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  • नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता


    काठमांडू।
    नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन अब प्रशासन के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ में अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

    आपदा के बाद कई इलाकों में शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने की खबरों ने महामारी फैलने का खतरा बढ़ा दिया है। मलबे और दलदल में दबे शवों को निकालना भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही

    यह प्राकृतिक आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद शुरू हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ पहाड़ों से नीचे आया और रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया।

    तेज बहाव में कई इलाकों में घर और सड़कें बह गईं। बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए या बाढ़ के पानी में बह गए। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की जा चुकी हैं।

    शवों के सड़ने से बढ़ी चिंता

    आपदा के करीब एक सप्ताह बाद कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे और कीचड़ में फंसे शवों को निकालने में लग रहा समय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है।

    प्रशासन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ मलबे में फंसे लोगों की तलाश और दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन व्यवस्था बनाए रखना और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकना।

    सुरंगों में फंसे करीब 100 कर्मचारियों की तलाश

    नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के कई सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मोटी मिट्टी और मलबे को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार भारी कीचड़ और मलबा हटाकर आगे बढ़ रही हैं। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन राहतकर्मियों को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।

    नेपाल ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

    शवगृहों में जगह कम, अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा

    बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण नेपाल में शवगृहों की क्षमता भी कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सके।

    लापता लोगों के परिजन सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने रिश्तेदारों के मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    1000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत

    नेपाल सरकार ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, शवों को संरक्षित रखने के लिए 1,000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत है।

    वहीं, लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे बचाव और पहचान की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

    रेस्क्यू के साथ अब स्वास्थ्य संकट से निपटने की चुनौती

    नेपाल में राहत अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आपदा का दूसरा पहलू सामने आ रहा है। हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है, सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है और दूसरी ओर शवों के सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नेपाल के लिए सिर्फ लापता लोगों को ढूंढना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि स्वच्छता, शवों के सुरक्षित निस्तारण और संभावित महामारी को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

  • होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?

    होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया और जॉर्डन व कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागने का दावा किया। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

    अमेरिकी सेना ने बताया है कि लारक आईलैंड पर हमला किसी बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक संभावित तत्काल खतरे को खत्म करने के लिए सीमित और सटीक कार्रवाई की गई।

    अमेरिका के मुताबिक क्या था खतरा?

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की माइन बिछाने वाली यूनिट समुद्र में माइंस तैनात करने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए दो रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी।

    अमेरिका का दावा है कि अगर ये समुद्री माइंस होर्मुज स्ट्रेट के शिपिंग रूट में बिछा दी जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे व्यावसायिक जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने इसे ‘इमिनेंट थ्रेट’ यानी तत्काल खतरा माना और दोनों लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    लारक आईलैंड ही क्यों बना निशाना?

    लारक आईलैंड ईरान के दक्षिणी तट के पास फारस की खाड़ी में स्थित है और होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट्स में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    इसी रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका का दावा है कि लारक आईलैंड पर मौजूद सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना और किसी संभावित खतरे को रोकना जरूरी था।

    पहले माइंस हटाईं, फिर हमला क्यों किया?

    अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से पहले बिछाई गई समुद्री माइंस को हटाने का अभियान पूरा किया था।

    इसके बाद अमेरिकी निगरानी में IRGC की गतिविधियां सामने आईं। अमेरिका का दावा है कि ईरान दो लॉन्चरों के जरिए नई समुद्री माइंस तैनात करने की तैयारी कर रहा था।

    वॉशिंगटन के मुताबिक, माइंस शिपिंग लेन में पहुंच जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती थी। इसलिए अमेरिका ने संभावित खतरे के बढ़ने का इंतजार करने के बजाय लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    ईरान ने कैसे दिया जवाब?

    ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक हमला बताया है। IRGC ने दावा किया कि लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले में उसके कई जवान और अन्य लोग मारे गए या घायल हुए।

    इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले दो ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस में आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।

    होर्मुज में अब क्या स्थिति?

