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  • इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश

    इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश


    नई दिल्ली।
    दक्षिण एशिया (South Asia), विशेषकर भारत (India) के लिए 2026 का मानसून (Monsoon) चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत दे रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) (World Meteorological Organization -WMO). के अनुसार जून से सितंबर के बीच मानसूनी वर्षा (Monsoon Rain) औसत से कम रह सकती है, जबकि दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले दीर्घावधि पूर्वानुमान में मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई है। ऐसे में कम बारिश और बढ़ती गर्मी का संयुक्त प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और आम जीवन पर व्यापक दबाव डाल सकता है। मानसून की कमी का सबसे अधिक असर मध्य भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों में दिख सकता है, जहां वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है।


    कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना

    हालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश संभव है, लेकिन पूरे क्षेत्र में वर्षा का वितरण असमान रहने की संभावना है। दक्षिण एशिया में कुल सालाना वर्षा का लगभग 75 से 90 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच होता है। ऐसे में इस अवधि में कमी का सीधा असर खेती, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। मानसून को लेकर अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान में बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए शुरुआती संकेत अनुकूल नहीं हैं।


    सूखे की आशंका के साथ बाढ़ का भी जोखिम

    डब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 में मानसून का स्वरूप असंतुलित रह सकता है, जिसमें एक ओर लंबे सूखे दौर की संभावना है तो दूसरी ओर कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति बाढ़ का खतरा भी बढ़ा सकती है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार दक्षिण एशिया में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसका अर्थ है कि दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। लगातार उच्च तापमान लू की घटनाओं को बढ़ा सकता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे। इसके साथ ही कूलिंग की मांग बढ़ने से बिजली व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


    अल नीनो रहेगा प्रभावी

    डब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव पड़ सकता है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर हवाओं और मौसम के पैटर्न में बदलाव आता है। इसका प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर का प्रभाव भी बना हुआ है। यह मार्च से मई के बीच का वह दौर होता है जब समुद्र और वायुमंडल में तेजी से बदलाव होते हैं, जिससे लंबी अवधि के मौसम पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक नहीं रह पाते।

  • MP: कान्हा में मृत मिला एक और बाघ शावक…. राज्य में इस साल अब तक 22 बाघों की मौत

    MP: कान्हा में मृत मिला एक और बाघ शावक…. राज्य में इस साल अब तक 22 बाघों की मौत


    मंडला।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कान्हा रिजर्व (Kanha Reserve) के कोर एरिया में एक शावक (Tiger Cub.) मृत पाया गया, जिससे इस साल जनवरी से अब तक राज्य में बाघों (Tigers) की मौत की संख्या बढ़कर 22 हो गई है. यह रिजर्व मंडला और बालाघाट जिलों में फैला हुआ है.

    कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर अमिता बी ने बताया कि एक से डेढ़ साल के इस बच्चे का शव गुरुवार शाम को रिजर्व के मुख्य क्षेत्र के सरगी इलाके में मिला. शावक का पोस्टमॉर्टम शुक्रवार को किया गया और हम इसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि मौत का सही कारण पता चल सके.

    अफसर ने आगे बताया कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि बच्चे को उसकी मां ने दूध नहीं पिलाया होगा, जिसके कारण भूख से उसकी मौत हो गई. इसी बाघिन का एक और बच्चा तीन दिन पहले मर गया था. उन्होंने कहा, “बाघिन ने चार बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है. हम बाघिन और बाकी बचे दो बच्चों पर कड़ी नजर रख रहे हैं.”

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जहां 9 बाघ अभयारण्य हैं, इस साल अब तक बाघों की 22 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें शावकों की मौतें भी शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि 2026 की पहली मौत 7 जनवरी को बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में दर्ज की गई थी.


    विशेषज्ञों की चिंता और जवाबदेही

    जाने-माने वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, “बाघों की मौतों के मामले में, जिनमें अप्राकृतिक मौतें भी शामिल हैं, मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है, जो चिंता का विषय है.”

    दुबे ने आरोप लगाया कि निगरानी और गश्त की कमी के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की. उन्होंने पन्ना बाघ अभयारण्य के एक हालिया मामले का जिक्र किया, जहां बाघ की मौत के लगभग 20 दिन बाद उसका सड़ा-गला शव मिला था.

  • उत्तर भारत में इस साल पड़ेगी भीषण गर्मी… IMD की चेतावनी- सामान्य से ज्यादा रहेंगे लू के दिन

    उत्तर भारत में इस साल पड़ेगी भीषण गर्मी… IMD की चेतावनी- सामान्य से ज्यादा रहेंगे लू के दिन


    नई दिल्ली।
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) ने चेतावनी दी है कि इस साल उत्तर भारत (North India) के मैदानी इलाकों, पूर्वी तटीय राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र और आसपास के इलाकों में हीटवेव (Heatwave.-लू) के दिन सामान्य से अधिक देखने को मिल सकते हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्रा ने बताया कि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां जलवायु के लिहाज से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना सामान्य है। इसलिए हमें ऐसे उच्च तापमान वाले दिनों के लिए तैयार रहना चाहिए।


