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  • थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

    थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । थाईलैंड के मुकदाहान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। धार्मिक पदयात्रा पर निकले बौद्ध भिक्षुओं के समूह में एक पिकअप वाहन के घुस जाने से 10 भिक्षुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन एक 11 वर्षीय बच्चा चला रहा था, जिसने बिना अनुमति अपने माता-पिता की पिकअप लेकर घर से बाहर निकलने के बाद नियंत्रण खो दिया। घटना के बाद पूरे देश में सड़क सुरक्षा, अभिभावकों की जिम्मेदारी और नाबालिगों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर चर्चा तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय 35 बौद्ध भिक्षु और पांच श्रद्धालु धार्मिक पदयात्रा पर थे। सभी सड़क के किनारे एक पंक्ति में आगे बढ़ रहे थे, तभी तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित होकर सीधे जुलूस में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई भिक्षु दूर तक उछल गए। पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनमें से तीन की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चा अपने माता-पिता की जानकारी के बिना वाहन लेकर निकल गया था। वाहन के घर से गायब होने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी थी। इसके कुछ समय बाद हादसे की जानकारी सामने आई। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हादसे में बचे भिक्षुओं और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    जांच अधिकारियों ने बताया कि बच्चा फिलहाल विस्तृत बयान देने की स्थिति में नहीं है। शुरुआती स्तर पर यह आशंका भी जताई गई है कि वह विशेष आवश्यकताओं वाला बच्चा हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति का भी मूल्यांकन कर रहे हैं।

    प्रत्यक्षदर्शी एक भिक्षु ने बताया कि सभी लोग धार्मिक मंत्रों का जाप करते हुए शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे। तभी सामने से तेज गति से आती पिकअप अचानक उनकी ओर मुड़ गई। उन्होंने समय रहते स्वयं को बचा लिया, लेकिन उनके पीछे चल रहे कई भिक्षु वाहन की चपेट में आ गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दल ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

    स्थानीय अस्पताल ने घायलों की संख्या अधिक होने के कारण लोगों से रक्तदान की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार कई घायलों का उपचार जारी है और कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि दुर्घटना के सभी पहलुओं का पता लगाया जा सके।

    थाईलैंड के कानून के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सामान्य परिस्थितियों में आपराधिक दायित्व लागू नहीं होता। ऐसे में इस मामले में बच्चे के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी कानूनी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से वाहन दूर रखें और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा

    हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करते हुए पूर्वी बेड़े के तीन प्रमुख युद्धपोत आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति को ऑपरेशनल तैनाती के तहत थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह भेजा है। इस महत्वपूर्ण पोर्ट कॉल का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री सहयोग को नई गति देना, रक्षा संबंधों को मजबूत बनाना और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर करना है।

    पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में पहुंचे भारतीय नौसैनिक दल का रॉयल थाई नेवी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मित्र देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक सहयोग का अहम हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे समुद्री संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    थाईलैंड प्रवास के दौरान भारतीय और थाई नौसेना के बीच कई पेशेवर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें क्रॉस डेक विजिट, ऑपरेशनल चर्चा, सामरिक अनुभवों का आदान-प्रदान, खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और प्रभावी बनाना है।

    यह पोर्ट कॉल भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी डिजाइन और आधुनिक निर्माण प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके जरिए भारत यह संदेश भी दे रहा है कि वह रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय तथा सक्षम साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

    इससे पहले भारतीय नौसेना के यही युद्धपोत वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी की तीन दिवसीय सफल यात्रा पूरी कर चुके हैं। 22 से 24 जून 2026 के बीच हुए इस दौरे में भारतीय और वियतनाम पीपुल्स नेवी के बीच कई महत्वपूर्ण पेशेवर संवाद, सामरिक अभ्यास और उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई थीं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग को लेकर अपने साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया।

    वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल अनुभव साझा किए और समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर चर्चा की। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षित समुद्री मार्ग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

    भारतीय नौसेना की लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों तथा मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। थाईलैंड और वियतनाम जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ बढ़ता नौसैनिक सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

  • चार वर्षों तक कोमा से जूझने के बाद थाईलैंड की राजकुमारी का निधन, शाही परिवार और देश में शोक की लहर

    चार वर्षों तक कोमा से जूझने के बाद थाईलैंड की राजकुमारी का निधन, शाही परिवार और देश में शोक की लहर

    नई दिल्ली । थाईलैंड के शाही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। देश के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी बेटी और उत्तराधिकार की प्रमुख दावेदारों में शामिल राजकुमारी बज्रकिटियाभा नरेंद्र देब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले लगभग चार वर्षों से वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कोमा में थीं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे थाईलैंड में शोक का माहौल बन गया।