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने स्ट्रेट में एक शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर भी रुकवाया है। वहीं, अमेरिकी एयर स्ट्राइक की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई।

    ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर आपसी सहमति बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पहले ही कम हुई है।

    क्या बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है?

    फिलहाल अमेरिका का कहना है कि लारक आईलैंड पर कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे को बड़े पैमाने पर तबाह करना नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए पैदा हो रहे तत्काल खतरे को खत्म करना था।

    दूसरी ओर, ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है और जवाबी कार्रवाई भी कर चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमला और ईरान का पलटवार दोनों देशों को एक बड़े सैन्य टकराव की ओर ले जाएगा?

  • हिमालय में बढ़ रहा ग्लेशियर झीलों का खतरा, इसरो अध्ययन में हुआ खुलासा

    हिमालय में बढ़ रहा ग्लेशियर झीलों का खतरा, इसरो अध्ययन में हुआ खुलासा

    नई दिल्ली। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने के साथ ग्लेशियल झीलों का विस्तार और उनसे जुड़े संभावित खतरे को लेकर चिंता बढ़ रही है। वर्ष 2026 में सामने आए उपग्रह आधारित अध्ययन में उच्च हिमालयी एशिया में ग्लेशियर झीलों के कुल क्षेत्रफल में वर्ष 2016-17 के बाद से 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं भारतीय हिमालयी नदी घाटियों में 676 ग्लेशियल झीलें ऐसी पाई गई हैं, जिनके आकार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इनमें 130 झीलें भारत में स्थित हैं।

    अध्ययन के अनुसार भारत में विस्तार वाली इन झीलों में 65 सिंधु नदी बेसिन, सात गंगा बेसिन और 58 ब्रह्मपुत्र बेसिन में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लेशियल झीलों का विस्तार इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि कुछ झीलें बर्फ, चट्टान या मलबे से बने प्राकृतिक बांधों के पीछे स्थित होती हैं। ऐसे बांध टूटने की स्थिति में अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर आने से बाढ़ और तबाही का खतरा पैदा हो सकता है।

    उच्च हिमालयी एशिया में 31,698 ग्लेशियर झीलें

    नए उपग्रह अध्ययन में उच्च हिमालयी एशिया में कुल 31,698 ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई है। वर्ष 2016-17 के मुकाबले इनके कुल क्षेत्रफल में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि सामने आई है।

    अध्ययन में पूर्वी हिमालय में ग्लेशियर झीलों के विस्तार को विशेष रूप से उल्लेखनीय पाया गया है। इस क्षेत्र में अकेले झीलों का क्षेत्रफल करीब 14.1 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है।

    ग्लेशियल झीलें आम तौर पर ग्लेशियरों के पीछे हटने और बर्फ के पिघलने से निकलने वाले पानी के जमा होने से बनती हैं। इनमें से कई झीलें प्राकृतिक रूप से बर्फ, चट्टान या मलबे से बने बांधों से घिरी होती हैं।

    इसरो के पुराने आंकड़े भी दे रहे चेतावनी

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के उपग्रह आंकड़ों पर आधारित पुराने अध्ययन में भी भारतीय हिमालयी नदी घाटियों में ग्लेशियल झीलों के विस्तार की तस्वीर सामने आ चुकी है।

    इसरो ने 1984 से अब तक के उपग्रह आंकड़ों के आधार पर 10 हेक्टेयर से बड़ी 2,431 ग्लेशियल झीलों का अध्ययन किया था। इनमें से 676 झीलों के आकार में 1984 के बाद उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    इन 676 झीलों में 130 भारत में स्थित थीं। अध्ययन के अनुसार इनमें से 601 झीलों का क्षेत्रफल दोगुने से अधिक हो चुका था। यह बदलाव हिमालयी क्षेत्र में जलवायु और ग्लेशियरों में हो रहे परिवर्तन से जुड़े संभावित जोखिम की ओर संकेत करता है।

