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  • Women's Asia Cup: टीम इंडिया की विजयी शुरुआत…..थाईलैंड को 94 रनों से हराया

    Women's Asia Cup: टीम इंडिया की विजयी शुरुआत…..थाईलैंड को 94 रनों से हराया


    दुबई।
    भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) ने एशिया कप (Women’s Asia Cup 2026) के अपने पहले मैच में थाईलैंड (Thailand) को हराकर विजयी शुरुआत की है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में नौ विकेट पर 159 रन बनाए। जवाब में थाईलैंड की टीम 16.1 ओवर में 65 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने ये मुकाबला 94 रनों से अपने नाम किया। भारत के लिए इस मैच में शेफाली वर्मा ने जहां बल्लेबाजी में कमाल किया तो वहीं, नंदिनी शर्मा और दीप्ति शर्मा ने गेंद से दम दिखाया। दीप्ति ने बिना एक भी रन खर्च किए तीन विकेट झटके।


    भारतीय गेंदबाजों के आगे बिखरी थाईलैंड की बल्लेबाजी

    लक्ष्य का पीछा करते हुए थाईलैंड की बल्लेबाजी अच्छी नहीं रही और उसे शुरुआत से ही झटके पर झटके लगे। थाईलैंड की ओर से सिर्फ नानापट कोंचारोएनकाई ही दहाई अंक तक नहीं पहुंच सकीं। कोंचारोएनकाई के अलावा थाईलैंड का अन्य कोई बल्लेबाज छह रन से भी अधिक नहीं बना सका। कोंचारोएनकाई ने टीम की ओर से सबसे ज्यादा 41 रन बनाए। भारत की गेंदबाजी बेहद शानदार रही। दीप्ति और नंदिनी ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि श्री चरणी को दो और क्रांति गौड़ को एक विकेट मिला।


    मंधाना ने सूजी बेट्स को पीछे छोड़ा

    इससे पहले, थाईलैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया। भारत के लिए स्मृति मंधाना और शेफाली ने पारी की शुरुआत की। भारत को मंधाना के रूप में पहला झटका लगा जो रन आउट होकर पवेलियन लौट गईं। मंधाना ने 10 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 19 रन बनाए। मंधाना इस मैच में भले ही सस्ते में आउट हुईं, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा कीर्तिमान बना लिया। मंधाना महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली दूसरी बल्लेबाज बन गई हैं। मंधाना ने इस मामले में सूजी बेट्स को पीछे छोड़ दिया है। बेट्स ने महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10740 रन बनाए हैं। अब मंधाना उनसे आगे निकल गई हैं। मंधाना से आगे अब भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में 10868 रन बनाए हैं।


    शेफाली का अर्धशतक

    थाईलैंड के खिलाफ भारतीय महिला टीम ने अच्छी शुरुआत की। शेफाली वर्मा ने शुरुआत से दी दबाव बनाया। मंधाना के रूप में हालांकि, भारत को पहला झटका लगा। लेकिन शेफाली ने रन गति कम नहीं होने दी और लगातार बड़े शॉट्स लगाती रहीं। भारत ने इस तरह पावरप्ले में एक विकेट के नुकसान पर 65 रन बनाए। महिला टी20 एशिया कप में पावरप्ले का यह सबसे बड़ा स्कोर है। इससे पहले भी ये रिकॉर्ड भारत के ही नाम था। भारतीय टीम ने 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ पावरप्ले में बिना किसी नुकसान के 59 रन बनाए थे। शेफाली ने इसके बाद भी दमदार बल्लेबाजी जारी रखी और 26 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया।


    भारत की पारी लड़खड़ाई

    भारत की बल्लेबाज अच्छी चल रही थी, लेकिन 13वें ओवर में उस समय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई जब सुलीपोर्न लाओमी ने भारत को लगातार दो झटके दिए। लाओमी ने पहले शेफाली को आउट किया और फिर अगली ही गेंद पर ऋचा घोष को खाता खोले बिना पवेलियन भेजा। इससे पहले, थिपात्चा फुथावोंग ने कप्तान हरमनप्रीत को आउट कर भारत को तीसरा झटका दिया था। हरमनप्रीत पांच रन बनाकर आउट हुईं। शेफाली ने दमदार बल्लेबाजी की और 36 गेंदों पर आठ चौकों और तीन छक्कों की मदद से 64 रन बनाकर आउट हुईं। शेफाली के आउट होते ही भारत की पारी लड़खड़ा गई। भारत ने 137 रन पर नौ विकेट गंवा दिए। अंत में श्री चरणी और क्रांति गौड़ ने 22 रनों की साझेदारी की, जिससे टीम इंडिया का स्कोर 160 के करीब पहुंचा। भारत के लिए क्रांति आठ गेंदों पर 15 और श्री चरणी छह रन बनाकर नाबाद रहीं। थाईलैंड की ओर से सुलीपोर्न ने तीन विकेट लिए, जबकि सुनिदा चातुरोंग्राटाना को दो विकेट मिले। वहीं, थिपात्चा और चानिदा को एक-एक विकेट मिला।


