बाद चयनकर्ताओं ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। इसी क्रम में सौम्य सरकार को टेस्ट टीम में जगह दी गई है।

    सौम्य सरकार आखिरी बार बांग्लादेश के लिए वर्ष 2021 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मीरपुर टेस्ट में खेलते नजर आए थे। इसके बाद वह लंबे समय तक टेस्ट टीम से बाहर रहे और उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी का इंतजार करना पड़ा। अब पांच साल बाद उन्हें फिर से टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने का मौका मिला है।

    सौम्य सरकार का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों का अनुभव है। मौजूदा बांग्लादेशी टीम में शामिल खिलाड़ियों में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। वह ऑस्ट्रेलिया की धरती पर आठ इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। टीम प्रबंधन का मानना है कि उछाल और तेज पिचों पर उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

    बांग्लादेश की टीम इस दौरे पर मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। ऐसे में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के लिए अहम मानी जा रही है। सौम्य सरकार के पास बल्लेबाजी के साथ जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी करने की भी क्षमता है जिससे टीम को अतिरिक्त संतुलन मिलेगा।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि लंबे अंतराल के बाद टेस्ट क्रिकेट में लौट रहे सौम्य सरकार अपने अनुभव का कितना फायदा उठा पाते हैं और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ बांग्लादेश के प्रदर्शन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।
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  • एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल

    एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल


    नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर ऐसा का रनामा कर दिखाया जिसे भारतीय क्रिकेट लंबे समय तक याद रखेगा। इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र महिला टेस्ट मैच में यास्तिका ने शानदार 113 रन की पारी खेलते हुए न केवल भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया बल्कि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी बन गईं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि वह करीब एक साल तक चोट के कारण क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैदान पर लौटी थीं।

    यास्तिका की यह पारी केवल एक शतक नहीं बल्कि संघर्ष धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर सामने आई। लंबे समय तक चोट से जूझने के कारण उन्हें कई बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था। घरेलू वनडे विश्व कप और महिला प्रीमियर लीग जैसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाने का दर्द उनके लिए बेहद कठिन था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में कई बार उन्हें लगा कि इतनी बड़ी उपलब्धि शायद अब कभी हासिल नहीं हो पाएगी।

    उन्होंने बताया कि चोट के दौरान पुनर्वास का समय मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन परिवार टीम प्रबंधन और सहयोगी खिलाड़ियों ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। यही भरोसा उन्हें दोबारा मैदान तक लेकर आया। उन्होंने कहा कि यदि छह महीने पहले कोई उनसे कहता कि उनका नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज होगा तो शायद वह खुद भी इस बात पर विश्वास नहीं करतीं। आज यह सपना सच होने जैसा महसूस हो रहा है।

    यास्तिका ने अपनी ऐतिहासिक पारी के बाद भावुक होते हुए कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि शतक पूरा होने के बाद उन्होंने जश्न मनाने की अलग योजना बनाई थी लेकिन उस पल भावनाएं इतनी प्रबल थीं कि उन्होंने सिर्फ भारतीय तिरंगे को चूमकर अपनी खुशी जाहिर की। उनके लिए यह सबसे बड़ा सम्मान था कि वह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इतिहास का हिस्सा बनीं।

    उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हेलमेट उतारा तो उनकी आंखों के सामने पिछले एक साल का पूरा संघर्ष घूम गया। परिवार की यादें कठिन दौर की चुनौतियां और मैदान पर वापसी की मेहनत सब कुछ एक साथ याद आने लगा। वह पल इतना भावुक था कि खुद को संभालना भी मुश्किल हो गया। उनके अनुसार यह उनके क्रिकेट जीवन का सबसे खास क्षण है।

    यास्तिका ने स्पष्ट किया कि उनका सपना केवल इस शतक तक सीमित नहीं है। वह भारत के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य टीम को विश्व कप जिताना है और देश के लिए लगातार यादगार प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय जर्सी पहनकर खेलने से बड़ा सम्मान कोई नहीं हो सकता और वह आने वाले वर्षों में टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती हैं।

    भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाकर यास्तिका ने न केवल नया इतिहास रचा बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला क्रिकेटरों के लिए भी नई प्रेरणा तैयार की है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल करने की उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत धैर्य और विश्वास के दम पर हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • इंग्लैंड टीम को राहत बेन स्टोक्स और एटकिंसन पर ईसीबी जांच पूरी तीसरे टेस्ट में कप्तान की वापसी

    इंग्लैंड टीम को राहत बेन स्टोक्स और एटकिंसन पर ईसीबी जांच पूरी तीसरे टेस्ट में कप्तान की वापसी