    राजपरिवार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राजकुमारी की तबीयत पिछले कुछ समय से लगातार नाजुक बनी हुई थी। कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनके शरीर की स्थिति लगातार कमजोर होती गई। चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम लंबे समय से उनका उपचार कर रही थी, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। अंततः उन्होंने जीवन की अंतिम लड़ाई हार दी।

    राजकुमारी की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दिसंबर 2022 में उस समय शुरू हुई थीं, जब वह एक आधिकारिक कार्यक्रम के सिलसिले में देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के दौरे पर थीं। इसी दौरान उन्हें अचानक हृदय संबंधी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा और वे बेहोश हो गईं। तत्काल उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधा के लिए राजधानी लाया गया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ। हालांकि उस घटना के बाद वह कभी पूरी तरह होश में नहीं लौट सकीं और लगातार कोमा की स्थिति में रहीं।

    राजकुमारी बज्रकिटियाभा को थाई शाही परिवार की सबसे प्रभावशाली और सक्रिय हस्तियों में गिना जाता था। उन्होंने केवल शाही जिम्मेदारियों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कानून, कूटनीति और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सार्वजनिक छवि एक शिक्षित, संवेदनशील और जिम्मेदार राजपरिवार सदस्य के रूप में स्थापित थी।

    उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने अमेरिका में कानून की पढ़ाई की और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल कीं। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानूनी क्षेत्र में काम किया और न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। बाद में उन्हें विदेशों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जहां उन्होंने राजनयिक के रूप में कार्य किया।

    राजकुमारी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती थीं। विशेष रूप से महिला अधिकारों और जेल सुधारों से जुड़े मुद्दों पर उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने महिला कैदियों और गर्भवती बंदियों के कल्याण के लिए कई पहल का समर्थन किया। इसी कारण उन्हें मानवाधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े मंचों पर भी सम्मान प्राप्त हुआ।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान मजबूत रही। कानून के शासन, न्यायिक सुधार और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में उनकी सक्रियता को वैश्विक संस्थाओं ने भी सराहा था। बाद के वर्षों में उन्होंने सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन किया तथा राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

    राजकुमारी के निधन को थाईलैंड के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। राजनीतिक, सामाजिक और शाही हलकों में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। देशभर में लोग उन्हें एक ऐसी शख्सियत के रूप में याद कर रहे हैं जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में सेवा, जिम्मेदारी और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।

    उनके निधन के साथ थाई शाही परिवार ने अपनी एक महत्वपूर्ण सदस्य को खो दिया है। आने वाले दिनों में देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है, जहां लोग उनके जीवन और योगदान को याद करेंगे।

  • थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही

    थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही


    बैंकॉक।
    थाईलैंड (Thailand) की भावी शासक राजकुमारी, बज्रकितियाभा (Princess Bajrakitiyabha) का निधन हो गया है। शुक्रवार सुबह शाही परिवार ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। राजा महा वजिरालॉन्गकॉर्न (King Maha Vajiralongkorn) की सबसे बड़ी बेटी और देश की सबसे लोकप्रिय शाही हस्तियों में से एक, ‘प्रिंसेस भा’ पिछले साढ़े 3 साल से लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे कोमा में थीं। अब उनकी मौत से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

    पैलेस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 47 वर्षीय राजकुमारी बज्रकितियाभा ने बैंकॉक के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। इससे पहले शाही परिवार ने बीते दिनों एक बयान जारी कर बताया था कि उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। मेडिकल टीम ने बताया था कि उनके पेट और आंतों में इन्फेक्शन फैल गया था और उनके कई अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात उनका निधन हो गया।


    दिसंबर 2022 में हो गई थीं बेहोश

    राजकुमारी बज्रकितियाभा दिसंबर 2022 में बैंकॉक में अपने पालतू कुत्तों को वॉक कराने के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, दिल में माइकोप्लाज्मा इन्फेक्शन के कारण अचानक उनकी दिल की धड़कनें पूरी तरह अनियमित हो गई थीं। इससे उनके दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हुई और वह कोमा में चली गईं। तब से उन्हें मशीनों के सहारे ही जीवित रखा गया था।


    सबसे योग्य उत्तराधिकारी थीं प्रिंसेज भा

    राजकुमारी को यहां के लोग प्यार से प्रिंसेज भा कहा करते थे। राजा वजिरालॉन्गकॉर्न की पहली पत्नी सोअमसावली से जन्मीं प्रिंसेज भा का जन्म 7 दिसंबर 1978 को हुआ था। वह अपने पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी थीं। बचपन से ही वे काफी मेधावी थीं। आगे चलकर वे वह एक बेहद काबिल वकील थीं। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून में LLM और डॉक्टरेट की डिग्रियां हासिल की थीं।