    उत्तरी मैदानी राज्यों में चलेगी भीषण लू

    मौसम विभाग के प्रमुख ने बताया कि हर साल अप्रैल, मई और जून के दौरान उच्च तापमान देखने को मिलता है, हालांकि इसमें साल-दर-साल कुछ भिन्नता होती है। तापमान में वार्षिक और दैनिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए आईएमडी एक सीजन पहले ही हीटवेव का पूर्वानुमान जारी करता है। इसके बाद हर गुरुवार अगले चार सप्ताह के लिए विस्तारित पूर्वानुमान और गर्मियों में हर दिन जिला स्तर पर सात दिन की चेतावनी जारी की जाती है।

    आईएमडी ने फरवरी के अंत में मार्च, अप्रैल और मई के लिए पहला हीटवेव आउटलुक जारी किया था, जिसे मार्च के अंत में अप्रैल, मई और जून के लिए अपडेट किया गया। पूर्वानुमान के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच उत्तर तटीय राज्यों—जैसे पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे पूर्वी क्षेत्रों में लू की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, मैदानी क्षेत्रों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड), राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों, गुजरात के कुछ भागों, मध्य प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों और महाराष्ट्र के उत्तरी हिस्सों में भी हीटवेव की आशंका जताई गई है।


    मजदूरों और रेहड़ी पटरी वालों को तापमान की सूचना दी जा रही

    संवेदनशील आबादी तक जानकारी पहुंचाने के उपायों पर उन्होंने बताया कि मौसम विभाग ने फील्ड में काम करने वाले मजदूरों और रेहड़ी-पटरी वालों तक सूचना पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाकर गर्मी और उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

    मोहापात्रा ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान को सरकारी माध्यमों से साझा किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल का भी इस्तेमाल होता है, जिससे मोबाइल फोन रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह जानकारी प्राप्त कर सकता है।नउन्होंने यह भी माना कि कुछ वर्ग ऐसे हैं जिन तक मोबाइल या अलर्ट की पहुंच नहीं है, इसलिए पारंपरिक और नवाचारपूर्ण तरीकों से उन्हें जागरूक करने की जरूरत है।

  • देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका

    देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने कहा है कि इस साल सामान्य से भी कम मॉनसूनी बारिश (Monsoon Rain) होगी। वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी करते हुए मौसम विभाग ने कहा कि इस साल देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है, जिससे खेतीबाड़ी, पशुपालन और जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम यानी 92% (±5%) रह सकती है। यह लंबी अवधि यानी 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के अनुमान पर आधारित है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है।

    मौसम विभाग ने पूर्वानुमानों में कहा है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव रह सकता है, जिसकी वजह से न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने कहा है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थितियाँ रहने की सबसे अधिक संभावना है। इसके बाद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की बहुत अधिक संभावना है। इस वजह से मॉनसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है। IMD के मुताबिक, अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन इसके बाद मॉनसून के दौरान अल-नीनो बनने की संभावना अधिक है।


    किन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD ने देश भर के लिए जारी लंबी अवधि के पूर्वामुमानों में कहा है कि भौगोलिक रूप से, देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना है। हालांकि, IMD ने पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने ये भी बताया कि फिलहाल हिंद महासागर में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थितियाँ बनी हुई हैं। यानी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं और समयपर मॉनसून के दस्तक देने की संभावना है।


    कहां-कहां सूखे के आसार?

    IMD ने कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध का हिम आवरण (Snow Cover) और साथ ही यूरेशिया का हिम आवरण भी सामान्य से थोड़ा ही कम रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विकसित होने और मॉनसूनी मौसमी वर्षा के लिए अनुकूल है। IMD के दीर्घ अवधि वाले इस पूर्वानुमान के दस्तावेज में फिलहाल सूखा घोषित होने वाली जगहों की सूची नहीं दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश/सूखे जैसे हालात बनने की आशंका ज्यादा बताई गई है, उनमें उत्तर भारत के कई हिस्से, खासकर गंगा के मैदानी और आसपास के पठारी क्षेत्र शामिल हैं।


    कुछ इलाकों में बेहतर बारिश की उम्मीद

    इसके अलावा मध्य भारत के बड़े हिस्से के सूखा से प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। ये वैसे इलाके हैं, जहां सामान्य से कम बारिश के अनुमान जताए गए हैं। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से और आंतरिक क्षेत्रों में भी कम बारिश के संकेत दिए गए हैं। IMD के मैप में दिखाया गया है कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्से जैसे कुछ इलाकों में बारिश इनके मुकाबले बेहतर स्थिति में रह सकता हैं।


    सामान्य से कम बारिश का क्या असर

    मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश होने की दशा में खेती पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कम बारिश से बुवाई, फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है खेती की बढ़ सकती है। मॉनसूनी बारिश का खेतीबाड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करते हुए IMD के वैज्ञानिकों ने बताया कि कम बारिश की मार आम आदमी तक को परेशान कर सकता है। इसकी वजह से सब्जी-दाल महंगी हो सकती है और कमजोर मॉनसून का असर फूड सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।


    खेतीबाड़ी से लेकर ऑटो सेक्टर तक असर

    मौसम विज्ञानियों ने बताया कि खेतीबाड़ी बाधित होने की दशा में ग्रामीण आमदनी पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, खेती कमजोर होने से गांवों में नकदी कम आएगी, जिसका असर ग्रामीण खर्च और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कम बारिश से ट्रैक्टर और टू-व्हीलर की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण मांग कमजोर होने से ऑटो कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।