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  • ट्रंप प्रशासन ने बिग बेंड नेशनल पार्क में विवादित सीमा परियोजना पर लगाई रोक, पर्यावरणीय नुकसान को लेकर उठे थे सवाल

    ट्रंप प्रशासन ने बिग बेंड नेशनल पार्क में विवादित सीमा परियोजना पर लगाई रोक, पर्यावरणीय नुकसान को लेकर उठे थे सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दक्षिणी टेक्सास में बिग बेंड नेशनल पार्क से होकर गुजरने वाली विवादित सीमा परियोजना के निर्माण पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह परियोजना लंबे समय से पर्यावरण और राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक संरचना को लेकर विवादों में रही थी। परियोजना के विरोध में उठाई गई प्रमुख आपत्तियों में क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरणीय भू-भाग पर संभावित असर और सीमा सुरक्षा के लिए इसकी वास्तविक जरूरत शामिल थी।

    बिग बेंड नेशनल पार्क टेक्सास के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक विशाल और दूरस्थ प्राकृतिक क्षेत्र है। यहां का भू-भाग कठिन होने के कारण सामान्य आवाजाही पहले से ही सीमित मानी जाती है। सीमा परियोजना के आलोचकों का तर्क रहा है कि इस प्राकृतिक क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां अपने आप में प्रवासियों और तस्करों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में इस इलाके में अतिरिक्त सीमा अवरोध खड़ा करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए।

    विवादित परियोजना को राजनीतिक स्तर पर भी विरोध का सामना करना पड़ा। आलोचकों में दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल रहे हैं। उनका कहना था कि सीमा सुरक्षा के उद्देश्य से बनाई जाने वाली किसी भी परियोजना में पर्यावरणीय प्रभाव और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेष रूप से राष्ट्रीय उद्यान जैसे संवेदनशील इलाके में निर्माण कार्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता बताई गई।

    ट्रंप प्रशासन की ओर से परियोजना को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला एक एजेंसी प्रमुख के टेक्सास दौरे के बाद किए गए जमीनी मूल्यांकन से जुड़ा बताया गया है। अधिकारियों की ओर से क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को देखने और परियोजना के संभावित प्रभावों का आकलन करने के बाद निर्माण रोकने का निर्णय लिया गया।

    दक्षिणी टेक्सास में प्रस्तावित सीमा परियोजना का एक हिस्सा राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र से होकर गुजरना था। इसे लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और अन्य आलोचकों ने आशंका जताई थी कि निर्माण से प्राकृतिक भू-भाग प्रभावित हो सकता है। उनका कहना था कि बिग बेंड जैसे संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से वहां के पारिस्थितिक संतुलन और प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है।

    परियोजना पर रोक लगाए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया को लेकर निगाहें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं। अस्थायी रोक का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र के मूल्यांकन और परियोजना की उपयोगिता पर आगे भी विचार किया जा सकता है।

    बिग बेंड में सीमा परियोजना को लेकर विवाद अमेरिका में सीमा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। एक तरफ सीमा पर अवैध प्रवेश और तस्करी रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की जाती रही है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय उद्यानों और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों को निर्माण से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।

    फिलहाल ट्रंप प्रशासन के फैसले से बिग बेंड नेशनल पार्क के उस क्षेत्र में प्रस्तावित सीमा निर्माण को तत्काल राहत मिली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे किए जाने वाले मूल्यांकन के बाद परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जाता है या किसी संशोधित योजना के साथ इसे दोबारा आगे बढ़ाया जाता है।

  • ह्यूस्टन के फास्ट-फूड आउटलेट पर खराब भोजन और लापरवाही को लेकर 12.5 करोड़ का केस

    ह्यूस्टन के फास्ट-फूड आउटलेट पर खराब भोजन और लापरवाही को लेकर 12.5 करोड़ का केस

    नई दिल्ली ।अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में स्थित प्रसिद्ध फास्ट-फूड चेन पोपेय्स के एक आउटलेट के खिलाफ 12.5 करोड़ रुपये के भारी-भरकम हर्जाने का कानूनी मामला सामने आया है। एक दंपत्ति ने रेस्टोरेंट प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दंपत्ति का दावा है कि उन्होंने आउटलेट से जो फ्राइड चिकन खरीदा था, उसके एक टुकड़े के भीतर आपत्तिजनक और दूषित सामग्री मौजूद थी, जिससे उनकी सेहत और मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, जस्टिन हॉवर्ड और डेनियल मैककिनन नामक दंपत्ति ने साउथ सैम ह्यूस्टन पार्कवे वेस्ट स्थित पोपेय्स के आउटलेट से चिकन का ऑर्डर दिया था। जब वे घर जाकर भोजन करने लगे, तो जैसे ही एक पीस को काटा गया, उसके भीतर कंडोम जैसी दिखने वाली संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। इस अवांछित चीज को देखते ही दंपत्ति का भोजन करने का अनुभव बेहद खौफनाक बन गया और उन्होंने तुरंत खाना रोक दिया।

