Tag: ThalapathyVijay

  • करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

    करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के बहुचर्चित करूर भगदड़ मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री थलपति विजय, उनके मंत्रियों और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों को मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए।

    करूर में 27 सितंबर 2025 को एक राजनीतिक जनसभा के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इसकी जांच CBI को सौंप दी थी। जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

    DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक टिप्पणियां गवाहों और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। याचिका में विशेष रूप से 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन के उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने करूर घटना को लेकर राजनीतिक जवाब देने जैसी टिप्पणी की थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के बयान जांच की दिशा बदलने और गवाहों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का माध्यम बन सकते हैं।

    याचिका में मुख्यमंत्री विजय के प्रस्तावित करूर दौरे का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य लाभ देने के लिए वहां जाने वाले हैं। DMK ने स्पष्ट किया है कि उसे पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन परिवारों को सहायता दी जानी है, वे CBI जांच में महत्वपूर्ण गवाह भी हैं। ऐसे में आरोपियों अथवा राजनीतिक कार्यपालिका का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा कर सकता है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में, जब मामला न्यायालय में लंबित था, तब भी मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये तथा घायलों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। पार्टी का कहना है कि भविष्य में भी यदि ऐसी सहायता दी जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप और CBI को पूर्व सूचना देकर ही दी जानी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    DMK ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मंत्री आधव अर्जुन के हालिया बयान की जांच कराई जाए और यदि उसमें जांच को प्रभावित करने का प्रयास पाया जाता है तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। साथ ही मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सी.टी.आर. निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पूरी होने तक मामले पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख तय करेगा कि जांच के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी और पीड़ित परिवारों से संपर्क को लेकर आगे क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

  • 61 दिन बाद खुलेगा समुद्र का खजाना, तमिलनाडु में फिर रफ्तार पकड़ेगा ₹7000 करोड़ का मत्स्य कारोबार और निर्यात

    61 दिन बाद खुलेगा समुद्र का खजाना, तमिलनाडु में फिर रफ्तार पकड़ेगा ₹7000 करोड़ का मत्स्य कारोबार और निर्यात

    नई दिल्ली । समुद्री मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लागू की गई 61 दिनों की वार्षिक बंदी समाप्त होने के साथ ही तमिलनाडु में मत्स्य उद्योग एक बार फिर पूरी क्षमता के साथ शुरू होने जा रहा है। इस निर्णय से राज्य के लाखों मछुआरों, समुद्री उत्पाद कारोबारियों और निर्यात क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही राज्य सरकार के राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।

    हर वर्ष अप्रैल से जून के बीच समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और मछलियों के प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यांत्रिक नौकाओं द्वारा मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है। इस अवधि के दौरान समुद्री गतिविधियां सीमित रहती हैं, जिससे मछुआरा समुदाय की आय प्रभावित होती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध दीर्घकालिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक है।

    बंदी अवधि समाप्त होने के बाद तमिलनाडु के तटीय इलाकों में फिर से गतिविधियां तेज हो गई हैं। मछुआरे अपनी नौकाओं की मरम्मत, इंजन परीक्षण, जालों की तैयारी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर समुद्र में वापसी को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद अब हजारों नौकाएं दोबारा समुद्र में उतरने की तैयारी कर रही हैं।

    तमिलनाडु देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन राज्यों में शामिल है। राज्य की लंबी समुद्री तटरेखा और विकसित मत्स्य अवसंरचना इसे इस क्षेत्र में विशेष पहचान प्रदान करती है। समुद्री उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री मछली पकड़ने की गतिविधियां शुरू होते ही घरेलू बाजारों में आपूर्ति बढ़ेगी और निर्यात क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी। समुद्री खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी हुई है, विशेष रूप से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में। ऐसे में उत्पादन और निर्यात में वृद्धि से विदेशी मुद्रा अर्जन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