    नई दिल्ली ।इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी की अनुशासनात्मक जांच में इंग्लैंड टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स को नाइटक्लब विवाद मामले में पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई है जांच के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि स्टोक्स उस समय घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे और न ही उनका किसी प्रकार की हिंसक घटना से कोई संबंध पाया गया

    इस जांच के बाद ईसीबी ने स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे और निर्णायक टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड टीम में शामिल कर लिया है इससे पहले दोनों खिलाड़ियों को अनुशासनात्मक कारणों से दूसरे टेस्ट से बाहर रखा गया था जहां टीम की कप्तानी जो रूट ने संभाली थी लेकिन उस मैच में इंग्लैंड को 253 रन से हार का सामना करना पड़ा था

    पूरा मामला 8 जून की रात लॉर्ड्स टेस्ट के बाद सामने आया जब दोनों खिलाड़ियों पर टीम कर्फ्यू नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा इसके बाद ब्रिटिश मीडिया में खबरें आईं कि गस एटकिंसन एक नाइटक्लब में हुए विवाद में शामिल थे रिपोर्ट्स के अनुसार एक रग्बी अकादमी खिलाड़ी ने उन पर हमला करने की कोशिश की थी लेकिन मामला बढ़ते हुए एक सुरक्षा कर्मी को चोट लगने तक पहुंच गया

    ईसीबी की विस्तृत जांच में सामने आया कि बेन स्टोक्स इस पूरी घटना के दौरान नाइटक्लब में मौजूद ही नहीं थे बोर्ड ने स्पष्ट किया कि स्टोक्स किसी भी विवाद का हिस्सा नहीं थे और न ही उन्होंने घटना को देखा था हालांकि टीम नियमों के उल्लंघन के चलते उन्हें और एटकिंसन दोनों को लिखित चेतावनी दी गई है

    गस एटकिंसन को लेकर जांच में यह पाया गया कि वह बिना किसी उकसावे के हमले के शिकार हुए थे और उन्होंने किसी भी स्थिति में जवाबी कार्रवाई नहीं की इस तरह उन्हें भी हिंसक घटना के लिए दोषी नहीं ठहराया गया इस पूरे विवाद के बावजूद ईसीबी ने अनुशासनात्मक नियमों के तहत दोनों खिलाड़ियों को चेतावनी जारी की है और टीम के आचार संहिता पालन पर जोर दिया है

    अब इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच सीरीज 1-1 की बराबरी पर पहुंच चुकी है और तीसरा टेस्ट निर्णायक होगा जिसमें स्टोक्स की कप्तानी में इंग्लैंड वापसी करेगा तीसरे टेस्ट के लिए घोषित इंग्लैंड टीम में बेन स्टोक्स, जो रूट, जोफ्रा आर्चर, हैरी ब्रूक, बेन डकेट और अन्य प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं जिससे मुकाबला और भी रोमांचक होने की उम्मीद है

  • एशेज सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम ने की आलोचना बोले मेरे हाथ में कुछ नहीं

    एशेज सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम ने की आलोचना बोले मेरे हाथ में कुछ नहीं


    नई दिल्ली । एडिलेड ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड की टीम को एक और एशेज सीरीज हार का सामना करना पड़ा है। महज 11 दिनों में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराया और पहले दो टेस्ट तो सिर्फ 6 दिन में ही समाप्त हो गए थे। हालांकि तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने थोड़ी सी लड़ाई जरूर दिखाई लेकिन सीरीज का निर्णय एडिलेड में ही हो गया। इस हार के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम की आलोचना हो रही है।

    तीसरे टेस्ट मैच के बाद जब मैकुलम से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के हेड कोच पद से इस्तीफा देंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि यह फैसला उनके हाथ में नहीं है। मैकुलम ने कहा “मुझे नहीं पता। असल में यह फैसला मेरे हाथ में नहीं है है ना, मैं सिर्फ अपनी तरफ से काम करता रहूंगा जो भी मैंने सीखा है उसे लागू करने की कोशिश करूंगा और टीम के साथ सामंजस्य बैठाऊंगा।

    मैकुलम ने कहा कि इस काम में मजा आता है और यह एक बेहतरीन अनुभव है।आप दुनिया भर में टीम के साथ यात्रा करते हैं और रोमांचक क्रिकेट खेलते हैं। हम कुछ विशेष हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं उन्होंने कहा। इंग्लैंड का खेल इस बार काफी अलग था। उनकी टीम बैजबॉल की पारंपरिक शैली से हटकर खेल रही थी जिसमें स्कोरिंग रेट पर कम ध्यान दिया गया। मैकुलम ने इस बारे में कहा “हमने कभी नहीं कहा कि हमें 5.5-6 ओवर की रफ्तार से रन बनाने होंगे। हमारा उद्देश्य खेल की स्थिति को समझना और रिस्क को पहचानना था।