    इस घटना के बाद दंपत्ति में शारीरिक अस्वस्थता और घबराहट की स्थिति पैदा हो गई। उन्हें लगातार उल्टी महसूस होने लगी और इस बात का गहरा डर सताने लगा कि कहीं उन्होंने कोई संक्रमित या दूषित भोजन तो नहीं खा लिया है। उस समय उनके पास इस बात की जांच या पुष्टि का कोई तत्काल उपाय नहीं था कि चिकन के अंदर मिली सामग्री वास्तव में क्या थी, वह कितने समय से वहां मौजूद थी और क्या पूरे भोजन में उसका जहर या प्रभाव फैल चुका था।

    पीड़ित पक्ष ने इस मामले को लेकर हैरिस काउंटी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका दायर की है। दायर मुकदमे में पोपेय्स की मूल कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स इंटरनेशनल, पोपेय्स लुइसियाना किचन और वहां के फ्रेंचाइजी संचालक आमाना बिजनेसेज को मुख्य रूप से प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में साफ तौर पर लापरवाही बरतने, असुरक्षित तरीके से खाद्य पदार्थों का प्रबंधन करने और टेक्सास राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

    मामले में सबसे चिंताजनक पहलू रेस्टोरेंट के कर्मचारियों का व्यवहार रहा। पीड़ित दंपत्ति का आरोप है कि जब वे इस शिकायत को लेकर तुरंत आउटलेट वापस पहुंचे, तो वहां मौजूद स्टाफ ने उनकी गंभीर समस्या को समझने के बजाय उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने मामले की गहन जांच करने या खेद व्यक्त करने के बजाय बार-बार चिकन बदलकर नया पैकेट देने का प्रयास किया, जबकि ग्राहक रिफंड और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे थे। काफी बहस और दबाव के बाद उन्हें पैसे वापस किए गए।

    इस घटना के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। ह्यूस्टन के कुछ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आउटलेट के प्रबंधन से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने यह भी कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और खाद्य सुरक्षा के मानकों की पुष्टि नहीं होती, तब तक उस विशिष्ट आउटलेट पर चिकन की बिक्री को पूरी तरह से निलंबित कर दिया जाना चाहिए।

    कुल मिलाकर, इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही फास्ट-फूड कंपनियों के गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला अदालत के विचाराधीन है, जहां लापरवाही और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोपों पर कानूनी सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • ट्रंप प्रशासन का बड़ा अभियान, कथित इमिग्रेशन धोखाधड़ी पर पाकिस्तानी मूल के व्यक्ति समेत 10 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की पहल

    ट्रंप प्रशासन का बड़ा अभियान, कथित इमिग्रेशन धोखाधड़ी पर पाकिस्तानी मूल के व्यक्ति समेत 10 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की पहल

    नई दिल्ली । अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी और गंभीर आपराधिक मामलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए 10 मामलों में अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की पहल की है। इन मामलों में पाकिस्तान में जन्मा एक व्यक्ति भी शामिल है, जिस पर अलग-अलग पहचान का उपयोग कर अमेरिकी आव्रजन प्रणाली का लाभ उठाने और बाद में नागरिकता हासिल करने का आरोप है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान अमेरिकी नागरिकता प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने और कथित धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और न्याय विभाग के अनुसार पिछले एक महीने के दौरान ऐसे कई मामलों में न्यायिक कार्रवाई शुरू की गई है, जिनमें नागरिकता प्राप्त करने के दौरान गलत जानकारी देने, महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों में केवल आव्रजन धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि बच्चों के यौन शोषण, स्वास्थ्य बीमा धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में अंतिम निर्णय अदालतों द्वारा ही किया जाएगा।

    कार्रवाई के केंद्र में 65 वर्षीय पाकिस्तानी मूल के मुर्तजा अली का मामला है। अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अमेरिका में स्थायी निवास और बाद में नागरिकता प्राप्त करने के लिए अलग-अलग नामों से कई आव्रजन आवेदन दाखिल किए। आरोपों के अनुसार उन्होंने अमेरिकी नागरिकता “मोहम्मद इकबाल” नाम से हासिल की थी। बाद में फिंगरप्रिंट मिलान और जांच के दौरान विभिन्न आवेदनों को एक ही व्यक्ति से जुड़ा पाया गया।

    संघीय अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2014 में मुर्तजा अली ने अमेरिकी सरकारी एजेंसी को झूठी और भ्रामक जानकारी देने के मामले में दोष स्वीकार किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने तीन अलग-अलग पहचान का उपयोग करते हुए अलग-अलग आव्रजन लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया। इसी आधार पर अब उनके खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