    26 जलविद्युत परियोजनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों पर नजर

    इसरो मानसून के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहा है। इसके तहत एनएचपीसी की 26 जलविद्युत परियोजनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों में मौजूद 2,024 ग्लेशियल झीलों की निगरानी की जा रही है।

    उपग्रहों से मिलने वाले आंकड़ों की मदद से झीलों के आकार, जलस्तर और आसपास के भूगर्भीय बदलावों पर नजर रखने में मदद मिलती है। इससे संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने और समय रहते चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।

    ग्लेशियर झीलों के साथ भूस्खलन का खतरा भी

    हिमालय में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते आकार के साथ भूस्खलन का खतरा भी जुड़ा हुआ है। भारी बारिश, चट्टानों का खिसकना और पहाड़ी ढलानों में होने वाले बदलाव कई बार ग्लेशियल झीलों को रोकने वाले प्राकृतिक बांधों पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

    इसरो के उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार हिमालयी पर्वत श्रृंखला में अब तक 80 हजार से अधिक भूस्खलन के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

    ग्लेशियर झीलों का बढ़ता विस्तार, प्राकृतिक बांधों की अस्थिरता और भूस्खलन का मेल हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के साथ-साथ जलविद्युत परियोजनाओं और निचले इलाकों के लिए भी जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में उपग्रह निगरानी, समय पर चेतावनी और संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारी को और मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट

    तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट


    पटना।
    कुदरत के कहर से जूझ रहे नेपाल (Nepal) पर शुक्रवार को खतरा तब और बढ़ गया, जब तिब्बत-नेपाल सीमा (Tibet-Nepal border) पर बनी एक और झील फट गई। संभावित खतरे से निबटने के लिए बिहार के सभी तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है। सरकार के आदेश पर वाल्मीकिनगर एवं कोसी बराज (Kosi Barrage) पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषकर गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारी मात्रा में मलबा के आगमन को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध सहित सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया गया है।


    पड़ोसी देश में जलप्रलय के बाद कोसी बराज पर बढ़ी सतर्कता

    नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद वीरपुर बराज पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। सभी स्पर, स्टड एवं अन्य संरचनाओं की स्थिति सामान्य है। कंट्रोल रूम के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 1,42,360 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक दर्ज हुआ, जबकि बराह में बढ़कर 99,500 क्यूसेक रहा। शाम छह बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। बराह में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा। विभाग अलर्ट है। नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना है, जिसका कोसी के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।


    दिन रात काम कर रही इंजीनियरों की टीम

    संभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है। संबंधित जिले के जिलाधिकारी अपने अधीन तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे पर गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसो घंटे काम कर रही है।


    क्या बोले डिप्टी सीएम विजय चौधरी?

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ की तबाही हुई है। लेकिन बिहार के वाल्मिकीनगर अवस्थित गंडक बराज से नेपाल के उस केंद्रबिंदु की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। इस कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह-प्रभाव नीचे आते-आते कम हो गया है। इसका लाभ बिहार को हुआ। इसके अलावा गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से भी सामान्य से कम पानी था। खतरे के निशान से नदी बह रही थी। इसलिए जो भी पानी आया, उससे बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी। शुक्रवार को गंडक में वाल्मीकिनगर बराज के समीप लगभग एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।


    नेपाल की दो दर्जन नदियों से उत्तर बिहार को खतरा

    नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियों से पश्चिम चंपारण जिले समेत उत्तर बिहार को खतरा है। नेपाल की त्रिशूली नदी जैसा हादसा सीमावर्ती क्षेत्रों में होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार में गंडक व सिकरहना तबाही मचा सकती हैं। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी ही भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती नदियां आकर मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास नारायणी में त्रिशूली नदी मिलती है।

    नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात व नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली बताते हैं कि त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है। त्रिशूली नदी अपने साथ भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी को लेकर नारायणी में मिलती है। ऊंची पहाड़ियों से निकलने के कारण यह नदी बेहद खतरनाक मानी जाती है। त्रिशूली नदी में ही बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही मची है। दोबारा झील टूटने से इसका असर भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।


    तिब्बत के नाले से निकली गंडक, नाम जुगूं खोला था

    नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव ने बताया कि गंडक तिब्बत के कागबेनी के नाले से निकलती है। यहां उसका नाम जुगूं खोला है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी के नाम से जानी जाती है। इसमें ठाकुर जी मिलती हैं। आगे बढ़ने पर कृष्णा गंडकी और देवघाट में नारायणी के नाम से जानी जाती है। बराज से पूर्व यह गंडक हो जाती है। नेपाल में 123 लेक आउट हैं। इन झीलों पर अवरोधक बने हुए हैं। कभी भी इनमें बर्स्ट आउट हो सकता है। इससे भारी तबाही मच सकती है।

    सिकरहना लाई थी तबाही
    रामनगर और गौनाहा से आने वाली डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया व सिकटा में आकर सिकरहना से मिलती हैं। 2017 में सिकरहना में बाढ़ आने पर चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत बेगूसराय में तबाही मची थी।

    बताते चलें कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आ गई थी। पानी गंडक में प्रवाह होने से गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ आने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को तैनात कर दिया है। गंडक बराज के सभी 36 गेटों को खोल दिया है, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी निकल सके।

  • इंडिगो उड़ान 6ई321 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरी, सीआईएसएफ जांच के बाद बम धमकी फर्जी निकली

    इंडिगो उड़ान 6ई321 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरी, सीआईएसएफ जांच के बाद बम धमकी फर्जी निकली

    नई दिल्ली ।लखनऊ से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की उड़ान 6ई321 में बम की धमकी मिलने से बुधवार को सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। विमान के बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इस धमकी की जानकारी सामने आई। इसके बाद तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान की व्यापक जांच की गई।

    फ्लाइट के बेंगलुरु पहुंचने के बाद विमान को सुरक्षित तरीके से उतारा गया और ग्राउंड स्टाफ की सहायता से सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने विमान की गहन तलाशी शुरू की।

    जांच प्रक्रिया में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और संबंधित सुरक्षा अधिकारियों ने विमान के विभिन्न हिस्सों की बारीकी से जांच की। सुरक्षा जांच के दौरान किसी तरह की संदिग्ध वस्तु अथवा विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके बाद बम की धमकी को फर्जी पाया गया।

    जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई। इस घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की। किसी भी संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए विमान और उससे जुड़े सामान की जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।

    महत्वपूर्ण बात यह रही कि धमकी का मामला लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान के रवाना होने के समय सामने नहीं आया था। यह जानकारी बेंगलुरु एयरपोर्ट पर विमान के पहुंचने के बाद मिली। इसलिए इस घटना का लखनऊ एयरपोर्ट के संचालन अथवा वहां की सुरक्षा व्यवस्था से सीधा संबंध नहीं बताया गया है।

    विमान में बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता यात्रियों और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। जांच के दौरान किसी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक के नहीं मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई और विमान को आगे की प्रक्रिया के लिए मंजूरी प्रदान की गई।

    विमानन क्षेत्र में बम की झूठी धमकियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती हैं। ऐसी सूचना मिलने पर वास्तविक खतरे की पुष्टि होने तक सुरक्षा एजेंसियों को निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इसके कारण यात्रियों और विमान संचालन पर अस्थायी असर पड़ सकता है।

    इससे पहले 18 अगस्त को भी इंडिगो की हैदराबाद से विशाखापत्तनम जाने वाली उड़ान 208 को बम की धमकी मिली थी। ईमेल के जरिए मिली सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुई थीं और विमान की व्यापक तलाशी ली गई थी। उस जांच में भी कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली थी।