    प्रतिका रावल का डेब्यू

    प्रतिका रावल ने थाईलैंड के खिलाफ मैच से टी20 अंतरराष्ट्रीय में डेब्यू किया। टॉस से पहले प्रतिका को कैप पहनाई गई। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने प्रतिका को कैप दी। प्रतिका के चयन को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं, लेकिन वह आज आखिरकार भारत के लिए टी20 डेब्यू करने में सफल रहीं।

    दोनों टीमों की प्लेइंग-11:
    भारत: शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, प्रतिका रावल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), भारती फुलमाली, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, एन श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदिनी शर्मा।
    थाईलैंड: अपिसारा सुवानचोंराठी, नाटाकन चांतम, फानिता माया, नानापट कोंचारोएनकाई (विकेटकीपर), चानिदा सुथिरुआंग, नाओमी हेमिल्टन, सुलीपोर्न लाओमी, नानाफट चाएहान, सुनिदा चातुरोंग्राटाना, थिपात्चा फुथावोंग (कप्तान), ओनिचा काम्चोंफू।

  • जापान की पहली पसंद भारत…. लेकिन कारखाने थाईलैंड में ज्यादा

    जापान की पहली पसंद भारत…. लेकिन कारखाने थाईलैंड में ज्यादा


    टोक्यो।
    जापान (Japan) के लिए भारत (India) कागज पर पहली पसंद है, कारखाने के लिए थाईलैंड (Thailand)। जापानी कंपनियों (Japanese Companies) की पसंद में भारत भले 61.8% वोट के साथ पसंदीदा ठिकानों की सूची में लगातार चौथे साल शीर्ष पर है, पर जापानी कंपनियां (Japanese Companies) भारत में 1400 हैं जबकि थाईलैंड में छह हजार।

    11 साल में निवेश का लक्ष्य 3.5 लाख करोड़ येन (2.10 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर 10 लाख करोड़ येन (6 लाख करोड़ रुपये) हो गया, कंपनियों की गिनती नहीं बढ़ी। रकम के वादे काम नहीं आए, इसलिए इस बार सरकार 220 भारतीय उद्योगपतियों को सीधे जापानी कारखानों के दरवाजे पर ले जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal Japan visit) के नेतृत्व वाला यह दल सोमवार से 27 अगस्त तक जापान में रहेगा। रणनीति दौरे के नक्शे से समझ आती है। पैसा टोक्यो में है, पर कारखाना लगाने वाली कंपनियां वहां नहीं हैं।

    जापान की असली विनिर्माण ताकत आइची और कंसाई की उन हजारों मझोली कंपनियों में है, जो बड़ी कंपनियों को कलपुर्जे देती हैं। कोई जापानी कंपनी जब कहीं जाती है, तो आपूर्तिकर्ताओं का पूरा झुंड साथ ले जाती है। इसीलिए भारत पहली बार इंतजार के बजाय खुद उनके पास गया है। भारतीय दल नागोया में चुकेइरेन व नागोया चैंबर के साथ रोड शो करेगा, ओसाका व क्योटो में क्षेत्रीय उद्योग से जुड़ेगा।

    सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स व एआई पर गोलमेज बैठक
    इस कार्यक्रम में मशीन को समझने या जानने पर जोर है। सेमीकंडक्टर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स पर एक गोलमेज बैठक है, पूंजीगत वस्तुओं, मशीनरी और वाहन उद्योग पर दूसरी। दौरे का मकसद दोतरफा निवेश बढ़ाना है। इसी क्रम में भारतीय कंपनियों का जापान जाना भी अहम है, जहां अभी सिर्फ 100 भारतीय कंपनियां हैं।


    भारत सिर्फ खरीदार नहीं…

    दल में रिलायंस के औद्योगिक नगर मेट सिटी के प्रमुख हैं, जो जापानी कंपनियों को जमीन बेचते हैं। मारुति सुजुकी है, गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन है, बीमा व संपत्ति प्रबंधन कंपनियां हैं, जो जापान की सस्ती पेंशन पूंजी की तलाश में हैं, और स्टार्टअप का पूरा जत्था है, जिसके लिए टोक्यो में अलग बैठक होगी।

    दल में कौन-कौन?
    आरपीजी समूह के उपाध्यक्ष अनंत गोयनका, एसोचैम से निर्मल कुमार मिंडा, टीसीआई के विनीत अग्रवाल, रिन्यू पावर के सुमंत सिन्हा, किर्लोस्कर सिस्टम्स की गीतांजलि विक्रम किर्लोस्कर, एडवर्ब टेक के जलज दानी, कार्स24 के विक्रम चोपड़ा, गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन के राजेंद्र कुमार, मारुति सुजुकी के राहुल भारती, मोबिक्विक की उपासना टाकू, न्यूस्पेस रिसर्च के जूलियस अमृत, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट के संदीप सिक्का, रिलायंस मेट सिटी के श्रीवल्लभ गोयल, स्नैबिट के आयुष अग्रवाल, स्टार यूनियन दाई-इची लाइफ के अभय तिवारी और एसपीएफ की श्वेता राजपाल कोहली। वाहन, वाहन कलपुर्जे, अभियांत्रिकी, रसायन, पेट्रो रसायन, तकनीक और स्टार्टअप, यानी हर क्षेत्र से नाम हैं।

  • Thailand के 3 प्रांतों में अलग शासन की मांग…. रातभर हुई हिंसा…. PM ने बुलाई आपात बैठक

    Thailand के 3 प्रांतों में अलग शासन की मांग…. रातभर हुई हिंसा…. PM ने बुलाई आपात बैठक


    बैंकाक।
    थाईलैंड (Thailand) के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल (Prime Minister Anutin Charnvirakul) ने रविवार को वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। देश के उत्तर में पहले से ही बाढ़ का संकट बना हुआ है। इसी बीच, दक्षिण के तीन प्रांतों में रातभर एक साथ हिंसा हुई। इन इलाकों में कुछ मुस्लिम विद्रोही संगठन (Muslim Insurgent Organization) सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं और अपने इलाके के लिए अलग शासन की मांग कर रहे हैं।


    पीएम अनुतिन ने क्यों बुलाई गई बैठक?

    अनुतिन के उत्तर की ओर रवाना होने से कुछ समय पहले यह बैठक हुई। उन्हें बुरी तरह बाढ़ प्रभावित नान प्रांत का जायजा लेना था। बैठक शनिवार रात दक्षिण के सबसे आखिरी तीन प्रांतों में हुई 51 घटनाओं के बाद बुलाई गई। इनमें नाराथिवाट, पट्टानी और याला शामिल हैं।

    हमलावरों का सेना या पुलिस से कोई सामना नहीं हुआ। अब तक सिर्फ तीन नागरिकों के घायल होने की जानकारी है। रविवार को बताया गया कि तीनों की हालत में सुधार हो रहा है।

    हिंसा में मुख्य रूप से छोटे बमों का इस्तेमाल हुआ। आगजनी की गई। संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। सबसे बड़ा निशाना पट्टानी का 7-इलेवन स्टोर था। सोशल मीडिया पर चल रहे एक वीडियो में हथियारबंद लोग स्टोर के बाहर घूमते दिखे। ग्राहक और कर्मचारी वहां से भागते नजर आए। इसके बाद स्टोर में आग लगा दी गई।

    नाराथिवाट में एक बम से रेल की पटरियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके कारण स्थानीय और लंबी दूरी की रेल सेवाएं रोकनी पड़ीं। सुरक्षा की स्थिति साफ नहीं होने के कारण यह पता नहीं चल पाया कि सेवाएं कब फिर शुरू होंगी। ऐसी घटनाओं में अक्सर तुरंत किसी संगठन पर सार्वजनिक रूप से आरोप नहीं लगाया जाता। इस बार भी किसी संगठन ने तुरंत हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली।


    हमलों के पीछे बीआरएन को क्यों माना जा रहा है?

    हालांकि, आमतौर पर माना जाता है कि ऐसे हमले बारिसान रिवोलुसी नेशनल मेलायु पटानी यानी बीआरएन करता है। यह दक्षिण का प्रमुख विद्रोही संगठन है। उसके पास ऐसी कार्रवाई करने के लिए संगठन और समर्थन दोनों हैं। यही वह संगठन है, जिसके साथ थाई सरकार समय-समय पर शांति वार्ता करती रही है।

    थाईलैंड में ज्यादातर लोग बौद्ध हैं। लेकिन इसके तीन सबसे दक्षिणी प्रांतों में मुस्लिम आबादी बहुमत में है। बीआरएन ने कहा है कि वह इन प्रांतों के लिए खुद शासन की व्यवस्था चाहता है। मुस्लिम लोग लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि थाईलैंड में उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार होता है। अलगाववादी आंदोलन भी कई दशकों से समय-समय पर सक्रिय रहे हैं।


    22 साल में 7,837 लोगों की मौत?

    2004 में विद्रोही हिंसा अचानक काफी बढ़ गई थी। इसके जवाब में सरकार ने सख्त कार्रवाई की। इससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया। पट्टानी में प्रिंस ऑफ सोंगकला यूनिवर्सिटी के परिसर से जुड़े थिंक टैंक डीप साउथ वॉच के मुताबिक, पिछले 22 साल में इस हिंसा में 7,837 लोगों की मौत हुई है।

    इस हिंसा में पिछली बड़ी घटना जुलाई में हुई थी। उस समय करीब 10 हमलावरों ने नाराथिवाट में एक सुरक्षा चौकी पर सैनिकों पर गोलियां चलाईं। उन्होंने सैनिकों पर पाइप बम भी फेंके। इस हमले में अर्धसैनिक बल के पांच सैनिक मारे गए। छह नागरिक घायल हुए। इनमें 10 साल का एक लड़का भी शामिल था।

  • थाईलैंड की खुदाई में मिला भारत से जुड़ा बड़ा सबूत, ब्राह्मी लिपि की अंगूठी ने खोले इतिहास के राज

    थाईलैंड की खुदाई में मिला भारत से जुड़ा बड़ा सबूत, ब्राह्मी लिपि की अंगूठी ने खोले इतिहास के राज


    नई दिल्ली । भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संबंध आधुनिक दौर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें करीब दो हजार वर्ष पुरानी हैं। इसका ताजा प्रमाण थाईलैंड में हुई एक पुरातात्विक खुदाई से मिला है, जहां वैज्ञानिकों को दो सोने की प्राचीन अंगूठियां मिली हैं। इनमें से एक अंगूठी पर भारतीय ब्राह्मी लिपि में अंकित शब्दों ने इतिहासकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज प्राचीन भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत व्यापारिक संपर्क का महत्वपूर्ण साक्ष्य है।

    यह खोज थाईलैंड के पेत्चाबुरी प्रांत स्थित दोन याई थोंग पुरातात्विक स्थल पर हुई। थाईलैंड के फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट के अनुसार यहां मानव कंकालों की खुदाई के दौरान ये अंगूठियां मिलीं। प्रारंभिक अध्ययन में पता चला कि इनका संबंध लगभग 2,000 वर्ष पुराने आयरन एज काल से हो सकता है।

    ब्राह्मी लिपि में मिला अहम संदेश

    विशेषज्ञों ने एक अंगूठी पर अंकित ब्राह्मी लिपि को पढ़ने की कोशिश की, जिसमें ‘पुस रखितस’ लिखा मिला। इसका अर्थ बताया गया है- “वह व्यक्ति जिसे पुष्य का संरक्षण प्राप्त है।” भारतीय परंपरा में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दूसरी अंगूठी पर कोई लेख नहीं मिला, लेकिन दोनों आभूषणों की बनावट और शैली भारतीय प्रभाव की ओर संकेत करती है।

    भारतीय व्यापारी से जुड़ा हो सकता है संबंध

    पुरातत्वविदों का मानना है कि ये अंगूठियां किसी संपन्न भारतीय व्यापारी की हो सकती हैं, जो समुद्री व्यापार के जरिए उस समय थाईलैंड पहुंचा होगा। उस दौर में भारत के व्यापारी मसाले, वस्त्र, धातु, आभूषण और अन्य वस्तुओं का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से करते थे। यही कारण है कि थाईलैंड सहित कई क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति, भाषा और धार्मिक प्रभाव के प्रमाण समय-समय पर मिलते रहे हैं।

    धान के खेत से शुरू हुई बड़ी खोज

    इस ऐतिहासिक स्थल की पहचान तब हुई जब स्थानीय ग्रामीणों को धान के खेत में प्राचीन वस्तुएं मिलीं। इसके बाद सरकार ने यहां वैज्ञानिक खुदाई शुरू कराई। फरवरी से अब तक यहां से आठ मानव कंकाल, सोने और कांसे के आभूषण, मिट्टी के बर्तन और कई अन्य प्राचीन वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि खुदाई पूरी होने के बाद इन सभी अवशेषों को संग्रहालय में आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

    राखीगढ़ी पर भी बढ़ी उम्मीदें

    उधर भारत में भी सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े स्थलों में शामिल राखीगढ़ी को लेकर शोध तेज हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वहां से मिले मानव कंकालों को वैज्ञानिक और डीएनए विश्लेषण के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण को सौंपा है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन अध्ययनों से प्राचीन भारतीय सभ्यता, लोगों की जीवनशैली और आनुवंशिक इतिहास से जुड़े कई नए तथ्य सामने आएंगे। थाईलैंड में मिली यह नई खोज एक बार फिर साबित करती है कि प्राचीन भारत का व्यापारिक और सांस्कृतिक प्रभाव समुद्री मार्गों के जरिए हजारों किलोमीटर दूर तक फैला हुआ था।

  • थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

    थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । थाईलैंड के मुकदाहान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। धार्मिक पदयात्रा पर निकले बौद्ध भिक्षुओं के समूह में एक पिकअप वाहन के घुस जाने से 10 भिक्षुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन एक 11 वर्षीय बच्चा चला रहा था, जिसने बिना अनुमति अपने माता-पिता की पिकअप लेकर घर से बाहर निकलने के बाद नियंत्रण खो दिया। घटना के बाद पूरे देश में सड़क सुरक्षा, अभिभावकों की जिम्मेदारी और नाबालिगों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर चर्चा तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय 35 बौद्ध भिक्षु और पांच श्रद्धालु धार्मिक पदयात्रा पर थे। सभी सड़क के किनारे एक पंक्ति में आगे बढ़ रहे थे, तभी तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित होकर सीधे जुलूस में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई भिक्षु दूर तक उछल गए। पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनमें से तीन की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चा अपने माता-पिता की जानकारी के बिना वाहन लेकर निकल गया था। वाहन के घर से गायब होने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी थी। इसके कुछ समय बाद हादसे की जानकारी सामने आई। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हादसे में बचे भिक्षुओं और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    जांच अधिकारियों ने बताया कि बच्चा फिलहाल विस्तृत बयान देने की स्थिति में नहीं है। शुरुआती स्तर पर यह आशंका भी जताई गई है कि वह विशेष आवश्यकताओं वाला बच्चा हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति का भी मूल्यांकन कर रहे हैं।

    प्रत्यक्षदर्शी एक भिक्षु ने बताया कि सभी लोग धार्मिक मंत्रों का जाप करते हुए शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे। तभी सामने से तेज गति से आती पिकअप अचानक उनकी ओर मुड़ गई। उन्होंने समय रहते स्वयं को बचा लिया, लेकिन उनके पीछे चल रहे कई भिक्षु वाहन की चपेट में आ गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दल ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

    स्थानीय अस्पताल ने घायलों की संख्या अधिक होने के कारण लोगों से रक्तदान की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार कई घायलों का उपचार जारी है और कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि दुर्घटना के सभी पहलुओं का पता लगाया जा सके।

    थाईलैंड के कानून के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सामान्य परिस्थितियों में आपराधिक दायित्व लागू नहीं होता। ऐसे में इस मामले में बच्चे के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी कानूनी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से वाहन दूर रखें और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा

    हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करते हुए पूर्वी बेड़े के तीन प्रमुख युद्धपोत आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति को ऑपरेशनल तैनाती के तहत थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह भेजा है। इस महत्वपूर्ण पोर्ट कॉल का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री सहयोग को नई गति देना, रक्षा संबंधों को मजबूत बनाना और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर करना है।

    पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में पहुंचे भारतीय नौसैनिक दल का रॉयल थाई नेवी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मित्र देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक सहयोग का अहम हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे समुद्री संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    थाईलैंड प्रवास के दौरान भारतीय और थाई नौसेना के बीच कई पेशेवर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें क्रॉस डेक विजिट, ऑपरेशनल चर्चा, सामरिक अनुभवों का आदान-प्रदान, खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और प्रभावी बनाना है।

    यह पोर्ट कॉल भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी डिजाइन और आधुनिक निर्माण प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके जरिए भारत यह संदेश भी दे रहा है कि वह रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय तथा सक्षम साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

    इससे पहले भारतीय नौसेना के यही युद्धपोत वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी की तीन दिवसीय सफल यात्रा पूरी कर चुके हैं। 22 से 24 जून 2026 के बीच हुए इस दौरे में भारतीय और वियतनाम पीपुल्स नेवी के बीच कई महत्वपूर्ण पेशेवर संवाद, सामरिक अभ्यास और उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई थीं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग को लेकर अपने साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया।

    वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल अनुभव साझा किए और समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर चर्चा की। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षित समुद्री मार्ग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

    भारतीय नौसेना की लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों तथा मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। थाईलैंड और वियतनाम जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ बढ़ता नौसैनिक सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

  • चार वर्षों तक कोमा से जूझने के बाद थाईलैंड की राजकुमारी का निधन, शाही परिवार और देश में शोक की लहर

    चार वर्षों तक कोमा से जूझने के बाद थाईलैंड की राजकुमारी का निधन, शाही परिवार और देश में शोक की लहर

    नई दिल्ली । थाईलैंड के शाही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। देश के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी बेटी और उत्तराधिकार की प्रमुख दावेदारों में शामिल राजकुमारी बज्रकिटियाभा नरेंद्र देब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले लगभग चार वर्षों से वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कोमा में थीं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे थाईलैंड में शोक का माहौल बन गया।

    राजपरिवार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राजकुमारी की तबीयत पिछले कुछ समय से लगातार नाजुक बनी हुई थी। कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनके शरीर की स्थिति लगातार कमजोर होती गई। चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम लंबे समय से उनका उपचार कर रही थी, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। अंततः उन्होंने जीवन की अंतिम लड़ाई हार दी।

    राजकुमारी की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दिसंबर 2022 में उस समय शुरू हुई थीं, जब वह एक आधिकारिक कार्यक्रम के सिलसिले में देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के दौरे पर थीं। इसी दौरान उन्हें अचानक हृदय संबंधी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा और वे बेहोश हो गईं। तत्काल उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधा के लिए राजधानी लाया गया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ। हालांकि उस घटना के बाद वह कभी पूरी तरह होश में नहीं लौट सकीं और लगातार कोमा की स्थिति में रहीं।

    राजकुमारी बज्रकिटियाभा को थाई शाही परिवार की सबसे प्रभावशाली और सक्रिय हस्तियों में गिना जाता था। उन्होंने केवल शाही जिम्मेदारियों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कानून, कूटनीति और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सार्वजनिक छवि एक शिक्षित, संवेदनशील और जिम्मेदार राजपरिवार सदस्य के रूप में स्थापित थी।

    उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने अमेरिका में कानून की पढ़ाई की और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल कीं। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानूनी क्षेत्र में काम किया और न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। बाद में उन्हें विदेशों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जहां उन्होंने राजनयिक के रूप में कार्य किया।

    राजकुमारी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती थीं। विशेष रूप से महिला अधिकारों और जेल सुधारों से जुड़े मुद्दों पर उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने महिला कैदियों और गर्भवती बंदियों के कल्याण के लिए कई पहल का समर्थन किया। इसी कारण उन्हें मानवाधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े मंचों पर भी सम्मान प्राप्त हुआ।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान मजबूत रही। कानून के शासन, न्यायिक सुधार और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में उनकी सक्रियता को वैश्विक संस्थाओं ने भी सराहा था। बाद के वर्षों में उन्होंने सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन किया तथा राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

    राजकुमारी के निधन को थाईलैंड के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। राजनीतिक, सामाजिक और शाही हलकों में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। देशभर में लोग उन्हें एक ऐसी शख्सियत के रूप में याद कर रहे हैं जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में सेवा, जिम्मेदारी और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।

    उनके निधन के साथ थाई शाही परिवार ने अपनी एक महत्वपूर्ण सदस्य को खो दिया है। आने वाले दिनों में देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है, जहां लोग उनके जीवन और योगदान को याद करेंगे।

  • थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही

    थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही


    बैंकॉक।
    थाईलैंड (Thailand) की भावी शासक राजकुमारी, बज्रकितियाभा (Princess Bajrakitiyabha) का निधन हो गया है। शुक्रवार सुबह शाही परिवार ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। राजा महा वजिरालॉन्गकॉर्न (King Maha Vajiralongkorn) की सबसे बड़ी बेटी और देश की सबसे लोकप्रिय शाही हस्तियों में से एक, ‘प्रिंसेस भा’ पिछले साढ़े 3 साल से लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे कोमा में थीं। अब उनकी मौत से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

    पैलेस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 47 वर्षीय राजकुमारी बज्रकितियाभा ने बैंकॉक के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। इससे पहले शाही परिवार ने बीते दिनों एक बयान जारी कर बताया था कि उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। मेडिकल टीम ने बताया था कि उनके पेट और आंतों में इन्फेक्शन फैल गया था और उनके कई अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात उनका निधन हो गया।


    दिसंबर 2022 में हो गई थीं बेहोश

    राजकुमारी बज्रकितियाभा दिसंबर 2022 में बैंकॉक में अपने पालतू कुत्तों को वॉक कराने के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, दिल में माइकोप्लाज्मा इन्फेक्शन के कारण अचानक उनकी दिल की धड़कनें पूरी तरह अनियमित हो गई थीं। इससे उनके दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हुई और वह कोमा में चली गईं। तब से उन्हें मशीनों के सहारे ही जीवित रखा गया था।


    सबसे योग्य उत्तराधिकारी थीं प्रिंसेज भा

    राजकुमारी को यहां के लोग प्यार से प्रिंसेज भा कहा करते थे। राजा वजिरालॉन्गकॉर्न की पहली पत्नी सोअमसावली से जन्मीं प्रिंसेज भा का जन्म 7 दिसंबर 1978 को हुआ था। वह अपने पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी थीं। बचपन से ही वे काफी मेधावी थीं। आगे चलकर वे वह एक बेहद काबिल वकील थीं। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून में LLM और डॉक्टरेट की डिग्रियां हासिल की थीं।

    इसके बाद उन्हें राजघराने से अहम जिम्मेदारियां भी मिलीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के लिए काम किया। इसके बाद वे 2012 से 2014 तक ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इसके अलावा प्रिंसेज भा ने थाईलैंड की जेलों में बंद महिला कैदियों की स्थिति सुधारने और ड्रग्स मामलों में मिलने वाली कड़ी सजाओं के खिलाफ कानून में बड़े सुधारों की वकालत भी की थी। 2021 में उनके पिता ने उन्हें अपनी पर्सनल बॉडीगार्ड विंग का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया था और उन्हें जनरल की रैंक दी थी।


    थाईलैंड के सिंहासन का अगला वारिस कौन?

    राजकुमारी बज्रकितियाभा के निधन से थाईलैंड में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 73 वर्षीय राजा वजिरालॉन्गकॉर्न ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है। प्रिंसेस भा के निधन से पहले उन्हें ही सबसे योग्य उम्मीदवार माना जा रहा था। हालांकि सालों पहले थाईलैंड के कानून में महिला उत्तराधिकारी का प्रावधान नहीं था। लेकिन 1974 में संविधान संशोधन के बाद इन नियमों में बदलाव किए गए थे।

    प्रिंसेज भा की मौत के बाद सबसे अहम दावेदार 21 वर्षीय प्रिंस दिपंगकोर्न हैं। वे राजा की तीसरी पत्नी से पैदा हुए इकलौते बेटे हैं और फिलहाल एकमात्र वैध पुरुष उत्तराधिकारी भी हैं। हालांकि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने की उनकी क्षमताओं पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले राजा के अन्य चार बेटे भी थे। हालांकि राजा ने अपनी दूसरी शादी से हुए चार बेटों को 1996 में ही राजघराने से बेदखल कर दिया था। वे अपनी मां के साथ अमेरिका में रहते हैं और उनका शाही हक खत्म हो चुका है।

  • मंदिर में मातम के बीच डांस परिवार ने निभाई आखिरी इच्छा सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    मंदिर में मातम के बीच डांस परिवार ने निभाई आखिरी इच्छा सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस


    नई दिल्ली । थाईलैंड के नखोन सी थाम्मरत प्रांत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान और विभाजित कर दिया है। यहां एक बौद्ध मंदिर में हुए अंतिम संस्कार के दौरान ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर लोग स्तब्ध रह गए। एक 59 वर्षीय व्यक्ति की अंतिम विदाई पर उसके परिवार ने पारंपरिक शोक के बजाय जश्न का माहौल बनाया और ताबूत के सामने कोयोट डांसर्स से प्रदर्शन कराया।