    सरकार ने टेक्सास की संघीय अदालत में दायर शिकायत में आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्ति ने इमिग्रेशन धोखाधड़ी, नागरिकता प्रक्रिया के दौरान झूठी गवाही देने और आवश्यक तथ्यों को छिपाने जैसे कृत्यों के माध्यम से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की। प्रशासन का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देकर नागरिकता हासिल करता है तो वह उस नागरिकता पर अपना वैधानिक अधिकार खो देता है।

    ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिकी नागरिकता एक विशेष कानूनी अधिकार है और इसे प्राप्त करने की प्रक्रिया में ईमानदारी सर्वोपरि है। प्रशासन का दावा है कि जिन मामलों में कार्रवाई की गई है, उनमें गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोग शामिल हैं और कानून के अनुसार ऐसे मामलों में नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भी इसी प्रकार के अन्य मामलों की समीक्षा जारी रहेगी।

    इन मामलों में पाकिस्तान के अलावा क्यूबा, मेक्सिको, पेरू और पोलैंड में जन्मे कुछ अन्य नागरिक भी शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी शिकायतें संघीय अदालतों में दायर की गई हैं और फिलहाल ये आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। अंतिम निर्णय अदालतों के आदेश के बाद ही प्रभावी होगा। प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य आव्रजन व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखना और नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कथित धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

  • US: टेक्सास के कैरोलटन शहर में अंधाधुंध फायरिंग…. 2 की मौत और तीन घायल, हमलावर गिरफ्तार

    US: टेक्सास के कैरोलटन शहर में अंधाधुंध फायरिंग…. 2 की मौत और तीन घायल, हमलावर गिरफ्तार


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) के टेक्सास (Texas) राज्य में डलास के उत्तरी शहर कैरोलटन (Carrollton K-Town Plaza) में मंगलवार को एक व्यक्ति ने पांच लोगों पर गोलियां चला दीं। इस हिंसक घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हमलावर (Attacker) को गिरफ्तार (Arrested) कर लिया है।

    कैरोलटन पुलिस प्रमुख रॉबर्टो एरेडोंडो ने जानकारी दी कि यह कोई अचानक हुआ हमला नहीं था। हमलावर और पीड़ित एक-दूसरे को पहले से जानते थे। पुलिस का मानना है कि उनके बीच कोई व्यावसायिक संबंध था और वे किसी मीटिंग के लिए मिले थे। हालांकि, उस मुलाकात का असली मकसद अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

    यह घटना कैरोलटन के कोरियाटाउन इलाके में स्थित के टाउन प्लाजा में हुई, जो डलास से करीब 32.1 किलोमीटर दूर है। सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो में पुलिस अधिकारी हाथों में हथियार लिए प्लाजा की तलाशी लेते नजर आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ एफबीआई (FBI) और एक अन्य संघीय एजेंसी के अधिकारी भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे।

  • टेक्सास की वालेरो रिफाइनरी में जोरदार धमाका, आग से मचा हड़कंप; ईरान कनेक्शन की अटकलों पर सस्पेंस

    टेक्सास की वालेरो रिफाइनरी में जोरदार धमाका, आग से मचा हड़कंप; ईरान कनेक्शन की अटकलों पर सस्पेंस

    वाशिंगटन। अमेरिका की टेक्सास स्थित वालेरो रिफाइनरी (Valero Energy) में जोरदार धमाके से हड़कंप मच गया। टेक्सास में स्थित इस रिफाइनरी में हुआ विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास की जमीन तक हिल गई और कई घरों की खिड़कियां टूटने की खबर है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें धमाके के बाद रिफाइनरी से घना काला धुआं उठता दिखाई दे रहा है।

    जानकारी के मुताबिक यह विस्फोट 23 मार्च को स्थानीय समयानुसार शाम 7 बजकर 22 मिनट पर हुआ। धमाके के बाद परिसर में आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकल की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं। Port Arthur फायर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि विस्फोट के कारणों की जांच की जा रही है और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास जारी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना तेज था कि उनके घर हिल गए। विस्फोट के बाद क्षेत्र में काला धुआं फैल गया, जिससे प्रशासन ने एहतियातन आसपास के इलाकों को खाली कराया और लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी है। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों की टीम यह भी जांच कर रही है कि आग के कारण हवा में कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं फैला।

    बड़ी रिफाइनरियों में शामिल

    वालेरो की पोर्ट आर्थर रिफाइनरी अमेरिकी गल्फ कोस्ट से करीब 90 मील दूर स्थित है और यहां लगभग 770 कर्मचारी काम करते हैं। रोजाना करीब 4.35 लाख बैरल गैसोलीन, डीजल और जेट ईंधन का उत्पादन यहां किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग के कारण संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय फ्यूल सप्लाई पर असर पड़ने की संभावना है।

    प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक हीटिंग यूनिट में विस्फोट आग की वजह हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच सोशल मीडिया पर यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि घटना का संबंध Iran से हो सकता है, लेकिन अब तक ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कारण स्पष्ट होगा।