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 पर भी बम संबंधी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी। एक यात्री द्वारा अपने बैग में बम होने की बात कहे जाने के बाद दिल्ली जाने वाली इंडिगो उड़ान को उड़ान भरने से पहले रोक दिया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने यात्री को विमान से उतारकर हिरासत में लिया था।

    लखनऊ-बेंगलुरु उड़ान की ताजा घटना में जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिलने से यात्रियों और विमान की सुरक्षा को लेकर तत्काल खतरा समाप्त हो गया। सुरक्षा एजेंसियां अब धमकी की सूचना के स्रोत और परिस्थितियों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

  • US: चीनी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स से देश की सुरक्षा पर खतरा…! ट्रंप सरकार ने किए बैन

    US: चीनी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स से देश की सुरक्षा पर खतरा…! ट्रंप सरकार ने किए बैन


    वाशिंगटन।
    रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स (Robotic Vacuum Cleaners) इनोवेशन और इंजीनियरिंग (Innovation and Engineering) का शानदार नमूने की तरह हैं. लेकिन रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स सुरक्षा के लिहाज से कई बार खतरनाक साबित हो सकते हैं. अमेरिका (America) में अब रोबोट वैक्यूम क्लीनर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. अमेरिकी सरकार ने नए नियम लागू किए हैं, जिनकी वजह से चीन समेत दूसरे देशों में बने कई नए रोबोट वैक्यूम क्लीनर अमेरिकी बाजार में नहीं आ पाएंगे. इस फैसले के पीछे वजह नैशनल सिक्योरिटी बताई गई है।

    यह फैसला अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने लिया है. पहले माना जा रहा था कि यह नियम सिर्फ ह्यूमनॉइड रोबोट और रोबोट डॉग पर लागू होगा, लेकिन बाद में साफ किया गया कि इसमें ऐसे रोबोट वैक्यूम क्लीनर भी शामिल हैं जो सेंसर, कैमरा, वायरलेस कनेक्टिविटी और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास का नक्शा बनाकर काम करते हैं।


    रोबोट वैक्यूम से डर क्यों?

    आज के रोबोट वैक्यूम सिर्फ फर्श साफ नहीं करते. इनमें कैमरा, LiDAR सेंसर, Wi-Fi और कई स्मार्ट फीचर होते हैं. ये घर का नक्शा तैयार करते हैं और मोबाइल ऐप से कंट्रोल किए जाते हैं. यही नहीं, रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स आपके घर का पूरा खाका तैयार करते हैं ताकि बेहतर तरीके से सफाई की जा सके. लेकिन इससे ये भी सवाल उठता है कि अगर लोगों के घरों के मैप्स गलती से किसी साइबर क्रिमिनल्स या स्टेट स्पॉन्सर्ड स्पाई एजेंसी को मिल जाए तो किसी मुल्क के लिए काफी खतरनाक हो सकता है.

    रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर में सेंसर्स के साथ कैमरे भी लगे होते हैं. यानी घर का कोना कोना इनकी जद में होता है और बाकायदा रिकॉर्डिंग भी की जाती है. पूरे घर का वीडियो बनता है. घर में कौन रह रहा है कितने लोग हैं और क्या कर रहे हैं सबकुछ रिकॉर्ड हो सकता है. हालांकि बड़ी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स कंपनियां प्राइवेसी को लेकर बड़े दावे करती हैं. जैसे – यूजर डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और इसका मिसयूज किसी भी हालत में नहीं किया जा सकता है।

    बहरहाल, अमेरिकी सरकार का कहना है कि ऐसे डिवाइस बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा करते हैं. अगर यह डेटा गलत हाथों में चला जाए तो सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा हो सकती है. इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।


    किन कंपनियों पर पड़ सकता है असर?

    रोबोट वैक्यूम बाजार में चीन की कंपनियों का दबदबा है. Roborock, Ecovacs, Xiaomi, Narwal और Dreame जैसे ब्रांड दुनिया के कई देशों में अपने प्रोडक्ट बेचते हैं. नए नियमों का सबसे ज्यादा असर इन्हीं कंपनियों पर पड़ सकता है।


    क्या पुराने रोबोट वैक्यूम बंद हो जाएंगे?

    नहीं. अगर आपने पहले से कोई रोबोट वैक्यूम खरीदा हुआ है तो उसे इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है. यह नियम सिर्फ नए मॉडल और फ्यूचर में होने वाले नए आयात पर लागू होगा. यानी पहले से बिक चुके या मंजूरी पा चुके डिवाइस फिलहाल प्रभावित नहीं होंगे।


    क्या सिर्फ रोबोट वैक्यूम पर ही असर होगा?

    नहीं. यह फैसला सिर्फ रोबोट वैक्यूम तक लिमिटेड नहीं है. कुछ दूसरे एडवांस मोबाइल रोबोट भी इस दायरे में आते हैं. हालांकि ड्रोन, मेडिकल रोबोट, कनेक्टेड वाहन और कई दूसरे रोबोट इस नियम से बाहर रखे गए हैं.


    चीन ने क्या कहा?

    अमेरिका के इस फैसले के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. चीन का कहना है कि नैशनल सिक्योरिटी का हवाला देकर चीनी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है. उसने चेतावनी दी है कि अगर यह नीति जारी रही तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं.


    भारत के यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

    फिलहाल इस फैसले का भारत में सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा. भारत में Roborock, Dreame, Ecovacs, Xiaomi और दूसरे ब्रांड अपने प्रोडक्ट बेचते रहेंगे. हालांकि अगर अमेरिका में इन कंपनियों की बिक्री प्रभावित होती है, तो फ्यूचर में में उनकी ग्लोबल स्ट्रैटिजी, कीमतों या नए प्रोडक्ट लॉन्च पर कुछ असर देखने को मिल सकता है।

  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

  • न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप

    न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप


    नई दिल्‍ली । New York इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी से जूझ रहा है. तापमान 100 डिग्री और हीट इंडेक्स 112 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. इस बीच, शहर के नए मेयर ज़ोहरान मम्दानी (Zohran Mamdani) ने न्यू यॉर्कर्स के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है. यूरोप में हाल ही में आए AC नियमों के बाद अब न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड भी खतरे में है. मेयर ने साफ कहा है कि अगर ग्रिड को बचाना है और लोगों की जान सुरक्षित रखनी है, तो AC चलाने के तरीकों में तुरंत बदलाव करना होगा.

    Europe का AC नियम और New York का संकट
    यूरोपियन कमीशन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत AC इंस्टॉल करने वालों को ग्राहकों को एनर्जी एफिशिएंसी की पूरी जानकारी देनी होगी. फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में रिकॉर्ड गर्मी के कारण AC की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई है. अब ठीक वैसा ही संकट न्यू यॉर्क के सामने खड़ा हो गया है. न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड इस समय शहर को ठंडा रखने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है.

    Mayor Mamdani का ’78 डिग्री रूल’
    मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से अपील की है. उन्होंने लिखा कि न्यू यॉर्क में बाहर बहुत गर्मी है और हमारा पावर ग्रिड ओवरटाइम काम कर रहा है. मेयर ने सभी नागरिकों से अपने AC को 78 डिग्री पर सेट करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने इस्तेमाल में न आने वाली लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स को बंद करने और प्लग निकालने के लिए कहा है. मेयर का मानना है कि ग्रिड स्थिर रहेगा तो AC चलता रहेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

    सरकार खुद कर रही है नियमों का पालन
    इस संकट से निपटने के लिए सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि खुद न्यू यॉर्क प्रशासन भी कड़े कदम उठा रहा है. मेयर ने बताया कि सभी सरकारी इमारतों में भी 78 डिग्री का नियम लागू कर दिया गया है. पीक ऑवर्स के दौरान सरकारी दफ्तरों की लाइटें डिम या पूरी तरह बंद की जा रही हैं. गैर-जरूरी उपकरणों को पावर डाउन किया जा रहा है. प्रशासन ने न्यू यॉर्क की प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस संकट में शहर का साथ दें और बिजली की खपत कम करें.

    112 डिग्री का टॉर्चर और हीट इमरजेंसी
    नेशनल वेदर सर्विस ने न्यू यॉर्क सिटी के लिए ‘एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पिछले एक दशक की सबसे खतरनाक हीटवेव हो सकती है. गर्मी का अहसास (Heat Index) 112 डिग्री तक जा सकता है. इसके लिए शहर में ‘हीट इमरजेंसी प्लान’ एक्टिव कर दिया गया है. प्रशासन ने उन लोगों के लिए कूलिंग सेंटर्स खोले हैं, जिनके घरों में AC की सुविधा नहीं है. बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है.

    मेयर की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
    एक तरफ जहां मेयर मम्दानी शहर को गर्मी से बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यू यॉर्क का बिजनेस माहौल गरमा गया है. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने न्यू यॉर्क के स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद मेयर के साथ उनकी बहस छिड़ गई है. शार्क टैंक के केविन ओ’लेरी ने भी बेजोस का समर्थन करते हुए न्यू यॉर्क को ‘कम्पलीट डिजास्टर’ करार दिया है. ब्लैकरॉक के लैरी फिंक ने भी चेतावनी दी है कि भारी टैक्स और खराब माहौल के कारण अमीर लोग न्यू यॉर्क छोड़ सकते हैं, जिससे शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.

  • ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!

    ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) नाटो (NATO) समूह के अन्य साथी देशों पर बुरी तरह भड़के हुए हैं। ईरान युद्ध (Iran War) के बीच नाटो देशों ने अमेरिका को एक के बाद एक झटके दिए हैं जिससे ट्रंप खिसियाए हुए हैं और यह धमकी भी दी है कि अमेरिका खुद को नाटो से अलग कर लेगा। इस बीच अब खबर है कि इन सब का खामियाजा एक छोटे से देश को भुगतना पड़ सकता है। यह देश है यूक्रेन। बीते 4 सालों से खुद रूस के साथ जंग लड़ रहा यूक्रेन अब ईरान युद्ध में बलि का बकरा बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन के लिए हथियारों की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप की इस धमकी का मकसद पश्चिमी देशों पर दबाव डालना है ताकि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के अमेरिका की मदद करें। विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच नाटो सहयोगियों के लिए ट्रंप का यह बयान बेहद चिंता का विषय है।

    कई देशों ने दिया झटका
    ट्रंप की यह धमकी नाटो देशों से मिले झटके के बाद आई है। फ्रांस, स्पेन, इटली समेत कई देशों ने ट्रंप को करारा झटका देते हुए ट्रंप को अपने बेस इस्तेमाल करने देने से इनकार कर दिया है। वहीं कई पश्चिमी देशों ने ट्रंप के उस प्लान का हिस्सा बनने से भी इनकार दिया, जिसके तहत ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए एक गठबंधन बनाने का ऐलान किया था। यूरोपीय देशों ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह उनकी लड़ाई नहीं है।

    बता दें कि ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्ग में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बाद अब ट्रंप इस रास्ते को खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।

    नाटो को बताया ‘कागजी शेर’
    इसके बाद से ट्रंप नाटो देशों पर लगातार हमलवार हैं। ट्रंप ने टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि वह उस नाटो सदस्यता को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने नाटो से संभावित अलगाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “हां, यह अब इस पर विचार किया जा रहा है। कभी भी नाटो से प्रभावित नहीं रहा। मुझे हमेशा पता था कि यह एक ‘पेपर टाइगर’ है, और (रूस के राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन भी यह जानते हैं।”

    लंबे समय से की है आलोचना
    गौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं और इसे अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर बताते हुए कई बार इससे बाहर निकलने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत नाटो से बाहर निकलने या सदस्यता निलंबित करने के लिए वाइट हाउस को सीनेट की “सलाह और सहमति” प्राप्त करनी होती है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।