    मैकुलम ने यह भी कहा कि उनका फोकस हमेशा टीम के खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालने पर रहा है। उन्होंने कहा “मेरे लिए यह खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ निकलवाने की कोशिश करना है। बाकी के फैसले तो दूसरों पर निर्भर करते हैं। जब मैंने काम शुरू किया था तब से लेकर अब तक टीम में बहुत तरक्की हुई है।इंग्लैंड का बैजबॉल तरीका जो पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है उसे लेकर मैकुलम ने कहा “यह तरीका किसी खास स्कोरिंग रेट के बारे में नहीं था। हमने जो रणनीति बनाई वह खिलाड़ियों के कौशल और टैलेंट पर आधारित थी। जब तक मैं इस काम में हूं यह तरीका नहीं बदलेगा।”

    कुल मिलाकर इंग्लैंड की टीम के लिए यह एशेज सीरीज एक और निराशाजनक अनुभव रही है। हालांकि मैकुलम का कहना है कि यह एक प्रक्रिया है और टीम को सुधार की दिशा में काम करना जारी रखना होगा।
    इस हार के बावजूद मैकुलम और इंग्लैंड की टीम आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले कुछ महीनों में इंग्लैंड किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या वे अपनी रणनीतियों में बदलाव करते हैं या नहीं।

  • नाथन लियोन ने तोड़ा ग्लेन मैक्ग्रा का रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट में अब तक चटकाए हैं 564 विकेट

    नाथन लियोन ने तोड़ा ग्लेन मैक्ग्रा का रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट में अब तक चटकाए हैं 564 विकेट


    नई दिल्ली ।ऑस्ट्रेलिया के महान ऑफ स्पिनर नाथन लियोन ने टेस्ट क्रिकेट में 564 विकेट चटकाकर ग्लेन मैक्ग्रा का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस सफलता के साथ लियोन अब ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे आगे केवल शेन वॉर्न हैं जिनके नाम 708 विकेट हैं।

    नाथन लियोन का ऐतिहासिक मील का पत्थर

    नाथन लियोन ने एडिलेड टेस्ट मैच में बेन डकेट को क्लीन बोल्ड करते हुए अपना 564वां विकेट लिया। इससे पहले ग्लेन मैक्ग्रा के पास यह रिकॉर्ड था जिन्होंने 563 विकेट हासिल किए थे। लियोन ने इंग्लैंड के खिलाफ जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे मुकाबले में पहले ओली पोप को आउट किया और फिर डकेट को बोल्ड करके इतिहास रच दिया। यह महत्वपूर्ण पल उस समय और भी खास हो गया जब ग्लेन मैक्ग्रा खुद स्टेडियम में मौजूद थे और कमेंट्री कर रहे थे। उनके रिऐक्शन ने दर्शकों को भी खुश कर दिया।

    ग्लेन मैक्ग्रा का मजाकिया रिऐक्शन

    जब नाथन लियोन ने रिकॉर्ड तोड़ा तो ग्लेन मैक्ग्रा ने मजाकिया अंदाज में अपनी कुर्सी उठाकर अपने साथी कमेंटेटर के पास मारने की कोशिश की। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और फैंस ने इस मजाकिया पल का आनंद लिया। मैक्ग्रा का यह रिऐक्शन दर्शाता है कि उनके बीच कितना सम्मान और दोस्ती है।

    नाथन लियोन का सफर और आगे का रास्ता

    नाथन लियोन अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में छठे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे आगे मुथैया मुरलीधरन 800 विकेट शेन वॉर्न 708 विकेट जेम्स एंडरसन 704 विकेट अनिल कुंबले 619 विकेट और स्टुअर्ट ब्रॉड 604 विकेट हैं। हालांकि लियोन को इन महान गेंदबाजों के रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए अब भी काफी विकेट और कुछ सालों तक खेलना पड़ेगा। लेकिन यदि वह फिट रहते हैं और आने वाली सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वह कुंबले और ब्रॉड के रिकॉर्ड को तोड़ने की ओर बढ़ सकते हैं।

    नाथन लियोन का यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के लिए भी गर्व का क्षण है। उन्होंने ग्लेन मैक्ग्रा के रिकॉर्ड को तोड़कर एक नई उपलब्धि हासिल की है और अब वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं। अगर उनका प्रदर्शन इस तरह जारी रहता है तो लियोन भविष्य में और बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं।