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  • FCRA बिल को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, शशि थरूर बोले- सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने के लिए विपक्ष एकजुट हो

    FCRA बिल को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, शशि थरूर बोले- सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने के लिए विपक्ष एकजुट हो

     
    नई दिल्ली । प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस विधेयक का खुलकर विरोध करते हुए इसे नागरिक समाज, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की है कि संसद में इस विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाए और इसे वर्तमान स्वरूप में पारित होने से रोका जाए। थरूर का कहना है कि यह केवल कानूनी संशोधन का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

    शशि थरूर ने कहा कि वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रहे अनेक संस्थानों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि प्रस्तावित संशोधन के कारण ऐसे संगठनों पर अतिरिक्त कानूनी और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि नियम अत्यधिक कठोर हुए तो अनेक संस्थाओं के नियमित कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचने वाली सेवाओं पर भी पड़ेगा।

    कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में गैर-लाभकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों पर लगातार सख्ती बढ़ी है। उनके अनुसार विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों की संख्या और फंडिंग में पहले ही उल्लेखनीय गिरावट देखी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि नया संशोधन लागू होता है तो अनेक संस्थाओं के संचालन पर और अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक समाज की भूमिका से जोड़ते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।

    थरूर ने विशेष रूप से केरल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लंबे समय से कई सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा करते रहे हैं। उनके अनुसार इन संस्थाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि नए प्रावधानों से ऐसे संगठनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।

    उन्होंने विपक्षी सांसदों से आग्रह किया कि इस विधेयक पर संसद में व्यापक चर्चा कराई जाए और सभी दल मिलकर अपनी बात मजबूती से रखें। उनका कहना है कि लोकतंत्र में किसी भी महत्वपूर्ण कानून पर सभी पक्षों की राय और विस्तृत विचार-विमर्श आवश्यक होता है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि संस्थागत स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय बताया।

    दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि विदेशी अंशदान से जुड़े कानूनों का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाने और विदेशी फंड के उपयोग की प्रभावी निगरानी के लिए समय-समय पर कानूनी संशोधन आवश्यक होते हैं। ऐसे में अब प्रस्तावित विधेयक को लेकर संसद में होने वाली चर्चा और विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    नई दिल्ली। संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) में इन दिनों हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच बुधवार को एक दिलचस्प घटना घटी, जिसने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरीं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) संसद भवन की सीढ़ियों पर फोन पर बात करते हुए लड़खड़ा गए और गिरते हुए नजर आए। हालांकि, इस दौरान समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें सहारा देकर गिरने से बचाया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि शशि थरूर जैसे ही बैलेंस खोते हैं, अखिलेश यादव पास खड़े होते हुए तेजी से उनकी ओर बढ़ते हैं और उन्हें सहारा देते हैं। साथ ही एक महिला सुरक्षा अधिकारी भी तुरंत मदद के लिए पहुंची। अखिलेश ने शशि थरूर को कुछ समय तक सहारा दिया और फिर उन्हें कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतारा।

    https://twitter.com/ShashiTharoor/status/2019102516416479508
    इस घटना के बाद शशि थरूर ने ट्विटर (अब एक्स) पर एक शायराना अंदाज में पोस्ट किया, “जिस दिए को, तूफां में जलना होगा, उसे संभल संभल कर चलना होगा। मैं ठीक हूं।” सोशल मीडिया पर इस सजीव और संवेदनशील मदद की काफी सराहना हो रही है, और लोग अखिलेश यादव की सहज शिष्टाचार की तारीफ कर रहे हैं।

    इससे पहले, शशि थरूर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया था। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

  • BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल

    BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल



    नई दिल्ली। नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 से पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय क्रिकेट कोच गौतम गंभीर के साथ सेल्फी शेयर की और उनकी तारीफ की, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। BJP का आरोप है कि थरूर की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस की राजनीति के खिलाफ है और अब उन्हें पार्टी से ‘फतवा’ मिल सकता है।

    भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को थरूर की नागपुर यात्रा, गंभीर से मुलाकात या उनकी प्रशंसा में से कौन सी बात ज्यादा खलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या थरूर के खिलाफ एक और “कांग्रेस फतवा” जारी होने वाला है।

    थरूर ने गंभीर को “प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे कठिन काम करने वाला इंसान” बताया और कहा कि लाखों लोग उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं, फिर भी वह शांत रहते हैं और आगे बढ़ते हैं। उन्होंने गंभीर की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    गंभीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब समय आएगा, तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ पर सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने लिखा कि खुद के खिलाफ खड़ा देखकर उन्हें हंसी आ रही है।

    यह विवाद राजनीतिक स्तर पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि थरूर की आलोचना और प्रशंसा दोनों ही पक्षों के बीच नई बहस का कारण बन गई है।