    यह घटना रॉन फिबुन जिले के वाट थेप्पानोम चुआट मंदिर में हुई जहां अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद अचानक तीन महिला डांसर्स ने ताबूत के सामने डांस करना शुरू कर दिया। बताया गया कि यह पूरा आयोजन मृतक की अंतिम इच्छा के अनुसार किया गया था। डांसर्स ने कोरियोग्राफ किया हुआ परफॉर्मेंस मंदिर परिसर के भीतर प्रस्तुत किया जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    मृतक के परिवार का कहना है कि वह व्यक्ति बेहद खुशमिजाज स्वभाव का था और हमेशा जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता था। उन्होंने अपने अंतिम संदेश में यह इच्छा जताई थी कि उनकी विदाई पर रोने की बजाय लोग उनके जीवन का जश्न मनाएं। इसी सोच को सम्मान देते हुए परिवार ने अंतिम संस्कार को एक अलग रूप देने का निर्णय लिया और शोक सभा को उत्सव में बदल दिया।

    बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अंतिम प्रार्थना और मंत्रोच्चार पूरा करने के बाद यह डांस परफॉर्मेंस शुरू हुआ। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को देखा और इसे सोशल मीडिया पर लाइव भी किया गया। वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया और दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

    हालांकि, इस घटना को लेकर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि यह मृतक की अंतिम इच्छा का सम्मान है और जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने का प्रतीक है। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ बता रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह का प्रदर्शन खासकर मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर उचित नहीं है।

    मरने वाले व्यक्ति का निधन 15 अप्रैल को हुआ था और उन्होंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह नहीं चाहते कि उनकी मृत्यु पर लोग दुखी हों। उनका मानना था कि मृत्यु जीवन का हिस्सा है और इसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने पारंपरिक शोक को हटाकर एक अलग प्रकार का अंतिम संस्कार आयोजित किया।

    यह घटना न सिर्फ थाईलैंड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर इसे जीवन को सेलिब्रेट करने का तरीका माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

  • थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह

    थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह


    मुंबई। भारतीयों के बीच में थाईलैंड की एक खास छवि बनी हुई है। हर साल लाखों लोग छुट्टियां मनाने के लिए थाईलैंड जाते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो सोशल मीडिया पर एक शर्म का कारण बन जाती हैं। ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें थाईलैंड के पटाया में कुछ ट्रांसजेंडर महिलाएं मिलकर एक भारतीय नागरिक के साथ हाथा-पाई करती नजर आ रही हैं।
    कथित तौर पर व्यक्ति यौन सेवाओं का भुगतान किए बिना भाग रहा था।
    सोशल मीडिया साइट पर वायरल हो रहा यह वीडियो 27 दिसंबर का बताया जा रहा है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तीन महिलाएं मिलकर एक 52 वर्षीय भारतीय व्यक्ति से पैसे की मांग कर रही है। जैसे ही व्यक्ति पैसे देने से इनकार करते हुए कार में बैठकर जाने लगता है, तो विवाद बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मदद से वह उसे कार से बाहर खींच लेती हैं और फिर जमकर मारपीट करती हैं। बाद में पुलिस वहां आकर उन्हें अलग करवाती है।

    एक स्थानीय युवक ने बताया कि आरोपी व्यक्ति वॉकिंग स्ट्रीट इलाके में एक ट्रांस सेक्स वर्कर के साथ बहस करत रहा था। जल्दी ही यह बहस एक हिंसक झड़प में बदल गई और फिर मारपीट शुरू हो गई।

    व्यक्ति ने बताया कि इस लड़ाई की शुरूआत रकम तय करने के बाद मुकर जाने की वजह से हुई।

    आपको बता दें, थाईलैंड का पटाया भारतीयों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहाँ पर अक्सर ऐसे विवाद सामने आते रहते हैं। कुछ समय पहले सिंतबर में भी एक ऐसा वीडियो सामने आया था, जिसमें ट्रांसजेंडर महिला ने आरोप लगाया था कि व्यक्ति ने उसे गलत तरीके से छुआ है। इसी तरह अक्तूबर में भी तीन ट्रांस महिलाओं पर दो भारतीयों ने हमला किया था और उनके पैसे लेकर फरार हो गए थे।