    इसके बाद उन्हें राजघराने से अहम जिम्मेदारियां भी मिलीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के लिए काम किया। इसके बाद वे 2012 से 2014 तक ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इसके अलावा प्रिंसेज भा ने थाईलैंड की जेलों में बंद महिला कैदियों की स्थिति सुधारने और ड्रग्स मामलों में मिलने वाली कड़ी सजाओं के खिलाफ कानून में बड़े सुधारों की वकालत भी की थी। 2021 में उनके पिता ने उन्हें अपनी पर्सनल बॉडीगार्ड विंग का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया था और उन्हें जनरल की रैंक दी थी।


    थाईलैंड के सिंहासन का अगला वारिस कौन?

    राजकुमारी बज्रकितियाभा के निधन से थाईलैंड में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 73 वर्षीय राजा वजिरालॉन्गकॉर्न ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है। प्रिंसेस भा के निधन से पहले उन्हें ही सबसे योग्य उम्मीदवार माना जा रहा था। हालांकि सालों पहले थाईलैंड के कानून में महिला उत्तराधिकारी का प्रावधान नहीं था। लेकिन 1974 में संविधान संशोधन के बाद इन नियमों में बदलाव किए गए थे।

    प्रिंसेज भा की मौत के बाद सबसे अहम दावेदार 21 वर्षीय प्रिंस दिपंगकोर्न हैं। वे राजा की तीसरी पत्नी से पैदा हुए इकलौते बेटे हैं और फिलहाल एकमात्र वैध पुरुष उत्तराधिकारी भी हैं। हालांकि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने की उनकी क्षमताओं पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले राजा के अन्य चार बेटे भी थे। हालांकि राजा ने अपनी दूसरी शादी से हुए चार बेटों को 1996 में ही राजघराने से बेदखल कर दिया था। वे अपनी मां के साथ अमेरिका में रहते हैं और उनका शाही हक खत्म हो चुका है।

  • मंदिर में मातम के बीच डांस परिवार ने निभाई आखिरी इच्छा सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    मंदिर में मातम के बीच डांस परिवार ने निभाई आखिरी इच्छा सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस


    नई दिल्ली । थाईलैंड के नखोन सी थाम्मरत प्रांत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान और विभाजित कर दिया है। यहां एक बौद्ध मंदिर में हुए अंतिम संस्कार के दौरान ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर लोग स्तब्ध रह गए। एक 59 वर्षीय व्यक्ति की अंतिम विदाई पर उसके परिवार ने पारंपरिक शोक के बजाय जश्न का माहौल बनाया और ताबूत के सामने कोयोट डांसर्स से प्रदर्शन कराया।

    यह घटना रॉन फिबुन जिले के वाट थेप्पानोम चुआट मंदिर में हुई जहां अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद अचानक तीन महिला डांसर्स ने ताबूत के सामने डांस करना शुरू कर दिया। बताया गया कि यह पूरा आयोजन मृतक की अंतिम इच्छा के अनुसार किया गया था। डांसर्स ने कोरियोग्राफ किया हुआ परफॉर्मेंस मंदिर परिसर के भीतर प्रस्तुत किया जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    मृतक के परिवार का कहना है कि वह व्यक्ति बेहद खुशमिजाज स्वभाव का था और हमेशा जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता था। उन्होंने अपने अंतिम संदेश में यह इच्छा जताई थी कि उनकी विदाई पर रोने की बजाय लोग उनके जीवन का जश्न मनाएं। इसी सोच को सम्मान देते हुए परिवार ने अंतिम संस्कार को एक अलग रूप देने का निर्णय लिया और शोक सभा को उत्सव में बदल दिया।

    बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अंतिम प्रार्थना और मंत्रोच्चार पूरा करने के बाद यह डांस परफॉर्मेंस शुरू हुआ। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को देखा और इसे सोशल मीडिया पर लाइव भी किया गया। वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया और दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

    हालांकि, इस घटना को लेकर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि यह मृतक की अंतिम इच्छा का सम्मान है और जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने का प्रतीक है। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ बता रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह का प्रदर्शन खासकर मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर उचित नहीं है।

    मरने वाले व्यक्ति का निधन 15 अप्रैल को हुआ था और उन्होंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह नहीं चाहते कि उनकी मृत्यु पर लोग दुखी हों। उनका मानना था कि मृत्यु जीवन का हिस्सा है और इसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने पारंपरिक शोक को हटाकर एक अलग प्रकार का अंतिम संस्कार आयोजित किया।

    यह घटना न सिर्फ थाईलैंड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर इसे जीवन को सेलिब्रेट करने का तरीका माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

  • थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह

    थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह


    मुंबई। भारतीयों के बीच में थाईलैंड की एक खास छवि बनी हुई है। हर साल लाखों लोग छुट्टियां मनाने के लिए थाईलैंड जाते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो सोशल मीडिया पर एक शर्म का कारण बन जाती हैं। ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें थाईलैंड के पटाया में कुछ ट्रांसजेंडर महिलाएं मिलकर एक भारतीय नागरिक के साथ हाथा-पाई करती नजर आ रही हैं।
    कथित तौर पर व्यक्ति यौन सेवाओं का भुगतान किए बिना भाग रहा था।
    सोशल मीडिया साइट पर वायरल हो रहा यह वीडियो 27 दिसंबर का बताया जा रहा है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तीन महिलाएं मिलकर एक 52 वर्षीय भारतीय व्यक्ति से पैसे की मांग कर रही है। जैसे ही व्यक्ति पैसे देने से इनकार करते हुए कार में बैठकर जाने लगता है, तो विवाद बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मदद से वह उसे कार से बाहर खींच लेती हैं और फिर जमकर मारपीट करती हैं। बाद में पुलिस वहां आकर उन्हें अलग करवाती है।

    एक स्थानीय युवक ने बताया कि आरोपी व्यक्ति वॉकिंग स्ट्रीट इलाके में एक ट्रांस सेक्स वर्कर के साथ बहस करत रहा था। जल्दी ही यह बहस एक हिंसक झड़प में बदल गई और फिर मारपीट शुरू हो गई।

    व्यक्ति ने बताया कि इस लड़ाई की शुरूआत रकम तय करने के बाद मुकर जाने की वजह से हुई।

    आपको बता दें, थाईलैंड का पटाया भारतीयों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहाँ पर अक्सर ऐसे विवाद सामने आते रहते हैं। कुछ समय पहले सिंतबर में भी एक ऐसा वीडियो सामने आया था, जिसमें ट्रांसजेंडर महिला ने आरोप लगाया था कि व्यक्ति ने उसे गलत तरीके से छुआ है। इसी तरह अक्तूबर में भी तीन ट्रांस महिलाओं पर दो भारतीयों ने हमला किया था और उनके पैसे लेकर फरार हो गए थे।

  • सीजफायर में फिर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप, कंबोडिया ने बताया थाई सेना अभी भी हमलावर, बमबारी जारी

    सीजफायर में फिर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप, कंबोडिया ने बताया थाई सेना अभी भी हमलावर, बमबारी जारी


    नई दिल्‍ली । दुनिया में किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध शुरू हो जाए और उसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)दखल देने की कोशिश न करें ऐसा होना मुश्किल है। इस साल की शुरुआत में ट्रंप के दबाव में सीजफायर(Ceasefire) करने के लिए राजी हुए थाईलैंड (Thailand)और कंबोडिया (Cambodia)एक बार फिर से युद्ध में उलझ गए थे। हालांकि, ट्रंप ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देश फिर से सीजफायर करने के लिए राजी हो गए हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद भी थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने एक-दूसरे पर बमबारी जारी रखने का आरोप लगाया है।

    इस साल की शुरुआत में हुई भीषण लड़ाई के बाद दोनों ही देश मलेशिया और ट्रंप की मध्यस्थता के बाद सीजफायर पर पहुंचे थे। इसके बाद भी दोनों के बीच में हल्की झड़पें जारी थी। जुलाई में हुए इस सीजफायर में ट्रंप ने दोनों देशों को व्यापारिक विशेषाधिकार समाप्त करने की धमकी दी थी। इसके बाद दोनों ही देश शांति के लिए मान गए थे। ट्रंप ने इस युद्ध को सुलझाने का दावा करते हुए इसे भी अपने नोबेल जीतने की कोशिश में शामिल कर लिया था। लेकिन अभी फिर से इन दोनों देशों के बीच में हालात जरूरत से ज्यादा बिगड़ गए इसके बाद ट्रंप को दोबारा दोनों देशों के नेताओं से बात करनी पड़ी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविरकुल और कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट के साथ बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर यह घोषणा की। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ हैंडल पर पोस्ट में कहा, ‘‘दोनों नेता आज शाम से हर तरह की गोलीबारी रोकने और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सहायता से मेरे साथ हुए मूल शांति समझौते को बहाल करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देश शांति और अमेरिका के साथ निरंतर व्यापार के लिए तैयार हैं।’’

    ट्रंप के इस दावे के बाद कंबोडिया की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि थाईलैंड अभी भी उनकी सीमा पर बम बरसा रहा है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रायल की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि 13 दिसंबर 2025 को थाई सेना ने दो एफ-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर कई ठिकानों पर सात बम गिराए। थाई सेना ट्रंप की घोषणा के बाद भी बमबारी बंद नहीं कर रहा है।