    मत्स्य उद्योग से जुड़े व्यापारियों, कोल्ड स्टोरेज संचालकों, परिवहन कंपनियों और प्रोसेसिंग इकाइयों को भी इस पुनः शुरुआत से लाभ मिलने की उम्मीद है। पिछले दो महीनों के दौरान गतिविधियां सीमित रहने से कई व्यवसायों की आय प्रभावित हुई थी। अब कारोबार सामान्य होने के साथ रोजगार और आय के अवसरों में भी वृद्धि देखी जा सकती है।

    आर्थिक जानकारों का मानना है कि समुद्री उत्पादों का व्यापार दोबारा गति पकड़ने पर राज्य को हजारों करोड़ रुपये के आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब सरकार विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की तलाश में है।

    मत्स्य क्षेत्र की यह वापसी केवल एक उद्योग के पुनः संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तटीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, निर्यात और ग्रामीण आजीविका से जुड़े व्यापक आर्थिक तंत्र को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी। आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के प्रदर्शन पर राज्य की आर्थिक गतिविधियों की दिशा काफी हद तक निर्भर रहने की संभावना है।

  • INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में थलापति विजय की पार्टी टीवीके को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि उनकी पार्टी ने टीवीके को समर्थन देने के फैसले की जानकारी पहले ही DMK और अन्य सहयोगी दलों को दे दी थी।

    चिदंबरम ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही यह निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों को भी इस फैसले की जानकारी दी गई थी। उनके अनुसार, केवल घोषणा के समय में एक दिन का अंतर था, लेकिन निर्णय की जानकारी पहले साझा कर दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता को रोकना और किसी भी स्थिति में दोबारा चुनाव की संभावना को टालना था। चिदंबरम के अनुसार, गठबंधन के भीतर भी यह व्यापक सहमति थी कि यदि टीवीके बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है, तो ऐसी स्थिति में समर्थन देकर स्थिर सरकार बनाने की कोशिश की जाए।

    वहीं, DMK ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के युवा संगठन ने इस निर्णय को गठबंधन के साथ विश्वासघात करार दिया है। DMK नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने बिना पूरी सहमति के यह समर्थन देकर गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा किया है।

    इस विवाद के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। तमिलनाडु में पहले से ही गठबंधन की राजनीति जटिल मानी जाती है, और अब टीवीके को समर्थन देने के फैसले ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    चुनावी नतीजों के अनुसार, अभिनेता-राजनेता थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई, लेकिन वह बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से पीछे रह गई। इसके बाद उसे सरकार गठन के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ी।

    कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के समर्थन की घोषणा कर टीवीके को समर्थन दिया, जिससे उसके सरकार बनाने की संभावनाएं मजबूत हुईं। इसके बाद वीसीके, भाकपा और माकपा जैसे दलों ने भी समर्थन दिया, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक थे। इन समर्थन के बाद टीवीके बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही और सरकार गठन का दावा पेश कर सकी।

    हालांकि, इस राजनीतिक कदम ने INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। DMK का आरोप है कि इस तरह का निर्णय गठबंधन की सामूहिक रणनीति के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ा है।

    चिदंबरम का दावा है कि यह निर्णय राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया था, जबकि विरोधी दल इसे गठबंधन अनुशासन के खिलाफ मान रहे हैं। इस मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और INDIA ब्लॉक के भीतर भविष्य की एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    फिलहाल, इस विवाद पर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।

  • तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव

    तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव



    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी चर्चा देखने को मिल रही है, हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस तरह की चुनावी जीत और सरकार गठन से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन आयोग या अधिकृत नतीजों से ही मानी जाती है। फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार टीवीके का उदय राज्य की पारंपरिक DMK और AIADMK राजनीति के बीच एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके सीटों और सरकार बनाने जैसे दावों पर अलग-अलग स्रोतों में स्पष्टता नहीं है।

    इसी बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक सोशल मीडिया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने विजय को बधाई देते हुए तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव की बात कही है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि तमिल समुदाय के साथ मलेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध गहरे रहे हैं और वह उम्मीद करते हैं कि नया नेतृत्व इस रिश्ते को और मजबूत करेगा। उन्होंने विजय के चुनावी नारे “ओरु विरल पुरची” (एक उंगली क्रांति) का उल्लेख करते हुए इसे बदलाव की भावना से जोड़ा।

    अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में यह भी कहा कि विजय लंबे समय तक फिल्मों में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए दिखे हैं और अब जनता ने उन्हें वास्तविक जीवन में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में वर्णित किया।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के प्रभाव में रही है, और किसी नए राजनीतिक विकल्प का उभरना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन वास्तविक राजनीतिक स्थिति, सीटों का बंटवारा और सत्ता परिवर्तन को लेकर अंतिम और आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग के प्रमाणित परिणामों पर ही निर्भर करती है।

    कुल मिलाकर यह मामला अभी राजनीतिक चर्चा और दावों के स्तर पर ज्यादा है, जबकि जमीनी राजनीतिक तस्वीर आधिकारिक नतीजों और पुष्टि के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

  • थलापति विजय और संगीता विवाद: त्रिशा कृष्णन का पुराना वीडियो फिर वायरल

    थलापति विजय और संगीता विवाद: त्रिशा कृष्णन का पुराना वीडियो फिर वायरल


    नई दिल्ली: थलापति विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने तलाक के लिए अर्जी दी है संगीता ने अपनी याचिका में विजय पर किसी एक्ट्रेस के साथ अवैध (illicit) संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया हालांकि याचिका में किसी का नाम साफ तौर पर नहीं लिखा गया इंटरनेट यूजर्स ने तुरंत इस मामले को विजय और त्रिशा कृष्णन के पुराने रिश्तों की अफवाहों से जोड़ दिया

    विजय-संगीत के विवाद के बीच त्रिशा का एक पुराना वीडियो फिर से वायरल हो रहा है यह वीडियो पिछले साल दुबई में हुए साइमा अवॉर्ड्स का है वहाँ त्रिशा ने विजय को उनकी नई पारी के लिए बधाई देते हुए कहा ‘वह जो भी सपना देखें वह पूरा हो क्योंकि वह इसके हकदार हैं’ इस बयान ने फैंस में उत्सुकता बढ़ा दी लेकिन दोनों ने हमेशा अफवाहों का खंडन किया

    त्रिशा और विजय का नाम एक साथ जुड़ने की सबसे बड़ी वजह उनकी शानदार ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग है ‘घिल्ली’ और ‘थिरुपाची’ जैसी फिल्मों ने इस जोड़ी को तमिल सिनेमा की सबसे पसंदीदा जोड़ी बना दिया था फिल्म ‘घिल्ली’ के दौरान इंडस्ट्री में चर्चाएं थीं कि दोनों के बीच दोस्ती से बढ़कर कुछ है ‘कुरुवी’ के बाद दोनों ने लगभग 15 साल तक साथ काम नहीं किया जिससे इन अटकलों को और हवा मिली

    उस समय खबरें भी आई थीं कि विजय के परिवार ने उन्हें त्रिशा से दूरी बनाए रखने की सलाह दी थी हालांकि दोनों कलाकारों ने हमेशा इन बातों को नकारा और खुद को सिर्फ अच्छे दोस्त बताया साल 2023 में जब फिल्म ‘लियो’ में जोड़ी दोबारा पर्दे पर आई तो फैंस की पुरानी यादें ताजा हो गई इस रीयूनियन ने उत्साह बढ़ाया और पुरानी गॉसिप्स को भी फिर से जिंदा कर दिया

    थलापति विजय और संगीता की शादी 1999 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं विजय हमेशा अपनी निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखते आए हैं फिलहाल इस पूरे मामले पर उनकी या त्रिशा की तरफ से कोई आधिकारिक official बयान नहीं आया इस विवाद ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल मचा दी है और फैंस लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं

    इस पूरे मामले ने यह दिखाया कि सेलिब्रिटी जीवन में निजी विवाद कैसे जल्दी ही अफवाहों और वायरल वीडियो का हिस्सा बन जाते हैं लेकिन वास्तविकता सिर्फ उन पर ही निर्भर करती है और अभी तक कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है